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शिक्षा और ज्ञान में क्या अंतर है। ज्ञानी मनुष्य के लक्षण(different in the education and knowledge)

शिक्षा और ज्ञान में क्या अंतर है।(different in the education and knowledge)

नमस्कार दोस्तों आप लोगों का हमारे साइट पर बहुत-बहुत स्वागत है, आप लोग कैसे हैं, आशा करता हूं कि आप लोग अच्छे होंगे इस। दोस्तों आज के इस लेख में हम शिक्षा और ज्ञान में क्या अंतर होता है तथा एक ज्ञाञानी पुरुष के क्या क्या लक्षण होते हैं।वैसे तो शिक्षा और ज्ञान एक दूसरे के पूरक है। क्योंकि शिक्षा केे बिना ज्ञा्ञा्ञान की प्राप्ति नहीं होती।और यदि कोई व्यक्ति है जो शिक्षित है पर ज्ञान ही नहीं तो उसका शिक्षा अधूरा मानाा जात है। आप लोगों के मन में उठ रहे सभी सवालों का जवाब जानने के लिए हमारे पोस्ट को पूरा पढ़ें।तो चलिए देर ना करते हुए आगे बढ़ते हैं।

शिक्षा क्या है (what is the education)

 शिक्षा हमारे समाज की वह व्यवस्था है जिसके द्वारा हम अपने ज्ञान को विकसित करते हैं बिना शिक्षा के ज्ञान असंभव है अतः हमें शिक्षा की आवश्यकता होती है। परंतु यह कोई आवश्यक नहीं होता की जो व्यक्ति शिक्षित है वह ज्ञानी भी है, ज्ञान को हम आगे स्टेप में बताएंगे तो हम पहले शिक्षा को समझ लेते हैं। शिक्षा कई तरह के होते हैं। क्योंकि पहले के लोग शिक्षा को एक अहम संस्कार मानते थे। उनके शिक्षा ग्रहण करने का उद्देश्य अपने ज्ञान चक्षु को खोलना ,और एक संस्कारी मनुष्य बनना होता था।
परंतु वर्तमान युग में शिक्षा के उद्देश्य में बहुत ही बदलाव देखने को मिलता है। आजकल लोग शिक्षा को व्यवसाय मानते हैं। दोस्तों आज कल आपने देखा होगा की जो लड़के पढ़े लिखे होते हैं उनमें संस्कार बहुत कम ही पाए जाते हैं। उससे ज्यादा संस्कार तो एक अनपढ़ सीख लेता है। क्योंकि वर्तमान युग में शिक्षा को एक जीवन यापन का व्यवसाय चुनकर शिक्षा ग्रहण करते हैं। उनको अपने संस्कार अथवा संस्कृति से कोई मतलब नहीं होता, उनका सिर्फ उद्देश्य पैसा कमाने का होता है। जैसे बिजनेसमैन की पढ़ाई, डॉक्टर, वकील, सरकारी नौकरी इत्यादि के उद्देश्य से पढ़ाई करते हैं। दोस्तों ऐसे लोग शिक्षित नहीं बल्कि इन्हें पढ़े लिखे लोग कहा जाता है।

ज्ञान किसे कहते हैं (what is the knowledge)

 यह बात में मानता हूं की शिक्षा से ही ज्ञान की प्राप्ति होती है परंतु यह कोई जरूरी नहीं की अगर बंदा शिक्षित नहीं है तो वह ज्ञान नहीं प्राप्त कर सकता। ज्ञान मनुष्य के दिमाग का एक ऐसा तथ्य है जो समाज में रहकर अपने आप विकसित हो जाता है। ज्ञान कोई किताबी विद्या नहीं है यह एक मौखिक होता है जो एक ज्ञानी मनुष्य के दिमाग में छुपा हुआ होता है और जरूरत पड़ने पर वह काम आता है। सूरदास जी जन्म से ही अंधे थे, और इसी के कारण वह पढ़ना लिखना कुछ भी नहीं जानते थे। अर्थात वह एक अशिक्षित व्यक्ति थे। परंतु उन्होंने भगवान श्री कृष्ण के ऐसे ऐसे पद्य गाए जिससे कुछ पढ़े लिखे लोगों ने उससे नोट किया। उसे पढ़कर आज भी ऐसा लगता है जैसे सूरदास जी ने स्वयं श्रीकृष्ण को अपनी आंखों से देखकर गाया हो। तो  यह होती है एक ज्ञान का ताकत जिसे शिक्षित व्यक्ति नहीं कर पाता
ज्ञान कोई बाजार में बिकने वाला सौदा नहीं है जिसे हम खरीद कर अपने घर ला सकें या खा पीकर एक ज्ञानी पुरुष बन जाए। ज्ञान एक ऐसा शब्द है जो समाज में रहकर एक दूसरे की मदद करके वह दूसरों के सुख दुख में शामिल होकर मस्तिष्क में उत्पन्न होता है और जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जाता है

सामाजिक ज्ञान किसे कहते हैं(what is the social knowledge)

 ज्ञान कई तरह के होते हैं जैसे चिकित्सा का ज्ञान, अदालत का ज्ञान, कृषि का ज्ञान, दुकानदारी का ज्ञान, बिजनेस का ज्ञान, भाषाओं का ज्ञान आदि होते हैं इनमें से एक सामाजिक ज्ञान भी होता है । सामाजिक ज्ञान का तात्पर्य समाज में कैसे कौन सा कार्य होता है। हम समाज में रहते हैं लोगों के साथ आचरण व्यवहार करते हैं तो समाज के बारे में जो जानकारी होती है उसे ही सामाजिक ज्ञान कहते हैं। जैसे एक बच्चा पैदा होता है तो हम लोग थाली बजाते हैं। यह सब समाज में रहकर ही पता चलता है और इसे ही सामाजिक ज्ञान कहते हैं। जब हम कोई भी कार्यक्रम अथवा धार्मिक समारोह आयोजित करते हैं तो हमें सामाजिक ज्ञान की आवश्यकता होती है यह सामाजिक ज्ञान जो मनुष्य समाज में रहता है एक दूसरे के यहां समारोह में जाता है उसको भली-भांति जानकारी होती है उससे समाज के बारे में पूर्ण जानकारी होती है इसी को सामाजिक ज्ञान कहते हैं।

निष्कर्ष(conclusion)

 दोनों को पढ़ने के बाद यह निष्कर्ष निकलता है कि शिक्षा एक किताबी अध्ययन है, और ज्ञान एक मनुष्य के मस्तिष्क की उपज है।
शिक्षा को किताब के द्वारा अर्जित किया जा सकता है परंतु ज्ञान प्राप्ति के लिए हमें समाज में उठना बैठना पड़ता है। उठने बैठने का तात्पर्य आना जाना और सभी लोगों के संबंधों को बनाए रखने से हैं।
शिक्षा के द्वारा हम अपना जीवन यापन करने के लिए धन अर्जित कर सकते हैं ,परंतु ज्ञान प्राप्त करके मनुष्य समाज में इज्जत और मान सम्मान प्राप्त करता है।
शिक्षा प्राप्त करने के लिए हमें पैसे और किताबों व स्कूल की आवश्यकता होती है परंतु ज्ञान प्राप्ति के लिए हमें समाज में आना जाना व में अन्य समारोह शामिल होने के द्वारा ज्ञान अर्जित कर पाते हैं।

ज्ञान प्राप्ति के लिए किन गुणों का होना आवश्यक है(what qualities are necessary to attain knowledge)

 ज्ञान एक ऐसा शब्द है जो हर एक इंसान को प्राप्त नहीं हो पाता है क्योंकि जो ज्ञान प्राप्त के लिए मार्ग हैं उसे नहीं अपना पाते हैं, तो दोस्तों हमारा पोस्ट आप लोग ध्यान से पढ़िए मैं आप लोगों को बताऊंगा की ज्ञान प्राप्ति के लिए किन-किन गुणों का होना आवश्यक है।

1-नम्र स्वभाव(humbal nature)

 ज्ञान प्राप्ति के लिए सबसे पहला गुण यह है कि हमें नम्र स्वभाव का होना चाहिए क्योंकि हमें अगर आपसे कुछ चाहिए तो हमें झुकना पड़ेगा, अतः सबसे बड़ा गुण ज्ञान प्राप्ति के लिए एक विनम्र इंसान होना आवश्यक है। अगर हम किसी समाज में या समारोह में जाते हैं तो हम अगर विनम्रता पूर्वक एक दूसरे से नहीं व्यवहार करेंगे तो हमें समाज में कोई नहीं खड़ा होने देगा।

2-एकाग्र चित्त(concentrated mind)

 ज्ञान प्राप्ति के लिए हमें अपने मस्तिष्क को कंट्रोल में रखना होगा, आपने देखा होगा कुछ लोग सत्संग में जाते हैं तो वे शरीर से तो वहां रहते हैं परंतु उनका दिमाग कहीं और रहता है। ऐसे मनुष्य चाहे दिन रात सत्संग में बैठे हो उन्हें कोई भी ज्ञान प्राप्ति नहीं होने वाली है अतः ज्ञान प्राप्ति के लिए अपने दिमाग को अपने काबू में रखना अति आवश्यक है।

3-क्षमा भाव(sorry nature)

 अगर हमें ज्ञान प्राप्ति का मार्ग ढूंढना है तो क्षमा भाव का होना अति आवश्यक है क्योंकि अगर हमारे अंदर क्षमा भाव नहीं है कोई हमें कुछ कह देता है तो हम तुरंत मरने मारने पर उतर जाते हैं ऐसे मनुष्य कभी भी ज्ञानी नहीं बन सकते क्योंकि क्षमा भाव एक ऐसा शक्ति है जो मनुष्य के मस्तिष्क को एक ठंडा एहसास देता है। और जिस मनुष्य का मस्तिष्क शांत रहेगा वही मनुष्य नए मार्ग सच करने में सक्षम हो सकता है।

3-संतोष(satisfaction)

 ज्ञान प्राप्ति के लिए मनुष्य को एक संतोषी होना बहुत ही आवश्यक है क्योंकि अगर लालची मनुष्य है तो उसका लालच से ही नहीं छुटकारा मिलेगा तो वह ज्ञान कब प्राप्त करेगा। अतः ज्ञान प्राप्ति के लिए संतोष बहुत जरूरी है हमारे पास जो है उसी में खुश रहना चाहिए किसी और का धन दौलत देखकर लालच नहीं करना चाहिए।

ज्ञानी पुरुष के लक्षण (characteristics a intelligent man)

ज्ञानी पुरुष के लक्षण कुछ निम्नलिखित प्रकार के होते हैं जिनके द्वारा इन्हें रखा जा सकता है।

1-दृढ़ प्रतिज्ञ (strong pledge)

ज्ञानी पुरुष अत्यंत ही प्रतिज्ञ होते हैं। ज्ञानी पुरुष यदि कुछ कर दिखाने को ठान ले तो वह कभी भी पीछे नहीं हटता चाहे कितनी भी बाधाएं सामने क्यों ना हो फिर भी उनसे लड़ता हुआ एक ना एक दिन लक्ष्य को प्राप्त करता है। क्योंकि जब कोई कार्य प्रारंभ करते हैं तो उनमें अनेक बाधाएं और विघ्न उत्पन्न होने लग जाते हैं और अज्ञानी पुरुष इन्हीं बाधाओं और विघ्न के डर से पीछे हट जाते हैं जो हमेशा असफल होते हुए दिखाई देते हैं।

2-प्रसन्न चित्त (happiness)

ज्ञानी पुरुष को अधिकतर आपने प्रश्न चित्र देखा होगा क्योंकि वह अपना मस्तिष्क फ्री रखना चाहते हैं इसलिए वह हमेशा प्रसन्न रचित रहते हैं उन्हें अपनी इंद्रियों को वश में करना अच्छी तरह से आता है अतः वह बिना किसी प्रवाह के जीते हैं उनके मस्तिष्क में किसी तरह की भय अथवा भ्रम की भावना उत्पन्न नहीं होती है इसीलिए वह हमेशा प्रसन्न चित्र दिखाई देते हैं।

3-सुख दुख में धर्य (patience in happy and sorrow)

आपने देखा होगा कई व्यक्ति इस तरह के भी होते हैं कि यदि थोड़ी सी कोई खुशी की बात होती है तो वह इतना ज्यादा उछलने लग जाते हैं की उनकी खुशी का ठिकाना ही नहीं रह जाता है। उन्हें लगता है अब संसार में हमारे कितना खुशकिस्मत और सुखी इंसान और कोई नहीं है। वह यह भूल जाते हैं की जो परमपिता परमात्मा इस सृष्टि का संचालक है वह मिनट भी नहीं लगेगा और सारा कुछ बदल कर रख देगा। ऐसे ही वह व्यक्ति जब थोड़ा सा कोई कष्ट होता है तो वह पूरे संसार में कोहराम मचा देते हैं और दूसरे लोगों से मदद मांगते हुए घूमते हैं। अरे पागल मनुष्य क्या किसी की help करेगा। अगर मदद मांगना ही है तो उस परमेश्वर से मांग जो संपूर्ण सृष्टि का मदद कर रहा है। दूसरों के आगे रोने चिल्लाने से सिर्फ तिरस्कार मिलता है। ज्ञानी पुरुष इन्हीं दोनों परिस्थितियों में समभाव में रहते हैं उन्हें सुख होने पर बहुत ही ज्यादा प्रसंता नहीं होती है क्योंकि उन्हें यह ज्ञात होता है कि यह प्रसन्नता अधिक देर नहीं रहती है। और दुख आने पर भी तो को अपने सीने में दबा लेते हैं क्योंकि उन्हें मालूम होता है की यह दुख किसी के नाम नहीं लिख गया है और हम संसार में आए हैं तो दुख से निपटना कि हमारी जीवन की एक कला है इसलिए हम रोने चिल्लाने के बजाय दुख से निपटने के लिए कुछ उपाय करें। और वह धैर्य के साथ अपने जीवन में एक अच्छी प्रतिष्ठा को प्राप्त करते हैं।

4-पवित्रता (purities)

 ज्ञानी व्यक्ति बहुत ही पवित्र ह्रदय क्या होते हैं उनका मन बहुत ही निश्छल स्वभाव का होता है। क्योंकि ज्ञानी पुरुष अपने ज्ञान चक्षु के द्वारा अपने इंद्रियों पर नियंत्रण कर लेता है जिसके कारण ज्ञानी पुरुष अत्यंत ही पवित्र हृदय का होता है। अज्ञानी मनुष्य ऊपर से भले ही अच्छे कपड़े पहन ले नहा धो ले परंतु उसका दिल ह्रदय और विचार अत्यंत ही गंदा होता है। ज्ञानी पुरुष अपने इसी पवित्र ह्रदय के द्वारा अपने आसपास के लोगों का दिल जीत लेता है और सभी व्यक्ति उसके मित्र बन जाते हैं।

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