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गर्भ में लड़का किस साइड रहता है लेफ्ट या राइट garbh men ladka kis side rahta hai left ya right

नमस्कार दोस्तों आप लोगों का हमारे वेबसाइट पर आने के लिए बहुत-बहुत स्वागत है। आज का हमारा टॉपिक helth के ऊपर है। जो प्रत्येक मनुष्य के शादीशुदा जिंदगी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। क्योंकि प्रत्येक मनुष्य की जब शादी होती है तत्पश्चात पति पत्नी दोनों के मन में उत्सुकता होती है कि हमारे भी घर में बच्चे किलकारी मारे। इन्हीं सभी बातों को ध्यान में रखते हुए आज हम आप लोगों को यह बताने वाले हैं कि गर्भ में लड़का किस साइड रहता है। हालांकि हमारा वेबसाइट लिंग जांच की अनुमति नहीं देता परंतु कुछ बूढ़े बुजुर्गों के द्वारा कही गई बातों का जिक्र करने वाला हूं। जो हमारे समाज में पूर्ण रूप से प्रचलित है। गर्भ में लड़का हो या लड़की दोनों को एक समान समझना चाहिए अतः दोनों में भेदभाव करना एक दंडनीय अपराध है। अतः आज के पोस्ट में हम आपको यह बताने वाले हैं कि गर्भ में लड़का किस साइड रहता है और लड़की की साइड रहती है। अर्थात अब बड़ी ही आसानी से पता लगा सकते हैं कि आपके घर में लड़की का जन्म होने वाला है या लड़का का। गर्भ में लड़की होने के क्या क्या लक्षण होते हैं, तथा लड़का होने के कौन-कौन से लक्षण दिखाई देने लग जाते हैं। जिससे हमें पता लग सके की गर्भ में लड़का है या लड़की। पर देर में करते हुए चलिए जानते हैं कि गर्भ में लड़का किस साइड रहता है।

गर्भ में लड़का किस साइड रहता है लेफ्ट या राइट garbh men ladka kis side rahta hai left ya right 

एक औरत जब से गर्भ धारण करती है। तब से उसके मन में एक ही सवाल उठता रहता है की उसके पेट में लड़का है या लड़की आज इन्हीं सवालों का जवाब हम कुछ टिप्स के माध्यम से आप लोगों को बताने वाले हैं पुरानी कहावत है कि यदि गर्भ में लड़का रहता है तो वह दाहिने साइड ज्यादा रहता है अर्थात यदि औरत का पेट दाहिने साइड से भारी लगता हो तो यह समझ लेना चाहिए कि गर्भ में लड़का है और आपके घर में बहुत जल्दी लड़के का जन्म होने वाला है। परंतु saince इसका कोई सपोर्ट नहीं करता है क्योंकि यह सिर्फ एक कहावत है अतः इसका कोई सही तर्क नहीं मिल पाया है क्योंकि जब बच्चा पेट में रहता है तो संपूर्ण पेट उसका घर होता है वह दाएं बाएं नीचे ऊपर किसी भी तरफ मूवमेेंट कर सकता है अतः पूर्ण रूप से यह नहीं कहा जा सकता कि दाएं साइड पेट भारी होने से लड़़का का ही जन्म होगा। परंतु अक्सर परिस्थितियों में देखा गया है कि यदि सोने के समय तथा चलने के समय बेबी दाहिने साइड ज्यादा मूवमेंट करता है तो अधिकतर लड़के का ही जन्म होता है।
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गर्भ में लड़का होने के लक्षण garbh mein ladka hone ke lakshan

आज का पोस्ट शादीशुदा लाइफ वालों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण पोस्ट है क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में यह समय अवश्य आता है। कि उसे यह जानने की बहुत ही उत्सुकता होती है कि उसके गर्भ में या उसके पत्नी के पेट में लड़की है अथवा लड़का। अतः में आप लोग को कुछ ऐसे लक्षण बताऊंगा जो आप को समझने में काफी आसानी होगी कि आपकी गर्भ में यह आपकी पत्नी के गर्भ में लड़का है या लड़की। अतः लड़का होने पर क्या क्या लक्षण दिखाई देने लग जाते हैं वह निम्नलिखित है।
  • यदि पेट में लड़का है तो स्त्री या औरत का चेहरा भद्दा दिखाई देने लग जाता है उसके चेहरे की चमक और चिकनापन कम हो जाती है इसलिए चेहरे पर रूखापन दिखाई देती है।
  • अल्ट्रासाउंड कराने के बाद यदि बेबी की धड़कन 140 से कम है तो यह समझना चाहिए कि औरत के पेट में लड़का है क्योंकि डॉक्टरों का कहना है कि यदि बेबी की धड़कन 140 से कम होती है तो अधिकतर लड़के का ही जन्म होता है हालांकि इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं है यह सिर्फ अंदाजा लगाया जा सकता है।
  • यदि स्त्री के पेट में baby दाहिने साइड right side ज्यादा मूवमेंट करता है तो यह समझना चाहिए कि स्त्री के पेट में लड़का है और बहुत जल्द ही हमारे घर में लड़के का जन्म होने वाला है हालांकि विज्ञान के द्वारा यह प्रमाणित नहीं है परंतु कुछ कहावतो और बूढ़े बुजुर्गों के द्वारा यह बताया जाता है।
  • यदि गर्भावस्था के दौरान औरत के स्तन ज्यादा बढ़ रहे हो तो यह समझा जाता है कि गर्भ में लड़का है।
  • गर्भावस्था के दौरान सुबह के समय यदि उल्टी आती है तो यह समझा जाता है कि गर्भ में लड़का है और बहुत जल्द आपके घर में लड़का आने वाला है। हालांकि लड़की होने पर भी सुबह उल्टी आ सकती है ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं है जिससे यह प्रमाणित किया जा सके कि सुबह उल्टी होने पर लड़का का ही जन्म होगा।

गर्भ में बेटी होने के लक्षण garbh mein beti hone ke lakshan

प्रत्येक विवाहित जीवन में जानना बहुत ही आवश्यक होता है कि उसके गर्भ में पल रहा बच्चा लड़की है या लड़का। लेकिन यह वेबसाइट किसी के लिंग जांच की अनुमति नहीं देता है क्योंकि गर्भ में लड़का हो या लड़की दोनों ही भगवान का दिया हुआ एक उपहार है जिसे सहर्ष स्वीकार करना चाहिए यदि लड़का का जन्म होता है तो यह समझना चाहिए की हमारा और हमारी संपत्ति का वारिस जन्म ले लिया है। अगर यदि बेटी जन्म लेती है तो यह समझना चाहिए की हमारे घर में महारानी दुर्गा कन्या का अवतार लेकर हमारे घर में प्रकट हुई है यह सोचकर उसका आदर करना चाहिए। अतः मैं आप लोगों को कुछ ऐसे लक्षण  बताऊंगा जििििससे यह सिद्ध होता है कि घर में बेटी जन्म लेने वाली है या औरत के गर्भ में बेटी है।
  • यदि औरत के पेट में बच्चा बाये  साइड ज्यादा हलचल कर रहा हो तो यह समझना चाहिए कि औरत के गर्भ में एक बेटी है। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक परीक्षण नहीं किया गया है यह सिर्फ एक अंदाजा लगाया जा सकता है।
  • यदि अल्ट्रासाउंड कराने के पश्चात उसकी हार्टबीट 140 प्लस रहती है तो यह समझना चाहिए कि गर्भ में लड़की या बेटी है।
  • यदि गर्भावस्था में किसी औरत का चेहरा अत्यधिक चिकना और खूबसूरत दिखाई देता है तो यह समझना चाहिए कि गर्भ में लड़की है और बहुत जल्द आपके घर में एक कन्या जन्म लेने वाली है।
  • यदि गर्भावस्था के दौरान औरत का दाहिना स्तन बाएं स्तन से बड़ा लग रहा हो तो यह समझा जाता है कि गर्भ में लड़की का वास है।
  • यदि औरत का पेट नीचे की तरफ ज्यादा लटका हुआ दिखाई दे तो यह समझना चाहिए कि गर्भ में लड़की है।
  • गर्भावस्था के दौरान यदि औरत के पैर का भी काफी ठंड है रहते हो या ठंडे महसूस कर रही हो तो यह समझा जाता है कि गर्भ में लड़की का निवास है।

गर्भ में लड़के की धड़कन कितनी होनी चाहिए garbh mein ladke ki Dhadkan kitni honi chahie

अल्ट्रासाउंड के द्वारा यह पता अवश्य लग जाता है कि गर्भ में लड़का है या लड़की परंतु इसके द्वारा भ्रूण हत्या का अत्यधिक अपराध फैल जाने के कारण सरकार ने इस पर बैन लगा दिया है जिससे यह जानना बहुत थी मुश्किल हो गया है कि किसी औरत से गर्भ में लड़का है या लड़की। आता मैंने आप लोगों को ऊपर के पोस्ट में जैसा कि आप पढ़ चुके हैं कि लड़का और लड़की होने की क्या पहचान, है या क्या लक्षण दिखाई देते हैं। अतः अब अल्ट्रासाउंड सिर्फ बच्चे की traking के लिए की जाती है की पेट में बच्चा किस पोजीशन में है तथा उसकी हार्ट बीट कितनी है व डिलीवरी डेट क्या है इत्यादि बातों की जानकारी के लिए अल्ट्रासाउंड कराया जाता है अतः अल्ट्रासाउंड के बाद रिपोर्ट में बच्चे की धड़कन लिखी हुई होती है जिसे देखकर डॉक्टर यह समझ जाते हैं कि बच्चा का हार्ट बीट कितना है। अतः बच्चे की हार्ट बीट 1 मिनट में लगभग 120 से 160 तक होनी चाहिए। शुरुआती दौर में हार्ट बीट 120 से 130 तक रहती है परंतु अंतिम अवधि में इसकी धड़कन 140 से 160 तक हो जाती है। अतः समय के हिसाब से यह अंदाजा लगा लेना चाहिए की यदि आप 3 महीने पर अल्ट्रासाउंड कर आते हैं तो उस समय आपके बेबी की धड़कन 120 130 तक होगी और यदि आप 6 महीने से 8 महीने तक अल्ट्रासाउंड कर आते हैं तो बेबी की धड़कन 146 से 160 के बीच हो सकती है।

गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड कब कब कराना चाहिए। Garbhavastha mein ultrasound kab kab karna chahie

एक स्त्री के लिए गर्भावस्था एक महत्वपूर्ण समय होता है। क्योंकि गर्भावस्था के दौरान स्त्री का मस्तिष्क सिर्फ अपने पेट में पल रहे बच्चे पर ही होता है उसके देखरेख तथा उसकी सेहत का ख्याल रखने में ही संपूर्ण समय व्यतीत होता है। यह समय स्त्री के जीवन का बहुत ही महत्वपूर्ण समय होता है क्योंकि वह मां बनने के लिए पूरी तरह से तत्पर रहती है। अतः बच्चे की बच्चे की सुख और सलामती की जांच करने के लिए अल्ट्रासाउंड कराया जाता है अल्ट्रासाउंड के द्वारा हमें बच्चे का वजन तथा बच्चे की हार्ट बीट और डिलीवरी डेट का पता लग जाता है। अतः हमें समय-समय पर अल्ट्रासाउंड कराना अत्यंत आवश्यक होता है जिससे बेबी के बारे में पूरी जानकारी और सही जानकारी मिल सके। इसके लिए 
  • पहला अल्ट्रासाउंड जब गर्भ 3 महीना का हो जाए तो अल्ट्रासाउंड कराना चाहिए ताकि बच्चे का वजन और हार्टबीट का पता लग जाता है। जिससे वजन कम या ज्यादा होने से डॉक्टर आपको बच्चे का वजन बढ़ाने का या ना बढ़ाने का सही सलाह देते हैं।
  •  दूसरा टेस्ट 6 महीने पर कराना चाहिए इससे आपको पता लग जाएगा की आपका बच्चा नार्मल डिलीवरी के द्वारा होगा या ऑपरेशन के द्वारा होगा। उसकी हार्टबीट और वजन कितना है तथा किस पोजीशन में है इत्यादि बातें जानने के बाद डॉक्टर आपको सही सलाह देते हैं।
  • तीसरा टेस्ट आपको नौवां महीना के स्टार्ट होते ही कराना चाहिए ताकि आपको बच्चे के पोजीशन का पता लग सके कि पेट में बच्चा किस पोजीशन में है जिससे डिलीवरी में काफी आसानी मिलती है और ज्यादा परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता है। इस तरह से पूरे गर्भावस्था के दौरान लगभग तीन बार अल्ट्रासाउंड कराना अत्यंत आवश्यक होता है।

गर्भ में बच्चे का वजन कितना होना चाहिए garbh mein bacche ka vajan Kitna hona chahie

गर्भ में बच्चे का वजन बहुत मायने रखता है क्योंकि गर्भ में बच्चे का वजन कितना है यह जानने के पश्चात डॉक्टर डिसाइड करते हैं कि बच्चा कितनी हद तक स्वस्थ है इस तरह से वजन के द्वारा यह पता लगाया जा सकता है कि पेट में पल रहे बच्चे की सेहत अच्छी है या खराब है उस तरह से उनके पेरेंट्स को बताया जाता है कि बच्चे की देखभाल और खान पान किस तरह से होना चाहिए डाइट में कौन कौन से खाद्य पदार्थ लेने चाहिए और कौन-कौन से नहीं लेनी चाहिए। अतः चलिए जान लेते हैं की कितने हफ्तों पर बच्चे का वजन कितना होता है या कितना होना चाहिए जिससे बच्चे को काफी हद तक स्वस्थ माना जाता है। शुरुआती दौर में भ्रूण का वजन बहुत कम होता है क्योंकि यह एक छोटे से अंडे के रूप में होता है जिसमें सिर्फ पानी होता है परंतु जैसे-जैसे समय बढ़ता जाता है उसी हिसाब से इसका वजन भी बढ़ता जाता है अतः किस किस समय पर कितना वजन होना चाहिए आपको मैं लिस्ट के माध्यम से बता देता हूं।
  • 10 हप्तों में भ्रूण का वजन लगभग 25 से 30 ग्राम होता है।
  • 12 हप्तो के बाद इसका वजन लगभग 35 से 40 ग्राम तक हो जाता है।
  • इस तरह से 24 हफ्तों पश्चात भ्रूण का भजन लगभग 400 ग्राम से 450 ग्राम तक हो जाता है।
  • 28 हफ्तों तक इसका वजन लगभग 800 ग्राम हो जाता है।
  • इस प्रकार से अंतिम अवधि तक बच्चे की वजन लगभग 2 किलो से2.5 किलो तक होना अनिवार्य है।
  • जन्म के पश्चात बच्चे का तुरंत वजन किया जाता है जिससे बच्चे की सेहत की जांच सके कि बच्चा किस हद तक स्वस्थ है और सेहत ठीक है।
  • यदि जन्म के पश्चात बच्चे का वजन ढाई किलो या 2 किलो से कम होता है तो वह बच्चा कम सेहत का माना जाता है अर्थात उसकी सेहत काफी अच्छी नहीं है इस स्थिति में डॉक्टर की सलाह लें और उचित उपाय करें।

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 बच्चे का वजन कैसे बढ़ाएं garbh mein bacche ka vajan kaise badhaen

आप लोगों ने हमारे ऊपर की पोस्ट में पड़ा की एक बच्चे का कितने महीने पर कितना वजन होना चाहिए। अतः अल्ट्रासाउंड कराने के पश्चात यदि आपको रिपोर्ट में बच्चे का वजन कम दिखाई देता है तो उसके लिए आपको कौन कौन से खाद्य पदार्थ खाने चाहिए जिससे बच्चे की वजन में पढ़ती हो और बच्चा अत्यधिक स्वस्थ रहे।
  • भोजन में अधिकतर तीसरे महीने में protein युक्त भोजन लेना चाहिए जिससे बच्चे की सेहत अच्छी रहे।
  • अधिकतर पत्तेदार सब्जियों व साग खाना चाहिए जिससे आयरन की भरपूर मात्रा माता और बच्चे के शरीर में बनी रहे।
  • 3 महीने से लेकर 8 महीने तक दूध का सेवन अवश्य करें क्योंकि दूध हमारे शरीर में कैल्शियम की मात्रा को पूरा करता तथा बच्चे की हड्डियों का विकास करने में बहुत सहायक होता है।
  • अनार का सेवन करना चाहिए ताकि माता को खून की भरपूर मात्रा मिलती रहे जिससे बच्चे का विकास बहुत तेजी से होता है।
  • अगर फलों की बात करें तो आप फल में अनार सेब ,चीकू, नारियल ,अनानास, संतरा मौसमी, स्ट्रॉबेरी ,ब्लैकबेरी इत्यादि फलों का सेवन कर सकते हैं।
  • बच्चे की अच्छी सेहत के लिए समय-समय पर डॉक्टर की सलाह लेना अत्यंत आवश्यक है। जिससे हमें काफी मदद मिलेगी।

गर्भ में बच्चे की अच्छी सेहत के लिए क्या नहीं खाना चाहिए garbh mein bacche ki acchi sehat ke liye kya nahin khana chahie

एक औरत का गर्भ धारण करने का समय बहुत ही महत्वपूर्ण समय होता है उस समय औरत का और मूड अलग अलग तरह का बदलता रहता है। गर्भावस्था के दौरान स्त्री को कभी खट्टा कभी मीठा कभी तीखा खाने का मन करता रहता है परंतु सभी खाद्य पदार्थ पेट में पल रहे बच्चे के लिए अनुकूल नहीं होता है इसलिए हमने आपको कुछ चुनिंदा खाद्य पदार्थों के नाम बताए हैं जिन्हें खाना अत्यंत आवश्यक है जिससे हमारे पेट में पल रहा बच्चा सुरक्षित और स्वस्थ हो, अतः कुछ ऐसे चुनिंदा खाद्य सामग्री है जिन्हें गर्भावस्था के दौरान नहीं खाना चाहिए अतः वे कौन कौन से खाद्य सामग्री है जिन्हें खाने से पेट में पल रहे बच्चे के ऊपर बुरा असर पड़ सकता है।
  • गर्भावस्था के समय अत्यधिक तीखा और मसालेदार सब्जियां नहीं खाना चाहिए।
  • फास्ट फूड जैसे बर्गर ,पिज्जा ,कुल्चा ,मोमोस स्नेक्स, मंचूरियन इत्यादि नहीं खाना चाहिए।
  • ज्यादाoily भोजन नहीं खाना चाहिए अर्थात तेल से बने हुए खाद्य सामग्री या तली हुई चीजें अत्यधिक नहीं खाना चाहिए क्योंकि इनके अधिक सेवन से बेबी पर बुरा असर पड़ सकता है
  • गर्भावस्था के दौरान नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए जैसे शराब सिगरेट बीड़ी तंबाकू गुटखा ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि यह बच्चे की सेहत को खराब कर सकता है।
  • गर्भावस्था के दौरान चिकन मटन या कोई भी मांस का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि मांस में अत्यधिक मसाले का इस्तेमाल किया जाता है जो बच्चे के लिए काफी हानिकारक साबित हो सकते हैं।
  • गर्भावस्था के दौरान पपीता बिल्कुल भी नहीं खाना चाहिए ।

निष्कर्ष conclusion

संपूर्ण पोस्ट पढ़ने के पश्चात हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि जब हमारे गर्भ में लड़का होता है तो वह अधिकतर दाहिने साइड एनी राइट साइड ज्यादा मूवमेंट करता है इसके विपरीत जब गर्भ में लड़की होती है तो वह पेट में बाए साइड ज्यादा हलचल करती है। हालांकि इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं है जिससे साबित हो सके की पेट में लड़का है अथवा लड़की परंतु पुराने लोगों और पूरे बुजुर्गों के द्वारा यह कहावत कही जाती है कि अगर इस तरह के लक्षण दिखाई देते हैं तो आपको समझ जाना चाहिए कि लड़का है अथवा लड़की। बच्चे के जन्म के तुरंत बाद उसका वजन किया जाता है उस समय उसका वजन लगभग 2 किलो से 3 किलो तक होना अनिवार्य है यदि बच्चे का वजन इससे कम होता है तो वह कुपोषण का शिकार हो सकता है।

प्रश्न 1-गर्भ में लड़का किस साइड रहता है लेफ्ट अथवा राइट?

उत्तर-गर्भ में लड़का है तो वह अधिकतर दाहिने साइड ज्यादा मूवमेंट करता है और सोते समय भी वह अधिकतर दाहिने साइड ज्यादा हलचल करेगा।

प्रश्न 2-गर्भ में बच्चे का हार्ट बीट कितना होना चाहिए।

उत्तर-गर्भ में बच्चे का हार्ट बीट लगभग 120 से 160 प्रति मिनट होना चाहिए। यह शुरुआती दौर में कम और बाद में ज्यादा भी हो सकता है।

प्रश्न 3-तीसरे महीने में बच्चे का वजन कितना होता है?

उत्तर-तीसरे महीने में बच्चे का वजन लगभग 40 से 50 ग्राम का होता है।

प्रश्न 4-जन्म के समय बच्चे का वजन कितना होना चाहिए?

उत्तर-जन्म के समय बच्चे का वजन 2 से 3 किलो तक होना चाहिए।

प्रश्न 5-गर्भावस्था के दौरान क्या-क्या खाना चाहिए?

उत्तर-गर्भावस्था के दौरान प्रोटीन कैल्शियम और विटामिन युक्त भोजन खाना चाहिए जिनके बारे में मैंने ऊपर की पोस्ट में जिक्र किया है।
Disclaimer
इस पोस्ट में दी गई दवाओं और घरेलू नुस्खे तथा अंधविश्वासों पर विश्वास करने की अनुमति नहीं है। यह पोस्ट लिखने का आशय सिर्फ सार्वजनिक जानकारी है। अतः इंटरनेट पर दी गई कोई भी दवाओं का या घरेलू नुस्खों का उपयोग करने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें अन्यथा यह आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है और इसके जिम्मेदार आप स्वयं होंगे

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