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भारत में महिलाओं की स्थिति और भूमिका(women situation in old time)

भारत में महिलाओं की भूमिका(role of women in India)

नमस्कार दोस्तों आप सभी का हमारे साइट पर स्वागत है दोस्तों आज हम आए हैं एक नए लेख के साथ मेरे साथियों अभी तक हमने अपने समाज में क्या-क्या होता है यह समझा और अब इस पोस्ट में हम महिलाओं अथवा नारियों के बारे में कुछ डिसकस करेंगे। दोस्तों महिलाएं भी हमारे समाज में रहकर हमारा आधा अंग होती हैं तो  भारत में महिलाओं की क्या भूमिका थी। तथा समाज में उनकी क्या मान्यता थी यह हम आपको बताने वाले हैं तो दोस्तों आप लोग हमारे साइट पर बने रहिए और हमारा पोस्ट पूरा पढ़िए जिससे आपको यह समझ में आ जाएगा कि आखिर प्राचीन काल में हमारे देश में स्त्रियों की क्या भूमिका थी और आज तक इन में क्या क्या बदलाव हुए हैं। तो दोस्तों आइए जानते है।

1-जीवनसाथी (partener)

हमारे समाज में महिला सर्वप्रथम जीवनसाथी का भूमिका निभाती है। जब हमारी उम्र 20 साल की हो जाती है तो एक लड़की से हमारी विवाह हो जाती है और वह लड़की दुल्हन बनकर हमारे घर में प्रवेश करती है और संपूर्ण जीवन हमारे साथ रहकर हमारे अमीरी गरीबी सुख दुख परेशानी मुसीबत और धार्मिक समारोह तथा सामाजिक समारोह में साथ साथ चलती है।

2-संतानोत्पत्ति (proliferation)

महिला अपने पति के साथ रहकर यौन इच्छाओं को पूर्ण करती है जिसके फल स्वरुप संतान की उत्पत्ति होती है। एक महिला ही है जो हमारे पीढ़ी को निरंतर बनाए रखने में मुख्य भूमिका निभाती है। संतानोत्पत्ति के द्वारा हमारे परिवार की व्यवस्था को बनाए रखती है। हरियाणा में सरकार के द्वारा बेटियों को बहुत ही प्रोत्साहन दिया गया है जिसके फलस्वरूप लड़कियों में वृद्धि दिखाई देने को मिला है।
बेटी नहीं बचाओगे तो बहू कहां से लाओगे”

3-बच्चों का समाजीकरण (socializetion of child)

एक स्त्री है जो बच्चों का लालन पालन करने में मुख्य भूमिका निभाती है पुरुष चाह कर भी बच्चों का पालन पोषण नहीं कर सकता अतः यह कार्य महिलाओं के द्वारा ही संभव हो पाता है। जब तक बच्चा 5 साल का नहीं हो जाता है तब तक उसका लालन-पालन बोलने का और बातचीत करने का तरीका आदि कार्य बच्चों के माता-पिता का ही होता है जिसमें माता की भूमिका अत्यधिक होती है क्योंकि पिता बच्चों के साथ हमेशा नहीं रह सकता क्योंकि उसे बच्चों के पालन पोषण के लिए धन ही करना होता है उसे घर से बाहर निकलना पड़ता है। परंतु माता बच्चों के साथ हमेशा रहती है जिसके कारण संपूर्ण जिम्मेदारी माता पर ही होती है।

4-अन्नपूर्णा (annapoorna)

महिला ही घर की देवी होती है जिसे अन्नपूर्णा के नाम से जाना जाता है। स्त्री ही हमारे भूख को शांत करने के लिए भोजन की व्यवस्था करती है। पुरुष भले ही पैसे कमा कर अनाज खरीद कर घर में रख देता है परंतु उसे खाने के लिए पकाने की जरूरत होती है। और यह कार्य महिलाओं के द्वारा पूर्ण किया जाता है। वह घर में रखे हुए जो भी अनाज और सब्जियां होती है उनको अच्छे से पका कर भोजन तैयार करती है और बड़े ही प्रेम पूर्वक घर के सभी लोगों को भोजन कराती है।

4-अन्य भूमिका (other roll)

आधुनिक युग की महिलाएं सिर्फ चूल्हे चौके तक ही सीमित नहीं है बल्कि आज के युग में महिलाएं राष्ट्रपति ,प्रधानमंत्री और समाज में अन्य सामाजिक कर्मों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आज के युग में महिलाएं प्लेन ,स्कूटर ,कार रेलगाड़ी इत्यादि सब कुछ चलाने में सक्षम है। महिलाएं आर्थिक क्षेत्र में भी काफी आगे देखने को मिलती है आज की लड़कियां शिक्षा ग्रहण करके डॉक्टर इंजीनियर वकील जज आज भूमिका भी निभाने में सक्षम है।

प्राचीन समय में महिलाओं की स्थिति (situation of women in old time)

प्राचीन समय में महिलाओं की स्थिति कुछ ठीक-ठाक थी। परंतु मध्यकाल में अनेक रीति-रिवाजों का प्रादुर्भाव हुआ जो महिलाओं के लिए बहुत घातक सिद्ध हुए। प्राचीन समय में महिलाओं की स्थिति कुछ इस प्रकार से थी।

पूर्ण स्वतंत्रता(full freedom)

 हमारे भारत में प्राचीन काल में स्त्रियों को पूर्ण स्वतंत्रता होती थी वह अपना मनचाहा वर सुनिश्चित कर सकती थी। दोस्तों आपने देखा होगा की प्राचीन काल में द्रोपती सीता आदि तमाम स्त्रियां थी जिन्हें उन्हें अपना वर चुनने की पूर्ण स्वतंत्रता दी जाती थी। प्राचीन काल में स्त्रियों को शस्त्र विद्या मैं भी पूर्ण स्वतंत्रता होती थी वह पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर रणभूमि में युद्ध करने निकल पड़ती थी। राजा रामचंद्र की सौतेली मा कैकेई भी ऐसी ही वीरांगना थी।

समाज में अस्तित्व(social value)

 स्त्रियों का पुराने काल में बहुत ही महत्व होता था। कोई भी निर्णय लेने से पहले पत्नी की भी इच्छा जाननी होती थी । इसके बाद ही कोई निर्णय लिया जा सकता था। जिससे इनका समाज में काफी अस्तित्व रहता था परंतु वक्त के साथ इनकी अस्तित्व में कमी आती गई।

घर की देवी(grah luxmi)

 प्राचीन काल में स्त्रियों को घर की देवी कहा जाता था। एक ग्रहणी पत्नी को ही घर की लक्ष्मी कहा जाता था अगर पत्नी चाहे तो घर को स्वर्ग बना सकती है और अगर चाहे तो नर्क भी बना सकती है अतः स्त्री ही एक ऐसी सदस्य है जो घर में अनाज दाल चावल इत्यादि को संभालना और खाना बनाना वह बच्चों का पालन पोषण करना इत्यादि कार्य होते थे। तथा खाना बनाकर सभी का भूख शांत करना इनका काम होता था इसलिए उन्हें घर की देवी कहा जाता था।
यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता
अर्थात जहां पर स्त्रियों की पूजा होती है वहां पर भगवान निवास करते हैं। अतः दोस्तों आप लोगों से हमारी यही विनती है की सभी लोग स्त्रियों का सम्मान करें और उन्हें किसी भी तरह प्रताड़ित ना करें ।

प्राचीन काल से अब तक महिलाओं में होने वाले कुछ प्रमुख बदलाव

 अभी तक हमने यह समझा की प्राचीन काल में हमारे समाज में स्त्रियों की क्या भूमिका तथा क्या स्थिति थी। दोस्तों प्राचीन काल से अब तक महिलाओं में क्या क्या परिवर्तन हुआ वा क्य क्या बदलाव हुआ है।
दोस्तों प्राचीन काल में नारियों की स्थिति काफी अच्छी थी परंतु मध्यकालीन युग में मुगलों के आगमन के बाद स्त्रियों की दशा धीरे-धीरे दयनीय होती चली गई जिसका वर्णन बहुत ही दुखद है परंतु आप लोगों को समझाने के लिए हमें यह वर्णन करना पड़ रहा है।
दोस्तों मुगलों के बाद धीरे धीरे स्त्रियों से उनके एक एक अधिकार छीनने लगे। लोग प्राचीन काल की बातों को भूल कर स्त्रियों को एक नीचे दृष्टि से देखने लग गए।

मध्यकाल में स्त्रियों की दयनीय दशा और उनके कुछ मुख्य कारण

 मध्यकाल में हमारे समाज में स्त्रियों की दशा बहुत दयनीय हो गई उन्हें घर की चारदीवारी में कैद होकर रहना पड़ता था। तथा तमाम कठिनाइयों झेलनी पड़ती थी।
इसका कारण है कुछ हमारे समाज की कुप्रथा है। जैसे दहेज प्रथा, बाल विवाह, विधवा विवाह निषेध, पर्दा प्रथा छुआछूत आदि है।दहेज प्रथा हमारे समाज की एक ऐसी कुप्रथा है जो अभी तक समाप्त नहीं हुई है लोग पैसों की लालच में आकर दहेज की मांग करते हैं और मांग पूरी ना होने पर सजा लड़की को भुगतना पड़ता है। उसे तमाम तरह की यातनाएं दी जाती है। आपने देखा होगा आदमी यहां तक अंधा हो जाता है की पैसों के लिए जला भी देते हैं। यह घोर अपराध हमारे समाज में चलने वाले कुछ कुप्रथा के द्वारा होता है। विधवा विवाह निषेध एक ऐसी प्रथा है जिसमें यदि पति शादी के तुरंत बाद मर जाता है तो लड़की को दूसरी शादी करने का अधिकार नहीं होता । अब आप लोग ही बताओ की इसमें उस लड़की का क्या कसूर है जो वह सारी उम्र भुगते। उसकी एक लड़की होने की जिंदगी का क्या अर्थ रह जाता है।

वर्तमान युग में महिलाओं की स्थिति(women situation in present time)

 मैं आपको बता दूं मध्यकालीन समय में जब मुगलों का आगमन हुआ तो धीरे-धीरे हमारे देश की स्त्रियां घर की चारदीवारी में कैद हो गई। और उनका शोषण किया गया। मुझसे खेतों में काम कराया जाता था। तथा प्रताड़ित किया जाता था। परंतु धीरे धीरे आधुनिक युग के कुछ समाज सुधारकों के द्वारा इन परिस्थितियों पर विचार किया गया। तब से महिलाओं की परिस्थितियों में कुछ सुधार आने लग गया तथा सरकार ने भी महिलाओं को पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर चलने की छूट दी। जिसके परिणाम स्वरूप आज स्त्रियां हर कार्य में आगे देखी जाती हैं। आजकल के जमाने में स्त्रियां बाइक चलाती कार चलाती यहां तक की देश की राष्ट्रपति भी बनने की हिम्मत रखती है। हमारे देश में स्त्रियों ने ऐसा काम करके दिखाया है जिसे देखकर पुरुषों के छक्के छूटने लग जाते हैं। दोस्तों हमें तो बहुत खुशी है की महिलाएं आज कितनी उच्च स्तर पर हैं। यह उनकी मेहनत और लग्न का फल है। दोस्तों हरियाणा की रहने वाली दो बहने सविता और बबीता का नाम आपने सुना होगा। इन दोनों बहनों ने विश्व में अपना नाम पहलवानी में रोशन किया।

भारतीय समाज में महिलाओं का महत्व(value of women in Indian society)

मेरे भाइयों आप लोग तो जानते ही होंगे की हमारे समाज में एक स्त्री का कितना महत्व होता है। स्त्री देवी भी होती है ,अबला भी होती है, और डायन भी होती है, स्त्री एक मां भी होती है, स्त्री रणचंडी काली भी होती है।
तो दोस्तों भारतीय समाज में हर एक इंसान को जन्म से लेकर मृत्यु तक एक महिला के साथ ही जीना पड़ता है। दोस्तों जो महिला हमें 9 महीने तक अपने कोख में पालती है और 9 महीने बाद हमें जन्म देती है उसके बाद 20 साल तक हमारा पालन पालन पोषण करके एक स्वस्थ शरीर बनाती है वह हमारी मां होती है दोस्तों स्त्रियों में मां का स्थान सबसे उच्च होता है। उसके बाद  हमारी जिस औरत से विवाह होती है, जिस औरत के साथ हम अपनी हर बात अपने दिल की बात कहने में संकोच नहीं करते हैं वह हमारी पत्नी होती है, पत्नी वह स्त्री होती है जो अपने मां, बाप, भाई, को छोड़कर हमारे घर में हमारे मां ,बाप, भाई बहन को अपना मां बाप भाई बहन बना लेती है। और वह हमारे कामेच्छा की भी पूर्ति करती है। तथा हमें हमारा वंश चलाने के लिए संतान उत्पन्न करती है। अजीब बात यह है की संतान उत्पन्न करके भी वह उसे पति का नाम ही दे देती है दोस्तों आपने देखा होगा किसी का भी नाम उसके मां के नाम से नहीं जुड़ा होता बल्कि उसके पिता के नाम से जुड़ा होता है।

महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराध (crime against women)

समाज में महिलाओं स्थिति में पहले से काफी सुधार देखने को मिल रहा है परंतु ऐसा नहीं है की सभी महिलाएं पूर्ण सुरक्षित है बल्कि स्त्रियों ओर महिलाओं को लेकर तमाम अपराधों का भी जन्म होता रहता है जो निम्नलिखित हैं।

1-दहेज प्रथा (dowry sistem)

हमारे समाज दहेज प्रथा पुराने समय से चला आ रहा है इसे बंद करने के लिए भारत सरकार और भारतीय समाज पूर्ण प्रयास कर रहे हैं। दहेज प्रथा में बहुत ही कमी देखने को मिल रही है परंतु यह नहीं कहा जा सकता कि दहेज प्रथा पूर्ण रूप से समाप्त हो गया है। दहेज प्रथा में जब विवाह होता है तो वर पक्ष वाले कन्या पक्ष वालों से बहुत सारा धन की मांग करते हैं। और कन्या पक्ष वालों को मजबूरन को मांग पूरी करनी पड़ती है परंतु यदि कोई व्यक्ति गरीब है तो वह उन सभी मांगों को पूरा नहीं कर पाता जिसके कारण स्त्रियों को तमाम दुखो का सामना करना पड़ता है उस लड़की के घर वाले पैसों के लिए उसे प्रताड़ित करते हो तथा पैसे ना मिलने पर उसे अपने घर ना लाने की धमकी देते हैं। जिसका सीधा प्रभाव भारतीय समाज और उसमें रहने वाली महिलाओं पर पड़ता है।

2-यौन शोषण (sexual abuse)

हमारे समाज में महिला कितना भी आगे क्यों ना हो जाए परंतु वह एक स्त्री ही होती है। अतः पुरुष अपनी यौन इच्छाओं की पूर्ति के लिए स्त्रियों का यौन शोषण करते हैं। जो सामाजिक दृष्टि से बहुत बड़ा पाप समझा जाता है। इस सामाजिक अपराध को बंद करने के लिए भारत सरकार ने अनेक कदम उठाएं परंतु फिर भी यह पूर्ण रूप से समाप्त नहीं हुआ है। स्त्रियों का यौन शोषण बहुत बड़ा अपराध है जिसका संविधान के अनुसार एक मानक दंड की भी व्यवस्था की गई है।

3-वेश्यावृत्ति (harlotry)

समाज में महिलाओं का एक ऐसा अपराध जो बहुत बड़ा दंडनीय अपराध है स्त्री व पुरुष दोनों के लिए। समाज में वेश्यावृत्ति तमाम कारणों से उत्पन्न होता है जैसे गरीबी जनसंख्या की पृथ्वी आदि कारणों से वेश्यावृत्ति ज्यादा मात्रा में फैलती है ।
दोस्तों तो आप लोगों को यह समझ में आ गया होगा की हमारे जीवन में स्त्रियों का कितना महत्व है वह हमारे समाज में स्त्रियों के बिना कोई कार्य संचालित नहीं किया जा सकता।
दोस्तों आज की पोस्ट में बस यही इतना अगर आप लोगों को हमारा लेख अच्छा लगा हो तो कमेंट करके हमें जरूर बताना।

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