Study

कृषि किसे कहते हैं? कृषि के प्रकार। Krishi kise kahate Hain. krishi ke prakar in Hindi.

 कृषि किसे कहते हैं? कृषि के प्रकार। Krishi kise kahate Hain. krishi ke prakar in Hindi.

नमस्कार दोस्तों हमारे वेबसाइट पर आप लोगों का बहुत-बहुत स्वागत है आज का हमारा पोस्ट agriculter से संबंधित पोस्ट है। जो अधिकतर कृषि विज्ञान पढ़ने वाले student के लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण साबित होता है। भारत को एक कृषि प्रधान देश कहा जाता है भारत की संपूर्ण जनसंख्या का लगभग 70% जनसंख्या सिर्फ कृषि पर ही निर्भर है। आज हमारे पोस्ट में आप लोगों को कृषि से संबंधित अनेक प्रकार की जानकारियां मिल जाएगी। कृषि मानव सभ्यता का सबसे पहला अविष्कार है जिसके द्वारा व्यक्ति पेट पालन के लिए अनाज उत्पन्न करते थे आप लोगों ने इतिहास में अवश्य पड़ा होगा की सबसे पहले आदिमानव जानवरों का मांस खाते थे उसके बाद धीरे धीरे जब उनके मस्तिष्क का विकास हुआ तब मांस को भूनकर खाना सीख गए। इसी प्रकार धीरे-धीरे वह जंगलों और झाड़ियों को काटकर जला देते थे उसके बाद उन्होंने उस जमीन को जोड़कर खेती करना शुरू किया और उससे प्राप्त अनाज को अपना भोजन बनाते थे। इस प्रकार से यह कहा जा सकता है कि कृषि हमारे जीवन यापन की सबसे प्राथमिक व्यवसाय है जिसके द्वारा समस्त व्यक्तियों की भरण पोषण संभव हो पाता है। किसी से जुड़े हुए अनेक प्रकार के प्रश्न आप लोगों की भी मन में उठ रहे होंगे जैसे कृषि का अर्थ क्या होता है? कृषि के कितने प्रकार होते हैं? कृषि की क्या-क्या विशेषताएं हैं? इत्यादि तमाम प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए हमारे पोस्ट को ध्यान से पढ़ें जिससे आप लोगों को पूर्ण रूप से समझ में आ जाएगा कि कृषि किसे कहते हैं।

कृषि का अर्थ meaning of agriculture

कृषि को साधारण अर्थों में “खेती” भी कहा जाता है कृषि को अंग्रेजी में agriculture कहा जाता है जो दो शब्दों से मिलकर बना है पहला agri जिसका अर्थ होता है “भूमि” तथा दूसरा है कल्चर जिसका अर्थ होता है संस्कृति परंतु यहां पर इसका अर्थ खेती करने से लगाया जाता है इस प्रकार से दोनों को मिलाकर एग्रीकल्चर अर्थात खेती का व्यवसाय कहा जाता है। किसी मानव जाति की प्रारंभिक आवश्यकता की पूर्ति का एक मात्र साधन है जिसके द्वारा मनुष्य अपने भोजन वस्त्र की व्यवस्था कर पाता है।

कृषि की परिभाषा definition of agriculture

मनुष्य भूमि की जोताई बुवाई करके उनमें बीज बोता है तथा उसके द्वारा पौधे निकलते हैं और उन पौधों के द्वारा फल प्राप्त होता है जो मानव व पशुओं के लिए अत्यंत आवश्यक होता है जिसे भोजन करते हैं अतः इस प्रकार से खाने पीने की वस्तुओं का भूमि के द्वारा निर्माण करना कृषि कहलाता है। साधारण अर्थों में यह कहा जा सकता है कि भूमि के द्वारा उत्पादन किया जाने वाला तरीका या विज्ञान कृषि कहलाता है। कृषि मानव और पशु पक्षियों के लिए बहुत ही अत्यंत उपयोगी होता है क्योंकि किसी के द्वारा ही प्रत्येक मनुष्य का भरण पोषण संभव होता है उदाहरण के लिए आप मान दीजिए कि आपके पास बहुत ज्यादा पैसे उपलब्ध है परंतु खाने के लिए अनाज नहीं है तो आप पैसे देकर अनाज खरीदते हैं। वह अनाज किसी ना किसी व्यक्ति के द्वारा खेती के माध्यम से उगाया जाता है आप अपना और अपने बच्चों का भरण पोषण करते हैं।

कृषि के प्रकार types of agriculture

आप लोग समाज में रहते हैं इसलिए आप लोगों ने देखा होगा कि कृषि के अनेक प्रकार होते हैं जिससे प्रत्येक व्यक्ति अलग-अलग प्रकार की अलग-अलग प्रकार की फसलों का खेती करता है और उनके द्वारा खाने पीने की तथा वस्त्र इत्यादि की व्यवस्था कर पाता है। भारत में अधिकतर तीन प्रकार के मौसम होते हैं जिसमें प्रत्येक मौसम में अलग-अलग तरह के फसलें उगाई जाती हैं जो इस प्रकार से है।
  1. रवि की फसलें(Ravi crop)
  2. खरीफ की फसलें(kharif crop)
  3. जायद की फसलें(jayad crop)

1-रवि की फसलें(Ravi crop)

रवि की फसलों की बुवाई अधिकतर ठंडे मौसम में की जाती है यह फसलें इस मौसम में अधिक विकसित होती हैं इसलिए इन्हें ठंडी के महीने में अक्टूबर 1 नवंबर के महीने में इनकी बुवाई की जाती है तथा मार्च या अप्रैल के लगभग इनको काट दिया जाता है। इन फसलों के अंतर्गत गेहूं चना जौ मटर मशहूर इत्यादि फसलें आती हैं जो रवि की फसलें कहलाते हैं रवि की फसलें अत्यधिक उत्तरी भारत में होती हैं।

2-खरीफ की फसलें(kharif crop)

या फसलें बरसा कालीन मैं उगाई जाती हैं। खरीफ की फसलों की बुवाई ग्रीष्म काल में ही की जाती है तथा जब यह पकने लग जाते हैं तो इन्हें शुष्क मानसून की आवश्यकता होती है जिसके कारण यह वर्षा कालीन में उगाई जाती है अतः इनकी बुवाई जून में की जाती है तथा सितंबर महीने में काट लिया जाता है। खरीफ की फसलें भारत में लगभग सभी जगह पर उगाई जा सकती हैं खरीफ फसलों के अंतर्गत धान बाजरा मक्का कन्ना जूट ज्वार मूंगफली उड़द, इत्यादि फसल खरीफ की फसल कहलाती है।

3-जायद की फसलें(jayad crop)

जायद की फसलें ग्रीष्म काल की फसलें होती है परंतु ग्रीष्म काल में इन फसलों को पानी की भी आवश्यकता होती है। यह फसलें मार्च अप्रैल के महीने में बोई जाती हैं तथा जून जुलाई के लगभग काट लिया जाता है। जायद की फसल के अंतर्गत उड़द, मूंग ,मक्का, खरबूजा खरबूजा खीरा ककड़ी करेला तोरी लौकी इत्यादि फसलें जायद की फसलों के अंतर्गत आते हैं।
भारत में लगभग 9 प्रकार की कृषि कि जाती है जो निम्नलिखित है।
  1. मिश्रित खेती mishrit kheti
  2. गहन खेती gahan kheti
  3. स्थानांतरित खेती sthanantarit kheti
  4. व्यापक खेती vyapak kheti
  5. निर्वाह खेती nirvah kheti
  6. बागवानी खेती bagwani kheti
  7. व्यापारिक खेती vyaparik kheti
  8. सुखी भूमि खेती sukhi Bhumi kheti
  9. गीली भूमि खेती Gill Bhumi kheti

1-मिश्रित खेती mishrit kheti

मिश्रित खेती के अंतर्गत कृषक अपनी जमीन में अनेक प्रकार की फसलें एक साथ बो देता है जो अपने अपने समय पर पक जाती है और उसे अलग-अलग काटकर अनाज को निकाल लिया जाता है इस प्रकार की कृषि को मिश्रित खेती कहा जाता है जैसे मसूर के साथ सरसों तथा अलसी, धनिया बों दिया जाता है जो अपने अपने समय पर तैयार हो जाता है और उसे अलग-अलग काट लिया जाता है।

2-गहन खेती gahan kheti

भारत में अधिकतर जनसंख्या होने के कारण गहन खेती अत्यंत कारगर माना जाता है गहन खेती के द्वारा कम भूमि पर ज्यादा से ज्यादा पैदावार संभव हो सकता है इसलिए अत्यधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रों में गहन खेती किया जाता है जिससे सभी लोगों का भरण पोषण आसानी से हो सके खेती के अंतर्गत कम भूमि पर अत्यधिक रासायनिक खादों और वैज्ञानिक तरीकों के द्वारा अधिक से अधिक पैदावार ली जा सकती है यह पैदावार लगभग 2 गुना तक हो जाता है जो गहन खेती कहलाता है।

3-स्थानांतरित खेती sthanantarit kheti

यह खेती ज्यादा दिन तक टिकाऊ नहीं होती है स्थानांतरित खेती के अंतर्गत कुछ लोग जंगलों और झाइयों को काटकर जला देते हैं जिसके कारण वह भूमि उर्वरा वाली हो जाती है। जिससे एक दो साल उस भूमि पर खेती करते हैं और जब उसकी उर्वरा शक्ति समाप्त हो जाती है तो वह उस खेती को छोड़कर अन्य स्थानों पर जाकर जंगल झाड़ियों को काटकर अपनी कृ कोषि योग्य भूमि को खोजते हैं इस प्रकार के किसी ने ज्यादा लागत की आवश्यकता नहीं होती है यह कृषि अधिकतम उड़ीसा आंध्र प्रदेश केरल में की जाती है।

4-व्यापक खेती vyapak kheti

व्यापक का अर्थ होता है बड़ा इसलिए यह खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। यह खेती अधिकतर मशीनों के द्वारा किया जाता है इनमें मानव परिश्रम का इस्तेमाल कम से कम किया जाता है क्योंकि यह बड़े पैमाने की खेती होती है यह खेती कोई एक फसल को बड़े से बड़े खेत में बुवाई की जाती है जिसके कारण इसके लिए कृषि के अनेक साधन जैसे ट्रैक्टर तथा सिंचाई के लिए ट्यूबवेल और कटाई के लिए कटाई वाली मशीन की आवश्यकता होती है विश्व के लगभग 30% क्षेत्रों में व्यापक कृषि किया जाता है।

5-निर्वाह खेती nirvah kheti

यह खेती अधिकतर भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में की जाती है जिसके द्वारा छोटे छोटे किसान अपने छोटे-छोटे खेतों में अपने जीवन निर्वाह के लिए फसल उगाते हैं जिसे निर्वाह खेती कहा जाता है। भारत में लगभग 40% जनसंख्या ऐसी है जो निर्वाह खेती करती है और सिर्फ किसी के द्वारा ही अपना जीवन यापन करता है। इस प्रकार की खेती को निर्वाह खेती कहा जाता है।

6-बागवानी खेती bagwani kheti

ऐसी खेती जिनके द्वारा फलों की उपज की जाती है बागवानी खेती कहलाते हैं। बागवानी खेती मैं काफी ज्यादा लागत लगानी होती है तथा लंबे समय तक इंतजार के बाद उसमें लाभ दिखाई देता है जिसके कारण गरीब किसान बागवानी खेती नहीं कर पाते हैं। बागवानी खेती के अंतर्गत नारियल रबड़ आम अमरूद सेब संतरे इत्यादि फलों के उत्पादन से संबंधित होता है। बागवानी खेती अधिकतर शिमला आंध्र प्रदेश जम्मू कश्मीर हिमाचल प्रदेश में की जाती है इन स्थानों पर फसलों की खेती करना संभव नहीं होता है जिसके कारण बागवानी खेती अत्यधिक लाभकारी होता है।

7-व्यापारिक खेती vyaparik kheti

ऐसी खेती जिसके द्वारा किसान पैसे कमाने के लिए कर रहा होता है व्यापारी खेती कहलाते हैं व्यापारिक खेती के अंतर्गत रबड़ की फसलें कपास की खेती रेशम का उत्पादन सूर्यमुखी फूल का उत्पादन गुलाब की खेती इत्यादि फसलों को सम्मिलित किया जाता है जिसके द्वारा कपड़े का उत्पादन तथा अनेक प्रकार के सुगंधित तेलों का निर्माण किया जाता है जो व्यापारिक खेती से पूर्णतया संबंधित होते हैं। व्यापारिक खेती अधिकतर बड़े किसानों के द्वारा ही संभव हो पाता है क्योंकि यदि गरीब किसान व्यापारी खेती करेंगे तो उनके पास ना ही इतनी भारी मात्रा में लागत इकट्ठी हो पाती है और उन्हें खाने के लिए अनाज भी नहीं मिल पाता है इसलिए गरीब किसान व्यापारिक खेती नहीं कर पाते हैं।

8-सुखी भूमि खेती sukhi Bhumi kheti

भारत में तमाम सी जगह ऐसी है जहां पर बरसात बहुत ही कम मात्रा में हो पाती है जिसके कारण वहां पर कुछ ऐसी चुनिंदा फसलों की बुवाई की जाती है जो कम से कम पानी की आवश्यकता होती है ऐसी फसलों को सुखी भूमि खेती कहा जाता है इस भूमि में अधिकतर ज्वार बाजरा तरबूज खरबूजे इत्यादि फसलों का उत्पादन किया जाता है। सूखी भूमि खेती अधिकतर राजस्थान और मध्य प्रदेश में किया जाता है क्योंकि इन स्थानों पर अधिक मात्रा में बारिश नहीं हो पाती है।

9-गीली भूमि खेती Gill Bhumi kheti

भारत में कुछ स्थान ऐसे भी होते हैं जहां पर बारिश की वजह से मिट्टी हमेशा गीली ही रहती है जिसके कारण सभी फसलें का उत्पादन कर पाना संभव नहीं होता है। गीली भूमि पर अधिकतर धान की फसल उगाई जाती है तथा धान के अलावा और भी कुछ फसलें हैं जैसे- जूट और गन्ना तथा कुछ जगहों पर पिपरमिंट की भी खेती कि जाती है।

भारतीय कृषि की विशेषताएं features of agriculture

भारतीय कृषि के कुछ प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं।
  • भारतीय कृषि का अधिकांश भाग सिंचाई के लिए मानसून पर निर्भर होता है जिसके कारण पैदावार प्रभावित हो जाती है।
  • भारतीय कृषि छोटे-छोटे टुकड़ों में पाई जाती है जिसके कारण अधिकांश जमीने मेड तथा बॉर्डर में निकल जाती है।
  • भारत में कृषि अधिकतर अनाज उगाने के लिए उपयोग की जाती है।
  • भारत में कृषि को एक जीविकोपार्जन के रूप में किया जाता है क्योंकि कृषि एकमात्र ऐसा स्रोत है जिसके कारण संपूर्ण व्यक्ति का जीवन यापन संभव हो पाता है।
  • भारतीय कृषक अधिक मात्रा में गरीबी से दबे हुए होते हैं जिसके कारण में अपने खेतों में पूंजी नहीं लगा पाते हैं जिसके कारण पैदावार प्रभावित हो जाती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button