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पंच तंत्र की कहानियां panch tantra ki kahaniyan

पंच तंत्र की कहानियां panch tantra ki kahaniyan

 जीवन में कई बार ऐसा होता है कि हम ऐसी परिस्थिति में फस जाते हैं।और हमें  उचित और अनुचित का बोध नहीं होता तब यही कहानियां हमें उस परिस्थिति से बाहर निकलने का मार्ग प्रशस्त करती है और मन में ज्ञान एवं जोश का संचार करती है। आज आप लोगों के समक्ष हम कुछ ऐसी ही कहानियां लेकर पेश हुए हैं जो हमारे जीवन में काफी मोटिवेशन का काम का काम करती है। अतः आज का आर्टिकल आप लोगों के लिए बहुत ही खास होने वाला है इसलिए ध्यान से पूरे पोस्ट को पढ़ें क्योंकि आज किए कहानियां आप लोगों के लाइफ में काफी बदलाव ला सकती हैं और यदि अपनी life में आप किसी भी परेशानी मैं हो तो उससे निकलने के लिए यह कहानियां आपकी काफी मदद करेंगी इसलिए इन कहानियों के माध्यम से आपको काफी motivation मिलने वाला है तो चलिए जान लेते हैं कि वह कहानियां कौन-कौन सी हैं। पांच कहानियां निम्नलिखित है।
  1. आहार का कुप्रभाव aahar ka Ku prabhav
  2. एकता में बल Ekta mein Bal
  3. बुद्धि का घमंड buddhi ka ghamand
  4. ईमानदारी का फल imandari ka fal
  5. लालच बुरी बला lalach buri Bala

1-आहार का कुप्रभाव (पंचतंत्र की कहानियां) aahar ka kuprabhav

एक समय की बात है एक नगर में एक भिखारी रहता था जो नित्य प्रति एक गृहस्थ के यहां से भिक्षा मांगता था और ग्रहणी उसे नित्य एक मुट्ठी चावल दे दिया करती थी एक दिन जब वह भिखारी भिक्षा मांगकर गली से वापस लौट रहा था तब उसने देखा कि उस ग्रहणी का ढाई साल का बच्चा गली में खेल रहा है उसके गले में सोने की चेन थी भिखारी के मन में लालच आ गया और वह बच्चे के गले से उस चेन को निकाल कर अपने घर चला गया घर जाकर वह सोचा कि कल प्रातकाल इस चैन को लेकर सुनार के पास जाऊंगा और अच्छे पैसे मिलेंगे यः सोच कर भिखारी ने उस चेन को एक ईंट के नीचे दबा कर सो गया सुबह उठकर सौंच से निवृत्त होकर जब उसने चेन को निकाला उसी समय उसका विचार बदल गया और सोचा वह हमारे अन्नदाता है यह चोरी करके बहुत गलत काम किया और तुरंत ही उस चैन को लेकर उस गृहस्थ के पास ले जा कर रोने लगा और बोलो हमें क्षमा कर दो मैंने बहुत गलत काम किया तुम्हारे बच्चे के गले से यह चैन चोरी किया है इस बात पर गृहणी बोली नहीं तुम चोर नहीं हो बल्कि उस चोर को बचाने की कोशिश कर रहे हो,वह बोला चोर मै ही हूं ग्रहणी ने आपने पति को बुलाया और पूछा ये चावल कहां से लाए थे पति बोला चावल मै एक चोर से खरीद कर लाया हूं सस्ते में दे रहा था तब ग्रहणी बोली यह इस चावल का ही दोष है जो तुम्हारे विचार को बदल दिया इतना कहकर चावल को फेंक दिया

सीख( moral)
अन्नाय से प्राप्त भोजन विचार को बदल देता है सात्विक भोजन से में अच्छे विचार उत्पन्न होते है चोरी, आहिंसा ,धोका ,आदि से कमाया धन  को मलीन कई देते है कहते है ना कि  जैसा खाओ आन्न वैसा रहे मन मतलब जैसा भोजन करोगे वैसा ही तुम्हारे मन में विचार उत्पन्न होंगे इसीलिए हमेशा किसी के दिए हो धन एवं भोजन को नहीं ग्रहण करना चाहिए।

2-एकता में बल (पंचतंत्र की कहानियां)Ekta mein Bal

एक जमींदार के पास चार पुत्र थे चारों आपस में झगड़े किया करते थे ।इस बात से जमीदार बहुत परेशान था ।और अपने  पुत्रों के भविष्य के बारे में सोचता रहता था जब जमीदार का अंतिम समय आया तब अपने चारों पुत्रों को बुलाकर उनसे कहते हुए बोला कि यह लकड़ी लो और एक-एक करके तोड़ो चारों पुत्र ने एक एक कर के प्रयास किया लेकिन वह लकड़ी को तोड नहीं पाए फिर जमीदार बोला कि चारो एक साथ मिलकर तोड़ो पुत्रों ने वैसा ही किया और लकड़ी टूट गया तब जमीदार समझाने लगा कि आग़र आपस में प्रेम भाव एवम् एकता के साथ रहोगे तो कोई भी कठिन कार्य आसानी से कर लोगे तुमको जीवन में कोई परास्त नहीं कर पाएगा उसी समय वे चारों भाई आपस मै प्रेम भाव से रहने लगे।
सीख (moral)
दोस्तो जीवन में कितनी भी मुसीबत क्यों हो लेकिन आपस में एकता है तो संसार कि कोई भी परिस्थिति का सामना करने में आप सफल रहोगे आपने परिजनों अपने परिवार से सदा प्रेम भाव एवम् एकता के साथ रहो
एकता में वो सकती है कि संसार में तुम्हे कोई नीचा नहीं दिखा सकता।

3-बुद्धि का घमंड (पंचतंत्र की कहानियां)buddhi ka ghamand

एक समय की बात है एक जंगल से चार विद्यार्थी गुजर रहे थे चारो काशी से शिक्षा ग्रहण करके आपने आपने घर को जा रहे थे रास्ते में उन्हें एक शेर का कंकाल दिखाई दिया चारो मित्र ने कहा क्यों ना हम इस कंकाल को आपने बुद्धि से शेर को जीवित कर दे इतना कहकर एक ने कंकाल का ढाचा तैयार किया दूसरे उस पर चमड़ा चढ़ाया तीसरा जैसे प्राण देने को आगे बढ़ा उसी समय चौथा मित्र बोला जो बुद्धि  तीनों से कमजोर था।
उसने कहा कि अगर शेर जीवित हो गया  तो हम लोग मारे जाएंगे लेकिन तीनों मित्र आपने बुद्धि के घमंड में उसकी बात ना सुनी  तो उसने कहा कि मैं इस पेड़ पर चढ़ जाता हूं फिर तुम इसे जीवित करना इतना कहकर वह पेड़ पर चढ़ गया  फिर तीसरे ने जैसे ही प्राण फूका वह शेर जीवित हो गया और हवा मेंअपनी पूंछ को लहराया और दहाड़ मारकर तीनों पर टूट पड़ा और मार डाला कुछ समय बाद जब शेर वहां से चला गया तब चौथा मित्र पेड़ से उतरकर अपने घर चला गया।
सीख( moral)
दोस्तो आपने बुद्धि, बल ,धन ,कभी घमंड नहीं करना चाहिए घमंड से ही मनुष्य का पतन होता है घमंड मतलब विनाश

4-ईमानदारी का फल (पंचतंत्र की कहानियां) imandari ka fal

 एक गांव में रामू नाम का आदमी रहता था जो रोज सुबह पास के जंगल में लकड़ियां काटने जाया करता था एक दिन वह एक नदी के किनारे लकड़ी काट रहा था तभी हाथ से छूटकर उसका कुल्हाड़ी अचानक नदी में गिर गया कुल्हाड़ी नदी में गिरने पर रामू को बहुत दुख हुआ और वह पेड़ के नीचे बैठकर रोने लगा तभी वहां पर नदी के देवता प्रकट हो गया और उससे रोने का कारण पूछा तब रामू बोला हे देवता मै लकड़ी काट रहा था ।आचनक मेरे हाथ से कुल्हाड़ी छूट गया अब मै लकड़ियां कैसे काट लूंगा रामू की बात सुनकर जल के देवता ने कहा मैं अभी तुम्हारी कुल्हाड़ी ला कर देता हूं इतना कह कर पानी के देवता पानी में अंतर्धान हो गए और कुछ देर बाद पानी के बाहर सोने की कुल्हाड़ी लेकर प्रकट हो और रामू से कहा कि यह तुम्हारी कुल्हाड़ी रामू ने कुल्हाड़ी को देखा और बोला नहीं यह मेरी कुल्हाड़ी नहीं है।जल के देवता फिर पानी में अंतर्ध्यान हो गए और इस बार एक चांदी की कुल्हाड़ी लेकर प्रकट हुए और रामू से कहा यह तुम्हारी कुल्हाड़ी है रामू कुल्हाड़ी को देखा और बोला यह मेरी कुल्हाड़ी नहीं है फिर जल के देवता पानी में अंतर्धान हो गए इस बार एक लोहे की कुल्हाड़ी लेकर प्रकट हुए लोहे की कुल्हाड़ी देख कर खुशी से झूमने लगा और बोला यही है मेरी कुल्हाड़ी जल के देवता रामू की ईमानदारी देखकर बहुत खुश हुए और रामू को तीनों कुल्हाड़ी दे दिया और रामू तीनों कुल्हाड़ी लेकर खुशी खुशी आपने गांव वापस आ गया
सीख( moral)
यह कहानी ईमानदारी की बहुत बड़ी सीख देती है इमानदारी मनुष्य के स्वभाव एवं चरित्र में चार चांद लगाती है जो भी अपना काम ईमानदारी से करता है वह जीवन में कभी हताश और निराश नहीं होता है 

5-लालच बुरी बला (पंचतंत्र की कहानियां)lalach buri Bala

एक गांव में चार मित्र रहते थे चारों बहुत गरीब थे वे सोचते रहते थे कि हम ही गरीब क्यों और मेरे साथ के लोग तो बहुत अमीर है धन कमाने के चक्कर में चारो शहर की तरफ निकल पड़े शहर का रास्ता जंगल से होकर जाता था  वे चारो जंगल से होकर जा रहे थे जंगल का रास्ता काफी लंबा था इस लिए उन चारों को जंगल में ही रात हो गया वे लोग जंगल में रात बिताने के लिए जगह ढूंढने लगे कुछ देर बाद एक साधू का कुटी देखा दिया वे लोग जाकर साधू से बोले बाबा हमें आज रात रुकना है हम जंगल में रास्ता भटक गए है  साधु बाबा ने उन चारों के लिए रुकने का प्रबंध किया ।सुबह हुई तो वो लोग जाने लगे 
साधू बाबा ने पूछा कहां जा रहे हो और क्या करने जा रहे हो उन चोरों ने कहा कि बाबा हम लोग बहुत निर्धन हैं और धन कमाने के लिए शहर में जा रहे है साधु बाबा को इस बात पर दया आ गई और उन चारो को एक एक पत्थर दिया और कहा कि तुम इस पहाड़ी पर जाओ और जहां इस पत्थर को फेकोगे वहीं पर खजाना तुमको मिलेगा चारों ने उस पत्थर को लेकर पहाड़ी की तरफ चले गए एक ने एक जगह पर पत्थर फेंका वहां पर खोजा तो उन्हें वहां पर कंसा मिला पहला वाला मित्र बोला हमें लगता है कि आप पर्याप्त धन हो गया है इसलिए मैं वापस चला जाता हूं ।तीनों बोलो तुम जाओ हम और आगे जाएंगे आगे चलकर दूसरे ने पत्थर फेंका तो वहां पर चांदी निकला चांदी   दूसरा मित्र बोला कि मेरे लिए पर्याप्त धन है मैं अब वापस जाऊंगा सो कहकर वह भी चला गया।  दोनों मित्र बोले यहां चांदी निकला है आगे सोना निकलेगा आगे जाकर देखते है ।कुछ दूर जाने के बाद तीसरा मित्र ने अपना पत्थर फेंका तो वहां पर सोना निकला तीसरा मित्र बोला कि अब हमारे पास पर्याप्त धन हो गया है हमें लगता है कि हमें वापस जाना चाहिए इस बात को सुनकर चौथा मित्र बोला तुम वापस जाओ मैं और आगे जाऊंगा हो सकता है आगे सोना के जगह पर हीरा मिले इतना कहकर चौथा मित्र पहाड़ी की ओर चल दिया चलते चलते हुए वह एक गुफा में पहुंच गया वहां देखा कि एक आदमी के ऊपर एक चक्र घूम रहा है और उसका पूरा शरीर खून से लथपथ है उसकी दुरदसा देखने जैसे है आगे बढ़ा वह चक्र इसके सर के ऊपर घूमने लगा तब वह खून से लथपथ आदमी बोला कि इसी तरह में भी लालच वस इस खूनी पहाड़ी तक आया था और यहां आकर फैंस गया था लेकिन आज मै मुक्त हूं जब कोई व्यक्ति लालच वस इस पहाड़ी पर आएगा तब तुम इस चक्र से मुक्त होंगे इतना कहकर वह चला गया  और यह दुख के कारण फूट फूट कर रोने लगा
सीख( moral)
दोस्तो लालच बुरी बला है इससे मनुष्य कि दुर्गती निश्चित है में लालच आ जाने पर वन उचित और अनुचित का विचार नहीं कर पाता और लालच वस ऐसे कर्म को कर बैठता है फिर अपने जीवन में केवल पछताता है 

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