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दीपावली पर निबंध – Diwali Essay In Hindi.rstbox

 दीपावली पर निबंध – Diwali Essay In Hindi.rstbox

नमस्कार दोस्तों कैसे हैं आप लोग हमारे वेबसाइट पर आप लोगों का बहुत-बहुत स्वागत है। आज भारत में सबसे ज्यादा मनाए जाने वाले एक ऐसा त्यौहार के बारे में बात करने वाले हैं जिसका इंतजार प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिवर्ष 2 महीना पहले से ही होता है। इसका नाम है दीपावली। अतः आज मैं दीपावली पर निबंध diwali essay in hindi लिख रहा हूं। यदि आप छात्र हैं तो यह आर्टिकल आपकी बहुत ज्यादा काम आने वाली है। क्योंकि परीक्षाओं में दीपावली पर निबंध अधिकतर आने वाला प्रश्न है। आता बिल्कुल भी ßkip ना करते हुए हमारे पोस्ट को ध्यान से पढ़ें क्योंकि आज के हमारे पोस्ट में दीपावली से जुड़े हुए अनेक प्रश्न जैसे दीपावली का त्यौहार क्यों मनाया जाता है? दीपावली के त्यौहार में कौन-कौन सी तैयारियां करनी होती है? दीपावली के त्यौहार में लगभग कितने रुपए तक का खर्चा हो जाता है? इत्यादि तमाम ऐसे प्रश्न है जो आप लोगों के मन में उठ रहे होंगे अतः आप अपने सभी प्रश्नों के उत्तर इस पोस्ट में पा सकते हैं।

प्रस्तावना introduction

भारत को त्योहारों का देश कहा जाता है। भारत में बारह महीने कोई न कोई उत्सव ,पर्व,त्योहार, होते रहते है कभी बैसाखी के मेले,होली,दशहरा,मकर,संक्रांति,लोहड़ी, क्रिसमस, जन्माष्टमी, ईद,मोहर्म आदि बहुत से त्योहार मनाए जाते है, उनमें से ही एक है दीपावली।दीपावली हिंदू धर्म का सबसे बड़ा त्योहार है इस त्यौहार में हिंदू ही नही बल्कि सभी धर्मो के लोग बढ़ चढ़ कर भाग लेते हैं और यहां तक कि अब तो foreign country में भी दीपावली त्योहार को खूब धूम धाम से मनाया जाता है दीपाली का त्योहार कार्तिक मास के अमावस्या तिथिि को मनाया जाता है। दीपावली का इंतजार सभी लोगों को दो महीनाा पहले से ही होताा है क्योंकिि दीपावली के दिन अनेक प्रकार की मिठाईयां बांटी जाती है। मिठाइयोंं का नाम सुनकर आप के भी मुुह में पानी आ रहा होगा क्योंकि भारत में कोई सा भीीी त्यौहार हो सभीीी त्यौहार में मिठाइयों जरूर बाटी जाती है।
दीपावली के 5 दिन पहले ही साफ सफाई शुरू हो जाती है क्योंकि दीपावली साफ-सफाई और सजावट का त्यौहार है क्योंकि भगवान श्री राम के आगमन की तैयारी की जाती है तथा उस रात माता लक्ष्मी का भी पूजन होता है इसलिए दो-चार दिन पहले ही साफ सफाई और सजावट का कार्य प्रारंभ हो जाता है। दीपावली के दिन शाम को दिन ढलने के समय सभी लोग अपने अपने घरों में अनेक दीपों की पंक्तियां चलाते हैं तथा अनेक प्रकार की लाइटों के द्वारा अपने अपने घरों को सजाते हैं। तथा भगवान श्री राम के आने की खुशी में पटाखे भी फोड़ते हैं और भगवान श्री राम के आगमन का स्वागत करते हैं।

दीपावली क्यों मनाई जाती है dipawali kyon manae jaati hai

भारत में अनेक प्रकार के त्यौहार मनाए जाते हैं जिन में दीपावली एक मुख्य त्योहार के रूप में मनाया जाता है। दीपावली प्रतिवर्ष कार्तिक के महीने में यानी 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक कार्तिक होता है अतः इस महीने में अमावस्या तिथि को दीपावली मनाई जाती है। प्रत्येक त्यौहार मनाने का कोई न कोई कारण अवश्य होता है अतः दीपावली मनाए जाने का भी कोई न कोई कारण अवश्य है या शुद्ध अर्थों में आप यह कह सकते हैं कि दीपावली क्यों मनाई जाती है। जब भगवान श्री राम लक्ष्मण और उनकी धर्मपत्नी सीता वनवास का समय व्यतीत कर रहे थे उस समय रावण सीता जी का हरण कर लेता है और उसे अपने राज्य लंका उठा ले जाता है। और भगवान राम अपनी पत्नी को खोजते खोजते लंका तक पहुंच जाते हैं और रावण का वध करके सीता जी को रावण के बंधन से मुक्त कराते हैं। और विभीषण को लंका का राजा बनाने के पश्चात वे अपनी राज्य अयोध्या लौटने की तैयारी करते हैं और अयोध्या वासी अपने राजा रामचंद्र के अपने राज्य वापसी की खुशी में संपूर्ण अयोध्या को दीप के द्वारा दुल्हन की तरह सजा देते है। श्री रामचंद्र के स्वागत के लिए प्रत्येक घर में घी के दीए जलाए जाते हैं। तभी से भारत में दीपावली का प्रचलन हो गया है। तभी से प्रतिवर्ष भारत में कार्तिक महीने अमावस्या तिथि को दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है।

दीपावली में कौन कौन सी तैयारी की जाती है? Dipawali mein kaun kaun si taiyari ki jaati hai

दीपावली की तैयारी दीपावली से 15 दिन पहले ही शुरू हो जाती है सबसे पहले घर की साफ सफाई की जाती है लोग अपने घर को दोबारा रंग पेंट करने लगते हैं। और अपने घरों में तरह-तरह की रंग-बिरंगे लाइट लगाने लगते हैं लोगों का ऐसा मानना है कि घर जितना साफ रहेगा और जितना ही पवित्र रहेगा मां लक्ष्मी उसी के घर में निवास करती है। और उस घर को धन-धान्य और खुशियों से भर देती है दिवाली को जब 2 दिन बचता है तो घर में कुछ नया सामान मंगवाया जाता है। उस दिन को धनतेरस के नाम से भी जानते हैं दिवाली के दिन घर में एक अलग ही उत्साह रहता है।लोग अपने घरों में रंगोली बनाते हैं जो भगवान श्री राम के स्वागत के लिए और माता लक्ष्मी यानी सीता जी के लिए बनाया जाता है। अच्छे-अच्छे पकवान बनते हैं गुजिया पेड़ा रबड़ी पूरी जलेबी और शाम को घर के सब बूढ़े बुजुर्ग साथ में दीपक को प्रज्वलित करते हैं और छोटे बच्चे बड़ों से आशीर्वाद लेते हैं।

आधुनिक दीपावली modarn dipawali

उपयुक्त पोस्ट में आपने पढ़ा कि दीपावली का त्यौहार किस प्रकार मनाया जाता है और क्यों मनाया जाता है अतः आधुनिक युग में दीपावली किस प्रकार से मनाया जाता है यह आप लोग तो भली-भांति जानते ही होंगे। दीपावली का त्यौहार घी के दिए द्वारा घर को सुसज्जित किया जाता है परंतु आधुनिक युग में लोग दिए बहुत कम ही जलाते हैं अधिकतर चाइनीस लाइटों के द्वारा घर को सजाते हैं। और सिर्फ 1 दिन की दिवाली मैं बहुत लोग लगभग 50000 रुपए तक के पटाखे फोड़ डालते हैं। जिसके कारण प्रदूषण की समस्या उत्पन्न हो जाती है और लगभग 2 महीने या प्रदूषण समाप्त होने का नाम नहीं लेता है। आधुनिक युग की दीपावली में लोगों में श्रद्धा और प्रेम बहुत कम ही दिखाई देती है बल्कि लोगों में और दंगा आतिशबाजी और मनोरंजन का माहौल अधिक दिखाई देता है।आधुनिक दीपावली में बहुत लोग ईर्ष्या के कारण एक दूसरे
से किसी ना किसी बहाने लड़ाई भी कर लेते हैं। इसलिए आधुनिक युग में लोग दीपावली के त्यौहार को श्रद्धा और शांति भावना से ना मनाते हुए और दंगा और मनोरंजन की भावना से मनाते हैं जो पूर्णतया गलत है।

दीपावली से जुड़ी हुई सामाजिक कुरीतियां dipawali se Judi Hui samajik kuritiyan

प्रत्येक त्योहार के पीछे कोई ना कोई रहस्य अवश्य होता है अतः उस रहस्य को जानने के पश्चात हमारे समाज में दीपावली से जुड़ी हुई अनेक प्रकार की सामाजिक कुरीतियां व्याप्त है उन्हें जानना बहुत ही आवश्यक है।समाज में कुछ ऐसे कुरीतियों का प्रचलन है जो समाज को गर्त में ले कर जा रही है ऐसा माना जाता है कि दीपावली के दिन चोरी करने से यदि पकड़ा नहीं गया तो वह साल भर चोरी करेगा और पकड़ा नहीं जाएगा। और बहुत से लोग जादू टोना टोटका और कृत्य को जगाते हैं। बहुत लोग तो अपने घर का भी कार्य नहीं करते हैं और यह कहते हैं कि यदि इस दिन कार्य करेंगे तो संपूर्ण वर्ष कार्य करना पड़ेगा। दीपावली के दिन बहुत लोग जुआ भी खेलते हैं। और यह कुरीतियां बरसों से चली आ रही है यदि आप भी ऐसा कुछ करने की सोच रहे हैं तो यह एक भ्रम है और इस से ज्यादा कुछ नहीं यह कुरीतियां केवल समाज को डुबोने का कार्य करती हैं आप दीपावली हमेसा धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाये।

दीपावली पर शायरी Deepawali per shayry

दियो की रोशनी से सब 
अंधेरा दूर हो जाए
दुआ है जो खुशियां मांगों 
वह मंजूर हो जाए
Happy Deepawali
दीवाली हम भी मनाते है 
दीवाली तुम भी मनाते हो
हां फर्क सिर्फ इतना है
हम दिए जलाते है और तुम दिल जलाते हो
Happy Deepawali
दीपावली का ये पावन त्यौहार
जीवन में लाए खुशियां अपार
लक्ष्मी जी विराजे आपके द्वार
शुभकामनाएं करे हमारी स्वीकार
Happy Deepawali
दीप जलते रहें जगमगाते रहें
हम आपको आप हमे याद आते रहें
जब तक जिंदगी है दुआ है हमारी
आप चांद जी तरह जगमगाते रहें
Happy Deepawali
चूहा निकला बिल से ।
Happy Diwali दिल से।
कह दो अंधेरों से कहीं और घर बना लें
मेरे मुल्क में रौशनी का सैलाब आया है.
सुख के दीप जले, घर आंगन में खुशहाली हो,
बड़ों का आशीर्वाद और अपनों का प्यार मिले,
ऐसी आपकी मंगल दिवाली हो।
दीपावली की बहुत-बहुत बधाई।
गुल ने गुलशन से गुलफाम भेजा है,
सितारों ने गगन से पैगाम भेजा है,
मुबारक हो आपको ये दिवाली,
हमने तह दिल से ये पैगाम भेजा है।
याद आता है आपका दिलकश मुस्कुराना,
कोई बात बुरी लगी हो तो दिल से मिटाना,
हम आपका इस दिवाली करेंगे इंतज़ार,
आकर बस एक दिया मेरे साथ भी जलाना।

दीपावली के त्योहार में कितने रुपए का खर्चा आता है।How much does the Diwali festival cost.

दीपावली एक ऐसा त्यौहार है जिसमें पैसे खर्च का कोई लिमिट नहीं रखा गया है। अतः प्रत्येक व्यक्ति अपने सामर्थ्य के अनुसार खर्चा करता है एक गरीब व्यक्ति की दिवाली ₹100 में भी हो जाती है। तथा अमीर व्यक्ति की दिवाली मैं 40 से ₹50000 तक की खर्च हो जाते हैं। इसलिए निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि दीपावली के त्यौहार में कितने रुपए का खर्चा आता है। परंतु कुछ दिन पहले न्यूज़ चैनलों के द्वारा एक सर्वे किया गया था जिसके मुताबिक यह पता लगा था कि दीपावली के त्यौहार में एक मध्यम वर्ग का व्यक्ति लगभग 10,000 से ₹20000 तक खर्चा करता है।अतः स्पष्ट शब्दों में कहा जा सकता है कि दीपावली के त्यौहार में अपने क्षमता के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति करता है।

दीवाली से जुड़े हुए त्यौहार festivals related to diwali

दीपावली का त्यौहार 5 दिन का त्यौहार होता है। दीपावली के साथ और भी अनेक त्यौहार जुड़े हुए होते हैं जो दीपावली को और भी रोचक और खूबसूरत बनाने मैं मदद करते हैं। दीपावली के त्यौहार में स्कूल और कॉलेज में 5 दिन की छुट्टी होती है। अतः दिवाली से जुड़े हुए कुछ त्योहार निम्नलिखित है।

1-धनतेरस dhanteras

धनतेरस दिवली से 2 दिन  पहले कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष त्रयोदशी को बड़ी श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है जाता है धनतेरस को महालक्ष्मी यमराज,कुबेर, और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती 
धनतेरस को मृत्यु के देवता यमराज का पूजन करने से और दीप दान देने से अकाल मृत्यु का संकट दूर हो जाता है। और व्यक्ति भय मुक्त होकर अपनी जिंदगी पूरे वर्ष हर्षोल्लास के साथ जीता है।धनत्रयोदशी के दिन समुंद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य हुआ था इसलिए  आज भी उसी अवसर पर धन त्रयोदशी या धनतेरस के नाम से मनाते आ रहे हैं।धनतेरस के दिन बर्तन खरीदना बहुत ही शुभ माना गया है आप बर्तन खरीद कर उसे खाली ना रखें उसमें पानी या कुछ तरल पदार्थ रख दे यह आपका भाग्य का प्रतिनिधित्व करता है जिससे यह साबित होता है कि आप हमेशा इसी तरह धन-धान्य  और खुसियों से अपने घर परिवार को भर कर रखेंगे। इस प्रकार से प्रत्येक व्यक्ति धनतेरस के दिन कुछ न कुछ अवश्य खरीदता है।

2- विश्वकर्मा पूजा vishwakarma pooja

विश्वकर्मा पूजा दीपावली की दूसरे दिन मनाया जाता है।देव शिल्पी विश्वकर्मा को सबसे प्राचीनतम वास्तुकार माना जाता है। भगवान विश्वकर्मा ने स्वर्ग,लंका,द्वारिका,और इंद्रपुरी जैसे अनेक चीजों का निर्माण किया है विश्वकर्मा पूजा कन्या संक्रांति के दिन प्रतिवर्ष मनाया जाता है विश्वकर्मा पूजा के दिन सभी कारखानों में विश्वकर्मा पूजा मनाया जाता है लोगो का मानना है की ऐसा करने से भगवान विश्वकर्मा उनका सब मनोकामना को पूर्ण करते है और कार्य में तरक्की मिलता है।सिविल इंजीनियर के क्षेत्र में विश्वकर्मा पूजा के दिन सब लोग अपने औजार हथियार और शस्त्र की पूजा करते हैं उनका ऐसा मानना है की औजार हथियार मशीन का पूजा करने से उनका कारोबार सालों साल चलता रहेगा। भगवान विश्वकर्मा का पूजा करने से सभी मनोकामना की पूर्ति होती है और बिजनेस कारखानों और अन्य मशीनरी कामों में तरक्की मिलती है।

3- भैयादूज bhaiyadooj

भैया दूज का त्यौहार दीपावली के 2 दिन बाद मनाया जाता है।भाई बहन के सबसे पवित्र रिश्तों को एक डोर में बांधने के लिए भयादूज त्योहार मनाया जाता है यह त्योहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। जिसमें बहन अपने भाई के दीर्घायु के लिए व्रत रखती है और पूजन करती है वहीं पर भाई भी अपनी बहन की रक्षा के लिए प्रण लेता है। और बहन को सामर्थ अनुसार भेंट भी देता है।

4- मंचिंता manchinta

मांचिंता एक अपनी मान्यता के अनुसार मनाया जाने वाला त्यौहार है। यह प्रत्येक स्थान पर नहीं मनाया जाता है। अतः हो सकता है आपने इसका नाम नहीं सुना होगा। परंतु उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में यह त्यौहार मनाया जाता है जिसमें प्रत्येक स्त्री व्रत रखती है तथा माता मंचिंटा का पूजन करती है। एक धार्मिक आस्था है जो बहुत समय पहले से चली आ रही है।

निष्कर्ष concluson

संपूर्ण पोस्ट पढ़ने के पश्चात यह निष्कर्ष निकलता है कि दीपावली का त्यौहार एक खुशियों का त्यौहार है। दीपावली के त्यौहार को प्रत्येक घर में दीपक जलाई जाती है। तथा अनेक प्रकार के लाइटों के द्वारा घर को प्रकाशित किया जाता है। दीपावली के दिन प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार नए कपड़े पहनता है तथा पटाखे भी फोड़ते हैं। दीपावली के त्यौहार का इंतजार प्रत्येक वर्ष सभी लोगों को लगभग 2 महीने पहले से ही होता है। दीपावली के दिन माता लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है और यह मान्यता है कि माता लक्ष्मी घर में प्रवेश करती हैं और उनकी स्वागत के लिए रंगोली बनाई जाती है। दीपावली का त्यौहार भगवान राम के आगमन के समय मनाई गई थी। तभी से भारत में प्रतिवर्ष दीवाली मनाई जाती है। दीवाली 5 दिन का त्यौहार होता है। जिसके साथ अनेक त्यौहार जुड़े हुए होते हैं। हमने इस पोस्ट में उन त्योहारों के बारे में भी पढा है।
Disclemer
हमने यह पोस्ट अपनी जानकारी और अध्ययन के मुताबिक लिखा है। इस पोस्ट में हमने छेत्र में प्रचलित रीत रिवाजों के बारे में भी लिखा है।अतः हो सकता है यह सभी सिस्टम या रिवाज आपके यहां ना प्रचलित हो।अतः आपके घर पर किस प्रकार की दीवाली मनाई जाती है हमें कॉमेंट बॉक्स में जरूर बताए।

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