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संयुक्त परिवार किसे कहते हैं( joint family in Hindi)

संयुक्त परिवार किसे कहते हैं (what is the joint family)

नमस्कार दोस्तों आप सभी का हमारे एक साइट पर बहुत-बहुत स्वागत है दोस्तों आज हम बात करेंगे संयुक्त परिवार की जो हमारे भारत की एक अहम संस्कृति है। संयुक्त परिवार का हमारे भारत में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। संयुक्त परिवार में दादा दादी ,मम्मी पापा, भाई-बहन ,चाचा चाची और सभी बच्चे एक जगह रहते हैं एक जगह भोजन ग्रहण करते हैं और एक ही जगह कार्य करते हैं। संयुक्त परिवार में तमाम लाभ के साथ अनेक हानियां भी हैं। जिसे आप हमारे नीचे के लेख में समझेंगे।

परिभाषा(definition)

वह परिवार जिसमें दो से अधिक सदस्यों की संख्या पाई जाती है संयुक्त परिवार कहलाता है। ऐसा परिवार जिसमें तीन पीढ़ी के लोग एक ही जगह निवास करते हैं एक ही चूल्हे पर बना खाना खाते हैं और एक ही छत के नीचे सोते हैं वह संयुक्त परिवार कहलाता है। संयुक्त परिवार का एक वृहद आकार होता है परम के सभी के विचार 1 तरह के होते हैं।

संयुक्त परिवार के लक्षण(Characteristics of joint family.)

संयुक्त परिवार के कुछ मुख्य लक्षण पाए जाते हैं। संयुक्त परिवार को समझने के लिए हमें इन लक्षण को समझना बहुत ही आवश्यक है।

1-संयुक्त खानपान(combined diet)

संयुक्त परिवार में सभी परिवार के सदस्य एक जगह ही भोजन करते हैं। संयुक्त परिवार में सभी सदस्यों के लिए एक जगह भोजन बनता है जो सभी सदस्यों के लिए सामान्य होता है इसमें किसी व्यक्तिगत इच्छा के अनुसार भोजन नहीं बनता बल्कि इसमें सामाजिक इच्छाओं के अनुसार ही भोजन बनता है। संयुक्त परिवार में भोजन बनाने से पहले सभी सदस्यों की राय ली जाती है की कौन सा भोजन बनना चाहिए उसके बाद ही फैसला लिया जाता है कि रोटी दाल अथवा दाल चावल या रोटी सब्जी आदि बनाया जाए।

2-मुखिया का सत्ता(The power of the chief)

संयुक्त परिवार में सभी सदस्यों और घर को संचालित करने के लिए एक मुखिया होता है जिसके द्वारा ही घर के अहम फैसले लिए जाते हैं। संयुक्त परिवार में घर के मुखिया के फैसले को सभी लोग स्वीकार करते हैं। घर का मुखिया ही जो भी आर्थिक लाभ होता है उनका संरक्षण करता है और उन्हें कहां पर खर्च करना है इसका भी निर्णय घर का मुखिया ही करता है। घर का मुखिया वही व्यक्ति होता है जिससे सभी कार्यों के बारे में ज्ञान होता है। संयुक्त परिवार में घर का मुखिया दो होता है एक स्त्री और एक पुरुष। स्त्री घर के अंदर जो भी कार्य होता है उनका नियंत्रण करती है और पुरुष घर के बाहर के कार्यों का नियंत्रण करता है।

3-श्रम विभाजन(work division)

संयुक्त परिवार में यदि कोई कार्य करना होता है तो बड़े से बड़े कार्य भी बहुत ही आसानी से हो जाते हैं क्योंकि संयुक्त परिवार में दो से अधिक सदस्य पाए जाते हैं अतः कोई कार्य को करने के लिए कई लोग एकत्र हो जाते हैं जिसके कारण कार्य थोड़ा-थोड़ा करके विभाजित हो जाता है और बहुत ही आसानी से पूरा हो जाता है।

4-सामान्य शिक्षा(general education)

संयुक्त परिवार में सामान्य शिक्षा पाई जाती है क्योंकि इस परिवार में सभी लोगों के बच्चे एक समान होते हैं ना कोई अमीर होता है ना कोई गरीब होता है अतः सभी लोगों के बच्चों की शिक्षा एक तरह की ही पाई जाती है। सभी सदस्यों के बच्चे एक भी तरह की स्कूल में पढ़ते हैं इस परिवार में कोई भी सदस्य अपने मनमर्जी से कोई उच्च शिक्षा दिलाने में समर्थ नहीं होता है क्योंकि घर को संचालित करने का कितने मुखिया होता है उनके लिए अभी बच्चे एक समान होते हैं अगर मुखिया किसी एक बच्चे को अच्छे स्कूल में पढ़ाता है तो इससे संयुक्त परिवार के टूटने का खतरा काफी बढ़ जाता है।

5-बृहद आकार(large size)

संयुक्त परिवार में 2 से अधिक परिवार होने के कारण इनकी आकार बहुत ही बड़ा होता है। संयुक्त परिवार में लगभग तीन पीढ़ियों के लोग रहते हैं जो एक दूसरे से किसी ना किसी रूप में रक्त से संबंधित होते हैं। संयुक्त परिवार में दादा दादी, चाचा चाची तथा भाई बहन और उनके बच्चे होते हैं जिसके कारण इसका आकार बहुत ही बड़ा होता है।

6-अधिकारों व कर्तव्यों का पालन(performing right and dutis)

संयुक्त परिवार में प्रत्येक सदस्य अपने अधिकार और कर्तव्य का पूरी तरह से पालन करते हैं। क्योंकि इस परिवार में जन्म से ही लेकर उनके अधिकार और कर्तव्य को पूर्ण तरह से परिचित कराया जाता है जिसके कारण सभी लोग अपने अर्थ अधिकार तथा कर्तव्य को अच्छी तरह समझते हैं। संयुक्त परिवार में वृद्धजनों माता पिता और बीमार लोगों की सेवा और देखभाल करना अपना परम कर्तव्य समझते हैं। जिसके कारण आपसी प्रेम भाव काफी बना हुआ रहता है।

7-रिश्तेदारों की सामान्य खातिरदारी(general care of relatives)

संयुक्त परिवार में सभी रिश्तेदारों की सामान्य खातिरदारी की जाती है। इस परिवार में सभी रिश्तेदार 1 तरह के माने जाते हैं कोई भी रिश्तेदार बड़ा या छोटा नहीं होता। क्योंकि यदि एक सदस्य के रिश्तेदार की खातेदारी उच्च व्यवस्था के अनुसार होती है और दूसरे रिश्तेदार की खातिरदारी निम्न व्यवस्था से होती है तो इससे संयुक्त परिवार के टूटने का खतरा रहता है क्योंकि परिवार के सदस्य एक दूसरे से ईर्ष्या की भावना रखने लग जाते हैं और लड़ाई झगड़े इत्यादि होते हैं जिसके कारण परिवार टूट जाता है। अतः घर का मुखिया सभी के रिश्तेदारों का सामान्य रूप से स्वागत और खातिरदारी करता है।

संयुक्त परिवार के गुण(profit of joint family)

संयुक्त परिवार के बहुत से गुण अथवा विशेषताएं हैं जो निम्न प्रकार से है।

1-संपत्ति पर समान अधिकार(equal rights of property)

संयुक्त परिवार में जो पूर्वजों की संपत्ति होती है और जो सभी सदस्यों के द्वारा मिलकर एकत्र की जाती है उन पर सभी सदस्यों का समान अधिकार पाया जाता है। संयुक्त परिवार में ऐसा कभी नहीं होता है कि हमने ज्यादा कार्य किया या धन एकत्र किया तो हमें ज्यादा मिलना चाहिए और आपने कम धन कमाया तो आप को कम मिलना चाहिए। बल्कि प्रत्येक सदस्य को एक समान भाव से देखते हुए घर का मुखिया सभी सदस्यों को संपत्ति में समान अधिकार देता है।

2-भारतीय संस्कृति की मिसाल(example of Indian culture)

संयुक्त परिवार एक भारतीय संस्कृति की मिशाल को कायम किए हुए हैं जिसका अन्य देशों में बहुत ही महत्व है। क्योंकि भारत के अपेक्षा अन्य देशों में संयुक्त परिवार बहुत ही कम पाई जाती है। अतः भारत में संयुक्त परिवार एक मिसाल कायम किए हुए हैं जिस पर हम सभी भारतीयों को गर्व होना चाहिए।

3-सहयोग की भावना(helpful)

संयुक्त परिवार में सहयोग की भावना काफी पाई जाती है क्योंकि इस परिवार में यदि किसी सदस्य की तबीयत खराब हो जाती है या किसी परिवार के सदस्य की मृत्यु हो जाती है तो उनके बच्चों का पालन पोषण शिक्षा व्यवस्था और उनकी संपत्ति में कोई भी कमी नहीं होती है। और उन बच्चों को और महिलाओं को भी अपने पिता अथवा पालनकर्ता की कोई कमी महसूस नहीं होती है।

4-पारस्परिक प्रेम भाव की वृद्धि(increase in mutual love)

संयुक्त परिवार में दादा दादी, चाचा चाची, माता पिता, भाई बहन और उनके बच्चे सभी एक साथ रहते हैं, एक साथ कार्य करते हैं ,एक साथ भोजन करते हैं जिसके कारण आपसी प्रेम की वृद्धि होती है क्योंकि वृद्ध माता पिता अथवा दादा दादी की यही आखरी तमन्ना होती है की उनके बच्चे और पोते उनके पास खेलें और उन्हें हंसते और खेलते हुए देखकर दादा दादी को बहुत ही आनंद प्राप्त होता है और जिस घर में वृद्ध जन प्रसन्न होते हैं उस घर में आनंद ही आनंद होता है।

5-बच्चों का अच्छी देखभाल(good care of the kids)

संयुक्त परिवार में बच्चों की अच्छी तरह से देखरेख पालन पोषण की जाती है क्योंकि इस परिवार में सदस्य ज्यादा होने के कारण जो बूढ़े बुजुर्ग होते हैं उन्हें ही बच्चों को संभालने का कार्य दिया जाता है जिसके कारण बच्चों का अच्छा देखरेख और उन्हें अच्छा आचरण सिखाया जाता है जो हमारे भारतीय संस्कृति के अनुकूल होता है। जिन बच्चों का पालन पोषण और देखरेख संयुक्त परिवार में किया जाता है वह बच्चे समाज में काफी इज्जत और नाम कमाते हैं।

6-खर्च में कमी(cost reduction)

संयुक्त परिवार में कम खर्च में ही कार्य किया जाता है क्योंकि संयुक्त परिवार में प्रत्येक सदस्य का एक ही उद्देश्य होता है की हमारे परिवार में धन की वृद्धि हो जिसके कारण मुखिया सिर्फ घर की जरूरतों का ही सामान पर खर्च करता है जिसके कारण फिजूलखर्ची पर काफी नियंत्रण होता है और खर्च में काफी कमी आती है। संयुक्त परिवार में कोई भी सदस्य अपने मनमर्जी से फिजूलखर्ची नहीं कर सकता है।

8-संपत्ति के टुकड़े टुकड़े होने से बचाव(avoidance of small pieces of property)

संयुक्त परिवार में सभी सदस्य एक जगह रहते हैं कार्य करते हैं और एक जगह ही उनकी संपत्ति एकत्र होती है जो सिर्फ उस परिवार के नाम पर ही जाना जाता है। इसके कारण संपत्ति के छोटे-छोटे टुकड़े नहीं होते हैं। क्योंकि सभी सदस्य के संपत्ति के हिस्से एक में ही होता है जिसके कारण खेतों का और पैसों का वृहत आकार होता है जिस पर परिवार के सभी सदस्य कार्य करते हैं और धन एकत्र करके एक निश्चित कार्य में ही लगाते हैं।

संयुक्त परिवार के दोष(defect of joint family)

संयुक्त परिवार में तमाम लाभ होने के साथ-साथ हैं इससे तमाम हानियां जुड़ी हुई है जो निम्न प्रकार से है।

1-मुखिया की मनमानी(Chief’s arbitrariness.)

संयुक्त परिवार में जो घर का मुखिया सदस्य होता है वह बहुत ही मनमानी करता है क्योंकि सभी सदस्य उसके विचारों का और बातों का सम्मान करते हैं इसलिए मुखिया अपनी मनमर्जी अनुसार कार्य करता है और सभी सदस्यों के ऊपर रोब जमाता रहता है। घर का मुखिया पैसा का मनमानी तरीके से गलत इस्तेमाल करता है क्योंकि उसे रोकने वाला कोई नहीं होता है और परिवार के सभी सदस्यों से काफी काम करवाता है और खुद कार्यों से दूर भागकर खड़ा हो जाता है।

2-आलस्य को बढ़ावा(encourage of laziness)

संयुक्त परिवार में कुछ सदस्य आलसी प्रवृत्ति के हो जाते हैं क्योंकि उनको पूर्ण रूप से यह ज्ञात होता है की यदि हम कोई बहाना बनाकर कार्य नहीं करेंगे तब भी हम सभी सदस्यों के समान ही भोजन करेंगे और सभी के समान ही हमें संपत्ति मिलेगी जिसके कारण वह कार्य नहीं करता है। और एक आलसी प्रवृति का मनुष्य बन जाता है जिसके कारण आगे चलकर उसे तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

3-ईर्ष्या के कारण लड़ाई झगड़े(fight because of geology)

संयुक्त परिवार में कार्य और धन संपत्ति को लेकर ईर्ष्या की भावना पैदा हो जाती है जो लड़ाई झगड़े की मुख्य जड़ होती है। संयुक्त परिवार में कोई व्यक्ति के ऊपर कार्य का दबाव काफी हो जाता है और कोई व्यक्ति बिल्कुल भी कार्य नहीं करता है जिसके कारण प्रेम की भावनाओं का अंत हो जाता है और ईर्ष्या की भावना जागृत हो जाती है जिसके कारण एक दूसरे के साथ लड़ाई शुरू हो जाते हैं और संयुक्त परिवार टूट जाता है।

4-व्यक्तिगत विकास में बाधक(hindrenc to personal development)

संयुक्त परिवार में यदि कोई व्यक्ति अधिक कार्य करके धन कमा लेता है फिर भी उसकी जीवन अस्तर निम्न ही रह जाती है क्योंकि उसे भी सभी परिवार के सदस्यों की तरह ही जीवन जीना पड़ता है और उनके बच्चे भी उच्च शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाते हैं जिसके कारण उस व्यक्ति का भी विकास नहीं हो पाता है।

5-कुप्रथाओं को बढ़ावा(pramot practices)

संयुक्त परिवार में हमारे दादा-दादी व बूढ़े बुजुर्ग भी रहते हैं जो हमारे परिवार में कोई कार्य होता है तो उसने अपने पुरानी प्रथाओं को ही आगे रखते हैं चाहे उससे कोई हानि हो अथवा लाभ परंतु उनका विश्वास उन्हीं कुप्रथा में व्याप्त होता है। और इन कुप्रथाओं का विरोध घर का कोई भी सदस्य नहीं करता है क्योंकि उन्हें यह विश्वास होता है कि यह हमारे पूजनीय पूर्वज हैं जिनके आज्ञा का पालन करना हमारा परम धर्म है। और इस तरह से समाज में कुप्रथाओं को बढ़ावा मिलता है।

6-जनसंख्या वृद्धि(population growth)

संयुक्त परिवार में आपको जनसंख्या काफी तेजी से बढ़ती हुई देखने को मिलती है। क्योंकि उन परिवार में अक्सर शिक्षा की कमी देखी जाती है जिसके कारण इनमें जनसंख्या पर कोई नियंत्रण नहीं होता है और इन परिवार में बच्चों का पालन पोषण करने में भी कोई समस्या उत्पन्न नहीं होती है जिसके कारण कुछ ही दिनों में जनसंख्या काफी तेजी से बढ़ जाती है और इस परिवार में तमाम बच्चे दिखाई देने को मिलते हैं जिससे यह समझने में अत्यधिक कठिनाई होता है की कौन सा बच्चा किसका है यह सिर्फ उसके माता-पिता ही पहचान सकते हैं।

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