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टॉप 10 बच्चों की नैतिक कहानियां (top 10 Short morel storys for kids in hindi)

टॉप 10 बच्चों की नैतिक कहानियां (top 10 Shory morel storys for kids in Hindi )

नमस्कार दोस्तों, आप लोग का हमारे वेबसाइट पर बहुत-बहुत स्वागत है। हमारे वेबसाइट पर छोटी-छोटी कहानियां आपको पढ़ने को मिलती है जो आपके बच्चों को जो आपके बच्चों को प्रसन्नता देती है। आपको अच्छी कहानियां पढ़ने का शौक है तो आप बहुत सही जगह पर हैं। दोस्तों बच्चों के लिए अच्छी-अच्छी नैतिक कहानियां पढ़ने के लिए आप लोग हमारी साइट पर बने रहिए और कहानी को पूरा पढ़कर आनंद उठाएं।हमारे साइट पर आप लोगों को अनेक जानवर जैसे बिल्ली चूहे, बंदर ,चिड़िया ,शेर भालू इत्यादि जानवरों की कहानियां सुनने को मिलेंगी। जो बच्चों को काफी प्रिय होती हैं इसे सुनकर बच्चे बहुत ही प्रसन्न होते हैं। चलिए कहानियों की तरफ आगे बढ़ते हैं।
  • कछुआ और खरगोश की कहानी
  • दो आलसी दोस्त की कहानी
  • एक पिता और दो बेटों की कहानी
  • बिच्छू और साधु की कहानी
  • बिल्ली के गले में घंटी कहानी
  • चतुर किसान और भालू की कहानी
  • बंदर और राजा की कहानी
  • समझदार मेमना की कहानी
  • मुर्गे का घमंड की कहानी
  • एक पंडित जी की कहानी

1-कछुआ और खरगोश की कहानी (The story of the tortoise and the hare)

बहुत समय पहले की बात है। एक जंगल में एक कछुआ और एक खरगोश रहते थे। दोनों एक दूसरे के काफी गहरे दोस्त थे, खरगोश घमंडी स्वभाव का था, उसे अपने फुर्तीले शरीर पर बहुत घमंड था। वह हमेशा कछुए का मजाक उड़ाता रहता था, परंतु कछुआ इस बात का कभी भी बुरा नहीं मानता था।एक दिन सभी जानवर एक साथ खेल रहे थे। जानवरों में दौड़ की प्रतियोगिता सुनिश्चित की गई। दौड़ की प्रतियोगिता सुनकर खरगोश पहले ही चिल्लाने लगा, खरगोश पहले ही बोला मुझसे ज्यादा तेज और कोई नहीं दौड़ सकता है, अगर कोई है तो वह सामने आए, कोई भी जानवर उसके सामने नहीं आया तो कछुआ को बहुत बुरा लगा, उसने सोचा यही सही समय है ,इस के घमंड को तोड़ने का,कछुआ बोला! मैं करूंगा तुम्हारा मुकाबला, यह सुनकर कछुआ हंसने लगा और बोला “हा हा हा”मूर्ख कछुआ! तुम करोगे हमारा मुकाबला? तुम्हारी अकल क्या घास चरने चली गई है? यह सुनकर कछुआ का प्रतिज्ञा और भी दृढ़ हो गया। प्रतियोगिता प्रारंभ हुई, जंगल के बीचो बीच में एक बरगद का बहुत ही विशाल वृक्ष था ,उस वृक्ष को लक्ष्य बनाया गया, जो उस वृक्ष के पास सबसे पहले पहुंचेगा, वही विजेता होगा। दोनों ने दौड़ना प्रारंभ किया, देखते ही देखते खरगोश बहुत दूर निकल गया, कुछ दूर जाने के बाद वह काफी थक गया, उसने सोचा कछुआ तो अभी बहुत पीछे है, तब तक मैं थोड़ा आराम कर लेता हूं, यह सोचकर वह एक पेड़ के नीचे लेट गया, लेटते ही थकान के कारण उसे नींद आ गई और और सो गया। कछुआ बिना थके हुए निरंतर चलता जा रहा था। धीरे-धीरे वह उस विशाल बरगद के पेड़ के नीचे पहुंच गया। जब खरगोश की आंख खुली तो उसने देखा कि समय बहुत ज्यादा हो रहा था। वह भागकर वहां पहुंचा तो कछुआ उससे पहले पहुंच चुका था। खरगोश को अपनी हार स्वीकार करना पड़ा। सभी जानवरों के बीच में खरगोश का सिर झुक गया। उसे अपने दोस्त के साथ किए गए बर्ताव पर बहुत पछतावा हो रहा था। खरगोश ने अपने दोस्त कछुआ से माफी मांगी और फिर से दोनों में गहरी दोस्ती हो गई और एक साथ रहने लग गए।
कहानी की सीख-यह कहानी हमें यह सीख देती है कि हमें अविरल प्रयत्न करना चाहिए क्योंकि लगातार प्रयत्न के द्वारा ही हम बड़े से बड़े लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं ,जैसे कछुआ असंभव कार्य को भी संभव बना दिया।

2-दो आलसी दोस्त की कहानी (two lazy friends story)

दो दोस्त थे, वह बहुत ही आलसी थे, उनके घर वाले भी उनसे बहुत तंग आ चुके थे, उनका कार्य था सिर्फ घर में बैठे-बैठे मुफ्त की रोटियां तोड़ना, यह देखकर उनके घरवाले रोज उन्हें खरी-खोटी सुनाया करते थे। एक दिन दोनों दोस्त के मन में एक विचार आया, क्यों ना हम कहीं किसी शहर में जाकर कुछ पैसे कमा कर लाएं, यह सोचकर दोनों दोस्त घर से बाहर निकल पडते हैं, कुछ दूर चलने के बाद वह बहुत थक जाते हैं, तभी कुछ दूरी पर उन्हें एक आम का बगीचा दिखाई देता है, वह वहां जाकर आम के पेड़ के छांव में सो जाते हैं। तभी वहां पर एक पका हुआ आम पेड़ पर से नीचे गिरता है। आम बहुत ही अच्छा और सुगंधित था, आम को देखकर दोनों के मुंह में पानी आ जाता है। एक दोस्त दूसरे दोस्त से बोलता है आम लाकर उसे दे दे। परंतु वह दोस्त भी उससे आम को उठाकर लाने के लिए ही बोलता है, ऐसा करते हुए दोनों झगड़ने लग जाते हैं, तभी वहां से एक बूढ़ा व्यक्ति जाता हुआ दिखाई देता है। वह बूढ़ा व्यक्ति उनसे पूछता है की वह क्यों आपस में झगड़ा कर रहे हैं। तो वे दोनों अपनी पूरी बात उस बूढ़े व्यक्ति को बताते हैं, बूढ़ा व्यक्ति समझ जाता है कि संसार में इनसे आलसी व्यक्ति और दूसरा कोई नहीं है। वह बूढ़ा व्यक्ति उनके सामने से आम उठाकर खाते हुए चल देता है। यह देखकर दोनों दोस्त चिल्लाते रह जाते हैं।
प्रेरणा-इस कहानी से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हमें आलस्य बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए, और प्रत्येक सुबह की नई किरण के साथ हमें आगे बढ़ना चाहिए। अन्यथा जिस तरह बहुत बड़ा आदमी आम उठा कर खा लेता है उसी तरह हम प्रत्येक उपभोग वंचित रह जाएंगे और अन्य व्यक्ति हमारा मजाक उड़ाते रहेंगे।

3-एक पिता और दो बेटों की कहानी (story of two sons and one fathers)

एक गांव में एक आदमी रहता था, उसके दो बेटे थे, एक का नाम रामू और दूसरे का नाम श्यामू था। रामू बड़ा था और श्यामू छोटा था।धीरे-धीरे वह व्यक्ति बुड्ढा हो चला , एक दिन उसके मन में विचार आया कि हमारे दोनों बेटों में कौन सा बेटा सबसे ज्यादा बुद्धिमान है। यह सोचकर उसने रामू और श्यामू को अपने पास बुलाया, उसने दोनों को पांच पांच रूपए दिए, और बोला “पुत्रों! जाओ और कोई ऐसी वस्तु ले आओ जिससे संपूर्ण घर भर जाए, दोनों घर से बाहर निकल जाते हैं, श्यामू बाजार में जाता है तो उसे ऐसी कोई वस्तु नहीं दिखाई देती जो ₹5 में मिल जाए और संपूर्ण घर भर जाए, बहुत ढूंढने के बाद उसे एक किसान धानका पुआर ले जाते हुए दिखा। वह उस किसान से बोला” भाई! क्या आप मुझे ₹5 में इसे दे सकते हो। वह किसान बोला कदापि नहीं इसे हमारे बैल खा लेंगे। बहुत विनती करने के बाद में किसान मान गया। वाह किसान को ₹5 देकर पूआर का गट्ठर घर ले आया और पूरे घर में बिखेर दिया।
रामू भी ₹5 लेकर बाजार गया, और एक मोमबत्ती खरीद लाया। मोमबत्ती को शाम होते ही उसने जला दिया, और संपूर्ण घर में प्रकाश फैल गया। यह देख कर पिता बहुत प्रसन्न हुआ और रामू का पीठ थपथपाने लगा, और उसकी बुद्धिमानी की प्रशंसा पूरे गांव में फैल गई।
कहानी की सीख-इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें किसी कार्य को करने के लिए बुद्धिमानी की आवश्यकता होती है अतः हमें शिक्षित होने के साथ-साथ बुद्धिमान भी होना चाहिए।

4-बिच्छू और साधु की कहानी (The story of a monk and scorpion)

एक जंगल में कुटी बनाकर एक साधु रहता था, वह रोज जब भी पूजा करने को बैठता था तो एक बिच्छू आकर उसके पैर में काट लेती थी, और साधु से लकड़ी से दूर भगा देता था, कई दिनों तक ऐसा ही चलता रहा, एक दिन एक शिष्य ने साधु से पूछा “महाराज! आप इसे मार क्यों नहीं देते, यह आपको प्रतिदिन काट लिया करती है। यह सुनकर उस साधु ने बहुत ही प्रेम भाव से उत्तर दिया। जब वह एक जन्तु होकर अपने आदत का परित्याग नहीं कर रही है, तो हम तो फिर भी एक इंसान होने के साथ-साथ साधु भी हैं। हम अपने आदत का परित्याग क्यों करें, यह सुनकर सभी शिष्य सिर झुका लिए।
कहानी की सीख -इस कहानी से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हमें अपनी इंसानियत का परित्याग नहीं करना चाहिए। दूसरा व्यक्ति क्या कर रहा है इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। हमें एक अच्छे इंसान बनने से कौन रोक रहा है।

5-बिल्ली के गले में घंटी की कहानी (The story of the bell around the cats neck

एक घर में कुछ चूहे रहते थे। वहां पर कभी-कभी एक बिल्ली आ जाया करती थी और चूहों को खा जाती थी, सभी चूहे बिल्ली से बहुत परेशान हो गए थे, एक दिन सभी चूहे इकट्ठा होकर इस समस्या से निपटने के लिए कोई उपाय खोजने लगे, इन सभी चूहों में एक चूहा बोल पड़ा, इस समस्या का एक उपाय है, सभी चूहे बहुत प्रसन्न हुए ,और बोले, जल्दी बताओ क्या है वह उपाय।
वह चूहा बोला यदि बिल्ली के गले में एक घंटी बांध दी जाए, तो उसके आने की खबर हमें पहले ही मिल जाएगी और हम सभी सतर्क हो जाएंगे। सब लोगों को यह विचार बहुत अच्छा लगा। उसमें से एक बूढ़ा चूहा बहुत समझदार था, जो बहुत दूर बैठा हुआ था, वह थोड़ा नजदीक आकर बोला, विचार तो अच्छा है, परंतु बिल्ली के गले में घंटी बांधेगा कौन? यह सुनकर सभी चूहे चुप हो गए।
प्रेरणा-इस कहानी से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि कथनी और करनी में बहुत अंतर होता है, किसी को कोई कार्य बताना बहुत आसान है परंतु उसे खुद को जब करना पड़ता है तो पता चलता है कि कितना कठिन है।

6-चतुर किसान और भालू की कहानी (the story of the clever farmer and a bear)

एक गांव में एक किसान रहता था, एक दिन जब वह अपने खेत में जा रहा था तो अचानक उसे एक जंगली भालू मिल गया, वह भालू किसान के तरफ झपटा, तो किसान बहुत ज्यादा है और बोला “भाई !मुझे क्यों मारते हो और क्या चाहिए आपको? वह भालू बोला, तुम्हारे खेत की आधी फसल मेरी और आधी तुम्हारी रहेगी, किसान मजबूर था, वह मान गया। जब फसल बोने का समय आया तो भालू बोला, जमीन के ऊपर की फसल मेरी और नीचे की तुम्हारी रहेगी, किसान मान गया, और उसने आलू को दिए, जब फसल तैयार हुई तो किसान को मिले आलू, और भालू को सिर्फ खाने को पत्ते मिले,भालू चिढ़कर रह गया। भालू ने सोचा इस बार किसान को मजा चखा कर ही रहूंगा, भालू बोला इस बार जमीन के नीचे की फसल मेरी और ऊपर की तुम्हारी रहेगी, किसान मान गया, इस बार उसने गेहूं को दिया जब फसल तैयार हुई, तो किसान को मिले चमकीले की हूं और भालू को सिर्फ जड़े खाने को मिली, भालू बहुत क्रोधित हुआ और बोला, इस बार जमीन के ऊपर और नीचे की फसल हमारी और बीच की तुम्हारी रहेगी ,किसान मान गया इस बार किसान ने गन्ना बो दिया जब फसल तैयार हुई तो किसान को बड़े-बड़े लट्ठे गन्ने की मिले ,और भालू को जोड़ें और पत्तियां खाने को मिली ,भालू बहुत परेशान हो गया,और दुखी होकर वापस वह जंगल में भाग गया ,अब किसान निश्चिंत होकर अपना खेती करने लग गया।
इस कहानी के माध्यम से हमें यह सीख मिलती है कि हम अपने मस्तिष्क का इस्तेमाल करके बड़े से बड़े ताकत को चकमा दे सकते हैं। अतः अपने से अधिक शारीरिक बल वाले व्यक्ति से बुद्धि के बल से लड़ाई करनी चाहिए।

7-बंदर और राजा की कहानी(The story of a monkey and a king)

बहुत समय पहले की बात है। एक राजा था, वह जानवरों का बहुत शौकीन था, वह अपने राज्य में दूर-दूर से अनेक जानवरों को खरीद कर लाता था। एक दिन राजा अपने राज्य में देखरेख करने के लिए निकला था, तभी उसे एक बाजीगर दिखाई दिया, वह जोर-जोर से चिल्लाकर बंदर बेच रहा था,सौ स्वर्ण मुद्राओं का एक बंदर ले लो। राजा को यह सुनकर बहुत आश्चर्य हुआ, राजा उस बाजीगर के पास गया और बोला “भाई! तुम एक बंदर के स्वर्ण मुद्राएं क्यों मांग रहे हो , क्या खासियत है इस बंदर में, वह बाजिगर बोला”महाराज! यह बंदर एक बंदर ही नहीं है अपितु एक योद्धा भी है, इसे तलवारबाजी की युद्ध कला से इसे पूरी तरह तैयार किया गया है। राजा बहुत प्रसन्न हुआ और सौ स्वर्ण मुद्राएं देकर उस बंदर को महल में ले आया। राजा ने उस बंदर को अपना अंगरक्षक बना दिया। वह बंदर हमेशा तलवार लेकर राजा का सुरक्षा करता था।एक दिन राजा अपने शयन कक्ष में सो रहा था, वह बंदर तलवार लेकर वहां पर पहरा दे रहा था। अचानक एक मक्खी आकर राजा के नाक पर बैठ गई, बंदर ने वह मक्खी देखा, उसे बहुत क्रोध आया, वह सोचा हमारे रहते हुए कोई राजा को कैसे छू सकता है, यह सोचकर उसने अपनी म्यान से तलवार निकाली, और खींच कर राजा के नाक पर चला दी, मक्खी उड़ गई परंतु राजा की नाक कट गई। राजा जोर से चिल्ला कर उठा और उस बंदर को पकड़कर कारागार में डालने का हुक्म दिया।
कहानी की सीख-इस कहानी के माध्यम से हमें यह सीख मिलती है कि हमें किसी जानवर पर पूर्ण विश्वास नहीं करना चाहिए, क्योंकि जानवर जानवर ही होता है ,वह इंसान नहीं बन सकता, इस कहानी में राजा जानवर पर विश्वास करके अपनी नाक खो देता है।

8-समझदार मेमना की कहानी (The story of a wise Lamb)

एक जंगल में एक मेमना और उसकी मां रहती थी। मेमना रोज अपने मां से बाहर जाने की जिद करती थी, परंतु उसकी मां उससे कहती थी, अभी तुम छोटी हो जब बड़ी हो जाओगी तब बाहर जाना मेमना का भी मन करता था कि वह बाहर जाकर जंगल मैं घूमे और सभी लोगों के साथ खेले। एक दिन जब उसकी मां भोजन की तलाश में बाहर गई हुई थी तो वह मेमना जंगल मैं खेलने के लिए निकल गई, जंगल में एक भेड़िया एक गड्ढे में गिर गया था ,और बहुत कोशिशों के बाद वह बाहर नहीं निकल सका, जब उसने उस मेमने की आवाज सुनी, तो उसने मेमने का आवाज बना कर बोला “भाई मेमना! मुझे बाहर निकालो मैं भी तुम्हारे जैसा ही एक मेमना ही हूं, मेमने का बच्चा कुछ देर खड़ा सोचता रहा फिर बोला आपका मुंह तो मेमने के जैसा नहीं लग रहा
भेड़िया बोला नहीं नहीं भाई !मैं आपके जैसा ही हूं और अचानक इस गड्ढे में गिर गया हूं, कृपा करके आप हमें बाहर निकाल दीजिए। मेमना बोला ठीक है मैं अपनी मां से पूछ कर आता हूं, तब तक आप यहीं रुको। यह सुनकर भेड़िया बहुत क्रोधित हुआ और उसने अपने मुंह को फ़ाड़ कर चिल्लाया, जिससे उसके बड़े बड़े दांत बाहर निकल आए, मेमने का बच्चा उस भेड़िए का भयानक चेहरा देखकर बहुत डर गया और तुरंत वहां से भाग कर अपने घर आ गया। उसने अपनी मां को सारी बात बताई। उसकी मां की आंखों में आंसू आ गए और उसने अपने बच्चे को गले से लगा लिया। इस तरह समझदारी की वजह से उसकी जान बच गई।
कहानी की सीख-इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपने समझ बूझ के बल पर काम करना चाहिए इस संसार में अनेकों धोखेबाज फरेबी इंसान हैं। जो सिर्फ दिखने में इंसान हैं परंतु वह जानवरों से भी ज्यादा खतरनाक होते हैं।

9- घमंडी मुर्गे की कहानी (The story of a praud cock)

एक गांव में एक मुर्गा रहता था। वह मुर्गा बहुत ही घमंडी स्वभाव का था। वह जब भी सुबह होता था तो कुकुरुकू का आवाज निकालता था, और सभी लोग उठ जाते थे और अपने अपने कार्य पर लग जाते थे। एक दिन उसके मन में विचार आया कि हमारे बोलने के द्वारा ही सब लोग उठ कर अपना कार्य करते हैं। अतः एक दिन उसने सोचा कि हम आज सुबह नहीं बोलेंगे जिसके कारण सभी लोग नहीं उठ पाएंगे और कार्य भी नहीं कर पाएंगे। सुबह हुई तो सभी लोग उठ कर अपना अपना कार्य करने लग गए, मुर्गा बहुत लज्जित हुआ, वह समझ चुका था कि हमारे बोलने या ना बोलने से इस संसार को कोई फर्क नहीं पड़ता।
इस कहानी के द्वारा हमें यह सीख मिलती है कि यदि हम अहंकार में आकर किसी की मदद ना करें तो हमारे बगैर किसी का कार्य नहीं रुकता। अतः हमें इस बात का अहंकार कभी नहीं करना चाहिए कि यदि मैं इसकी मदद नहीं करूंगा तो कोई नहीं करेगा।

10-एक पंडित जी की कहानी (The story of a panditji)

एक गांव में एक पंडित जी रहा करते थे। उनके साथ उनकी पत्नी और बच्चे भी थे। वह काम है लोगों के यहां कथा बांचकर जो भी धन एकत्र होता था उससे अपना जीवन यापन करते थे। वे जहां भी अपना कथा कहने के लिए जाते थे तो कथा के बीच में कद्दू की बुराई करने लग जाते, उनकी बातों पर लोग अमल भी करते थे, मैं अपनी कथा में बताते थे कद्दू की सब्जी कभी भी नहीं खाना चाहिए इनको खाने से अनेक बीमारियों का जन्म होता है ,तथा इन्हें खाना वेद शास्त्रों में एक अपराध माना गया है। दूसरे दिन सभी लोग कद्दू ले जाकर पंडित जी के यहां दे आते हैं। पंडित जी बहुत प्रसन्न होते हैं। यह देखकर उनकी पत्नी ने कहा, आप खुद तो कद्दू की सब्जी इतना ज्यादा पसंद करते हो, और पूरे गांव भर के लोगों को कद्दू खाने से मना करते हो, ऐसा क्यों? पंडित जी बोले “अरे मूर्ख! हमें कद्दू पसंद है तभी तो हम सभी लोगों को मना करते हैं, जिससे सभी लोग अपने घर का कद्दू हमें दान कर दें।

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