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पर्यावरण की परिभाषा तथा निबंध paryavaran ki paribhasha tatha nibandh

 पर्यावरण की परिभाषा तथा निबंध paryavaran ki paribhasha tatha nibandh

नमस्कार दोस्तों हमारे वेबसाइट पर आप लोगों को बहुत-बहुत स्वागत है आज के इस पोस्ट में आप लोगों के सामने हम स्टूडेंट के काम की आर्टिकल लेकर पेश हैं क्योंकि 10वीं और 12वीं क्लास में पर्यावरण की परिभाषा और पर्यावरण पर निबंध अक्सर exam में आ जाता है इसलिए यदि आप पढ़ाई कर रहे हैं तो आपके लिए यह पोस्ट बहुत ही बहुत ही इंपॉर्टेंट हैं। पर्यावरण किसे कहते हैं, पर्यावरण का अर्थ क्या होता है ,तथा यह प्रदूषित कैसे हो जाता है ,और इसे दूर करने के लिए हमें क्या क्या उपाय करनी चाहिए, पर्यावरण प्रदूषण कितने प्रकार के होते हैं आदि तमाम प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए हमारे पोस्ट पर बने रहें और पोस्ट को पूरा पढ़ें। पर्यावरण दो शब्दों से मिलकर बना है परि+आवरण = पर्यावरण परी का अर्थ है चारों ओर से और आवरण का अर्थ है ढका हुआ अर्थात जो हमारे चारों ओर से ढका हुआ है उसे हम पर्यावरण कहते हैं। पर्यावरण शब्द का अर्थ एक विस्तृत अर्थ है । पर्यावरण के अंतर्गत हमारा समस्त भूमंडल आता है अर्थात झरने नदियां, पहाड़ ,पेड़ ,पौधे ,वनस्पति जहां हम निवास करते हैं अतः संपूर्ण जगत में जो कुछ भी दिखाई दे रहा है उसे पर्यावरण कहते हैं।

पर्यावरण की परिभाषा definition of environment

पर्यावरण का अर्थ इन भौतिक तथा भौतिक वस्तुओं से है जो प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं अथवा हमारे जीवन से संबंधित होते हैं।”
पर्यावरण शब्द का अर्थ हमारे समक्ष तथा परोक्ष रूप में जो कुछ भी विद्यमान है जैसे जीव, जंतु के कीड़े मकोड़े समस्त वनस्पति झरने, नदियां पहाड़ इत्यादि को पर्यावरण कहा जाता है।
बहुत लोग पर्यावरण शब्द को सिर्फ प्रदूषण के माध्यम से ही जानते हैं परंतु पर्यावरण शब्द का अर्थ विस्तृत होता है जिसे हम संपूर्ण जगत में जो कुछ भी हमें दिखाई देता है और जो कुछ हम नहीं देख पाते हैं परंतु हमारे जीवन से किसी ना किसी रूप में विद्यमान है उसे हम पर्यावरण कर सकते हैं।

हमारे जीवन में पर्यावरण का महत्व hamare Jeevan mein paryavaran ki mahatva

हमारे जीवन के लिए पर्यावरण बहुत ही आवश्यक है क्योंकि जब हमारा जन्म होता है तभी हम पर्यावरण में प्रवेश करते हैं और संपूर्ण जीवन पर्यावरण से संबंधित रहता है क्योंकि कोई भी प्राणी बिना पर्यावरण के जीवित नहीं रह सकता अर्थात इस संपूर्ण जगत में जो कुछ भी हमें दिखाई दे रहा है अथवा जो कुछ भी विद्दमान है उसे पर्यावरण कहते हैं इसलिए हमारे जीवन के लिए पर्यावरण अत्यंत महत्व रखता है। कोई भी जीव जंतु अथवा मनुष्य या प्राणी पेड़ पौधे जब तक पर्यावरण में अपना पैर नहीं रखता है तब तक उसका विकास संभव नहीं है अतः पर्यावरण हमारे जीवन के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। पता हमें अपने आसपास के पर्यावरण को स्वच्छ रखना चाहिए जिससे हमारा जीवन का विकास संपूर्ण ढंग से हो सके। क्योंकि हमें पर्यावरण से ही ऑक्सीजन पानी और अनाज तथा अन्य जीवन से संबंधित सभी पदार्थ प्राप्त होते हैं इसलिए पर्यावरण के बिना जीवन असंभव है सामान्य शब्दों में हम यह कह सकते हैं कि यदि पर्यावरण नहीं तो जीवन नहीं।

पर्यावरण की रक्षा कैसे करें paryavaran ki raksha kaise

हमें अपना जीवन जीने के लिए पर्यावरण की अत्यंत आवश्यकता होती है इसलिए इस पर्यावरण को साफ और सुरक्षित रखना हमारी पूर्ण जिम्मेदारी होती है परंतु आधुनिक युग में स्वार्थ बस लोग पर्यावरण को नष्ट करते रहते हैं। अतः हमें पर्यावरण को नष्ट होने से बचाने के लिए कुछ सावधानियों को ध्यान में रखना आवश्यक है क्योंकि लालच और स्वार्थ के बस में आकर हमें अपना पर्यावरण नष्ट करना बहुत भारी पड़ सकता है अभी जल्द ही आप लोगों ने देखा होगा दिल्ली में ऑक्सीजन की किस तरह से किल्लत हुई है कोरोना महामारी में जगह-जगह ऑक्सीजन के लिए भारी किल्लत हो रही थी क्योंकि हम स्वार्थ में आकर प्राकृतिक वस्तुओं का विनाश कर रहे हैं। और यह विनाश मनुष्यों के लिए अत्यंत घातक सिद्ध होता है। अतः हमें अपने पर्यावरण की किस प्रकार रक्षा करनी चाहिए जिससे हमारा जीवन स्वस्थ और सुरक्षित बन सके।
  • हमें वृक्षारोपण करना चाहिए जिससे हमें पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिल सके।
  • वन कटाई पर सरकार को रोक लगाना चाहिए तथा पेड़ की कटाई पर नए कानून लाना चाहिए।
  • हमें पानी का miss use नहीं करना चाहिए क्योंकि पानी हमारे लिए बहुत ही आवश्यक है हमें 2 दिन भोजन ना मिले तो हम जीवित रह सकते हैं परंतु यदि 2 घंटे पाई ना मिले तो हम जीवित नहीं रह सकते हैं अतः हमें सिर्फ जरूरत भर का ही पानी का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • मिट्टी की खुदाई हमारे प्रकृति के लिए बहुत ही हानिकारक है इसलिए हमें मिट्टी की खुदाई पर रोक लगाना आवश्यक है जिससे खेतों की मात्रा कम ना हो और हमें फसल तथा खाने के लिए अनाज पर्याप्त मात्रा में मिल सके।
  • हमारे जीवन के लिए ओक्सीजन अत्यंत आवश्यक है।

पर्यावरण के प्रकार types of environment

हमारे ऊपर की पोस्ट में आप लोगों ने यह अच्छी तरह से समझ लिया हुआ कि पर्यावरण किसे कहते हैं परंतु और अच्छी तरह से समझने के लिए हमें यह जानना बहुत ही आवश्यक है कि पर्यावरण को कितने भागों में विभक्त किया गया है।पर्यावरण को मुख्यतः तीन भागों में विभक्त किया गया है।
1-प्राकृतिक पर्यावरण इसके अंतर्गत हमारे जीवन से जो प्रत्यक्ष रूप से संबंधित होती हैं उन सभी वस्तुओं को सम्मिलित किया गया है। प्राकृतिक पर्यावरण के अंतर्गत जल ,वायु, पहाड़ नदियां, झरने, रितु तथा मनुष्य जीवन में प्रतिदिन काम आने वाली वस्तुएं को सम्मिलित किया गया है जो प्रकृति ने प्रदत्त किया है।
2-जैविक पर्यावरण इस पर्यावरण के अंतर्गत हमारे आसपास रहने वाले सभी जीव जंतु एवं मनुष्यों को सम्मिलित किया गया है। अर्थात हमारे आस पास जो भी जीव जंतु कीड़े मकोड़े मनुष्य पशु पक्षी इत्यादि जो भी दिखाई पढ़ते हैं उन्हें जैविक पर्यावरण कहा जाता है।
3-सामाजिक पर्यावरण हम समाज में रहते हैं इसलिए हमारा समाज से बहुत ही घनिष्ट संबंध है क्योंकि कोई भी मनुष्य बिना समाज की जीवित नहीं रह सकता अथवा कोई भी जीव अपने समाज के बिना जीवित रहना असंभव है। सामाजिक पर्यावरण मैं हमारी संस्कृति समाज के रीति रिवाज संस्थाएं संबंध रिश्तेदारी नातेदारी आदि को सम्मिलित किया जाता है।

पर्यावरण प्रदूषण क्या है what is the inronmention pollution

पर्यावरण हमारे जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है इसलिए पर्यावरण का स्वच्छ होना अत्यंत आवश्यक है परंतु कभी-कभी कुछ कारणों की वजह से यह प्रदूषित हो जाता है जिसे हम पर्यावरण प्रदूषण कहते हैं। जब पर्यावरण प्रदूषित हो जाता है तो हमारा जीवन जीना असंभव होने लग जाता है हमारा शरीर तथा पशु पक्षी और पेड़ पौधों के लिए पर्यावरण का प्रदूषित होना अत्यंत घातक होता है। जब किसी पदार्थों का स्तेमाल करके जगह बेजगह फेक दिया जाता है। तो उससे पर्यावरण प्रदूषित हो जाता है। पर्यावरण को प्रदूषित करने मैं मनुष्य की अहम भूमिका होती है क्योंकि मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए प्राकृतिक वस्तुओं का इस्तेमाल करके उनके अवशेषों को उचित जगह पर ना फेंककर अनुचित जगह पर फेंक देते हैं जिसके कारण पर्यावरण में प्रदूषण फैल जाता है और उसके आसपास रहने वाले लोगों के शरीर में यह प्रदूषण नाक कान मुंह के माध्यम से चला जाता है।

पर्यावरण प्रदूषण के प्रकार types of environment pollution

जब किसी प्राकृतिक वस्तुओं का उपयोग उनके अवशेषों को जगह जगह फेक दिया जाता है तो ए कुछ दिनों बाद वे सड़ने लग जाते हैं और एक विषैले पदार्थ के रूप में परिवर्तित हो जाते हैं। या विषैले पदार्थ पर्यावरण  में घुल जाते हैं जिसके कारण पर्यावरण प्रदूषित हो जाता है। पर्यावरण प्रदूषण को मुख्यता चार भागों में बांटा गया है।
  • वायु प्रदूषण
  • जल प्रदूषण
  • ध्वनि प्रदूषण
  • मृदा प्रदूषण

1-वायुु प्रदूषण(air pollution)

दोस्तों वायु हमारे जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक होती है क्योंकि तुम्हारा जीवन सिर्फ वायु पर ही निर्भर है। परंतु जब वायु में जहरीली गैस से धुआं धूल और मिट्टी के कण इत्यादि मिश्रित हो जाते हैं तो वायु प्रदूषित हो जाती है तथा वह जीव जंतुओं मनुष्य पशु पक्षियों आदि के लिए हानिकारक सिद्ध होती है जिसे वायु प्रदूषण कहा जाता है।

वायु प्रदूषण के कारण (reason of air pollution)

  • वायु प्रदूषण धूल मिट्टी उड़ने से तथा फैक्ट्रियों से गंदा धुआ निकलने से फैलता है।
  •  लकड़ी और कोयले के जलने से निकलने वाला काला धुआं वायु प्रदूषण फैलने का कारण है। मोटर गाड़ियां की इंजन से पेट्रोल जलन के कारण निकलने वाला धुआं से वायु प्रदूषण फैलता है।
  • हमारे समाज में पेड़ों की कटाई अंधाधुंध चल रही है जिसके कारण निरंतर ऑक्सीजन में कमी होती जा रही है अतः पेड़ों की कटाई भी वायु प्रदूषण का मुख्य कारण है।
  • आधुनिक युग में बड़े बड़े घरों में ऑफिस में लगी हुई AC (air condition) हमारे वातावरण की वायु को प्रदूषित करता है ।
  • आधुनिक युग में उद्योग धंधों में वृद्धि के कारण बड़े पैमाने पर ज्वलनशील पदार्थों को और रसायन को जलाकर निर्माण कार्य संपन्न किया जाता है जिसके फलस्वरूप बड़े पैमाने पर धुआ फैलता है।

वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव (effect of air pollution)

  • वायु प्रदूषण के द्वारा मनुष्य के स्वास्थ्य में निरंतर गिरावट आती जाती है जिसके फलस्वरूप अनेक बीमारियों का जन्म होता है।
  • वायु प्रदूषण के द्वारा इंसान के अंदर खांसी जुखाम, टीवी , दमा नजला इत्यादि बीमारियां खेलने लग जाते हैं।
  • वायु प्रदूषण से सिर्फ मनुष्य ही नहीं अभी तो पेड़-पौधे ही नष्ट होने लग जाते हैं।
  • वायु प्रदूषण के फैलने से उस स्थान पर पशु पक्षियों आज की कमी देखने को मिलती है क्योंकि या तो वह भाग जाते हैं और या तो वे मर जाते हैं।
  • वायु प्रदूषण के द्वारा दिन में और रात में भी कोहरा छाया हुआ रहता है जिससे जहरीली गैस के कारण आंखों में जलन और पानी आना शुरू हो जाता है।

वायु प्रदूषण के रोकथाम केे उपाय(measures to prevent air pollution)

  • वायु प्रदूषण को रोकने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को एक ना एक पेड़ लगाना अत्यंत आवश्यक है जिससे वायु प्रदूषण में काफी गिरावट आएगी।
  • कंपनियों और फैक्ट्रियों का निकलने वाला चिमनी की ऊंचाई कम से कम 70 फीट के ऊपर होनी चाहिए जिससे धुआं हमारे वातावरण में फैले हुए ऑक्सीजन को नष्ट ना कर सके।
  • 70 फीट की ऊंचाई के ऊपर धुआ निकलने से पेड़ पौधे और पशु पक्षियों को भी हानी नहीं होगा।
  • वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए समय-समय पर प्रदूषण की जांच होना अत्यंत आवश्यक है जिसके कारण प्रदूषण वृद्धि होने पर कंपनियों और तमाम जहरीले बस और रसायनों का कारोबार बंद करके वायु प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके।
  • सबसे ज्यादा प्रदूषण शहरों में ही होता है क्योंकि यहां पर पेड़ पौधे कम और गाड़ियों की संख्या अधिक होती है जो निरंतर धूआ देती रहती है। अतः गाड़ियों को सीएनजी गैस के द्वारा ही चलाना चाहिए जिससे प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सके।

2-जल प्रदूषण (wather pollution)

दोस्तों जल हमारे जीवन में उपयोग होने वाली एक ऐसी वस्तु है जिसके बिना हमारा जीवन असंभव है आप कल्पना कर सकते हैं कि अगर यह जल प्रदूषित हो जाता है तो हमारे जीवन में कितनी परेशानियां आ सकती हैं। जल के बिना सिर्फ मानव जीवन ही नहीं अपितु पशु पक्षियों और पेड़-पौधों कीट पतंगों का भी जीवन संभव नहीं है। अतः जब जल में जहरीले घटक और गंदे कचड़े तथा अवशेष मिश्रित हो जाते हैं तो उसे जल प्रदूषण कहा जाता है।

जल प्रदूषण के कारण (reason of water pollution)

  • टॉयलेट की सफाई करके नदियों और तालाबों में विसर्जित कर दिया जाता है जिसके कारण जल प्रदूषण फैलता है।
  • कंपनी और फैक्ट्री से निकलने वाले अवशेष तथा गंदे पानी को नदियों और समुद्र में विसर्जित कर देते हैं जिसके कारण जल दूषित हो जाता है उसे जल प्रदूषण कहते हैं।
  • शहरों के बड़े-बड़े गंदे नालों का संपर्क नदियों में कर दिया जाता है जिससे बड़े पैमाने पर गंदा पानी नदियों में विसर्जित हो जाता है और जल प्रदूषण फैल जाता है।
  • तमाम मनुष्य और पशुओं के लाश को पानी में फेक देने से जल प्रदूषित हो जाता है ।
  • जल में तमाम कीटनाशक दवाइयों को मिलाने से जल भी जहरीला हो जाता है जिसे वायु प्रदूषण कहते हैं।

जल प्रदूषण के दुष्प्रभाव (effect of water pollution)

  • जल प्रदूषण के द्वारा व्यक्तियों में हैजा, उल्टी दस्त पेट दर्द गैस्टिक प्रॉब्लम इत्यादि भयानक बीमारियां जन्म लेती हैं।
  • जब जल प्रदूषित हो जाता है तो सिंचाई करने के बाद उस प्रदूषित जल का असर अनाज पर भी होता है जिसको खाने से लोगों के अंदर टाइफाइड हैजा इत्यादि बीमारियां व्याप्त हो जाती हैं।
  • जल प्रदूषण होने पर पीने की पानी की कमी होने लग जाती है क्योंकि प्रदूषित जल जमीन पर काफी गहराई तक सोख लेता है जिससे पीने की पानी भी प्रदूषित हो जाता है और उससे ज्यादा गहराई की पानी पीने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
  • जल प्रदूषण होने पर पेड़ पौधे अपने आप सूखने लग जाते हैं और जो नहीं सूखते हैं वह फल फूल देना बंद कर देते हैं।
  • प्रदूषित जल पीने से हमारे पालतू जानवर जैसे भेड़ बकरी गाय भैंस मुर्गी इत्यादि बीमार होने लग जाते हैं और असमय ही उनकी मृत्यु हो जाती है।
  • प्रदूषित जल में रहने वाली मछलियां को खाने से मनुष्य बीमार होने लग जाता है।

जल प्रदूषण को रोकनेेे के उपाय(measures to prevent water pollution)

  • जल प्रदूषण को रोकने के लिए हमें कचरे को एक निश्चित स्थान पर ही फेंकना चाहिए।
  • गंदे पानी और मल मूत्र को नदी नालों में ना फेंककर किसी गड्डे में विसर्जत करना चाहिए।
  • मनुष्य और जानवर के लाशों को पानी में नहीं देखना चाहिए अपितु उन्हें एक निश्चित स्थान पर लकड़ियों के द्वारा जला देना चाहिए।
  • जल को प्रदूषित होने से रोकने के लिए फैक्ट्रियों का गंदा पानी एक निश्चत स्थान पर शहर से बाहर गिराना चाहिए।

ध्वनि प्रदूषण (noise pollution)

जब कोई ध्वनि कानों की सहनशक्ति से ज्यादा हो जाती है तो उसे ध्वनि प्रदूषण कहते हैं ध्वनि प्रदूषण के बहुत हानियां हैं। ध्वनि प्रदूषण को नापने के लिए” डेसीबल” की आवश्यकता होती है।

ध्वनि प्रदूषण के कारण (reason of noise pollution)

  • ध्वनि प्रदूषण के मुख्य कारण विवाह शादी समारोह में तेज आवाज में बैंड बाजे अथवा डीजे का बजना।
  • बड़ी बड़ी गाडियों में लगी हुई तेज आवाज वाली हॉर्न का बजना।
  • बड़ी-बड़ी एंपलीफायर का अनियंत्रित वॉल्यूम करके बजाना।
  • फैक्ट्रियों में चलने वाली अत्यधिक धोनी वाली मशीनें।

ध्वनि प्रदूषण के दुष्प्रभाव (effect of noise pollution)

  • ध्वनि प्रदूषण के कारण बहरापन वह कानों में परेशानी उत्पन्न होती है।
  • ध्वनि प्रदूषण के कारण सिर और आंखों में दर्द रहता है।
  • ध्वनि प्रदूषण के कारण रक्तचाप (blood pressure) बीमारी उत्पन्न होती है।
  •  ध्वनि प्रदूषण के द्वारा हार्ड अटैक होने के कारण आकस्मिक मृत्यु हो जाती है।
  • ध्वनि प्रदूषण के कारण इंसान के अंदर चिड़चिड़ापन और क्रोध का स्वभाव उत्पन्न हो जाता है।

4-मृदा प्रदूषण soil pollution

आधुनिक युग में खेत की पैदावार बढ़ाने के लिए अनेक प्रकार के दवाओं तथा रासायनिक खादों का उपयोग किया जाता है जिसके कारण मृदा प्रदूषण फैलता है। मृदा प्रदूषण के कारण अनाज में अनेक प्रकार की बीमारियां व्याप्त हो जाती हैं तथा इस अनाज को खाने से मनुष्य की आयु घटती जाती है और लगभग 70 सालों में फिर मनुष्य जीवन समाप्त हो जाता है। मृदा प्रदूषण ऊंची नीची जमीन के कारण भू क्षरण होता है। जिससे मिट्टी कट कर एक जगह से दूसरी जगह चली जाती है और जमीन की ऊपरी परत पर जाने के कारण वह मिट्टी किसी काम की नहीं रह जाती है और उसमें अनाज की उपज नहीं हो पाती है।

Discllamer

इस पोस्ट का आशय सार्वजनिक जानकारी है। हम भी आप लोगों की तरह एक सामान्य व्यक्ति हैं। यह पोस्ट हमने अपने शिक्षा तथा ज्ञान के माध्यम से लिखा है इसलिए यह भी इस पोस्ट में कोई त्रुटि दिखाई देती है तो आप लोग कमेंट करके हमें बता सकते हैं मैं अपनी गलतियां सुधारने का प्रयत्न करूंगा।

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