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पहले महीने में गर्भपात के लक्षण pahle mahine mein garbhpat ke lakshan

 पहले महीने में गर्भपात के लक्षण pahle mahine mein garbhpat ke lakshan

नमस्कार दोस्तों ,आप लोग का हमारे वेबसाइट में बहुत-बहुत स्वागत है, मानव जीवन में विवाह का बहुत ही बड़ा महत्व है, क्योंकि अपने वंश के संचालन के लिए विवाह एक आवश्यक और पवित्र बंधन है, जिसके द्वारा पति पत्नी मिलकर संतान की उत्पत्ति करते हैं और अपने जीवन का परम लक्ष्य प्राप्त करते हैं। परंतु कभी-कभी कुछ कारणों की वजह से बच्चे की पेट में ही मौत हो जाती है जिसे   हिंदीी में गर्भपात अंग्रेजी में aborshan कहा जाता है गर्भपात का होना पति पत्नी के लिए बहुत ही दुखदाई घटना है। क्योंकि पुत्र को खो देने का दुख सबसे बड़ा दुख होता है। भगवान ना करे कि किसी के साथ ऐसी घटना घटे। कभी-कभी ऐसा होता है कि पहले महीने में ही गर्भपात हो जाता है, गर्भपात होने के समय क्या क्या लक्षण दिखाई देने लग जाते हैं ,और क्या क्या संकेत मिलने लग जाते हैं जिससे हमें पता लग सके की गर्भपात हो गया है। गर्भपात को रोकने के लिए हमें क्या-क्या उपाय करना चाहिए, डाइट में हमें क्या-क्या लेना आवश्यक है क्योंकि जब पेट में गर्भ रहता है तो स्त्री को डबल एनर्जी की आवश्यकता होती है इसलिए डाइट सबसे महत्वपूर्ण मायने रखता है क्योंकि आहार के द्वारा ही हमें विटामिंस प्रोटीन के द्वारा एनर्जी प्राप्त होता है इसलिए यह जानना बहुत ही आवश्यक है कि हमें प्रेगनेंसी के दौरान भोजन में क्या क्या खाना चाहिए और क्या क्या खाने का परहेज करना चाहिए। इन सभी प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए हमारे पोस्ट पर बने रहें क्योंकि आज के किस आर्टिकल में हम गर्भपात के बारे में आप लोगों को पूरी जानकारी देने वाले हैं। कभी-कभी कुछ कारणों की वजह से पहले महीने में ही गर्भपात हो जाता है ऐसी स्थिति में बहुत लोगों यह भी नहीं पता लगता है की उनके गर्भाशय में गर्भ था अथवा नहीं क्योंकि लगभग मासिक चक्र पूरा होने के पांच-छह दिन बाद हार्मोंस में बदलाव होने शुरू होते हैं इसके पश्चात ही  किट के द्वारा हमें पता लगा सकते हैं कि गर्भ है अथवा नहीं। इसलिए बहुत लोगों को यह भी नहीं पता लगता है कि उनका पहले महीने में ही गर्भपात हो गया है इसलिए मैं आप लोगों को कुछ ऐसे टिप्स बताने वाला हूं जिससे आप समझ जाएंगे कि आपका पहले महीने में ही गर्भपात हो गया है।
  • पेट के निचले हिस्से में अर्थात पेडू में असहनीय दर्द का होना।
  • पेट के निचले हिस्से में जलन का महसूस होना 
  • पहले मासिक धर्म की अपेक्षा कुछ अलग तरह का महसूस होना।
  • योनि से रक्त का बहना।
  • पेट के निचले भाग में दर्द का होना।

गर्भपात होने के कारण garbhpat hone ke Karan

गर्भपात का होना एक स्त्री के लिए बहुत ही दुखद घटना है अतः सभी स्त्रियों को यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि गर्भपात किस कारण से होता है क्योंकि गर्भपात को रोकने के लिए अर्थात गर्भ को नष्ट होने से बचाने के लिए यह जानने अत्यंत आवश्यक है। कि गर्भ के नष्ट होने की वजह क्या है। क्योंकि जब तक हम इसकी वजह का पता नहीं लगा सकते जब तक हम गर्भ के नष्ट होने से बचाने के लिए उसका सही उपाय अथवा सही उपचार नहीं कर सकते। अतः मैं आज आप लोगों को पूर्ण विस्तार से बताने वाला हूं कि गर्भपात किस वजह से होता है।

1-सही उम्र का ना होना

यदि लड़की की उम्र 18 साल से कम है तो उसे गर्भपात होने की संभावना अधिक होती है क्योंकि इस उम्र में गर्भ धारण करने से उसके बच्चेदानी की झिल्ली कमजोर होती है। और इस वजह से गर्भपात होने का खतरा अधिक रहता है। यदि महिला की उम्र 35 वर्ष से ऊपर है तो गर्भपात होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है क्योंकि इस उम्र में शरीर में bone density कम होने लग जाती है तथा मांसपेशियों में ढीलापन आ जाता है शरीर में रक्त बन्ना कम हो जाता है जिसके कारण इस उम्र में गर्भधारण करना खतरे से खाली नहीं जाता है इस उम्र में गर्भ धारण करना बच्चे तथा मां के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है। गर्भधारण करने के लिए सही उम्र 18 से 30 साल तक है क्योंकि इस उम्र में शरीर में मैं शरीर में खून और anargy की मात्रा काफी होती है जो गर्भधारण करने के बाद बच्चे की सेहत के लिए भी अच्छा होता है और मां के ऊपर भी ज्यादा कमजोरी का एहसास नहीं होता है।

2-खानपान का सही ढंग से ना होना

गर्भधारण करने के बाद स्त्री का सही खानपान का होना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि जब पेट में गर्व का विकास होने लग जाता है तो शुरुआत में वह रक्त का थक्का के जैसा होता है अतः उसे anargy की अत्यंत आवश्यकता होती है। गर्भधारण करने के लगभग 12 हफ्तों पश्चात स्त्री के शरीर में blud की कमी आ सकती है जिसके लिए सही डाइट का होना बहुत आवश्यक है। इस समय हमें dite में एनर्जी वाले खाद्य पदार्थ खाना चाहिए जिससे शरीर में  anargy की मात्रा तथा खून की मात्रा बनी रहे और जच्चा तथा बच्चा दोनों की सेहत पर कोई असर ना पड़े। खाद्य पदार्थ में हमें अधिकतर प्रोटीन और विटामिन वाले तथा कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ खाने चाहिए जो स्त्री तथा बच्चे के लिए लाभदायक होता है। परंतु कुछ लापरवाही की वजह से हमारे खान पान में कमी आ जाने से पर्याप्त एनर्जी ना मिल पाने के कारण बच्चा कमजोर हो जाता है। और उसकी पेट में ही मृत्यु हो जाती है जिसे गर्भपात कहा जाता है।

3-किसी गंभीर बीमारी का होना

गर्भधारण करने के लिए स्त्री का स्वस्थ होना आवश्यक है यदि स्त्री किसी भी रोग से ग्रसित है तो उसे गर्भधारण करना बच्चे तथा उसकी मां के लिए खतरे से खाली नहीं है। क्योंकि शरीर में रोग होने के कारण उसके शरीर में एनर्जी की मात्रा पर्याप्त नहीं हो पाती है जिसके कारण यह बच्चे पर भी असर डालता है और भ्रूण का विकास सही ढंग से नहीं हो पाता है जिसके कारण बच्चे का पेट में ही 10 या 12 हफ्तों बाद मृत्यु हो जाती है जिसे गर्भपात कहा जाता है। गर्भपात के लिए तमाम अन्य कारण है जिनके द्वारा गर्भपात हो जाता है ।
  • उल्टी-सीधी दवाइयां खाने से गर्भपात हो जाता है इसलिए प्रेगनेंसी के दौरान कोई भी दवाई खाने से पूर्व डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
  • ज्यादा तली भुनी चीजें या ज्यादा गर्म सामग्री खाने से गर्भपात हो सकता है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा भारी वजनदार सामान उठाने से भी गर्भपात हो सकता है।
  • पेट पर कोई आकस्मिक चोट लगने के कारण गर्भपात हो सकता है।
  • ना खाने योग्य चीजें खाने से गर्भपात हो सकता है। जैसे पपीता ,आम, शराब का सेवन, अंडा का सेवन तथा मीट मछली खाने से गर्भपात होने का खतरा ज्यादा होता है।
  • जब पेट में गर्भ 1 महीने का हो जाता है तब शारीरिक संबंध नहीं बनाना चाहिए क्योंकि इस दौरान सेक्स करने से बच्चेदानी पर जोर पड़ता है और भ्रूण कमजोर होने के कारण नष्ट होने की संभावना अधिक होती है ।
  • प्रेगनेंसी के दौरान ज्यादा चलने तथा दौड़ने से गर्भपात हो जाता।
  • ज्यादा hard exercise करने से गर्भपात हो सकता है।

गर्भपात के प्रकार types of abortion

गर्भपात का होना माता पिता पिता के लिए असहनीय घटना है। जो माता पिता के खुशियों पर पानी फेर देती है। इस दुख से निकल पाना बहुत मुश्किल होता है। ऊपर में बताए गए कारणों की वजह से गर्भपात हो जाता है गर्भपात कई प्रकार के होते हैं जिससे समझना बहुत आवश्यक है, यदि आप विवाहित जीवन व्यतीत कर रहे हैं तो आपके लिए यह पोस्ट अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकता है। हमारे पोस्ट में आज आप लोग को गर्भपात के बारे में पूरी जानकारी मिलेगी अतः पोस्ट को पूरा पढ़ें। गर्भपात कुछ इस प्रकार के होते हैं।
  • मिष्ड गर्भपात इस तरह के गर्भपात में मां को बिल्कुल भी पता नहीं लगता है कि उसका गर्भपात हुआ है क्योंकि यह बिना किसी लक्षण के अपने आप नष्ट हो जाते हैं। इसलिए इसे मिस्ट गर्भपात कहा जाता है।
  • अधूरा गर्भपात इस गर्भपात में पेट के निचले हिस्से में दर्द होता है व कुछ दिनों के बाद योनि से रक्त आने लग जाता है। परंतु रक्त के कुछ थक्के बच्चेदानी में रह जाते हैं जिसे अस्पताल में सफाई कराना पड़ता। अन्यथा यह बाद में अत्यंत दुखदाई और घातक सिद्ध हो सकते हैं।
  • पूर्ण गर्भपात पूर्ण गर्भपात में योनि से रक्त बहता रहता है तथा रक्त के थक्के भी बाहर आ जाते हैं और बच्चेदानी की पूर्ण रूप से सफाई हो जाती है इस गर्भपात में स्त्री को कोई खतरा नहीं रहता है क्योंकि बच्चेदानी पूरी तरह से खाली हो जाती है और वह अगले गर्भधारण के लिए कुछ दिन बाद उपयुक्त हो जाते हैं।
  • सेफ्टिक गर्भपात इस गर्भपात में गर्भ में संक्रमण हो जाने के कारण,गर्भ नष्ट हो जाते है तथा योनि के माध्यम से बाहर निकल जाते है।
  • अपरिहार्य गर्भपात इस गर्भपात में अधिक दिनों तक ब्लीडिंग होती रहती है क्योंकि भ्रूण का थोड़ा थोड़ा हिस्सा रक्त में परिवर्तित होकर थोड़ा थोड़ा योनि के जरिए बाहर निकलता रहता है।

गर्भपात के कितने दिन बाद संबंध बनाना चाहिए garbhpat ke kitne din bad sambandh banana chahie

जब स्त्री के पेट में घर में रहता है तो वह नन्ने मुन्ने बच्चे की आस में अनेक प्रकार के सपने देखती है परंतु कुछ कारणवश इन सपनों पर पानी फिर जाता है और गर्भपात हो जाता है बच्चे का 24 हफ्ते या उससे पहले मृत्यु हो जाना गर्भपात कहलाता है। परंतु गर्भपात के पश्चात ऐसा नहीं है कि आप बच्चे को जन्म नहीं दे सकती अथवा आपको बच्चे की प्राप्ति नहीं होगी परंतु इस समस्या से निकलने में थोड़ा समय लगता है। परंतु कुछ लोग जल्दबाजी करने लग जाते हैं और गर्भपात के तुरंत बाद बेबी प्लानिंग करना शुरू कर देते हो जो उन्हें फिर से निराशा में बदल देती है इसलिए गर्भपात के बाद बेबी प्लानिंग करने के लिए लगभग 2 महीने का समय लेना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि गर्भपात के बाद स्त्री का शरीर अत्यंत कमजोर हो जाता है उसके शरीर में रक्त की कमी आ जाती है इसलिए गर्भपात के पश्चात उसे प्रोटींस तथा फाइबर और विटामिन वाली खाद्य पदार्थ खान आवश्यक होता है। इसमें में उसे अपने पति का साथ अत्यंत आवश्यक होता है क्योंकि पति ही हैं जो इस समस्या और निराशा में उसे दिलासा दिलाने का काम करता है। यदि आप गर्भपात के बाद फिर से संबंध बनाना चाहते हैं तो कम से कम 2 महीने का समय अवश्य लेना चाहिए जिसके दौरान शरीर मैं भरपूर मात्रा में एनर्जी पर्याप्त हो सके।

गर्भपात के बाद घरेलू उपचार garbhpat ke bad gharelu upchar

  • गर्भपात में अत्यधिक रक्तस्राव होता है जिसके कारण शरीर में रक्त और एनर्जी की कमी आ जाती है, इस कमी को पूरा करने के लिए आज आपको कुछ घरेलू उपचार बताने वाले हैं जिसके द्वारा इस समस्या से निजात मिल सकती है। गर्भपात के बाद खानपान का विशेष ध्यान रखना पड़ता है इसलिए हमें fiver,nutriance तथा protin और calsiam वाले dite को ही चुनना चाहिए।
  • दूध में हल्दी तथा अदरक और गुड़ मिलाकर पीने से गर्भपात के बाद दर्द से काफी आराम मिलता है।
  • अधिकतर पत्तेदार सब्जियां खाना चाहिए परंतु सब्जियों में मिर्च और मसालों की मात्रा बहुत कम होनी चाहिए।
  • अनार का जूस प्रतिदिन पीना चाहिए क्योंकि गर्भपात के पश्चात रक्त की कमी आ जाती है जिससे अनार का जूस पीने से रक्त की मात्रा धीरे-धीरे पूरी हो जाती है।
  • गर्भपात के पश्चात होने वाले दर्द में आप ebrofen टैबलेट ले सकते हैं जो दर्द निवारक दवा है और इससे कोई नुकसान भी नहीं है।
  • गर्भपात होने के पश्चात दशमूलारिष्ट अवश्य पीना चाहिए। क्योंकि यह बच्चेदानी में खराब खून को शरीर से बाहर निकाल देता है।
  • गर्भपात के पश्चात नशीली दवाइयां अथवा शराब का सेवन नहीं करना चाहिए यह लीवर तथा बच्चेदानी के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
  • गर्भपात के पश्चात पनीर की सब्जी काफी फायदेमंद होती है तथा पालक पनीर खाने से शरीर में प्रोटीन की मात्रा और कैल्शियम की मात्रा पूरी हो जाती है।

कैसे पता करें गर्भपात पूरा हो गया है kaise pata Karen ki customer pura ho gaya hai

गर्भपात होने के पश्चात यह समस्या बनी रहती है कि यह निश्चित नहीं हो पाता है कि गर्भपात पूरी तरह से हो गया है अथवा नहीं। अतः किस तरह से पता करे कि गर्भपात पूरी तरह से हो गया है। क्योंकि गर्भपात का अधूरा होना भविष्य के लिए खतरा बन सकता है क्योंकि अधूरा गर्भपात होने से बच्चेदानी में infection हो सकता है और मां के लिए यह जानलेवा हो सकता है। अतः आप लोगों को कुछ इस तरह का लझन बताऊंगा जिससे आपको पता लग जाएगा कि गर्भपात अधूरा हुआ है अथवा पूर्ण रूप से हुआ है।
  • यदि का गर्भपात 12 सप्ताह के पहले होता है तो अधिकतर संभावना रहती है कि वह पूर्ण गर्भपात ही होगा क्योंकि 12 हप्तो के पहले भ्रूण बहुत ज्यादा विकसित नहीं हो पाता है इसलिए इस समय पर होने वाला गर्भपात पूर्ण गर्भपात ही होता है।
  • यदि योनि से भारी मात्रा में खून निकलता है तत्पश्चात रक्त का थक्का बाहर निकलता है तो आप समझ जाएगी की गर्भपात पूर्ण रूप से हो गया है।
  • गर्भपात होने के पश्चात अल्ट्रासाउंड कराना अत्यावश्यक है क्योंकि अल्ट्रासाउंड के द्वारा यह पता लगाया जा सकता है कि घर पर पूर्ण हुआ है उसके कुछ अंश बच्चेदानी में हैं।
  • यदि क गर्भपात के पश्चात आपके पेट के नीचे हिस्से में ऐठन और दर्द होता रहता है तो यह समझना चाहिए कि गर्भपात पूर्ण रूप से नहीं हुआ है इस स्थिति में हमें डॉक्टर की सलाह लेना अत्यंत आवश्यक होता है।

प्रेगनेंसी टेस्ट कैसे करें pregnancy test kaise karen

स्त्री का प्रेग्नेंट होना बहुत ही खुशी का मौका होता है। अतः प्रत्येक स्त्री यह जाने के लिए अत्यंत आवश्यक होती है गर्भ से है अथवा नहीं। अतः इसके लिए pregnancy test करना अत्यंत आवश्यक होता है यह टेस्ट आप घर बैठे कर सकते हैं। Pregnancy टेस्ट के लिए आपको मेडिकल स्टोर पर प्रेगनेंसी टेस्ट किट लाना अनिवार्य है। इसकी कीमत की बात करें तो यह ₹30 से ₹60 तक आता है। परंतु हर लोगों को इसके इस्तेमाल के बारे में सही जानकारी नहीं होती है इसलिए वह इसका सही उपयोग नहीं कर पाते हैं।इस आर्टिकल में मैं आप लोगों को इसी के बारे में बताने वाला हूं कि किस तरह से आपको प्रेगनेंसी टेस्ट करना है। प्रेगनेंसी टेस्ट करने के लिए सही समय का होना अत्यंत आवश्यक है। यह सही समय मासिक चक्र पूरा होने के 6 दिन पश्चात आता है। यदि इस से पहले आप प्रेगनेंसी टेस्ट करते हैं तो आपको सही रिजल्ट नहीं मिल पाएगा क्योंकि मासिक चक्र पूरा होने के पश्चात ही शरीर में हार्मोन स्रावित होते हैं। प्रेगनेंसी टेस्ट के लिए सुबह उठ कर पेशाब की बूंद को किट में लगाने के बाद लगभग 5 मिनट के लिए रख दें। 5 मिनट बाद यदि कििट में सिंगल लाइन दिखाई देती है तो आप प्रेग्नेंट नहीं है यदि किट में डबल लाइन दिखाई देती है तो बधाई हो आप इस समय प्रेग्नेंट है और आपके पेट में बच्चा है। इस तरह से आप प्रेगनेंसी का टेस्ट कर सकते हैं।

प्रेगनेंसी के दौरान हमें डाइट में क्या क्या लेना चाहिए pregnancy ke dauran hamen diet mein Kya Kya Lena chahie

जब पेट में गर्भ होता है उस समय हमें खानपान के ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक होता है। क्योंकि इस समय हमें डबल एनर्जी की आवश्यकता होती है। अतः हमें जानना बहुत ही आवश्यक होता है कि हमें प्रेगनेंसी के दौरान डाइट में कौन कौन से खाद्य पदार्थ लेने चाहिए। गर्भपात होने में 50 परसेंट भूमिका डाइट की होती है अतः प्रेग्नेंसी के समय हमें खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए आज क्या आर्टिकल में हम आप लोगों को यह बताने वाले हैं कि प्रेग्नेंसी के समय हमें कौन कौन से खाद्य पदार्थ खाने चाहिए और कौन-कौन से नहीं खाने चाहिए।
  • प्रेग्नेंसी के समय दूध प्रतिदिन पीना चाहिए क्योंकि दूध में पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम की मात्रा होती है जो बच्चे के सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है।
  • इस दौरान juis और fruit खाने चाहिए जिससे शरीर में एनर्जी बनी रहे।
  • अधिकतर soft खाद्य सामग्री खाना चाहिए। जैसे सूजी का हलवा चावल bread आदि।
  • प्रेगनेंसी के दौरान नारियल का पानी अवश्य पीना चाहिए परंतु ध्यान रहे अधिक नहीं पीना चाहिए क्योंकि नारियल का पानी अधिक पीने से बच्चे को निमोनिया होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • दूध में प्रोटीन को बढ़ाने वाला पाउडर मिलाकर पीना चाहिए इससे दूध के एनर्जी दोगुनी हो जाती है।
  • नहीं खाने वाले खाद्य पदार्थ
  • शराब का सेवन नशीली दवाइयां
  • पपीता नहीं खाना चाहिए
  • मनमर्जी दवाइयों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए डॉक्टर की सलाह के बाद ही दवाइयों का इस्तेमाल करें।
  • Fast food तथा oily खाना नहीं खाना चाहिए।
  • मीट मछली का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • ज्यादा तीखी तथा मसाले वाली वस्तुएं नहीं खानी चाहिए।

निष्कर्ष conclusion

संपूर्ण पोस्ट करने के पश्चात हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं की पहले महीने में गर्भपात का गर्भपात मिस्ट गर्भपात कहलाता है। जिसे बहुत कम लोगों को पता लगता है। गर्भपात होने पर पेट के निचले हिस्से में दर्द होना पीठ की रीड की हड्डी में दर्द होना योनि से रक्त बहना आदि शामिल है
गर्भपात होने के कुछ आकस्मिक कारण होते हैं जिनके लिए हमें सावधान रहने की जरूरत होती है। गर्भपात अलग-अलग तरह के होते हैं जिन्हें पांच रूप में देखा जाता है। प्रेगनेंसी के दौरान हमें एनर्जी वाले खाद्य पदार्थ खाने चाहिए जिसमें दूध पत्तेदार सब्जियों तथा जूस और फल शामिल करना चाहिए। प्रेगनेंसी के दौरान पपीता नशीली दवाइयां और शराब तथा हार्ड एक्सरसाइज करने से गर्भपात हो सकता है अतः इन्हें ध्यान में रखते हुए हमें सावधान रहने की जरूरत होती है। प्रेगनेंसी टेस्ट करने के लिए हमें प्रेगनेंसी टेस्ट किट की आवश्यकता होती है तभी हमें पूर्ण रूप से यह पता लग सकता है की प्रेग्नेंट है अथवा नहीं। वैसे तो प्रेग्नेंसी का पता लगाना बेहद आसान है परंतु यह पूर्ण रूप से कामयाब नहीं माना जाता है। जब मासिक चक्र पूरा होने के बाद भी मासिक धर्म ना आए तो यह मान लिया जाता है कि आप प्रेग्नेंट है परंतु कभी-कभी कुछ कारणों की वजह से भी मासिक धर्म नहीं आता है ऐसी परिस्थिति में जब तक प्रेगनेंसी टेस्ट किट के द्वारा कंफर्म करना अनिवार्य होता है।
Disclaimer
यह पोस्ट हमने सार्वजनिक जानकारी के लिए लिखी है हमारे पोस्ट में दिए गए कोई भी जानकारी का अथवा दवाइयों का उपयोग करने की जिम्मेदारी मैं नहीं लेता। यदि आप इन दवाओं और नुस्खों का इस्तेमाल अपनी मर्जी से करते हैं तो इसके जिम्मेदार आप स्वयं होंगे हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।

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