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व्याकरण के कितने अंग होते हैं? Parts of gramer in hindi.rstbox

 व्याकरण के कितने अंग होते हैं? Parts of gramer in hindi.rstbox

नमस्कार दोस्तों, मैं आप लोगों के सामने एक हिंदी से जुड़ी हुई महत्वपूर्ण प्रश्न के उत्तर को पेश कर रहा हूं। जो अधिकतर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी के काम की जानकारी है। आज के आर्टिकल में व्याकरण के कितने अंग होते हैं तथा व्याकरण की परिभाषा क्या है व्याकरण के प्रत्येक अंगों के बारे में बहुत ही सूछंम रूप से जानकारी पाने के लिए हमारे पोस्ट को ध्यान से पढ़ें। व्याकरण के द्वारा हम किसी भी वाक्य के बोलने चलने को सही तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं क्योंकि बिना व्याकरण के कोई भी वाक्य का सही ढंग से लिख पाना वह बोल पाना संभव नहीं है। आता किसी भी वाक्य को लिखने के लिए व्याकरण का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है नहीं तो उस वाक्य का अर्थ का अनर्थ हो सकता है। उदाहरण के लिए-
राम स्कूल जा रही है।
ऊपर के वाक्य में आप लोग भी भली-भांति जान सकते हैं। की पहले वाक्य में राम पुल्लिंग है परंतु इसमें क्रिया का इस्तेमाल स्त्रीलिंग का किया गया है। अतः जब इसमें व्याकरण का इस्तेमाल किया जाएगा तो इसमें यदि करता पुलिंग है तो क्रिया भी पुलिंग का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें व्याकरण का उपयोग करने के पश्चात यह वाक्य इस तरह से बनेगा।
राम स्कूल जा रहा है।
अब आप लोग भली-भांति समझ चुके होंगे की किसी भी वाक्य को पढ़ने और लिखने और बोलने के लिए व्याकरण की इतनी ज्यादा आवश्यकता होती है। बिना व्याकरण के वाक्य के अर्थ का अनर्थ हो सकता है।

व्याकरण की परिभाषा definition of grammar

व्याकरण बहुत विधा है किसके द्वारा किसी भी वाक्य को बोलने पढ़ने तथा लिखने के तरीकों को शुद्ध और सरल बनाता है। तथा उससे निकलने वाले अर्थ को सार्थक बनाता है। साधारण अर्थों में हम व्याकरण को हिंदी का प्राण मान सकते हैं। व्याकरण सिर्फ हिंदी का ही नहीं बल्कि संस्कृत तथा अंग्रेजी में भी होता है। बिना व्याकरण के अंग्रेजी हिंदी तथा संस्कृत शुद्ध रूप से बोलना तो था लिखना संभव नहीं है।

व्याकरण के अंग vyakaran ke Ang

हिंदी व्याकरण हमारे जीवन के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है क्योंकि बिना हिंदी व्याकरण के हम शुद्ध भाषा में हिंदी पढ़ना बोलना पढ़ना लिखना नहीं जान सकते हैं। अतः व्याकरण को समझने के लिए उसके प्रतेक अंगों पर ध्यान देना बहुत आवश्यक होता है। अतः व्याकरण के मुख्य रूप से तीन अंग होते हैं।
  • वर्ण विचार
  • शब्द विचार
  • वाक्य विचार
व्याकरण के समझने के लिए इन तीनों वर्ण, शब्द और वाक्य को समझना बहुत ही आवश्यक है। क्योंकि वर्ण व्याकरण की सबसे छोटी इकाई है इसलिए कई वर्णों को मिलाकर एक शब्द बनता है और कई शब्दों को मिलाकर एक वाक्य बनता है।

1-वर्ण विचार varn vichar

वर्ण व्याकरण की सबसे छोटी इकाई है। कई वर्णमाला ओं को मिलाकर एक शब्द बनता है। वर्णमाला को अक्षर भी कहा जाता है। प्रत्येक वर्णमाला का अपना एक ध्वनि होता है जिसे मिलाकर कोई शब्द बनता है और उसका अपना एक अर्थ निकलता है। हिंदी वर्णमाला कुल मिलाकर 52 अक्षर होते हैं। जो इस प्रकार से है।
स्वर
अ आ इ ई उ ऊ ऋ ए ऐ ओ औे अं अ:
व्यंजन
क ख ग घ ङ
च छ ज झ ञ
ट ठ ड ढ ण
त थ द ध न
प फ ब भ म
य र ल व श ष स ह 
संयुक्त व्यंजन-श्र क्ष त्र ज्ञ
द्विगुण व्यंजन-ड ढ
इस तरह से कुल मिलाकर वर्णमाल
 में 52अछर होते है ,जिनके मेल से शब्द का निर्माण होता है।

2-शब्द विचार shabd vichar

वर्णमाला के कई अछरो के मेल से शब्द का निर्माण होता है। शब्द के दो अंग होते है।
सार्थक शब्द ऐसे शब्द जिनके द्वारा कोई अर्थ निकलता हो सार्थक शब्द कहलाते है। जैसे-कमल जिसका अर्थ कमल का फूल होता है।अतः यह सार्थक शब्द कहलाते हैं।
निरर्थक शब्द ऐसे शब्द जिनके द्वारा कोई अर्थ नहीं निकलता है निरर्थक शब्द कहलाते हैं। जैसे-मकल इस शब्द का कोई अर्थ नहीं है इसलिए ये निरर्थक शब्द कहलाते है।अतः वर्णों का मेल उसी तरह से किया जाता है जिससे शब्दों का कोई अर्थ निकलता हो।शब्द के मुख्य रूप से तीन भेद होते है।
  • यौगिक जिन शब्दों को अलग अलग करने पर कोई अर्थ निकालता है यौगिक शब्द कहलाते है। जैसे- राजकुमार को अलग अलग करने पर “राज”और “कुमार”हो जाता है अतः दोनों का अलग अलग अपना अर्थ निकल रहा है ।इस तरह के शब्दों को यौगिक शब्द कहा जाता है।
  • रूढ़ ऐसे शब्द जिनके दो टुकड़े करने पर कोई अर्थ नहीं निकलता है वह रूढ़ शब्द कहलाते हैं। जैसे- हल के दो टुकड़े करने पर “ह” और “ल” मैं विभक्त हो जाता है जिनका कोई अर्थ नहीं निकलता है अतः ऐसे शब्द रूढ़ शब्द कहलाते हैं।
  • योगरूढ़ ये शब्द भी यौगिक की तरह ही होते है परंतु जब इनको तोड़ा जाता है तो दोनों भागो में किसी एक भाग का अर्थ तो निकलता है परन्तु आज भाग का कोई अर्थ नहीं निकलता है । जैसे- कमल को दो भागों में तोड़ने पर “कम” और “ल” में विभक्त हो जाता है।जिसमें “ल” का कोई भी अर्थ नहीं निकलता है।

3-वाक्य विचार vakya vichar

कई शब्दों के मेल के द्वारा वाक्य का निर्माण होता है।वाक्य के मुख्य रूप से तीन भेद होते है।
  • साधारण वाक्य वह वाक्य है जिसमें सिर्फ एक ही करता एक ही क्रिया एक ही कर्म हो।तथा स्वतंत्र रूप से कर्ता पूर्ण रूप से क्रिया पर निर्भर हो।उसे साधारण वाक्य कहा जाता है। जैसे-श्याम किताब पढ़ रहा है।
  • उपरोक्त वाक्य में आप देख सकते हैं कि करता स्वतंत्र रूप से क्रिया कर रहा है।अतः इस तरह के वाक्य को साधारण वाक्य कहा जाता है।
  • मिश्रित वाक्य ऐसे वाक्य जिनमें करता सिर्फ एक हो परंतु क्रिया अनेक हो मिश्रित वाक्य कहलाते है। जैसे-राम ने अपना बैग उठाकर स्कूल को चल दिया।उपरोक्त वाक्य में कर्ता सिर्फ एक ही है परंतु क्रिया दो है, उठाकर और चल ।इसलिए यह मिश्रित वाक्य कहलाता है।
  • संसृष्ट वाक्य ऐसे वाक्य जो अर्थ के लिए किसी और पर आश्रित नहीं होते है संसृष्ट वाक्य कहलाते है। जैसे-मै खाना खा लूं।
  • यह व्याकरण के मुख्य अंग थे जिनके द्वारा एक वाक्य का निर्माण होता है।अब वाक्य के बाद हमें व्याकरण के कुछ अंग है जिनका वर्णन निम्नलिखित है।

संपूर्ण हिंदी व्याकरण Sampurn hindi vyakaran

संपूर्ण हिंदी व्याकरण को समझने के लिए हमने संच्छेप में प्रत्येक अंगो के बारे हमने बताया है अतः व्याकरण संपूर्ण व्याकरण को समझने के लिए इन सभी अंगों के बारे में एक बार अवश्य पढ़े।
वर्ण 
कई वर्णों के मेल से शब्द का निर्माण होता है अतः वर्ण व्याकरण की सबसे छोटी इकाई है।
शब्द
कई वर्णों का मेल जिससे कोई अर्थ निकलता हो उसे शब्द कहा जाता है।
वाक्य
कई शब्दों को मिलाकर एक वाक्य का निर्माण होता है।
स्वर
जिन वर्णों का उच्चारण किसी अन्य वर्ण के सहायता के बिना की जाती है स्वर कहलाते हैं।
व्यंजन
जिन वर्णों का उच्चारण स्वर की सहायता से की जाए उन्हें व्यंजन कहा जाता है।
लिपि
हमारे मुंह से निकलने वाले उच्चारण को लिखित शब्दों में लिखने को लिपि कहा जाता है।
वर्तनी
लिखने की रीति को वर्तनी कहा जाता है या लेखनी कहा जाता है।
संज्ञा
किसी व्यक्ति वस्तु स्थान के नाम को संज्ञा का जाता है जैसे-Rakesh, पेड़, बाजार आदि।
सर्वनाम
ऐसे शब्द जो संज्ञा की जगह पर आते हैं सर्वनाम कहलाते हैं।
कर्ता
वाक्य के मुखिया को करता कहा जाता है।
क्रिया
जब करता कोई कार्य करता है तो उस कार्य को क्रिया कहा जाता है जैसे- सुरेश घर जा रहा है। इस वाक्य में जाना क्रिया कहलाता है।
विशेषण
वह शब्द जो संज्ञा व सर्वनाम की विशेषता का वर्णन करते हैं विशेषण कहलाते हैं जैसे-राम फुटबॉल अच्छा खेलता है। इस वाक्य में “अच्छा” विशेषण कहा जाता है।
रस
किसी कविता अथवा कहानी को पढ़ने व सुनने से हमारे मन में जिस तरह के अनुभव प्राप्त होते हैं उन्हें रस कहा जाता है। रस को और अधिक जानने के लिए क्लिक करें।
छंद
किसी भी वाक्य को क्रमबद्ध तथा सुव्यवस्थित रूप से लिखने को छंद कहा जाता है।
अलंकार
अलंकार का अर्थ आभूषण होता है अतः काव्य की शोभा बढ़ाने वाले शब्दों को अलंकार कहते हैं।अलंकार के बारे में और अधिक जानने के लिए क्लिक करें।
समास
जब दो या दो से अधिक शब्दों को मिलाकर कोई अर्थ उत्पन्न होता है तो उसे समास कहा जाता है।
प्रत्यय
शब्दों के साथ लगाने वाले शब्दांश को प्रत्यय कहते हैं
संधि
दो वर्णों के मेल से उत्पन्न विकार को संधि कहा जाता है।
लिंग
जाति का बोध कराने वाले शब्दों को लिंग कहा जाता है लिंग तीन प्रकार के होते हैं।
  1. पुल्लिंग
  2. स्त्रीलिंग
  3. नपुंसक लिंग
वचन
वाक्य में कितने कर्ता है। वचना में इसका बोध कराता है वचन हिंदी व्याकरण में तीन प्रकार के होते हैं।
  1. एकवचन
  2. द्विवचन
  3. बहुजन
काल
काल का अर्थ समय होता है अतः समय को मुख्य रूप से तीन भागों में विभक्त किया गया है।
  1. वर्तमान काल
  2. भूतकाल
  3. भविष्य काल
पूर्ण विराम
कोई भी वाक्य पूर्ण होने के पश्चात पूर्ण विराम का उपयोग किया जाता है। जिसका अर्थ होता है विश्राम करना या आराम करना,पूर्ण विराम का चिन्ह “ “इस प्रकार होता है।
कामा
जब कोई वाक्य पूर्ण रूप से समाप्त नहीं हुआ हो और आगे कुछ और कहना चाहते हो तो उस स्थान पर कामा लगाया जाता है। कामा का चिन्ह कुछ इस प्रकार से होता है। ,
विलोम शब्द
एक दूसरे के विपरीत शब्द को विलोम शब्द कहा जाता है। जैसे -दिन और रात एक दूसरे के विलोम शब्द कहलाते हैं।
पर्यायवाची शब्द
ऐसे शब्द जिनको कई नामों से संबोधित किया जाता है पर्यायवाची शब्द कहलाते हैं इन्हें समानार्थी शब्द भी कहा जाता है। जैसे- कमल का पर्यायवाची पंकज, नीरज ,जलज, इत्यादि। पर्यायवाची शब्द को विस्तार से जानने के लिए क्लिक करें।
अनेकार्थी शब्द
ऐसे शब्द जिनके अनेक अर्थ निकलते हो अनेकार्थी शब्द कहलाते हैं। जैसे- कनक का अर्थ सोना भी होता है और कनक का अर्थ धतूरा भी होता है।
तत्सम शब्द
जब कोई संस्कृत का मूल शब्द हिंदी में परिवर्तित होता है तो उसे तत्सम शब्द कहा जाता है।
तद्भव शब्द
जब कोई संस्कृत शब्द हिंदी शब्द में परिवर्तित हो जाता है तो उसे तत्सम शब्द कहा जाता है।
मुहावरा
हिंदी भाषा में कुछ ऐसे शब्दों तथा वाक्यों का उपयोग किया जाता है जिनका अपना शाब्दिक अर्थ कुछ और होता है तथा वास्तविक अर्थ कुछ और होता है। जैसे-ऊंट के मुंह में जीरा, इसका शाब्दिक अर्थ कुछ और निकलता है परंतु इसका वास्तविक अर्थ किसी वस्तु की कमी को दर्शाता है।

निष्कर्ष conclusion

संपूर्ण पोस्ट पढ़ने के पश्चात यह निष्कर्ष निकलता है कि व्याकरण हमारे भाषा को तथा लिखने के तरीके को शुद्ध और सुव्यवस्थित करके एक सार्थक रूप प्रदान करता है। अतः यदि हिंदी या संस्कृत तथा अंग्रेजी भाषा में व्याकरण का उपयोग ना किया जाए तो इन भाषाओं में बोलना तथा लिखना समुचित ढंग से नहीं हो पाता है इसलिए व्याकरण बहुत ही आवश्यक है जिसके अनेक अंगों की परिभाषाएं उदाहरण सहित हमने इस पोस्ट में पड़ा है जिसके द्वारा हमें अत्यंत जानकारी प्राप्त होती है।एक वाक्य का निर्माण किस प्रकार से होता है तथा बाकी के निर्माण की सबसे छोटी इकाई क्या है इन सभी का समुचित अध्ययन हमने इस पोस्ट में किया है।
Disclaimer
हमने यह पोस्ट अपनी पढ़ाई तथा जानकारी के माध्यम से लिखा है अतः यदि आपको हमारे पोस्ट में कोई त्रुटि दिखाई देती है तो कृपा करके कमेंट बॉक्स में जरूर लिखे मै अपनी गलतियां सुधारने का प्रयत्न करूंगा।

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