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कबीर दास जी के गुरु कौन थे? Kabir Das Ji ke Guru kaun the कबीरदास जी का जीवन परिचय

कबीर दास जी के गुरु कौन थे? Kabir Das Ji ke Guru kaun the कबीरदास जी का जीवन परिचय

नमस्कार दोस्तों, आप लोगों का हमारे साइट पर आने के लिए बहुत-बहुत स्वागत है। आज मैं आप लोगों के लिए कबीर दास जी के जीवन का संपूर्ण वृतांत को लिख रहा हूं जो अधिकतर विद्यार्थियों student के काम आने वाली है। क्योंकि कबीरदास जी का जीवन परिचय अक्सर परीक्षाओं में आ सकता है अतः आप को भी कबीर दास जी के जीवन का प्रत्येक पहलू जानना बहुत ही आवश्यक है अतः मैं आज कबीर दास जी की जीवन की कुछ घटनाएं उनकी जन्म और मृत्यु कब और कहां हुई थी? तथा कबीर दास जी के गुरु कौन थे ?और वह किस तरह से बने? कबीरदास जी की रचनाएं कौन-कौन सी हैं? इत्यादि प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए हमारे पोस्ट पर बने रहे।

कबीर दास का जीवन परिचय kabir das ji ka jeewan parichay in Hindi.

ज्ञानमार्गी शाखा के कवि श्री कबीर दास जी का जन्म सन 1398 में हुआ था। इनके जन्म के विषय में अनेक मतभेद हैं कहा जाता है कि इनका जन्म काशी में लहरतारा तालाब के पास हुआ था, वहीं पर कुछ लोगों का मानना है कि कबीर दास जी का जन्म आजमगढ़ जिले में हुआ था। कबीर दास जी ज्ञान मार्गी काव्य धारा के संत थे। हुए हिंदू तथा मुस्लिम के आडंबर हो और अंधविश्वासों की कड़ी आलोचना करते थे। कुछ लोगों का मानना है कि इनका जन्म तालाब में खिले हुए कमल के पुष्प के ऊपर हुआ था। परंतु कुछ लोगों का मानना है कि कबीर दास जी का जन्म एक विधवा ब्राह्मणी के कोख से हुआ था इसलिए लज्जा के कारण उसने इन्हें तालाब में फेंक दिया था। कबीर दास जी ने अपनी रचनाओं में समाज में सुधार लाने के लिए अनेक प्रकार के दोहे लिखे हैं। कबीर दास जी निरक्षर थे अर्थात कबीर दास जी ने पढ़ाई लिखाई बिल्कुल भी नहीं की थी। अतः जब वह किसी दोहे का गायन करते थे तो उनके शिष्य उन्हें लिख लिया करते थे।
मसि कागद छुए नहि, कलम गहयो नहीं हाथ
इस लेख से पता चलता है कि कबीर दास जी बिल्कुल भी पढ़े-लिखे नहीं थे। इनकी रचनाओं में अधिकतर अवधी भाषा और खड़ी बोली का इस्तेमाल किया गया है। कबीर दास जी ने अपनी रचनाओं में समाज को सुधारने का भरसक प्रयास किया है तथा सन 1518 में यानी 120 साल की उम्र में उनकी जीवन लीला समाप्त हो गई थी।

कबीर दास जी का जन्म Kabir Das ji ka janm

कबीर दास जी के जन्म के बारे में अनेक किंबदंती या हैं क्योंकि कुछ लोगों का मानना है कि कबीर दास जी का जन्म एक तालाब में कमल के पुष्प के ऊपर हुआ था परंतु कुछ लोगों का मानना है कि एक विधवा ब्राह्मणी थी जो गुरु रामानंद की बहुत सेवा किया करती थी, गुरु रामानंद उच्च कोटि के संत थे उन्होंने उस ब्राह्मणी को पुत्रवती होने का आशीर्वाद दे दिया जिसके कारण उसने महान संत श्री कबीर दास जी को जन्म दिया परंतु लोक लज्जा के कारण उसने कबीर दास जी को तालाब में फेंक दिया। सुबह-सुबह एक जुलाहा उस तालाब के किनारे से होकर गुजर रहा था। तभी अचानक उसे तालाब के किनारे से बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। वह दौड़कर वहां पर गया तो बच्चे को देखकर बहुत खुश हुआ क्योंकि वह निसंतान था उसके पास कोई संतान नहीं थी अतः वो कबीर दास जी को घर ले आया। अतः कबीर दास जी का पालन पोषण एक मुस्लिम परिवार में हुआ था जिनका नाम “नीरू” और “नीमा” था।

कबीर दास जी की पत्नी और बच्चे Kabir Das Ji ki ki patni aur bacche

कबीर दास जी के पालन करने वाले माता-पिता जिनका नाम “नीरू” और “नीमा” था। इन्होंने कबीर दास जी का विवाह बचपन में ही कर दिया था। कबीर दास जी के पत्नी का नाम “लोई” था। तथा कबीर दास जी के एक लड़के और एक लड़की को भी थी। जिनका नाम “कमाल” और “कमाली” था। उनकी रचनाओं के द्वारा यह प्रमाणित होता है कि उनके पुत्र का नाम कमाल था।
बूढ़ा वंस कबीर का, उपजा पूत कमाल।
हरि का सुमिरन छोड़ के, घर ले आया माल।
कहा जाता है कि उनका पुत्र कमाल अपने पिता श्री कबीर दास जी का विरोधी था अतः उसने अपने दोहों में कबीर दास जी के मत का विरोध भी किया है।
चलती चक्की देखकर दिया कबीरा रोय।
दो पाटन के बीच में साबित बचा न कोय।
संत कबीर दास जी के इस दोहे का विरोध करते हुए उनके पुत्र कमाल ने एक दोहा लिखा है।
चलती चक्की देखकर हंसा कमाल ठट्ठाय।
धुर कुली से लग रहा, वह कैसे पीस जाय।

कबीर दास जी के गुरु कौन थे Kabir Das Ji ke Guru kaun the

कबीर दास जी काशी के गंगा घाट के किनारे रहा करते थे कहा जाता है कि 1 दिन सुबह-सुबह कबीर दास जी गंगा घाट के किनारे बैठे हुए थे तभी वहां पर गुरु रामानंद जी स्नान करने के लिए जा रहे थे और अचानक उनकी खड़ाऊ कबीर के ऊपर पड़ गई जिसके कारण कबीर के मुंह से राम शब्द निकल पड़ा। और यह सुनकर गुरु रामानंद अत्यधिक प्रसन्न हुए की इस मुस्लिम को राम शब्द अत्यधिक प्रिय है इस कारण से रामानंद ने कबीर दास जी को अपना शिष्य बना लिया कथा उन्हें अपनी दीक्षा दी। इस प्रकार से कबीर दास जी के गुरु श्री रामानंद जी थे। गुरु रामानंद जी ने कबीर दास को ज्ञान और भक्ति के सच्चे दर्शन कराएं तथा उनके ज्ञान को विकसित करने में सहायता की।
गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पाय।
बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताए।

कबीरदास जी की रचनाएं Kabir Das Ji ki rachnaen

कबीर दास जी बचपन से निरक्षर थे, क्योंकि उनके माता-पिता अत्यंत गरीब थे जो कपड़े बेच कर अपने जीवन का भरण पोषण करते थे अतः कबीर दास जी को पढ़ाने में असमर्थ थे। अतः जब वह किसी दोहे का गायन करते थे तो उनके शिष्य उन्हें लिख लिया करते थे इस तरह से उनकी मुख्य रूप से सिर्फ तीन रचनाएं हैं जो इस प्रकार से है।
  • साखी
  • सबद
  • रमैनी
कबीर दास जी ने अपनी रचनाओं में किसी भी धर्म हिंदू या मुसलमान की विशेषताओं का वर्णन नहीं किया है। बल्कि कबीर दास जी ने अपनी रचनाओं में हिंदू तथा मुसलमान के आडंबर और अंधविश्वासों को दूर करने के लिए अनेक प्रमाण सहित दोहे भी लिखे हैं।
कंकर पत्थर जोड़ के मस्जिद लिया बनाएं।
ता चढ़ी मुल्ला बांग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय
पोथी पढ़ पढ़ जग भया, पंडित भया न कोय।
ढाई अछर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय।
यह दोहा पढ़कर यह मालूम होता है कि कबीर दास जी मुसलमान थे यह बात उन्हें पता थी क्योंकि उनका पालन पोषण एक मुस्लिम परिवार में हुआ था परंतु उन्होंने इसकी परवाह न करते हुए समाज को सुधारने का प्रयास किया है।

कबीर दास जी की भाषा शैली Kabir Das ji ki Bhasha shaili

कबीर दास जी ने अपनी रचनाओं में अवधि बृज भाषा तथा खड़ी बोली का इस्तेमाल किया है हालांकि इन्हें भाषाओं का कोई बहुत ज्यादा ज्ञान नहीं है सिर्फ साधु संतों के बीच में रहने से जो ज्ञान प्राप्त हुआ है उन्हीं के आधार पर इन्होंने अपनी रचनाएं की हैं इसलिए इनकी भाषा सदु कढ़ी और पंचमेल खिचड़ी भी कहा जाता है क्योंकि उनकी भाषा में कई तरह की भाषाओं का मिलावट पाया जाता है। इसलिए इनकी रचनाओं में पंचमेल खिचड़ी की भाषा भी कहा जाता है। इनकी रचनाओं में अधिकतर शांत रस का प्रयोग किया गया है तथा अलंकार की बात करें तो अधिकतर उत्प्रेक्षा अलंकार रूपक अलंकार तथा अतिशयोक्ति अलंकार का वर्णन दिखाई देता है।

कबीर दास जी की मृत्यु Kabir Das ji ki mrityu

कबीर दास जी ने संपूर्ण जीवन काशी में रहकर लोक कल्याण के लिए तथा सामाजिक बुराइयों और कुरीतियों का अंत करने के लिए अपना संपूर्ण जीवन काशी में व्यतीत किया। परंतु मृत्यु के समय हुए मगहर चले गए थे जो उत्तर प्रदेश में पड़ता है कहा जाता है कि उस समय मगहर में मरने वाले को नर्क की प्राप्ति होती थी अतः इसी अंधविश्वास को झूठा साबित करने के लिए कबीर दास जी मृत्यु के समय मगहर चले गए थे, ताकि समाज में फैली हुई अंधविश्वास को रोका जा सके। इस तरह से 120 साल की उम्र में सन 1518 मैं महान संत श्री कबीर दास जी की जीवन लीला समाप्त हो गई।

कबीर दास जी के कुछ प्रसिद्ध दोहे Kabir Das Ji ke kuch prasidh dohe

कबीरा खड़ा बाजार में मांगे सबकी खैर।
ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर।
ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोए।
औरन को शीतल करे आपहु शीतल होय।
बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं फल लागे अति दूर।
गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पाय।
बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताए।
काल करे सो आज कर आज करे सो अब।
पल में परले होएगी बहुरी करोगे कब।
राम बुलावा भेजिया, दिया कबीरा रोए।
जो सुख साधुन बीच में,सो बैकुंठ ना होय।
कबीरा मन की ही व्यथा, मन में राखो गोय।
सुन अठीलैहाई लोग सब बांटी ना लेहै कोय।
पोथी पढ़ पढ़ जग भया, पंडित भया न कोय।
ढाई अछर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय।
कबीरा सोई पीर है ,जो जाने पर पीर।
जो पर पीर ना जानही,सो का पीर में पीर।
नहाय धोए क्या हुआ जो में मेल ना जाय।
मीन सदा जल में रहे धोए मेल ना जाए।
जब मै था तब हरी नहीं अब हरी है में नाहि।
सब अंधियारा मीट गया जब दीपक देख्या माहि।
मलिन आवत देख कर कलियां करी पुकार।
फूले फूले चुन लिए कल हमारी बारि।
सत्संगती है सूप क्यों,त्यागे फटकी असार।
कहें कबीर गुरु नाम ले परसे नहीं विकार।
चलती चक्की देखकर दिया कबीरा रोए।
दो पाटन के बीच में सबूत बचा ना कोय।
भक्त मरे क्या रोइए,जो अपने घर जाए।
रोइए साकट बापुरे, हाटों हाट बिकाय।

प्रश्न 1-कबीर दास जी किस जाति के थे?

उत्तर-कबीर दास जी का कोई जाति नहीं था क्योंकि वह एक ब्राह्मणी के कोख से जन्म लिए थे तथा एक जुलाहा परिवार मैं उनका पालन-पोषण हुआ था इसलिए उनकी कोई जाति नहीं है वह सिर्फ एक संत थे।

प्रश्न 2-कबीर दास जी के गुरु कौन थे?

उत्तर-कबीर दास जी के गुरु का नाम गुरु रामानंद था।

प्रश्न 3-कबीर दास जी का जन्म कहां पर हुआ था?

उत्तर-कबीर दास जी का जन्म काशी के लहरतारा तालाब के पास हुआ था।

प्रश्न 4-कबीर दास जी के माता-पिता का क्या नाम था?

उत्तर-कबीर दास जी के पालन पोषण करने वाले माता पिता का नाम निरु तथा नीमा था।

प्रश्न 5-कबीर दास जी के पत्नी का क्या नाम था?

उत्तर-कबीर दास जी के पत्नी का नाम लोई था।

प्रश्न 6-कबीर दास जी के कितने बच्चे थे?

उत्तर-कवीर दास जी के एक लड़का एक लड़की थी जिसका नाम कमाल और कमाली था।

प्रश्न 7-कबीरदास की रचनाएं कौन-कौन सी है?

उत्तर-कबीर दास जी की मुख्य तीन रचनाएं हैं जिनके नाम साखी शब्द और रमैनी है।

प्रश्न 8-कबीरदास की भाषा शैली क्या है?

उत्तर-कबीर दास जी की भाषा शैली ब्रजभाषा अवधी भाषा तथा खड़ी बोली है।
Disclaimer
यह पोस्ट हमने किताबों में पढ़ी गई जानकारी के मुताबिक लिखा है अतः मैं यह दावा नहीं कर सकता की पूर्ण रूप से यह सत्य है अतः यदि हमारे पोस्ट में आपको कोई त्रुटि दिखाई देती है तो प्लीज कमेंट करके हमें जरूर बताएं हम अपनी गलती सुधारने का प्रयत्न करेंगे।

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