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ज्वालामुखी किसे कहते हैं? यह कितने प्रकार का होता है jwalamukhi kise kahate Hain yah kitne prakar ka hota hai

 ज्वालामुखी किसे कहते हैं? यह कितने प्रकार का होता है jwalamukhi kise kahate Hain yah kitne prakar ka hota hai in hindi

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आज हम बात करने वाले हैं ज्वालामुखी के बारे में कि ज्वालामुखी किसे कहते हैं, ज्वालामुखी कितने प्रकार का होता है, ज्वालामुखी पर्वत किसे कहते हैं, भारत में ज्वालामुखी कहां पाया जाता है, और ज्वालामुखी के बारे में बहुत कुछ तो सभी जानकारी प्राप्त करने के लिए आर्टिकल को ऊपर से नीचे तक पूरा पढ़ें और हां यदि आपको जानकारी अच्छी लगे तो हमें कमेंट बॉक्स मेंyes लिखकर हमारा हौसला जरूर बढ़ाएं
पृथ्वी के निचले हिस्से में रेडियोएक्टिविटी एवं खनिजों के लगातार टूटने से पृथ्वी के अंदर तापमान की मात्रा बहुत ही ज्यादा बढ़ जाती है जिसके फलस्वरूप पृथ्वी के नीचे बड़े-बड़े चट्टान पिघल कर द्रव के रूप में परिवर्तित हो जाते हैं। पृथ्वी के निचली सतह पर द्रव का ज्यादा मात्रा में एकत्रित होने के कारण पृथ्वी के ऊपरी भाग में बहुत बड़ा छिद्र हो जाता है। उसी छिद्र से चट्टान के पिघले हुए पदार्थ धरातल पर आ जाते। उसे ही ज्वालामुखी कहते है।ज्वालामुखी के लगातार निकलने की क्रिया को ज्वालामुखी उदगार कहते हैं।जिस छिद्र से ज्वालामुखी का प्राकट्य होता है उसे क्रेटर कहते हैं। जब क्रेटर के आसपास ज्वालामुखी से निकले हुए पदार्थ शंकु आकार में ज्यादा मात्रा में एकत्रित हो जाते हैं तो उसे ज्वालामुखी का पर्वत कहते हैं। ज्वालामुखी में निकलने वाले पदार्थ ठोस द्रव गैस तीनों अवस्था में पाए जाते हैं। ज्वालामुखी में पाए जाने वाले गैस की वजह से पृथ्वी की ऊपरी सतह पर बहुत ज्यादा मात्रा में विस्फोट होता है जिसके कारण पृथ्वी पर द्रव पदार्थ जिसे लावा कहते हैं वह पृथ्वी की ऊपरी सतह पर फैल जाता है।यह लावा बहुत ज्यादा दिनों तक गर्म रहता है ज्वालामुखी से  हमेशा लावा निकलता रहता है या लावा निकलने की संभावना होती है उसे सक्रिय ज्वालामुखी कहते हैं

ज्वालामुखी का परिभाषा; jwalamukhi ka paribhasha

 भू पृष्ठ का वह ऊपरी भाग जहां पर विस्फोट होने के कारण एक छिद्र बन जाता है और उस छिद्र से गरम लावा पानी और कार्बन डाइऑक्साइड मोनोऑक्साइड एवं सल्फर ऑक्साइड की गैस निकलती है वह ज्वालामुखी कहलाता है 

ज्वालामुखी के प्रकार (ज्वालामुखी का वर्गीकरण) jwalamukhi ke prakar (jwalamukhi ka vargikaran)

ज्वालामुखी के निकलने की प्रक्रिया एवं ज्वालामुखी के सदा उद्गार होने की अवधि के अनुसार ज्वालामुखी को तीन भागों में वर्गीकरण किया गया है या ज्वालामुखी को तीन भागों में बांटा गया है जो निम्नलिखित है
  1. सक्रिय ज्वालामुखी
  2. प्रसुप्त ज्वालामुखी
  3. मृत ज्वालामुखी

सक्रिय ज्वालामुखी किसे कहते है; sakriy jwalamukhi kise kahate Hain

जिस ज्वालामुखी में चट्टान के टूटे गर्म पदार्थ लावा गैस हमेशा निकलते रहते हैं उसे सक्रिय ज्वालामुखी कहते हैं। सक्रिय ज्वालामुखी पूरी दुनिया में लगभग 500 से अधिक सक्रिय ज्वालामुखी इस पृथ्वी पर मौजूद हैं ज्यादातर सक्रिय ज्वालामुखी इटली में पाया जाता है । दक्षिण अमेरिका के हवाई दीप पर ज्वालामुखी हमेशा सक्रिय रहता है इसमें से आग की लपटें एवं जलन सील गैसे सदैव निकलती रहती है इस ज्वालामुखी को भूमध्य सागर का प्रकाश स्तंभ कहा जाता

प्रसुप्त ज्वालामुखी किसे कहते है; prasupt jwalamukhi kise kahate Hain

प्रसुप्त ज्वालामुखी में उद्गार होने के बाद शांत हो जाता है।वो प्रसुप्त ज्वालमुखी कहलाता है लेकिन यह ज्वालामुखी कुछ समय के बाद सक्रिय हो सकता है। प्रसुप्त ज्वालमुखी ज्यादातर इटली जापान और प्रसंत महासागर के आसपास पाया जाता है इस ज्वालामुखी के आसपास गरम लावा एवं शंक्वाकार में पर्वत खड़े होते हैं इस ज्वालामुखी का मलवा बहुत दिनों तक गर्म रहता है जो बहुत ही ज्यादा खतरनाक होता है प्रसुप्त ज्वालामुखी को देखने के लिए दर्शक प्रायः जाते रहते हैं।

मृत ज्वालमुखी या शांत ज्वालामुखी किसे कहते हैं; mrit jwalamukhi ya shant jwalamukhi kise kahate Hain

वे ज्वालामुखी जो कभी इतिहास में सक्रीय से लेकिन अब वे बेहद शांत एवम निस्क्रीय है वे ज्वालामुखी मृत ज्वालामुखी कहलाते है मृत ज्वालामुखी को शांत ज्वालामुखी भी कहा जाता है। ये ज्वालामुखी भविष्य मे सक्रीय हो सकते है। लेकिन अभी के लिए यह बिल्कुल शांत है। मृत ज्वालामुखी के उदाहरण ज्यादातर इटली अमेरिका जैसे देशों पाए जाते है।

ज्वालामुखी के क्या कारण है; jwalamukhi ke kya Karan hai

ज्वालामुखी का उत्पत्ति पृथ्वी के निचले भूभाग में होता है इसलिए इस क्रिया को प्रत्यक्ष देख पाना संभव नहीं है जिसकी वजह से इसका कोई प्रत्यक्ष प्रमाण है या कोई साक्ष जानकारी प्राप्त नहीं है कि ज्वालामुखी किस कारणों से उत्पन्न होता है लेकिन वैज्ञानिकों ने अपने अनुभव से ज्वालामुखी की उत्पत्ति का कुछ कारण बताया है जो निम्नलिखित है
  • भूगर्भ में ताप वृद्धि
  • भू पृष्ठ के निचले भाग में भारी मात्रा में गैस का होना
  • पृथ्वी के गर्भ में रेडियो एक्टिविटी एवं खनिजों का टूटना
  • भूभाग का कमजोर
  • भूकंप
भूगर्भ में तापमान वृद्धि
पृथ्वी के निचले हिस्से में शायद खनिज एवं अन्य रासायनिक तत्वों के टूटने के कारण भूगर्भ में तापमान बहुत ही ज्यादा मात्रा में बढ़ जाता है जिसके फलस्वरूप चट्टान पिघल कर द्रव के रूप में परिवर्तित हो जाता है वही द्रव पृथ्वी के ऊपरी भाग में आ जाता है जिससे हम लावा कहते हैं

भू पृष्ठ के निचले भाग में भारी मात्रा में गैस का होना
पृथ्वी के गर्भ में कुछ कारणों की वजह से कार्बन डाई ऑक्साइड सल्फर ऑक्साइड मोनोऑक्साइड एवं अन्य ज्वलनशील गैस की मात्रा बहुत ही ज्यादा बढ़ जाती है जिसकी वजह से पृथ्वी के ऊपरी सतह को बहुत ही तेजी से विस्फोट करता हुआ ज्वालामुखी प्रकट हो जाता है और उसमें से गर्म पदार्थ एवं जहरीले गैस भी निकलने लगते हैं

पृथ्वी के गर्भ में रेडियो एक्टिविटी एवं खनिजों का टूटना
पृथ्वी के अंदर रेडियोधर्मी हलचल एवं अन्य रासायनिक खनिज के टूटने से पृथ्वी के गर्भ में बहुत बड़े-बड़े चट्टान द्रव के रूप में परिवर्तित हो जाते हैं और वही द्रव पृथ्वी के ऊपरी सतह पर विस्फोट होकर गर्म पदार्थ उगलने लगते हैं जिसके फल स्वरुप भारी मात्रा में ज्वालामुखी उद्गार होता है
भूभाग का कमजोर होना
कई जगहों पर जमीन बहुत ही कमजोर होती है जिसकी वजह से नीचे किसी प्रकार की हलचल से पृथ्वी में एक दरार पड़ जाती है जहां से ज्वालामुखी का उद्गार होता है
भूकंप
पृथ्वी का ऐसा क्षेत्र जहां पर लगातार भूकंप आते रहते हैं वहां की जमीन में एक दरार पड़ जाती है जहां से ज्वालामुखी का उद्धार होता है

ज्वालामुखी पर्वत किसे कहते हैं? Jwalamukhi parvat kise kahate Hain

ज्वालामुखी जहां से प्रकट होता है उस क्षेत्र को क्रिएटर कहते हैं जब क्रिएटर के आसपास ज्वालामुखी से निकले गर्म गर्म पदार्थ शंक्वाकार मैं भारी मात्रा में एकत्रित हो जाते हैं तो उसे ज्वालामुखी का पर्वत कहते हैं ज्वालामुखी पर्वत लगभग पूरे विश्व में 5000 से अधिक पाए जाते हैं जिसमें कुछ ज्वालामुखी पर्वत से अभी भी लावा एवं गर्म पदार्थ निकलता रहता है

ज्वालामुखी से निकलने वाले पदार्थ; jwalamukhi se nikalne wale padarth

ज्वालामुखी से निकलने वाले पदार्थ को निम्नलिखित तीन हिस्सों में वर्गीकृत किया गया है जो निम्नलिखित है
  • गैस या जल वाष्प
  • ठोस
  • द्रव
गैस या जल वाष्प
ज्वालामुखी में गैस की मात्रा बहुत ज्यादा निकलती है जिसमें कार्बन डाई ऑक्साइड सल्फर ऑक्साइड और अन्य बहुत सारी गैस निकलती है ऐसी ज्वालामुखी बहुत ही खतरनाक होती है क्योंकि यह जलन सील गैस कभी भी आग पकड़ सकती हैं इन गैसों में तो कभी आग लग जाता है जिनकी वजह से भारी लपटे प्रकट होती है जो दूर से भी दिखाई देती है
ठोस
पृथ्वी के निचले भाग में शैल के टूटने से भारी मात्रा में विस्फोट होता है और यह सेल गोलाकार ठोस अवस्था में आकर जमीन के ऊपर हवा में बहुत ऊंचाई तक उड़ते रहते हैं और फिर यह पृथ्वी की तरफ से बहुत तेजी से आते हैं यह बहुत गर्म और बहुत ही ज्यादा खतरनाक होते हैं
द्रव
पृथ्वी के गर्भ में भारी मात्रा में चट्टान एवं खनिजों के पिघल जाने से एक चट्टान एवं खनिज गर्म तरल पदार्थ का रूप ले लेते हैं जिन्हें मैग्मा कहते हैं और जब यह गर्म पदार्थ पृथ्वी की ऊपरी सतह पर आकर फैल जाते हैं तो उसे लावा कहते हैं जो बहुत ही ज्यादा गर्म और बहुत दूर तक फैल जाता है

भारत में ज्वालमुखी कहां है? Bharat mein jwalamukhi kahan hai

भारत में एक ही ज्वालामुखी सक्रिय पाया गया है जो अंडमान निकोबार के बैरन द्वीप पर स्थित है यह ज्वालामुखी राजधानी से 140 किलोमीटर दूर है यह ज्वालामुखी पहले तो शांत हुआ करता था इस ज्वालामुखी के सक्रिय होने का इतिहास यह है कि यह ज्वालामुखी 1991 में सक्रिय था उसके बाद में शांत हो गया था लेकिन फिर से एक बार यह ज्वालामुखी अभी सक्रिय हो गया है और इसमें से सदा लावा एवं गैस एवं ठोस पदार्थ निकलते रहते हैं

ज्वालामुखी के लाभ और हानि; jwalamukhi ke Labh aur Hani

ज्वालामुखी से हमें बहुत ही ज्यादा नुकसान है लेकिन नुकसान को नजरअंदाज करते हुए इसके फायदे के बारे में बात करें तो ज्वालामुखी हमारे लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है हम नीचे जानेंगे कि ज्वालामुखी से हमें क्या क्या लाभ है और क्या क्या हानि
ज्वालामुखी के लाभ 
  • ज्वालामुखी से निकलने वाला लावा हमारे किसान भाइयों के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद है क्योंकि लावा का खाद गन्ने के खेत में डालने से गन्ना बहुत ही जबरदस्त लगता है और इसके उत्पादन की मात्रा बहुत ही ज्यादा बढ़ जाती है
  • ज्वालामुखी में गर्म पदार्थ के साथ बहुमूल्य रत्न भी पृथ्वी के नीचे से बाहर आ जाते हैं जो हमारे लिए बहुत ही लाभकारी हैं
  • ज्वालामुखी से बने क्रेटर झील किसानों के सिंचाई के लिए बहुत ही सुलभ एवं बहुत ही सुविधाजनक व्यवस्था हो जाती है
  • ज्वालामुखी के दौरान निकला हुआ जल स्रोत चर्म रोग के लिए बहुत ही ज्यादा उपयोगी है
ज्वालामुखी से हानि
  • ज्वालामुखी उद्गार के समय यदि कोई व्यक्ति ज्वालामुखी के चपेट में आ जाता है तो उस व्यक्ति की तुरंत मृत्यु हो जाती है
  • ज्वालामुखी के सदैव उद्गार से बहुत भारी मात्रा में गांव एवं शहर बर्बाद हो जाते हैं इसका मलवा सालों साल तक गर्म रहता है
  • ज्वालामुखी से निकले हुए अलावा यदि नदी में या समुंद्र के आसपास गिरता है तो समुद्री जीव पूर्णतया समाप्त हो जाते हैं या उनकी मृत्यु हो जाती है
  • ज्वालामुखी से किसानों के खेत बर्बाद हो जाते हैं और इनकी फसल नष्ट हो जाती है
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