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गरीब लकड़हारे की कहानी (the story of poor woodcutter)

 गरीब लकड़हारे की कहानी (the story of poor woodcutter)

नमस्कार दोस्तों आप लोगों का हमारे वेबसाइट पर बहुत-बहुत स्वागत है। आज के पोस्ट में हम आप लोगों को एक ईमानदार लकड़हारे की कहानी बताने जा रहे हैं। यह कहानी बच्चों के लिए बहुत ही शिक्षाप्रद है जिसे पढ़कर बच्चे काफी प्रसन्न भी होते हैं। तो अगर आप के भी बच्चे कहानियां सुनने की जिद कर रहे हैं तो आपके लिए यह पोस्ट बहुत ही अच्छा साबित होने वाला है। क्योंकि जिस कहानी का मैं जिक्र करने जा रहा हूं उसे बच्चे काफी पसंद भी करते हैं और उनके जीवन में काफी सुधार भी होता है तो चलिए देर ना करते हैं हम शुरू करते हैं।

ईमानदार लकड़हारा (honest woodcutter)

बहुत समय की बात है। एक गांव में एक लकड़हारा रहता था। वह बहुत ही गरीब था। वह अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए जंगल में जाकर लकड़ियां काटकर बाजार में बेच देता था। और उस लकड़ी के बदौलत जो धन से मिलता था उससे वह अपना और अपने परिवार का जीवन यापन करता था। एक दिन वह जंगल में लकड़ी काटने गया। वह एक नदी के पास एक पेड़ पर चढ़ गया और लकड़ियां काटने लग गया। अचानक लकड़ी काटते हुए उसकी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई। लकड़हारा पेड़ से नीचे उतरा और सिर पर हाथ रख कर रोने लग गया। क्योंकि नदी बहुत गहरा था जिससे वह उसमें जाकर अपना कुल्हारी ढूंढने में असमर्थ था। उसे अपने घर परिवार की बहुत चिंता हुई। वह सोचने लगा कि अब हमारे परिवार का भरण पोषण किस प्रकार होगा। क्योंकि यही एकमात्र साधन था हमारे जीवन यापन का। वह बहुत ही करुण हृदय से भगवान से प्रार्थना करने लग गया।” हे भगवान! मुझे मेरी कुल्हाड़ी कुल्हाड़ी वापस दे दो। उस लकड़हारे की करुण भावना और सच्चे हृदय से की गई प्रार्थना से ही भगवान अति प्रसन्न हुए। और भगवान उस लकड़हारे के सामने प्रकट हो गए और बोले” पुत्र! क्या परेशानी है तुम्हें? लकड़हारा हाथ जोड़कर बोला” भगवन! लकड़ी काटते समय हमारी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई है। यह सुनकर भगवान ने अपना हाथ पानी में डाला और एक सोने की कुल्हाड़ी निकाली। और बोले” पुत्र !क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है? लकड़हारा बोला “भगवान! यह तो सोने की कुल्हाड़ी इससे लकड़ी काटना संभव नहीं है, यह मेरी कुल्हाड़ी नहीं है, मेरी कुल्हाड़ी लोहे की है। भगवान ने फिर से नदी में हाथ डाला और इस बार एक चांदी की कुल्हाड़ी निकाली और बोले” पुत्र! क्या यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है? लकड़हारा हाथ जोड़कर बोला” प्रभु! यह तो चांदी की कुल्हाड़ी है, यह मेरी कुल्हाड़ी नहीं है, मेरी कुल्हाड़ी तो लोहे की है। यह सुनकर भगवान ने नदी में पुनः हाथ डाला और एक लोहे की कुल्हाड़ी के साथ प्रकट हुए और बोले” पुत्र! क्या यह है तुम्हारी कुल्हाड़ी? लकड़हारा अपनी कुल्हाड़ी देखते ही पहचान लिया और उसकी आंखें भर आई देखते ही लकड़हारा बोला “हां प्रभु! यही है मेरी कुल्हाड़ी। भगवान उस लकड़हारे की ईमानदारी देखकर अति प्रसन्न हुए और उसने सोने ,चांदी और लोहे तीनों कुल्हाड़ी उस लकड़हारे को दे दी। वह लकड़हारा अति प्रसन्न हुआ और खुशी-खुशी अपने घर को आ गया। घर आकर उसने जंगल में हुए संपूर्ण कहानी को अपने बच्चों और परिवार को सुनाया जिसे सुनकर पूरा परिवार अत्यंत प्रसन्न हुआ।
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कहानी के कुछ प्रश्न (question of story)

प्रश्न-1-लकड़हारा क्यों रोने लगा?
उत्तर-लकड़हारे की कुल्हाड़ी पानी में गिर जाने के कारण वह असहाय हो गया और अपने परिवार और बच्चों का भरण पोषण की चिंता होने से वह रोने लग गया।
प्रश्न -2-भगवान ने लकड़हारे को कौन सी कुल्हाड़ी दी?
उत्तर-भगवान ने लकड़हारे की इमानदारी देखकर अति प्रसन्न हुए और उसे सोने चांदी और लोहे की तीनों कुल्हाड़ी दे देते हैं।
प्रश्न-3-भगवान ने सोने और चांदी की कुल्हाड़ी क्यों निकाला?
Utter-भगवान उस लकड़हारे की ईमानदारी की परीक्षा ले रहे थे जिसके कारण वह कभी सोने और कभी चांदी की कुल्हाड़ी दिखाते थे कि यह लालची तो नहीं है परंतु वह लकड़हारा अत्यंत ईमानदार था। जिसके कारण भगवान अति प्रसन्न हुए ।
प्रश्न-4-इस कहानी से बच्चों को क्या सीख मिलती है?
उत्तर-इस कहानी से बच्चों को यह सीख मिलती है कि हम भले ही गरीब क्यों ना हो परंतु हमें अपना ईमान नहीं खोना चाहिए। क्योंकि ईमान ही व्यक्ति का सबसे बड़ा गहना होता है। और इस कहानी में ऐसी इमानदारी की वजह से गरीब लकड़हारे के घर में समृद्धि और खुशी फैल गई।

निष्कर्ष (conclusion)

हमें यह कहानी पढ़ने के बाद यह निष्कर्ष देखने को मिलता है की हमें अपने जीवन में ईमानदारी का साथ नहीं छोड़ना चाहिए भले ही जीवन में कितनी गरीबी क्यों ना हो परंतु ईमानदारी और भगवान की ऊपर विश्वास कभी नहीं छोड़ना चाहिए। क्योंकि कोई और देखे या ना देखे परंतु परमपिता परमात्मा अपने सभी बच्चों का ध्यान रखते हैं और मुसीबत में उनकी मदद करने स्वयं पहुंचते हैं।
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