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ग्रामीण समाज और नगरीय समाज में अंतर (different in village and city society in Hindi)

ग्रामीण समाज और नगरीय समाज में अंतर (different in village and city society)

नमस्कार दोस्तों आप लोगों का हमारे वेबसाइट पर बहुत-बहुत स्वागत है दोस्तों आज के पोस्ट में हम ग्रामीण समाज और नगरीय समाज में क्या अंतर होते हैं उनके बारे में जानेंगे। दोस्तों पुराने जमाने से लेकर आज तक ग्रामीण समाज की परंपरा रीति रिवाज और अपने रहन सहन मे नगरिए समाज की अपेक्षा काफी अलग रहा है तो आज हम इसी के बारे में नीचे के लेख में पढ़ेंगे।

रहन सहन का अन्तर(living difference)

ग्रामीण समाज और शहरी समाज में रहन-सहन का काफी अंतर देखने को मिलता है। ग्रामीण समाज के लोग के रहने का तौर तरीका और उनके समाज में किस तरह व्यवहार करना चाहिए इनमें भी काफी अंतर देखने को मिलता है ग्रामीण समाज के लोग काफी सीधे-साधे जीवन व्यतीत करते हैं परंतु नगरिया समाज के लोग अपने आप को एक हाई लेबल में डालने का प्रयत्न करते हैं।

संस्कारों में अंतर(different of sacraments)

भारत में ग्रामीण समाज और नगरिए समाज में संस्कारों का काफी अंतर देखा जाता है। आप लोगों ने अक्सर देखा होगा कि ग्रामीण समाज के लोग अपने पुराने रीति रिवाज और संस्कारों से बहुत ही मजबूती के साथ जुड़े हुए होते हैं परंतु शहरों में पुराने रीति-रिवाजों को लोग भूल जाते हैं और नए जमाने के साथ ढल जाते हैं। और आधुनिक युग में शहरों में अक्सर देखा जाता है की लोगों में संस्कारों की कमी आती जाती है। ग्रामीण समाज के लोगों को आपने देखा होगा की यदि पिता अपने बेटे को गाली भी देता है तो उसका बेटा बर्दाश्त कर लेता है। परंतु शहरी समाज के लोग मैं संस्कारों की इतनी कमी आती दिख रही है की वह पिता-पुत्र और तमाम अनेक रिश्ते नातो को भूलते जा रहे हैं।

पर्यावरण का अंतर(different off paryavaran)

 ग्रामीण इलाके में आप लोगों ने अक्सर देखा होगा की पेड़ पौधों की संख्या बहुत ज्यादा होती है जिसके कारण गांव के पर्यावरण बहुत अच्छे होते हैं और मनुष्य के लिए बहुत ही लाभदायक होते हैं। आपने ग्रामीण इलाके में कभी भी नहीं सुना होगा कि प्रदूषण लेबल हाई हो रहा है। क्योंकि ग्रामीण इलाके में कोई फैक्ट्री अथवा कचरा वह गंदा पानी इकट्ठा नहीं होता है जिसके कारण गांव का पर्यावरण बहुत ही शुद्ध होता है।
परंतु शहर मैं प्रदूषण बहुत ज्यादा होती है क्योंकि शहरों में घनी आबादी होती है जिसके कारण गंदगी फैलती है। शहरों में कंपनी और फैक्ट्री की संख्या बहुत ज्यादा होती है जो भारी मात्रा में गंदा पानी और धुआ निकालती हैं जिसके कारण वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण बहुत ज्यादा होता जा रहा है। फैक्ट्रियों के कारण ही और शहरों के कारण गंगा नदी का पानी दूषित होता चला जा रहा है। कई शहरों में तो वायु प्रदूषण का लेबल इतना ज्यादा बढ़ जाता है की सांस लेने में भी दिक्कत होने लग जाती है।

रोजगार में अंतर(different off job)

 आजकल के युग में आपने देखा होगा बेरोजगारी भारी मात्रा में बढ़ती ही जा रही है जो हमारे देश की बहुत बड़ी समस्या है। दोस्तों ग्रामीण इलाके में हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता तो बहुत होती है परंतु रोजगार के साधन बहुत ही कम होते हैं जिसके कारण लोग एक गरीब जीवन जीने पर मजबूर होते हैं। पैसों की कमी के कारण उनके पास साधन की बहुत ही कमी होती है। ग्रामीण समाज में लोगों का मुख्य रोजगार कृषि होता है। लोग कृषि के द्वारा ही अपना जीवन यापन करते हैं। वह लोग अपने खेतों में सब्जी ,फल ,और अनाज उगा कर बेचते हैं। इसी के द्वारा उनका जीवन यापन संभव हो पाता है।
परंतु शहरी समाज में रोजगार के साधन भारी मात्रा में पाए जाते हैं और मनुष्य अपना रोजी रोटी बहुत अच्छे ढंग से चलाने में सक्षम हो पाता है। क्योंकि शहरों में कंपनी ,मॉल्स ,दुकान ,जिम सेंटर, सिनेमा हॉल आदि तमाम सुविधाएं होती हैं जिनके द्वारा लोगों को रोजगार के अवसर बहुत ही ज्यादा होते हैं और इंसान कोई भी कार्य करके अपना रोजी रोटी कमा सकता है।

सरकारी सुविधाओं का अंतर (different of government service)

 ग्रामीण इलाके में सरकार की सभी सुविधाएं अच्छे ढंग से नहीं पहुंच पाती है जिसके कारण ग्रामीण इलाकों में अस्पताल, स्कूल ,रोड बिजली और अन्य तमाम सुविधाओं की बहुत ही किल्लत होती है। इन्हीं किल्लत की वजह से ग्रामीण समाज में लोगों को बहुत ही कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ जाता है लोग दवाई कराने के लिए कोसों पैदल चलते हैं। स्कूल दूर दूर होने की वजह से बच्चों को बहुत दूर तक साइकिल से स्कूल जाना पड़ता है। और अन्य परेशानियां भी बहुत होते हैं। परंतु नगरीय जीवन में इन सभी सुविधाओं का पर्याप्त साधन उपलब्ध होता हैं जिससे शहर में रहने वाले लोगों को कोई बहुत ज्यादा परेशानी नहीं उठानी पड़ती है।

जनसंख्या का अंतर (population difference)

 गांव में सिर्फ मुख्य व्यवसाय खेती होता है और ग्रामीण इलाके में रहने वाले व्यक्ति अधिकतर कृषि पर ही आश्रित होते हैं। इसलिए यहां पर जनसंख्या कम पाई जाती है परंतु इसकी अपेक्षा शहरी इलाकों में अनेक व्यवसाय और रोजगार के साधन पाए जाते हैं जिसके कारण जनसंख्या भी काफी ज्यादा पाई जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व कम होता है और इसके कारण प्रदूषण भी कम होता है परंतु शहरों में जनसंख्या घनत्व ज्यादा होने के कारण प्रदूषण भी अधिक होता है।

यातायात के साधनों का अंतर(difference in means of transport)

ग्रामीण इलाकों में सरल जीवन होने के कारण यातायात के साधन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो पाते हैं जिसके कारण एक जगह से दूसरी जगह आने जाने में काफी समय लग जाता है और असुविधा होती है। परंतु शहरों में लोगों के पास धन पर्याप्त मात्रा में होने के कारण सभी लोगों के पास यातायात के पर्याप्त साधन उपलब्ध होते हैं जिसके कारण लोग एक दूसरे जगह बहुत ही आसानी से और कम समय में आने जाने में सक्षम होते हैं।

अन्य अंतर(other difference)

इन सभी अंतर के बावजूद भी ग्रामीण और नगरीय जीवन में कई अंतर है। ग्रामीण समाज में गाड़ियों की संख्या कम होती है जिसके कारण प्रदूषण कम फैलता है। और शहरों में गाड़ियों की संख्या अधिक होने के कारण प्रदूषण बहुत रहता है। शहरों में जनसंख्या ज्यादा होती है और गांव में जनसंख्या कम होती है।

ग्रामीण जीवन अच्छा है या नगरिये जीवन(rural life better or city life)

 अब आप लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा होगा की क्या हमें ग्रामीण जीवन में रहना ठीक है या शहरों में रहना ठीक है। तो दोस्तों मैं आप लोगों को यह बता दूं की यह निश्चित कर पाना बहुत ही कठिन है क्योंकि कुछ सुविधाएं और लाभ ग्रामीण जीवन में है परंतु शहरों में नहीं है। और कुछ सुविधाएं और लाभ शहरों में है जो गांव में नहीं होता है। ग्रामीण जीवन में एक स्वच्छ पर्यावरण और प्राकृतिक हरियाली और सुंदरता देखने को मिलती है। परंतु ग्रामीण जीवन में रोजगार की कमी बहुत ज्यादा होती है इसलिए यहां पर जीवन यापन करने के लिए यदि समुचित व्यवस्था है तो आपके लिए ग्रामीण जीवन से बेहतर जीवन कोई नहीं है। ग्रामीण जीवन अभी भी हमारे अच्छे संस्कारों और प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली से जुड़ा हुआ है जिसके कारण यहां पर प्रदूषण बहुत ही कम होता है जो मनुष्य जीवन के लिए काफी लाभदायक होता है।
इसकी अपेक्षा यदि ग्रामीण इलाके में आपका कोई रोजगार अथवा कोई जीवन यापन करने का साधन नहीं है तो आपके लिए ग्रामीण जीवन कोई मायने नहीं रखता क्योंकि मनुष्य बिना रोजगार के अपना जीवन यापन करने में सक्षम नहीं हो पाता इसलिए यदि आपके पास रोजगार नहीं है तो आपको शहर में रहना उचित रहेगा क्योंकि शहरों में आपको समुचित रोजगार मिल जाएगा जिसके कारण आप अपना जीवन यापन और अपने बच्चों का भविष्य सुधारने में सक्षम हो सकते हैं।

निष्कर्ष (conclusion)

 ग्रामीण जीवन और शहरी जीवन में अंतर जानने के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं की ग्रामीण इलाके में प्रदूषण रहित जीवन होता है। प्रत्येक व्यक्ति का अपना एक महत्व होता है। ग्रामीण इलाके में लोग अतिथियों को देवता मानते हैं। और यदि आपके पास ग्रामीण इलाके में कोई रोजगार का अच्छा साधन है जिससे आपका जीवन यापन और आपके बच्चों का भविष्य सही ढंग से चल सकता है तो आपको सोने में सुहागा का काम हो जाता है। अर्थात आपको शहर में जाने की कोई जरूरत नहीं है।
इसकी अपेक्षा अगर आपके पास ग्रामीण इलाके में रोजगार का साधन नहीं है तो आपको मजबूरन शहर की तरफ पलायन करना पड़ सकता है। क्योंकि शहरों में आपको रोजगार का साधन मिल जाएगा जिससे आप अपना और अपने बच्चों का भविष्य सवारने में सक्षम हो सकते हैं।अतःआपको शहरों में ही रहना चाहिए।

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