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रीति रिवाज किसे कहते हैं (riti riwaj in HindI)

 रीत रिवाज किसे कहते हैं (meaning in Hindi)

नमस्कार दोस्तों हमारी साइट पर आने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद दोस्तों आज हम एक ऐसे सामाजिक सिस्टम के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे जो हमें समाज में कदम कदम पर देखने को मिलता है। रीति रिवाज हम उस परंपरा को कहते हैं जिससे हमारे पूर्वज करते चले आ रहे हैं। हमें कैसे कपड़े पहनना है हमें कैसे खाना खाना है यह सब कुछ हमारे रीति रिवाज कहलाते हैं। रीति रिवाज प्रत्येक घर का व प्रत्येक जगह का अलग-अलग होता है। सब लोग कार्य करने के तरीके को ही रीति रिवाज कहते हैं। सब का कार्य करने का उसने बैठने का रहने सहने का तरीका व पहनावा अलग अलग होता है जिसे रीति रिवाज का नाम दिया जाता है।

हमारे कुछ प्रमुख रिवाजों के नाम

वैसे तो भारत देश में बहुत तरह के रीति रिवाज होते हैं पर दोस्तों मैं आप लोगों को एक सरल तरीके से बताने का प्रयास करता हूं की रीति रिवाज कौन कौन कहलाते हैं।
हमारे हिंदुस्तान में कुछ मुख्य रीति रिवाज है। जिन्हें हम अलग-अलग तरीके से समझेंगे।

2-शादी में बैंड पार्टी

दोस्तों हमारे भारत में हिंदू धर्म में विवाह एक बहुत बड़ा संस्कार माना जाता है। विवाह केवल कर लेने से ही सब कुछ नहीं हो जाता बल्कि यह एक पति पत्नी का ऐसा अटूट बंधन है जो मृत्यु के बाद भी नहीं टूटता है। शादी marriage एक ऐसा संस्कार है जिसमें दो आत्माओं का मिलन होता है और पति पत्नी दोनों मिलकर अपने वास्तविक जीवन को प्राप्त करते हैं। और अपना वंश चलाने के लिए दोनों के मिलन के द्वारा संतान की उत्पत्ति होती है। दोस्तों विवाह के चक्कर में मैं तो अपने मेन पॉइंट को भूल ही गया था तो दोस्तों हमारा पॉइंट था रीति रिवाज। भाइयों मैं आपको बता दूं की हमारे यहां शादियों में आपने देखा होगा कि सभी लोग बैंड पार्टी बुक कराते  हैं ऐसा क्यों है कभी तो किसी को नहीं भी बुक कर आना चाहिए पर आपने देखा होगा की शादी में और कुछ चाहे ना हो पर बैंड पार्टी जरूर होगी तो दोस्तों मैं आपको बता दूं की हमारे यहां शादियों में बैंड पार्टी एक रिवाज है जो संपूर्ण समाज के लोग मानते हैं।

3-विवाह में नकली राजा बनना

दोस्तों आपने देखा होगा की हिंदू धर्म में जो भी विवाह होते हैं उसमें दूल्हे को एक राजा का पोशाक पहनाया जाता है। आखिर ऐसा क्यों किया जाता है। क्या राजा का पोशाक पहन लेने से और घोड़ी पर बैठ जाने से कोई असली राजा थोड़ी ना बन जाता है। तो ऐसा क्या कारण है जिससे विवाह में दूल्हे को नकली राजा बनाया जाता है। दोस्तों हमारे देश में प्राचीन काल में राजतंत्र हुआ करता था । प्राचीन काल में आधुनिक उपकरण या वाहन ना होने के कारण लोग घोड़े या रथ पर सवार होकर विवाह के लिए जाते थे अतः वही रीत रिवाज आज तक पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होता रहता है जिसका कारण है कि आज भी दूल्हे को एक राजा बनाया जाता है।

रीत- रिवाजों से होने वाले दुष्परिणाम

दोस्तों कोई भी इंसान अथवा कोई सा भी सिस्टम है उसके कुछ अच्छाइयां होती हैं और कुछ बुराइयां भी होती है। फर्क सिर्फ इतना है की जिसकी अच्छाई ज्यादा होती है उसकी बुराई नजर नहीं आती। परंतु अच्छा ही कम हो जाए और बुराई ज्यादा हो जाए तो वह हर किसी को नजर आने लगती है जैसे कि चंद्रमा की शीतलता के और मनोहारी दृश्य में उसका काला धब्बा छुप जाता है उसी तरह आदमी का भी अच्छाई ज्यादा होने के कारण बुराई छुप जाती है। तो दोस्तों हम इस पर बात कर रहे थे की रीति रिवाज से आखिर नुकसान क्या है उसके दुष्परिणाम क्या है।

अंधविश्वास को बढ़ावा

दोस्तों रीति-रिवाजों के द्वारा हम यह कंफर्म नहीं कर पाते हैं की हम अच्छा कर रहे हैं या बुरा इसके द्वारा अंधविश्वास को बढ़ावा मिलता है। रीति-रिवाजों को हम जानते हुए भी नकार नहीं सकते क्योंकि हमारे पूर्वजों की यह एक धरोहर है जोकि हमें प्राप्त हुई है इसलिए हमें इन रीति-रिवाजों का पालन करना ही होता है। जैसे की हम जानते है कि 1 दिन नकली राजा बनने से कुछ नहीं होगा। यह सब सिर्फ एक ढोंग और अंधविश्वास है।

आर्थिक चुनौतियां

भाइयों आपने देखा होगा की कभी-कभी इंसान को इन रीति-रिवाजों के चक्कर में आर्थिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है। 
अगर आप एक गरीब परिवार से बिलॉन्ग करते होंगे तो आपको गरीबी और पैसा की परेशानी समझ में आती होगी। मेरे भाइयों जो लोग अमीर परिवार से बिलोंग करते हैं वह भी हमारे गरीब भाइयों और बहनों की मजबूरी को समझने का प्रयत्न करें। तो मैं दोस्तों यह कह रहा था की जैसे एक गरीब परिवार की लड़की की शादी करनी है और पूर्ण तरह से रीति रिवाजों के द्वारा किया जाए तो इनमें आर्थिक परेशानी आती ही है और अगर सिर्फ शादी ही किया जाए तो शादी में दोस्तों सिर्फ पति पत्नी का मेल होता है बाकी तो सब दिखावा और अंधविश्वास है।

रीति-रिवाजों का पालन करें या नहीं

दोस्तों रीति रिवाज कोई संवैधानिक कानून नहीं है जिसे पालन कराने के लिए पुलिस का डंडा या अदालत की कार्यवाही हो सकती है। बल्कि यह एक ऐसा सिस्टम है जिस पर अगर खुद को यकीन है तो आप पालन कर सकते हैं अन्यथा कोई भी बाध्य नहीं कर सकता। यह धर्म से पूरी तरह अलग है क्योंकि धर्म और रीति रिवाज में बहुत अंतर है हमारे धर्मों में रीति-रिवाजों का उल्लेख जरूर है पर किसी भी रिवाज को करने के लिए बाध्य नहीं किया गया है यह सिर्फ अपने बड़े बुजुर्गों के द्वारा ही संचालित किया जाता है अथवा बंद किया जाता है तो आप अगर किसी भी रिवाज को नहीं अपनाना चाहते हैं तो अपने पिताजी या दादाजी से बात करके आप किसी भी रिवाज को अपनाने से मना कर सकते हैं पर अपने पूर्वजों के सहमति के बिना आप इसे बंद अथवा चालू नहीं कर सकते।

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