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मैदान किसे कहते हैं|मैदान के प्रकार|मैदान क्या होता है? Maidan kise kahate Hain| maidan ke prakar| maidan kya hota hai

 मैदान किसे कहते हैं|मैदान के प्रकार|मैदान क्या होता है? Maidan kise kahate Hain| maidan ke prakar| maidan kya hota hai

नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है हमारे वेबसाइट rstbox.com पर दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं कि मैदान किसे कहते हैं, मैदान के कितने प्रकार होते है, मैदान का निर्माण कैसे होता है, मैदान से हमें लाभ एवं मैदान के बारे में और भी बहुत कुछ यदि आप मैदान के विषय में सभी जानकारी को प्राप्त करना चाहते हैं तो इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें तभी आपको यह जानकारी मिल पाएगी
पृथ्वी का वह भू भाग जो समतल एवं सागर के तल से 150 मीटर ऊंचा एवं विस्तृत भू-भाग को मैदान कहते हैं कुछ मैदान सागर तल से ऊंचे भी हो सकते हैं जैसे होलेंड का तटीय मैदान कम उच्चावच के स्थान बहुत ही ज्यादा समतल एवं बहुत ज्यादा मात्रा में पाए जाते हैं। मैदान का ढलान बहुत ही ज्यादा समतल एवं बहुत ही ज्यादा मंद होता है मैदान के ऊपर और नीचेले सतह को उच्चावच कहते हैं मैदान पूरे धरातल पर लगभग 55 परसेंट में फैले हुए हैं इनका निर्माण नदियों एवं हिमानी वायु के द्वारा होता है भारत में मैदान लगभग 45% हिस्सों में फैला हुआ है अगर हम मैदान के परिभाषा की बात करें तो यह कुछ इस प्रकार रहेगा 

मैदान की परिभाषा

500 फीट से कम ऊंचे समतल स्थान को या समतल क्षेत्र को मैदान कहते हैं। समुद्र तट से 150 मीटर से कम वाले समतल भू भाग को मैदान कहते

मैदान का वर्गीकरण

ऊंचाई स्थलीय आकार धरातलीय एवं बहुत सी बातों को ध्यान में रखते हुए मैदान को कई भागों में बांटा गया है लेकिन स्थिति के आधार पर मैदान दो प्रकार के होते हैं जो निम्नलिखित हैं
  1. तटीय मैदान
  2. आंतरिक मैदान

तटीय मैदान किसे कहते हैं

जो मैदान सागर के तट पर उपस्थित होते हैं या सागर के तट के आसपास होते हैं उसे तटीय मैदान कहते हैं जैसे फ्लोरिडा का तटीय मैदान और भारत का पूर्वी तटीय मैदान जो बिल्कुल समुद्र के तल पर स्थित है

आंतरिक मैदान किसे कहते है

महाद्वीप एवं पर्वत के निचले हिस्से में पाए जाने वाले मैदान को आंतरिक मैदान कहते हैं जैसे यूरोप का मैदान आंतरिक मैदान बहुत बड़ा एवं बहुत विशाल होता है जिसकी तरंग बहुत कम एवं समतल होता है

मैदान का निर्माण किस प्रकार होता है

हिम निर्मित मैदान
कई जगह ठंडी प्रदेशों पर लगातार हिमानी होने के कारण हिम के छोटे-छोटे टुकड़े कालांतर से एकत्रित होकर एक टीले का रूप ले लेती है बाद में वही टीले मैदान के आकार में परिवर्तित हो जाता है जिसे हिम निर्मित मैदान कहते हैं निर्मित मैदान ज्यादातर ठंडे प्रदेशों में पाए जाते हैं जैसे अंटार्कटिका महाद्वीप और उत्तरी ध्रुव दक्षिणी ध्रुव एवं पर्वत मालाओं में भी यह मैदान बहुत विस्तृत मात्रा में फैला रहता है  इस मैदान को प्राचीन निर्मित मैदान कहते हैं

ज्वालामुखी द्वारा निर्मित मैदान

ज्वालामुखी विस्फोट होता है तो उसमें बहुत से गर्म पदार्थ पृथ्वी के धरातल पर आ जाते हैं उन पदार्थ में गैस ठोस द्रव तीनों अवस्थाओं में पदार्थ पाए जाते हैं उसी में से एक पदार्थ होता है लावा जोकि द्रव के रूप में पाया जाता है जब लावा ठंडा एवं शांत हो जाता है तो लावा एक समतल एवं विस्तृत मैदान के रूप में फैल जाता है जिसे ज्वालामुखी निर्मित मैदान कहते हैं यह मैदान ज्यादा कर इटली जैसे देशों में पाया जाता है
वायु द्वारा निर्मित मैदान
पृथ्वी का वह भाग जहां पर हमेशा वायु का बहाव बना रहता है या बहुत तेजी मात्रा में तूफान आता रहता है वहां इस मैदान का निर्माण होता है वायु से मैदान निर्मित होने में लाखों करोड़ों वर्ष लग जाते हैं क्योंकि वायु पृथ्वी के उन छोटे-छोटे कड़ो को एकत्रित कर टीले का रूप देता है बाद में अधिक वरुण चलने के कारण या भूकंप या फिर भूस्खलन के कारण वह टीला एक समतल धरातल के रूप में परणीत हो जाता है जिसे वायु द्वारा निर्मित मैदान कहते हैं
नदी द्वारा निर्मित मैदान
निरंतर बहने वाली नदियां अपने साथ पृथ्वी के मलबे एवं अन्य पदार्थ के मलवा को साथ लेकर प्रवाहित होती हैं तेज बहाव के कारण कभी-कभी नदिया कटकर गांव शहरों या पहाड़ी इलाकों में चली जाती हैं ऐसा होने पर नदी के साथ जो मलवा होता है उससे एक मैदान का निर्माण होता है जिसे नदी द्वारा निर्मित मैदान कहते हैं या नदी द्वारा निर्मित मैदान के रूप में उसे जाना जाता है

 जलोढ़ मैदान किसे कहते हैं

जलोढ़ मैदान बहुत विस्तृत में फैला हुआ समतल भू भाग है जो काफी अर्से से चला आ रहा है  जलोढ़ मैदान ज्यादातर ढाल वाली जगह पर पाया जाता है जब नदी का मलवा जाकर ढाल वाली जगह पर जम जाता है जिसे जलोढ़ मैदान कहते हैं उदाहरण के तौर पर उत्तरी भारत में स्थित गंगा नदी द्वारा निर्मित जालौर मैदान का निर्माण गंगा यमुना ब्रह्मपुत्र कावेरी जैसी नदियां करती है इन नदियों का जलोढ़ मैदान बनाने का बहुत बड़ा योगदान एवं भूमिका रही है

मैदान से लाभ

उत्तरी भारत में स्थित जलौढ़ मैदान जो कि सिंधु एवं ब्रह्मपुत्र नदी के बहाव से बना है यह मैदान किसान एवं जन कल्याण के लिए बहुत ही ज्यादा लाभदायक है इस मैदान में उपजाऊ मिट्टी की मात्रा बहुत ज्यादा है जो कि किसानों एवं खेती-बाड़ी के लिए बहुत ही ज्यादा उपयोगी है इन मैदानों में पर्यटक घूमने आते हैं जो देखने में बहुत ही ज्यादा शोभायमान होता है
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