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मोक्ष क्या है।moksh kya hai in Hindi.

 मोक्ष क्या है।(moksh kya hai in hindi)

धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि जन्म और मृत्यु के बंधन से मुक्त होना ही मोक्ष कहलाता है जीवन में हर वस्तु प्राप्त करना आसान है परंतु मोक्ष प्राप्त करना आसान नहीं है भगवान बुद्ध को मोक्ष प्राप्ति के लिए अपना पूरा जीवन लगाना पड़ा वहीं पर महावीर को मोक्ष प्राप्ति के लिए कठिन तपस्या करनी पड़ी। और महात्माओं को जंगल और गुफाओं में घोर तपस्या करना करना पड़ा लोगों का मानना है कि श्राद्ध तर्पण करने से पूर्वजों को मोक्ष मिलता है 
वही कुछ लोगों का मानना है कि जीवन में अच्छे कर्म और दान करने से मोक्ष प्राप्त होता है मोक्ष प्राप्ति के बाद आत्मा शून्य हो जाता है  और भगवान के परमधाम बैकुंठ को प्राप्त करता है जहां पर परम स्वतंत्रता एवं परम आनंद को प्राप्त कर लेता है और वह आत्मा ईश्वर तुल्य हो जाता है। जन्म मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाता है क्योंकि तुलसीदास ने कहा है जनमत आम मरत दुसह दुख होई। मतलब जन्म मृत्यु के समय मनुष्य को बहुत दुख से होकर गुजरना पड़ता है मोक्ष के बाद आत्मा फिर से इस धरा धाम पर लौट कर नहीं आती है।

मोक्ष कैसे प्राप्त करें(moksh kaise prapt karen)

संसार में 84 लाख योनि है जिसमें केवल मनुष्य शरीर से ही मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है तुलसीदास रामचरितमानस मे लिखा है कि साधन धाम मोक्ष कर द्वारा मतलब मानव शरीर में ही मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है 8400000 योनियों में भटकने के बाद मानव तन मिलता है इससे मोक्ष की प्राप्ति होती है मानव का जन्म ही इस उद्देश्य से होता है।कि मानव अच्छा कर्म करके इस जन्म में मोक्ष की प्राप्ति करेगा मोक्ष प्राप्ति के बहुत सारे तरीके हैं दूसरे युगों में कठिन तपस्या एवं साधना करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है परंतु तुलसीदास कहते हैं कि कलयुग में केवल भगवान नाम संकीर्तन से ही मोक्ष की प्राप्ति होती

किन किन लोगो को मोक्ष प्राप्त होता है ।(kin kin logo ko moksh prapt hota hai)

 मोक्ष प्राप्त करने के लिए ग्रंथो में बहुत से उपाय बताए गए हैं जो व्यक्ति धर्म करता है स्वर्ग की प्राप्ति करता है लेकिन जो व्यक्ति धर्म और कर्म दोनों करता है वह बैकुंठ को प्राप्त है मोक्ष को प्राप्त होता है क्योंकि  कलयुग कर्म प्रधान है ।भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है कि निष्काम भाव से किया हुआ कोई भी काम मोक्ष प्राप्ति का साधन बनता है।जो व्यक्ति दीन दुखी और लाचार की  सहायता करते है भूखे को भोजन कराते हैं और गाय की सेवा करते हैं वह लोग बैकुंठ के अधिकारी होते हैं ।

मोक्ष प्राप्त करने का सबसे सरल तरीका क्या है(moksh prapt karne ka sabse saral Tarika kya hai)

भगवान श्री कृष्ण ने रणभूमि कुरुक्षेत्र में सभी उपदेश दिए मानव जीवन के सभी विकारों से निकालने का मंत्र दिया जो मनुष्य भगवत गीता का अध्ययन किया और पढ़ा और समझा फिर उसने जाना की दुनिया की सभी समस्याओं से बाहर निकलने का समाधान भगवत गीता में मौजूद है फिर आपकी समस्या कोई क्यों ना हो इसी तरह से भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को मोक्ष प्राप्ति के कई सारे द्वार बताएं जैसे ध्यान योग, कर्म योग,प्रेम योग, आज मै वहीं बताने वाला हूं कि भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन से मोक्ष प्राप्ति के आसान और सरल तरीका बताया है जिससे मनुष्य कितना भी पापी कितना भी  अधर्मी हो लेकिन वह मृत्यु के समय मोक्ष को प्राप्त करता है। भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि हे अर्जुन मानव शरीर बड़ी मुश्किल से मिलता है इसको ऐसे ही नहीं गंवाना चाहिए। देवता भी मानव शरीर के लिए आकांक्षा करते हैं ।तुलसीदास ने अपने रामचरितमानस में लिखा है कि
बड़े भाग मानुष तन पावा सुर दुर्लभ सब ग्रंथन गावा। 
अर्थ
यह है कि” मनुष्य शरीर बड़े भाग्य से मिलता है यह देवताओं को भी दुर्लभ है इसे ऐसे ही नहीं गंवाना नहीं”  चाहिए लेकिन मनुष्य की अज्ञानता इतना है कि इस मौके भरे अवसर को गंवाता रहता हैऔर अपना सारा जीवन भोग विलस में समाप्त कर देता है यहां तक की मृत्यु के समय में भी वासना उसका पीछा नहीं छोड़ती मृत्यु के समय जो वासना उसके मन में सबसे शक्तिशाली रहता है वह उसी वासना के मुताबिक उसे अगला जन्म मिलता है यह भगवान श्री कृष्ण द्वारा दी गई यह एक गुप्त विद्या है यह एक मरने की विद्या है और जो इस विद्या को जान लेता है वह अपने जीवन में कितना ही पाप क्यों न किया हो मृत्यु के समय इस विद्या का उपयोग करके परमात्मा का ध्यान करके मोक्ष की प्राप्ति कर लेता है फिर वह जीवन मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि मृत्यु के समय अपने सभी इंद्रियों का द्वारा रोक कर अर्थात वश में करके और अपने मन को अपने हृदय में स्थित करके और अपने प्राण ऊर्जा को अपने मस्तिष्क में स्थापित करके उस परमात्मा का स्मरण करते हुए ओम मंत्र का उच्चारण करे तो वह मनुष्य कितना भी पापी क्यों ना हो  वह भगवान के परम धाम मोक्ष को प्राप्त होता है देखा भगवान श्री कृष्ण ने कितना सरल तरीका बताया है मोक्ष प्राप्त करने के ओम केवल एक  नहीं शब्द है बल्कि सभी मंत्रों का परम मंत्र है।

कलयुग में मोक्ष कैसे प्राप्त करें

कलयुग में मोक्ष प्राप्त करना बहुत सुगम और सरल है
हम उदाहरण से समझेंगे ।महाभारत के समाप्त होने के बाद कलयुग का आने का समय हो चुका था और उस समय के राजा परीक्षित थे एक बार महाराज परीक्षित अपने राज भ्रमण करने के लिए निकले थे। राज्य भ्रमण करते हुए उन्होंने रास्ते में एक अजीब दृश्य देखा की एक शुद्र गाय और बछड़े को बुरी तरह से पीट रहा है। यह दृश्य देखकर राजा परीक्षित को बहुत ग्लानि हुआ और उन्हें ने सोचा कि हमारे राज्य में ऐसा कौन पापी है जो गाय को इस तरह पीट रहा है। ऐसा कहते हुए राजा परीक्षित उस दुष्ट को दंड देने जा पहुंचे। उस सूत्र को मारने के लिए राजा परीक्षित ने जैसे ही धनुष उठाया वह शूद्र महाराज परीक्षित के चरणों में गिर गया और बोलो हे महाराज में कलयुग हूं यह मेरा स्वभाव है अतः  हमें दंड ना दें दीन भाव से बोला। राजा परीक्षित बोले कि हमारा राज्य छोड़कर चले जाओ हम तुम्हें कुछ नहीं कहेंगे तब कलयुग बोला कि महाराज हमारे आने का समय हो गया है। इस बात को सुनकर  महाराज परीक्षित ने उसे कुछ स्थान बताएं रहने के लिए बताए जैसे।जुआ खेला जाता है, वेश्या, जहां मांस मदिरा का सेवन करते हों,चोरी होता, हो। इस तरह से कुछ स्थान महाराज परीक्षित ने कलयुग को रहने के लिए दिया। कलयुग बोला महाराज हमारे आवगुन को देखकर ही आपने ऐसा स्थान दिया है आपने हमारे गुण को नहीं देखा। इस पर महाराज परीक्षित बोले तुम्हारे अंदर क्या गुण है तब कलयुग कहता है कि
  महाराज दूसरे युग में कठोर तपस्या और  कठिन साधना से ही मोक्ष प्राप्त होता है लेकिन कलयुग में केवल भगवान नाम स्मरण से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है इस पर तुलसीदास भी लिखते हैं कि कलयुग जोग ना जग्य ना ज्ञाना एक आधार राम गुन गाना। अर्थात् केवल भगवान नाम स्मरण से ही मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है इस लिए कहते हैं कि कलयुग में मोक्ष प्राप्त करना बहुत आसान एवम् सरल है।

मोक्ष और मुक्ति में क्या अंतर है

निष्कर्ष,

इस आर्टिकल में आपको बताया गया है कि मोक्ष क्या है,मोक्ष कैसे प्राप्त करे , वाकई कलयुग में मोक्ष प्राप्त करना बहुत आसान है इस युग जैसा दूसरा कोई युग नहीं।मै यहीं कहना चहूंगा की जो कलयुग में मानव जन्म लेकर और इस भारत जैसे पवित्र देश रहकर जो मोक्ष नहीं प्राप्त करता है उससे बड़ा आभगा की इस संसार में कोई नहीं है।

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