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टॉप 10 बच्चों की नई नई कहानियां हिंदी(top 10 new story for kids in hindi)

टॉप 10 बच्चों की नई नई कहानियां हिंदी (top 10 new story for kids in hindi )

भाइयों आप लोगों का हमारे वेबसाइट पर बहुत-बहुत स्वागत है, आजकल के जमाने की जो बच्चे हैं उन्हें पुरानी कहानियां अच्छी नहीं लगती जिसके कारण हम उनके लिए कुछ नई नई कहानियां लेकर आए हैं जिन्हें सुनकर बच्चे बहुत प्रसन्न हो जाते हैं अगर आप लोगों के बच्चे भी कहानी सुनना चाहते हैं तो आप लोग इन नई कहानियों को पढ़कर जरूर सुनाएं।
  • बंटी और उसका पालतू कुत्ते की कहानी (the story of banti and his pet dog)
  • समझदार किसान और बाज की कहानी(the story of a Wise farmer and egle)
  • इमानदारी का परिणाम की कहानी(consequences of honesty)
  • नकलची बंदर की कहानी (the story of copycat monkey)
  • पालतू शेर की कहानी (the story of PET lion)
  • सांप और मनुष्य की कहानी (the story of a man and snacks)
  • गुरु गुण और चेला शक्कर की कहानी (the story of guru gud and chela shakkar)
  • भाग्य और किस्मत की कहानी (the story of of luck and fortune)
  • भिंडी और आलू की कहानी (story of lady finger and potato)
  • बहरा मेंढ़क की कहानी (the story of deaf frog)

1-बंटी और उसके पालतू कुत्ते की कहानी हिंदी the story of bunty and his pet dog in hindi

बंटी के पापा अपने घर में एक कुत्ता पाल रखे थे, जिसका नाम रॉकी था ,रॉकी बहुत ही समझदार और खूबसूरत लगता था, छोटे कद का लंबे बाल बहुत ही खूबसूरत लगते थे ,बंटी उसके साथ पूरा दिन खेलता रहता था ,रॉकी बहुत ही समझदार था ,वह बंटी के हर एक इशारे को समझता था, दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे बंटी कहीं भी जाता था, तो उसे अपने साथ ले जाता था दोनों खाना खाते थे ,तो एक साथ बैठकर खाते थे। जब वह घर में रहता था तो कोई भी अनजान व्यक्ति घर में नहीं घुस पाता था। एक दिन अचानक रॉकी की तबीयत खराब हो गई बंटी के पापा भी उससे अपने बेटे की तरह ही उसको प्यार करते थे, तबीयत खराब हो जाने से वह बहुत परेशान हो गए, और डॉक्टर के पास ले गए उसकी दवा कराएं ,जिससे रॉकी स्वस्थ हो गया। और फिर से अपने घर आ गया।

दिन बंटी के स्कूल के सभी बच्चे टूर पर घूमने जा रहे थे बंटी भी तैयार होकर चल दिया, और उसका कुत्ता रॉकी को भी साथ ले गया। उन सभी बच्चों के साथ उनकी स्कूल टीचर भी उनके साथ गई हुई थी।बहुत दूर चलने के बाद सब लोग रात में एक जंगल के पास ठहरे। सभी लोगों ने वहां पर रुक कर रोटियां बनाई और सभी ने बहुत ही खुशी से खाना खाया। सुबह हुई तो सभी लोगों ने सोचा क्यों ना यह खूबसूरत जगह घूम कर ही आगे चला जाए। अतः सभी लोग जंगल में घूमने के लिए चल दिए कुछ दूर चलने के बाद बंटी को एक खूबसूरत तालाब दिखाई दिया बंटी और रॉकी उस तालाब की तरफ बढ़ गए । धूप काफी होने के कारण बंटी के मन में विचार आया कि चलो इस तालाब में नहाया जाए बंटी और उसके सभी दोस्त उस तालाब में नहाने लग गए बंटी नहाते हुए तालाब की बीच में चला गया जिससे वह डूबने लग गया और वह बचाओ- बचाओ चिल्लाने लगा या देखकर उसके सभी दोस्त तालाब से बाहर निकल आए, कोई उपाय नहीं सूझ रहा था, बंटी को बचाने का यह देखकर रॉकी बहुत घबरा गया ,और उसके मन में एक विचार आया वह हो पेड़ पर लटकने वाली रस्सी को चढ़कर अपने नुकीले दांतों से काट दिया, और पानी में फेंक दिया और बंटी ने वह रस्सी पकड़ ली।जिससे बंटी के सभी दोस्तों ने उसे को बाहर खींच लिया। बाहर आकर बंटी ने अपने सभी दोस्तों और रोकी को गले से लगा लिया। और सभी को धन्यवाद दिया।

2-समझदार किसान और बाज की कहानी हिंदी the story of a Wise farmer and egle in hindi.

एक राजा था, वह अनेक पशु पक्षियों को अपने राजमहल में रखने का बहुत शौकीन था, वह बहुत दूर दूर से अनेक बंदर ,भालू, तोता ,मैना आदि अपने राज्य में लेकर आता था ,उनका अच्छी तरह से पालन पोषण करता था ,तथा उनके साथ अपना समय व्यतीत करता था ,एक दिन राजा अपने राज्य में घूम रहा था तो उसे एक बाज बेचता हुआ आदमी दिखा वह बाज के एक जोड़ी की कीमत 100 स्वर्ण मुद्राएं बता रहा था, ऐसा सुनकर राजा उसके पास गया ,और बोला क्या खासियत है ,इस बाज में जो इसका सौ स्वर्ण मुद्राएं मांग रहे हो, वह पक्षी बेचने वाला बोला “महाराज !आप पहले इसकी उड़ान देखिए और दोनों बाज को उसने आकाश में छोड़ दिया वह दोनों बाज इस तरह आकाश में उड़ान भर रहे थे ,जैसे कोई शेर अपना शिकार कर रहा हो उन दोनों बाज की उड़ान देखकर राजा अत्यंत मोहित हो गया ,और उन्हें स्वर्ण मुद्राएं देकर खरीद लिया उसे अपने राज्य में लाकर उन्हें चिड़ियाघर में डाल दिया कुछ दिनों बाद राजा का मन हुआ कि आज क्यों ना दोनों बाज का उड़ान देखा जाए, अतः राजा ने आदेश दिया कि दोनों बाज को छोड़ दिया जाए और नौकर ने दोनों बाज को छोड़ दिया ,एक बाज तो आसमान में उड़ान भरा और ऊपर निकल गया, परंतु दूसरा बाज थोड़ी दूर जाकर एक डाल पर आकर बैठ गया, राजा को बहुत आश्चर्य हुआ और उसने पूछा, कि ऐसा क्यों ?दोनों एक जैसे ताकतवर एक जैसे उड़ान भरने वाले थे, परंतु एक बाज पेड़ पर क्यों बैठ जा रहा है ,उसने अपने राज्य में यह खबर फैला दी कि जो भी इस बाज को आसमान में उड़ाने में सफल होगा उसे बहुत सारा इनाम दिया जाएगा। यह सुनकर दूर-दूर से चिड़ियों के जानकार उनके राज्य में आने लगे परंतु कोई भी इस रहस्य को समझ नहीं सका। एक दिन एक किसान राजा के दरबार में आया और बोला” महाराज !आपकी आज्ञा हो तो मैं इस बाज को उड़ा सकता हूं, यह बात सुनकर उस किसान पर हंसने लग गए। किसान ने देखा कि वह बाज बार आकर सिर्फ उसी डाल पर बैठता है, अतः उसने पेड़ पर चढ़कर वह डाल काट दी, और बाज को छोड़ दिया, डाल काट जाने से बाज सीधा आसमान में उड़ान भरा। यह चमत्कार देखकर राजा बहुत प्रसन्न हुए उस किसान को बहुत सारा सोने चांदी और धन दिया ,और उसके बुद्धिमानी की बहुत तारीफ की।
कहानी की सीख-इस कहानी के माध्यम से हमें यह सीख मिलती है कि जब तक हमारे जीवन में कोई सहारा देने वाला रहता है तब तक हम उसके सहारे पर जीते रहते हैं अपने लक्ष्य की तरफ आगे नहीं बढ़ सकते हैं परंतु जब हमारे जीवन में किसी का सहारा नहीं होता तो हम अपने लक्ष्य की तरफ अपने भरोसे पर आगे बढ़ते हैं और उसे प्राप्त करते हैं।

3-इमानदारी के परिणाम की कहानी हिंदी the story consequences of honesty in Hindi.

एक गांव में दो भाई रहते थे, एक का नाम राम था ,और एक का नाम श्याम था ,राम बड़ा था और श्याम छोटा था, दोनों का विवाह हो गया, दोनों की पत्नी घर आ गई ,जिसके कारण दोनों भाइयों में विवाद होने लग गया ,और वह एक दूसरे से अलग रहने लग गए, और खाने लग गए राम बहुत ही चालाक और चतुर स्वभाव का था, और उसकी पत्नी भी उसी की तरह लालची स्वभाव की थी ,श्याम बहुत ही सुशील और ईमानदार था ,और उसकी पत्नी भी उसी की तरह ईमानदार थी ,जब दोनों में बांट होने लग गया तो श्याम और उसकी पत्नी ने बड़ी चालाकी से उसकी सारी धन-संपत्ति हड़प ली, और उसे एक छोटा सा घर और खेत मिला, जिसमें वह अपने बच्चों के पालन पोषण के लिए अनाज उगाता था।राम बेईमानी के कारण अपने भाई की हिस्से की तमाम संपत्ति हड़प ली थी ,जिसके कारण उनका आर्थिक जीवन बहुत अच्छा था, परंतु श्याम का आर्थिक जीवन बहुत कष्टमय था, क्योंकि वह अपने खेत में सब्जियों और अनाज उगाते थे, उसी से उनका पालन पोषण होता था।
 एक बार श्याम की खेत में एक बहुत बड़ा कद्दू हुआ इतना बड़ा कद्दू अभी किसी भी ने भी नहीं देखा था ,उसकी पत्नी बोली क्यों ना हम इस कद्दू को अपने राजा को भेंट करें ,श्याम मान गया और उस कद्दू को लेकर राज महल में पहुंचा ,और राजा को उपहार स्वरूप भेंट कर दी, वह कद्दू देखकर राजा बहुत प्रसन्न हुआ, क्योंकि राजा ने भी इतना बड़ा कद्दू अपनी जीवन में कभी भी नहीं देखा था, उसने श्याम को इनाम में बहुत सारी धन-संपत्ति दिया ,और श्याम खुश होकर अपने घर आ गया, और उसका आर्थिक जीवन बहुत ही अच्छा हो गया,  पति पत्नी खुश होकर रहने लगे ,यह देखकर राम के मन में लालच की भावना उत्पन्न हो गई ,उसने सोचा कि जब इसने एक तुच्छ भेंट तो राजा ने इसे इतना ढेर सारा इनाम दिया ,अगर मैं राजा को कोई कीमती सामान उपहार में दूं, तो राजा मुझे और अधिक धन देंगे ऐसा सोचकर उसने अपने घर के सभी जेवरात और धन बेचकर एक हीरे की कीमती माला बनवाई, और राजा को उपहार स्वरूप भेंट किया वह माला देखकर राजा बहुत प्रसन्न हुए उसने सोचा यह आदमी बहुत ही पैसे वाला और धनी है ,इसे धन की तो कोई जरूरत है नहीं इसलिए इसे यही कद्दू दे देते हैं, ऐसा सोच कर राजा ने वह कद्दू राम को दे दिया राम हाथ मसल कर अपने घर आ गया दोनों पति और पत्नी बहुत पछताने लगे ,और उन्हें अपने भाई के साथ किए गए दुर्व्यवहार और बेईमानी पर बहुत पछतावा हुआ, वह समझ चुके थे कि यह हमारी बेईमानी का ही नतीजा है, उसने श्याम से माफी मांगी और फिर से दोनों भाई एक साथ रहने लग गए।
कहानी की सीख-इस कहानी के द्वारा हमें यह सीख मिलती है कि हमें किसी की भी हिस्से का धन अथवा रोटी नहीं खाना चाहिए हमें ईमानदारी की रोटी खानी चाहिए चाहे वह सूखी ही क्यों ना हो।

4-नकलची बंदर की कहानी हिंदी the story of a copycat monkey in hindi

गर्मी का समय था, और एक टोपी बेचने वाला एक बगीचे के पास से गुजर रहा था, तो उसका मन हुआ कि यहां क्यों ना रुक कर कुछ देर विश्राम कर ले, यह सोचकर वह बगीचे में पेड़ के नीचे बैठ गया, वह एक टोपी लगा रखा था ,और बाकी टोपी अपने झोले में रख रखा था, उस पेड़ पर कुछ बंदर रहते थे ,वह उस टोपी वाले को टोपी लगाते ही देखा तो सभी बंदर नीचे कूदकर और उसकी सारी टोपी उठा ले गए ,और सभी बंदरों ने टोपी लगा ली, अब टोपी बेचने वाला बहुत परेशान हुआ, बहुत कोशिशों के बाद भी बंदर उसे टोपी नहीं दे रहे थे, और टोपी लगा कर उससे बार-बार चिढ़ाते थे ,टोपी बेचने वाला थककर जमीन पर बैठ गया,और अपनी टोपी निकाल कर हाथ में ले ली, यह देखकर सभी बंदरों ने टोपी निकाल कर हाथ में ले ली, और उसकी तरह सिर पर हाथ लगाकर बैठ गए, यह देख कर उस टोपी वाले को बहुत आश्चर्य हुआ वह बंदर उसकी नकल कर रहे थे, यह देखकर उसके मन में एक विचार आया उसने अपने सिर से टोपी निकालकर और जोर से जमीन पर फेंक दिया ,यह देखकर सभी बंदरों ने अपनी अपनी टोपी निकाल कर जमीन पर फेंक दिया, और वह टोपी बेचने वाला सभी टोपिया उठाकर अपनी झोले में डाल लिया ,और चला गया। सभी बंदर देखते रह गए।
कहानी की सीख-हमें किसी की नकल नहीं करनी चाहिए ,क्योंकि नकल करने में भी अकल होना चाहिए, जिस तरह बंदर नकल करके मूर्ख बन गए ,उसी तरह मनुष्य दूसरों की नकल करके मूर्ख बन जाता है।

5-पालतू शेर की कहानी हिंदी the story of pet Lion in Hindi

एक गांव में एक गडरिया रहता था, वह अपनी भेड़ चराने के लिए जंगल में जाया करता था ,एक दिन उसे जंगल में एक शेर का बच्चा मिला जो बहुत ही छोटा था ,वह अपनी मां से बिछड़ गया था ,गडरिया ने उस शेर के बच्चे को अपने घर ले आया और उससे पाल पोस कर बड़ा किया ,जब वह शेर बढ़ा हुआ तो बहुत ही खतरनाक लगता था ,गडरिया उसे बाहर अपनी भेड़ की रखवाली के लिए घर के बाहर ही रखता था ,उसके रहते हुए उसके भेड़ के पास कोई भी मनुष्य या जानवर जानवर नहीं भटकता था। एक रात को वह अपने भेड़ की रखवाली पर था ,तभी वहां पर एक खूंखार शेर भेड़ का शिकार के लिए आया था, परंतु उसकी दहाड़ सुनकर वह ठिठक गया उसने सोचा यह तो हमारी ही बिरादरी का लगता है ,यह सोचकर वह हिम्मत बांध कर उसके पास गया ,और बोला “भाई तुम कौन हो? और यहां क्या कर रहे हो वह शेर बोला” मैं इस गडरिया का पालतू शेर हूं ।और इन भेड़ की रखवाली कर रहा हूं ,मेरे रहते हैं इन्हें कोई नहीं ले जा सकता ,और इसके बदले में गडरिया मुझे खाने के लिए रोटी देता है ,यह सुनकर जंगली शेर हंसने लग गया और बोला” भाई रोटी खाते हो? कभी मांस खाकर देखा है? वह पालतू शेर बोला “नहीं” यह सुनकर वह जंगली शेर चौक गया।

उसने कहा- अभी तक आपने मांस नहीं खाया। वह जंगली शेर बोला कि शेर किसी का गुलाम नहीं होता और तुम यहां रहकर इस गडरिया की पहरेदारी कर रहे हो ?धिक्कार है तुम पर!हमारी जाति किसी की पहरेदारी अथवा गुलामी नहीं करता। इससे अच्छा तुम मेरे साथ चलो और जंगल में खुली हवा का शैर करेंगे और जानवरों का शिकार करके खून और मांस खाएंगे, यह सुनकर वह पालतू शेर राजी हो गया, और दोनों भेड़ के बाडे में से एक एक भेड़ उठा कर भाग गए ,सुबह में गडरिया उठा तो देखा वह शेर और दो भेड़ उसके गायब थे। वह गडरिया बहुत पछताया और मन ही मन सोच रहा था कि हमें शेर को नहीं पालना चाहिए था।

कहानी के कुछ प्रश्नोत्तर answer some questions from the story

प्रश्न-1-गडरिया को शेर का बच्चा कहां मिला था?
उत्तर-गडरिया को शेर का बच्चा जंगल में भेड़ चराते हुए मिला था।
प्रश्न-2-गंडरिया उस शेर को खाने के लिए क्या देता था?
उत्तर-गडरिया उस शेर को खाने के लिए रोटी देता था।
प्रश्न -3-गडरिया उस शेर से क्या कार्य कराता था?
उत्तर-गडरिया उस शेर से भेड़ की रखवाली करवाता था।
प्रश्न -4-वह शेर किसके बहकावे में आकर जंगल में भाग गया?
उत्तर-वह शेर एक जंगली शेर के बहकावे में आकर जंगल में भाग गया।
प्रश्न-5-इस कहानी के माध्यम से हमें क्या सीख मिलती है?
उत्तर-इस कहानी के माध्यम से हमें यह सीख मिलती है कि हमें किसी भी खतरनाक जानवर को नहीं पालना चाहिए, क्योंकि वह हमारे लिए कभी भी खतरनाक साबित हो सकते हैं, और हमें नुकसान पहुंचा सकते हैं। 

6-सांप और मनुष्य की कहानी हिंदी the story of a man and a sneak in Hindi.

एक जंगल में एक सांप था ,एक दिन वह शिकार के पीछे भागते हुए पेड़ पर बहुत ऊपर चढ़ गया, जब उसने नीचे की तरफ देखा तो वह बहुत डर गया ,वह नीचे नहीं उतर पा रहा था, वह चिल्लाने लगा कि “मुझे कोई नीचे उतार दो “परंतु वहां पर उस समय उसकी पुकार सुनने वाला कोई नहीं था ,थोड़ी देर बाद वहां पर एक आदमी आया तो वह सांप रोते हुए बोला” भाई !आप मुझे नीचे उतार दो, आपका यह एहसान मैं जिंदगी भर नहीं भूलूंगा ,आदमी बोला “नहीं नहीं !यदि मैं तुम्हें नीचे उतार दूंगा तो तुम मुझे डश लोगे। यह सुनकर सांप बोला “नहीं भाई !मैं आपको वचन देता हूं मैं आपको नहीं काटूंगा। आप मेरे ऊपर भरोसा करो। उस आदमी के हृदय में दया आ गई और वह पेड़ पर चढ़कर उस सांप को अपने गले में बैठा लिया और नीचे उतर आया। नीचे उतरते ही सांप बोला अब मैं आपको काट लूंगा। यह सुनते ही उस आदमी के छक्के छूट गए ,वह भय से कांपने लगा वह बोला परंतु आपने तो वचन दिया था सांप बोला हां दिया था, परंतु पेड़ के ऊपर था तब , क्योंकि तुम मनुष्य हमें बेवजह ही मार देते हो। वह मनुष्य बोला यह फैसला करने के लिए हमें किसी और से पूछना होगा, क्योंकि हमने कोई भी गलती नहीं की है। यह बात सांप मान गया और बोला “चलो चलते हैं 
कुछ दूर चलने के बाद एक बैल मिला दोनों ने उसको अपनी अपनी बात सुनाई तो बैल बोला! मनुष्य दया के लायक नहीं है। यह हमसे खेतों में जोताई करवाते हैं, और उसके बाद भी डंडे से पिटाई करते हैं। इसको तो काटना ही उचित है। मनुष्य बोला चलो किसी और से पूछते हैं, कुछ दूर चलने के बाद उसने एक पेड़ से पूछा, पेड़ पूरी कहानी सुनने के बाद बोला! मनुष्य दया के काबिल नहीं है क्योंकि यह मनुष्य जब हम बड़े हो जाते हैं ,तो हमारी ही छांव में बैठकर ठंडी हवा का आनंद लेते हैं ,हम उन्हें खाने के लिए फल देते हैं ,फिर भी यह मनुष्य कुछ पैसों के लिए हमें काट डालते हैं। यह सुनकर वह आदमी बहुत घबरा गया उसे लगा कि अब उसकी जान नहीं बच पाएगी कुछ दूर चलने के बाद उसे एक कुत्ता दिखाई दिया, दोनों ने अपनी सारी बात उससे बताई और और पूछा!कि क्या करना चाहिए, उस कुत्ते को मनुष्य पर दया आ गई, वह सब बात समझ चुका था, परंतु वह बात बनाकर बोला” भाई देखो हमारे तो कुछ भी समझ में नहीं आया। आप मुझे उस पेड़ के पास ले चलो जहां पर यह घटना हुआ है ,सांप बोला चलो ठीक है ,वहां पहुंचकर कुत्ता बोला भाई आप कहां पर थे ,और मनुष्य से पूछा आप कहां पर थे, दोनों ने बताया पर कुत्ता बोला हमारे समझ में अभी भी नहीं आ रहा है ,ऐसा करो आप जिस डाल पर थे वहां पर जाकर बैठो और मनुष्य को बोला आप जिस जगह खड़े थे वहां पर जाकर खड़े हो जाओ।
 सांप उसे समझाने के लिए तुरंत भाग कर पेड़ पर चढ़ गया ,और उसी डाल पर जाकर बैठ गया मनुष्य नीचे खड़ा रहा। अब कुत्ता बोला तुम्हारे लिए वही स्थान सही है अतः अब तुम वहीं पर बैठे रहो ।क्योंकि तुम जैसे खतरनाक जंतुओं पर भरोसा करना ठीक नहीं है वह सांप चिल्लाता रह गया ।कुत्ते की समझदारी की वजह से उस मनुष्य की जान बच गई।कुत्ता और मनुष्य दोनों खुश होकर अपने अपने घर चले गए।
कहानी की सीख-इस कहानी के माध्यम से हमें क्या सीख मिलती है ,कि हमें किसी भी खतरनाक व्यक्ति अथवा धोखेबाज लोगों से दूर रहना चाहिए ,उन पर भरोसा नहीं करना चाहिए क्योंकि उनकी बात उस सांप के वचन की तरह ही होता है।

7-गुरु गुड़ चेला शक्कर की कहानी हिंदी (the story of the guru gud and chela shakkar in hindi

एक आश्रम में एक गुरु और एक चेला रहते थे, गुरु रोज खाना खाने से पहले भगवान का स्मरण करके उनका भोग लगाकर ही भोजन करते थे, एक दिन उसने अपनी चेले को जंगल में लकड़ी लाने के लिए कहा। गुरु ने कहा जंगल में जाकर तुम्हें भूख लगेगी ,इसलिए कुछ रोटियां अपने साथ ले जाओ और ध्यान रहे !भोजन करने से पहले किसी नदी नाले पर स्नान करके भगवान विष्णु का भोग लगाकर उन्हें खाना खिला कर ही स्वयं भोजन करना शिष्य मान गया और उसने 5 रोटियां अपने कमर में बांधी और लकड़ी लाने चल दिया। कुछ देर लकड़ियां काटने के बाद जब उसे भूख लगी तो वह पास के झरने के पास स्नान किया ,और रोटियां निकाल कर बैठ गया, उसने भगवान विष्णु का भोग लगाया ,और सच्चे मन से उनका आवाहन किया ,जिससे भगवान विष्णु स्वयं प्रकट हो गए, शिष्य उन्हें बड़े प्रेम पूर्वक भोजन कराया, परंतु वह स्वयं भूखा रह गया।
 कुटी पर आकर उसने अगले दिन उसने 10 रोटी रखा और जंगल की तरफ चल दिया ,पहले दिन की ही तरह संपूर्ण कार्य के पश्चात उसने भगवान को आवाहन किया, और इस बार भगवान विष्णु और शंकर भी साथ में आ गए ,वह शिष्य दोनों को बहुत ही प्रेम पूर्वक भोजन कराया ,परंतु वह इस दिन भी भूखा रह गया ,अगले दिन उसने 15 रोटी अपने कमर में बांधी और जंगल को चल दिया संपूर्ण क्रिया के पश्चात उसने सच्चे मन से भगवान को खाने के लिए बुलाया इस बार पर ब्रह्मा विष्णु और शंकर तीनों ही आ गए थे, यह देखकर वह अति प्रसन्न हुआ और तीनों को बड़े ही प्रेम पूर्वक भोजन कराया ,परंतु “अफसोस! इस दिन भी वह भूखा ही रह गया, चौथे दिन गुरु ने जब शिष्य को 20 रोटियां ले जाते हुए देखा तो उसने शिष्य को टोककर कर पूछा, तुम इतनी रोटियां जंगल में किसे खिलाते हो? यह सुनकर शिष्य क्रोधित हो गया, और बोला आपने ही तो कहा था कि भगवान को भोजन कराने के बाद ही स्वयं भोजन करना ,अतः मैं वही कर रहा हूं, परंतु रोज उनकी संख्या में वृद्धि हो रही है, जिसके कारण मैं भूखा रह जाता हूं ,और आज तो 5 लोग आने वाले हैं ,अतः मैं उन्हीं के लिए यह भोजन ले कर जा रहा हूं। यह सुनकर गुरु को बड़ा ही आश्चर्य हुआ, कि यह रोटी ले जाकर जंगल में किस को खिलाता है ,क्योंकि हम इतने दिन से पूजा कर रहे हैं, भगवान का स्मरण करते हैं परंतु हमें तो भगवान कभी नहीं मिले। गुरु दिखावे के लिए भगवान की पूजा करते थे और उनका भोग लगाते थे।
 इस बात का रहस्य जानने के लिए गुरु उसका पीछा करने लग गए जंगल में जाकर वह झाड़ियों के पीछे बैठकर उसके संपूर्ण क्रिया पर नजर रख रहे थे। शिष्य रोज की तरह ही इस दिन ही स्नान करके रोटी का पोटली खोला और बैठ गया,उसने सच्चे मन से भगवान को पुकारा कि” हे भगवान! आकर आप भोजन ग्रहण करो, यह सुनते ही वहां पर ब्रह्मा ,विष्णु, शंकर और साथ में लक्ष्मी भी प्रकट हो गए, और बैठकर बड़े ही प्रेम से भोजन करने लगे ,यह यह देख कर गुरु बहुत आश्चर्यचकित हुआ उसका ज्ञान रूपी नेत्र खुल चुका था ,वह समझ चुका था, कि सच्चे प्रेम से ही ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है ,पूजा पाठ करने से और माला जपने से कुछ नहीं होता है।
कहानी की सीख -इस कहानी के द्वारा हमें यह सीख मिलती है कि पूजा पाठ, माला का जाप करना, एक पैरों पर खड़े होना, यह सब एक दिखावा और ढोंग है, यदि हमें ईश्वर को प्राप्त करना है तो हमें सच्चे हृदय और पवित्र मन से उनका स्मरण करना चाहिए।

8-भाग्य और किस्मत की कहानी हिंदी the story of luck and fortune in Hindi.

एक गांव में दो दोस्त रहते थे, एक दिन  भाग्य और कर्म को लेकर दोनों में बहस हो गई, एक कह रहा था कि भाग्य में होगा वही मिलेगा ,तो दूसरा कहता कर्म करने से ही सब कुछ हासिल होता है, इसकी पुष्टि के लिए दोनों दोस्तों ने कई प्रमाण रखे ,परंतु कोई हल नहीं निकल सका। एक दिन वह जो कर्म का पक्ष ले रहा था ,बहुत दूर जंगल में जाकर एक पेड़ के ऊपर चढ़कर बैठ गया ,और सोचा की यदि हम कर्म नहीं करेंगे, तो देखते हैं कि भाग्य हमें कैसे खाना खिलाता है। कुछ देर बाद उसने देखा कि उस पेड़ के नीचे से एक राजा गुजर रहे थे, पेड़ की छांव देखकर राजा बोले “चलो !इस पेड़ की छांव में बैठकर कुछ देर विश्राम करेंगे फिर भोजन करेंगे। राजा और उनके आदमी जैसे ही अपना अच्छा अच्छा राजसी भोजन निकालकर खाने के लिए तैयार हुए, तभी वहां पर एक शेर आ गया ,और बहुत जोर से दहाड़ा सभी लोग डर कर वहां से भाग गए ,और वह राजसी खाना वही पर रखा रह गया।
 थोड़ी देर बीतने के बाद वहां पर चार चोर आए वह कहां राजसी भोजन देखकर उन्हें बहुत जोर की भूख लग गई, वे जैसे ही खाने के लिए आगे बढ़े तभी उसमें से एक चोर बोला” रुको !इस भोजन में जहर भी हो सकता है ,हमें पकड़ने के लिए यह किसी की चाल हो सकती है ,यह सुनकर सभी चोर चारों तरफ देखने लग गए उसने ऊपर देखा तो उसे एक आदमी दिखा।उसे देखकर बोले यही हो सकता है, इसी ने खाने में जहर मिलाया होगा ,चलो इसे ही पहले खिलाकर देखते हैं, एक चोर पेड़ पर चढ़ गया, और उसे नीचे उतार लाया वह खाना खाने को तैयार नहीं था ,परंतु चोर ने जबरदस्ती खाना उसके मुंह में खिला दिया। वह व्यक्ति राजसी भोजन खाकर बहुत प्रसन्न हुआ और मन ही मन सोचने लगा की जो हमारे भाग्य में है वो भाग कर आएगा। और अपनी हार स्वीकार करके वह वापस घर आ गया।
कहानी की सीख-इस कहानी के माध्यम से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपने भाग्य पर भरोसा करना चाहिए। किसी अन्य व्यक्ति के धन का लालच नहीं करना चाहिए। इस कहानी में सिर्फ भाग्य पर बल दिया गया है परंतु भाग्य और कर्म एक दूसरे के पूरक हैं हमें बिना कर्म किए बैठना ठीक नहीं है अतः में कर्म करते हुए अपने भाग्य पर भरोसा करना चाहिए।

9-भिंडी और आलू की कहानी हिन्दी the story of Lady finger and potato in Hindi

आलू भिंडी से बहुत ही प्यार करता था, एक दिन उसने सोचा की भिंडी को आज प्रपोज कर ही देते हैं ,यह सोच कर उसने भिंडी से आई लव यू बोल दिया। भिंडी क्रोध से आग बबूला हो गई और बोली! मैं पतली सी, चिकनी और खूबसूरत हूं। और तुम खुरदरे चेहरे खड़ूस बुड्ढे ? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे आई लव यू बोलने की?

यह सुनकर आलू बहुत दुखी हुआ, उसका दिल टूट गया। और उसके बाद उसने इतने दोस्त बनाए, जिनकी गिनती भी नहीं की जा सकती। आप खुद देख सकते हैं ,आलू गोभी, आलू टमाटर ,आलू मटर ,आलू बैंगन ,आलू शिमला ,आलू परवल आदि। और तभी से भिंडी अकेली ही रह गई।
कहानी की सीख-इस कहानी के माध्यम से हमें यह सीख मिलती है ,कि हमें अपने आप पर घमंड नहीं करना चाहिए ,क्योंकि घमंड स्वयं को ही हानि पहुंचाता है।

10-बहरा मेंढक की कहानी हिंदी the story of a deaf frog in Hindi.

एक बार कुछ मेंढ़कों की प्रतियोगिता थी, प्रतियोगिता में एक खंभे के ऊपर चढ़ना था। एक निश्चित समय पर सभी मेंढक एकत्र हुए, उसमें से एक मेंढक बहरा था। प्रतियोगिता आरंभ हुई सभी मेंढक कुछ ऊंचाई तक जाकर गिर जाते थे, यह देख कर सभी लोग जोर-जोर से हंसते और तालियां बजाते थे। और अंत में वह बहरा मेंढ़क उस खंभे के ऊपर चढ़ने में कामयाब हो गया। सभी लोगों ने उससे पूछा की इस खंभे पर जो कोई नहीं चढ़ सका आपने कैसे कर दिखाया? बहरा मेंढ़क बोला ,जब आप लोग जोर-जोर से तालियां बजा रहे थे, तो मुझे लगा आप लोग हमारी प्रशंसा कर रहे हैं ,और कह रहे हैं, कि तुम यह कर सकते हो, यह सोचकर हमारी हिम्मत और दोगुनी हो गई ,और मैं खंबे पर चढ़ गया।
कहानी की सीख-इस कहानी के माध्यम से हमें यह सीख मिलती है ,कि यदि कोई हमारे पास हमारे हिम्मत को बढ़ाने वाला होता है तो हमारी हिम्मत दोगुनी हो जाती है, और हम अपने लक्ष्य में कामयाब हो जाते हैं।






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