Social

अंधविश्वास किसे कहते है(superstation in Hindi)

अंधविश्वास किसे कहते हैं (what is the superstation)

नमस्कार दोस्तों आप सभी का हमारे साइट पर बहुत-बहुत स्वागत है। दोस्तों आज के लेख में हम समाज में व्याप्त एक ऐसे बुराई के बारे में समझेंगे जो समाज के लिए और समाज के विकास के लिए एक अभिशाप बन चुका है। और इस अभिशाप से मुक्ति कैसे हो सकती है और इससे मुक्ति के लिए विज्ञान हमारी किस प्रकार मदद करता है आदि बातें जानने के लिए हमारे पोस्ट को पूरा पढ़ें।

अंधविश्वास का अर्थ (meaning of superstition)

अंधविश्वास का अर्थ है आंख बंद करके विश्वास करना। अर्थात जब हम किसी बात का आंख बंद करके या उसका परिणाम जाने बिना सिर्फ लोगों के कहने पर विश्वास कर लेते हैं तो उसे अंधविश्वास कहा जाता है। अंधविश्वास हमारे समाज में इस तरह व्याप्त हो चुका है जिससे बच पाना बहुत ही मुश्किल होता जा रहा है। अंधविश्वास ज्ञानी से ज्ञानी पुरुष को भी मानने पर मजबूर कर देता है क्योंकि कुछ परिस्थितियां ऐसी होती हैं कि उन परिस्थितियों में हमें ना मानते हुए भी अंधविश्वास पर विश्वास करना पड़ता है।

अंधविश्वास फैलने के कारण(because of the spread of superstation)

 अंधविश्वास एक संक्रामक रोग है जो एक दूसरे के जरिए फैलता जाता है यह समाज में बुराइयों को जन्म देता है। कुछ कारणों की वजह से समाज में यह अंधविश्वास फैलता जाता है।

1-शिक्षा का अभाव(uneducated)

हमारे समाज में शिक्षा का अभाव होने के कारण अंधविश्वास अधिक फैलता जाता है। जिस जगह पर पढ़े-लिखे व्यक्ति जनसंख्या अधिक होती है उस जगह पर अंधविश्वास कम होता है और जिस जगह पर अनपढ़ लोग रहते हैं वहां अंधविश्वास की जड़ें मजबूती से पकड़े हुए होती है जिस से निकल पाना बहुत ही मुश्किल होता है। अतः शिक्षा के अभाव के कारण भी अंधविश्वास को बढ़ावा मिलता है।

2-आत्मविश्वास की कमी(lack of confidence)

जब मनुष्य के अंदर आत्मविश्वास की कमी हो जाती है तो वह अंधविश्वास के दलदल में फंसता चला जाता है वह अपने मस्तिष्क का इस्तेमाल किए बिना दूसरों के कहे पर यकीन कर लेता है और उसी का आदी बन जाता है। जिस मनुष्य के पास आत्मविश्वास है वह किसी भी अंधविश्वास पर यकीन नहीं करेगा जैसे हमारे समाज में तमाम अंधविश्वास हैं जैसे बिल्ली का रास्ता काटना, यदि आपको स्वयं पर और परमात्मा पर विश्वास है तो आप निडर होकर आगे बढ़िये आप का रास्ता कोई नहीं रोक सकता परंतु आप यदि आत्मविश्वास कमजोर है तो आप आगे नहीं बढ़ सकते क्योंकि आपका ही मन कहेगा कि आखिर 2 मिनट रुकने में क्या जाता है 2 मिनट बाद चलेंगे परंतु वह 2 मिनट की बात नहीं होती है। 2 मिनट रुकने की सोच हमें धीरे-धीरे बहुत बड़े दलदल में फंसा सकती हैं इससे हमारी सोच धीरे-धीरे उसी में फंसती चली जाती है और हम एक कमजोर और भाग्य किस्मत आदि पर यकीन करने लग जाते हैं।

3-ज्योतिषी साधु लोग(astologers)

 आजकल आपने देखा होगा टीवी चैनलों पर तथा पेपर में तमाम ज्योतिषी और बाबा लोग आते हैं। जो तमाम यंत्रों के द्वारा लोगों का धन वृद्धि, पुत्र प्राप्ति कष्ट निवारक तमाम ताबीज अंगूठी आदि बना कर देते हैं जिसमें यह दावा किया जाता है की आपको इसको पहनने से धन की वृद्धि होगी ,पुत्र प्राप्ति होगी ,आप स्वस्थ रहेंगे। दोस्तों अगर रियल केस में ऐसा होता तो कोई मनुष्य कार्य करके धन नहीं प्राप्त करता सिर्फ एक लॉकेट पहनकर ही पैसा कमा लेता। अगर किसी बाबा के भभूत देने से पुत्र की प्राप्ति हो जाती तो सरकार इतने बड़े बड़े अस्पताल का निर्माण करवाती है इनकी कोई जरूरत ही नहीं पड़ती। परंतु सबसे बड़ा दुर्भाग्य तो यह है की मनुष्य यह सब कुछ जानते हुए भी इन पर विश्वास कर लेता है और अंधविश्वास के जाल में फंसकर अपना समय और पैसा बर्बाद करता है। ज्योतिषी साधु लोग भी इस अंधविश्वास को बढ़ाने के जिम्मेदार हैं।

4-परिस्थितियां (situation)

 परिस्थितियां अच्छे से अच्छे और समझदार से समझदार इंसान को भी मजबूर कर देती हैं। हमारे देश में कुछ ऐसे गरीब तथा मजबूर लोग हैं जो पैसे के अभाव में झाड़-फूंक और बाबा के द्वारा दिए गए भभूत वह ताबीज के चक्कर में फस जाते हैं। इसमें उनका कोई दोष नहीं होता है क्योंकि उनकी परिस्थितियां उन्हें मजबूर कर देती हैं। 1 मिनट के लिए आप मान लीजिए आपके बेटे का तबीयत खराब है आप दवा करा कर बहुत परेशान हैं फिर भी तबीयत ठीक नहीं हो पा रहा है। उसी समय आपको किसी ने कोई बाबा अथवा ज्योतिषी का नाम लेकर कहता है की उसके पास जाने से आपके सारे कष्ट दूर हो जाएंगे। तो आप परिस्थिति बस आपको बाबा व ज्योतिषी के पास जाना ही पड़ता है। क्योंकि आपके मन में विचार आता है की हो सकता है कहीं हमारा बेटा ठीक ही हो जाए।

अंधविश्वास से नुकसान(loss of superstation)

1-अंधविश्वास के द्वारा ही पंडित पुजारी और ज्योतिषी पंडा लोग फ्री की रोटियां तोड़ते है। और भोली भाली जनता को ठगते हैं।
2-अंधविश्वास की वजह से एक डर से भरा हुआ जीवन जीने पर आदमी मजबूर हो जाता है वह कभी भी निडर होकर नहीं जी पाता है क्योंकि उसके मन में यह भय बना हुआ रहता है कि हम ऐसा करेंगे तो वैसा हो जाएगा इसलिए वह भय से भरी हुई जीवन जीने पर मजबूर हो जाता है।
3-अंधविश्वास की वजह से मनुष्य का मस्तिष्क काम करना बंद कर देता है क्योंकि वह दूसरों की बातों पर ही यकीन करने लग जाता है और खुद के मस्तिष्क का इस्तेमाल नहीं करता है। और वह मनुष्य भाग्य ,किस्मत के भरोसे बैठा रहता है।
4-अंधविश्वास की वजह से मनुष्य के हृदय में भगवान के प्रति जो श्रद्धा होती है वह धीरे-धीरे खत्म होने लग जाता है और वह मनुष्य भूत पिशाच,निशाचर सामाजिक कुरीतियां आदि के जंजाल में फंस जाता है और ईश्वर पर विश्वास करना छोड़ देता है। और पाखंडी मनुष्य के ऊपर विश्वास कर लेता है जिसके कारण वह ठगा जाता है।
5-अंधविश्वास जब समाज में व्याप्त हो जाता है तो जो स्वार्थी लोग होते हैं वह अपने फायदे के लिए मजबूर इंसान का शोषण करना शुरू कर देते हैं और अपना अच्छा कमाई करने लग जाते हैं।
6-अंधविश्वास के कारण मनुष्य अपना सार्थक जीवन नहीं जी पाता है क्योंकि यदि किसी के घर में दीपावली के दिन कोई दुर्घटना हो जाती है तो उस घर में कभी भी दीपावली नहीं मनाई जाती है। वह मनुष्य जीवन भर दीपावली जो हिंदुओं का साल भर का बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार है उसका आनंद नहीं ले पाता है और एक अंधा सिस्टम के ऊपर विश्वास कर लेता है जो उसे सारी उम्र झेलने पर मजबूर कर देती है।
7-अंधविश्वास के द्वारा जो अनपढ़ लोग होते हैं वह अपनी आजीविका चलाने के लिए ओझा का कार्य करने लग जाते हैं वह झाड़-फूंक करके भूत को भगाते हैं और भोली भाली जनता को ठगते हैं

भारत में चलने वाले कुछ अंधविश्वासों के नाम(indian superstation)

भारत में चलने वाले कुछ अंधविश्वास निम्न प्रकार के हैं।

1-बिल्ली का रास्ता काटना(cats cut way)

यदि कोई मनुष्य नए कार्य के लिए बाहर निकलता है और उसके रास्ते पर आगे से कोई बिल्ली निकल जाती है तो उसे बिल्ली का रास्ता काटना कहते हैं। ऐसा माना जाता है कि यदि बिल्ली रास्ता काट जाए तो आप जिस कार्य के लिए जा रहे हो वह कार्य पूरा नहीं हो पाता है। अतः लोग वहीं पर रुक जाते हैं और जब तक उस रास्ते से कोई अन्य व्यक्ति नहीं गुजरता है तब तक वे अपने कार्य के लिए नहीं आगे जाते है।

2-नींबू मिर्ची लटकाना(hanging lemon pepper)

Frends आपने देखा होगा कि अधिकतर लोग अपने घरों और दुकानों में नींबू और मिर्ची लटकाए हुए रहते हैं इसमें पांच मिर्ची और एक नींबू एक धागे के साथ गूंथा रहता है। इसको घर के सामने या दुकान के सामने लोग लटका कर रखते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इसको लटकाने से बुरी नजर नहीं लगती है और भूत पिशाच भी की तरफ आंख उठाकर नहीं देखते।

3- बच्चे की नजर उतारना(take a look at the child)

कभी-कभी ऐसा हो जाता है कि बच्चे अधिकतर रोने लग जाते हैं उनका पता नहीं लगता है कि क्या हुआ है क्या नहीं तो घरवाले कहते हैं इसे नजर लगा हुआ और इसको उतारने के लिए राई और मिर्च को बच्चे की सर पर 7 बार घुमाकर चूल्हे में आग में डाल देते हैं और कहते हैं की यदि मिर्च जलने पर आंख और नाक में लगता है तो नजर नहीं लगी है अन्यथा इस बच्चे को नजर लगी हुई है जो अब उतर जाएगी।

4-भूत भगाना(ghost run away)

गांव में अधिकतर ऐसे लोग होते हैं जो तबीयत खराब होने पर क्या कोई बीमारी होने पर अस्पताल में नहीं जाते हैं बल्कि वह किसी सोखा को खोजते हैं और उसे अपनी समस्या समझाते हैं। सोखा उसे अनेक तरह से भ्रमित कर देता है की उसको सोखा की बात पर विश्वास होने लग जाता है और इस तरह से उस मजबूर व्यक्ति से तमाम पैसे सोखा लोग ऐंठ लेते है। और उसे समझा-बुझाकर घर भेज देते हैं की जाओ अब तुम्हारा समस्या का समाधान हो जाएगा क्योंकि आपके सर पर जो भूत का निवास था उसे हमने हटा दिया है।

5-भभूत और ताबीज (ashes and amulet)

हमारे भारत में ज्योतिषी लोग सीधे-साधे लोगों को भ्रमित करके बहुत सारा धन कमाने में सक्षम है। क्योंकि ज्योतिषी लोगों का कहीं एक जगह ठिकाना नहीं होता है यह लोग एक जगह से दूसरे जगह चलते रहते हैं क्योंकि यदि ए एक जगह रुक गए तो इनकी पोल खुल जाएगी और सारी कमाई चौपट हो जाएगी। ज्योतिषी लोग घर घर जाकर लोगों के हाथ देखते हैं और उनसे उसी तरह का बात बताते हैं जो उन्हें अच्छा लगता है धीरे धीरे उनसे कुछ ऐसा बात बताएंगे जो उनके मन में डर पैदा करेगी और इसी डर का फायदा उठाकर इसका उपाय भी बताएंगे और और उन्हें राख की भभूत और ताबीज बनाकर दे देंगे और कहेंगे इसको हमेशा अपने पास रखना अथवा कलाई में बांध कर रखना जिससे तुम्हारे पास कोई भी बाधा विघ्न उत्पन्न नहीं होगा।इसी बहाने उनसे बहुत सारा धन ठग लेते हैं।

6-जूता चप्पल उल्टा होना (shoes slippers upside down)

आप लोगों ने देखा होगा घर में जब भी कोई जूता चप्पल उल्टा हो जाता है तो घरवाले नाराज होने लग जाते हैं। और बोलते हैं चप्पल सीधा कर दो क्योंकि उनका मानना है कि यह चप्पल जूता उल्टा होता है तो घर में फिजूलखर्ची ज्यादा होती है। अर्थात घर में बिना मतलब के या बिना किसी काम के पैसे खर्च हो जाते हैं।

आदि तमाम अंधविश्वास हैं जो भारत में पूरी तरह से अपनी जड़ों को गड़ाए हुए हैं जिनसे निकलना बहुत ही मुश्किल है।

अंधविश्वास को दूर करने के उपाय(remedies to remove superstation)

अंधविश्वास को दूर करने के लिए जन जागृति का होना बहुत ही आवश्यक है। अंधविश्वास से बाहर निकलने के लिए आत्मविश्वास की अत्यधिक आवश्यकता होती है क्योंकि यदि आपको स्वयं पर विश्वास नहीं है तो फिर आप जीवन में कभी भी आगे नहीं बढ़ सकते हैं।
विज्ञान आज के युग में हर समस्या का समाधान बन चुका है क्योंकि जितने भी अंधविश्वास हैं उनका कोई उचित परिणाम नहीं है परंतु विज्ञान आज के युग में हर समस्या का उचित समाधान और उसका परिणाम सबूत के साथ देने के लिए तत्पर है। अतः हमें अंधविश्वास की बातों को छोड़कर विज्ञान पर विश्वास करना चाहिए और लोगों में यह जागृति फलानी चाहिए कि सभी लोग अंधविश्वास की बातों पर भरोसा ना करें।
अंधविश्वास को दूर करने के लिए साक्षर होना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि यदि मनुष्य अनपढ़ है बहुत जल्दी इन सब बातों में फंस जाता है परंतु यदि कोई पढ़ा-लिखा मनुष्य है तो वह इन बातों पर बहुत कम ही विश्वास करेगा।
हमें परमात्मा के ऊपर विश्वास करके कार्य को आरंभ करना चाहिए क्योंकि इस संसार में परमात्मा के अलावा ऐसा कोई भी नहीं है जो हमें कष्ट पहुंचा सके वही हमारा पालन करता है वही हमारा सब कुछ है और कोई भी पालनकर्ता अपने बच्चों को नुकसान नहीं पहुंचाता यह सोचकर हमें अपने कार्य में आगे बढ़ना चाहिए।
अंधविश्वास को दूर करने के लिए सरकार भी प्रयास कर रही है इन प्रयासों में सती प्रथा, बाल विवाह प्रथा, विधवा विवाह निषेध, तीन तलाक आदि तमाम कुरीतियों को बंद किया जिसके बहुत ही अच्छे परिणाम समाज को सुधारने में हुए हैं।
अंधविश्वास से दूर हटने के लिए हमें कुछ समाज सुधार को का अनुसरण करना चाहिए जो हमें अच्छे रास्ते रास्ते पर लाने के लिए प्रयत्न किए हैं। जैसे कबीर दास ,दयानंद सरस्वती, विनोबा भावे, आचार्य रामचंद्र शुक्ल, आदि समाज सुधारक हैं जिनकी बातों पर हमें अमल करना चाहिए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button