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संस्मरण किसे कहते हैं? Sansmaran kise kahate Hain.

 संस्मरण किसे कहते हैं? Sansmaran kise kahate Hain.

स्मृति के आधार पर किसी व्यक्ति अथवा वस्तु के एवं भाव के बारे में रोचक एवं कलात्मक रूप से वर्णन करना संस्मरण कहलाता है संस्मरण शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है सम+स्मरण जिसका अर्थ होता है किसी व्यक्ति के गुण एवं किसी वस्तु के बारे में रोचक एवं सार्थक एवं सटीक ढंग से वर्णन के लेखन शैली को संस्मरण कहते हैं संस्मरण को लिखने वाला व्यक्ति अपने विषय में बहुत ही कम जानकारी प्रदान करता है वह ज्यादातर दूसरे व्यक्ति के गुण एवं स्वभाव को ध्यान में रखते हुए संस्मरण के तहत उसके को एक लेखन शैली में पिरोता है संस्मरण लगभग सत्य पर आधारित होती है क्योंकि इसमें लेखक ज्यादा कल्पनात्मक विचार को नहीं रखता। संस्मरण ज्यादातर महान पुरुषों के ऊपर लिखा जाता है जिसे हम जीवनी के स्तर पर रख सकते हैं लेकिन जब लेखक अपने बारे में संस्मरण लिखता है तब हम उसे आत्मकथा के साथ जोड़ सकते हैं आत्मकथा में लेखक अपने साथ बीते हुए कुछ रोचक पलकों लिखता है और आत्मकथा संस्मरण लिखने में लेखक महान पुरुषों के स्वभाव एवं गुणों को ध्यान में रखते हुए उनकी जीवनी लिखता है संस्मरण का एक सार्थक अर्थ यह भी है कि किसी व्यक्ति विशेष के गुणों को रोचक ढंग से प्रस्तुत करना संस्मरण कहलाता है

संस्मरण कितने प्रकार का होता है?

संस्मरण मुख्यतः दो प्रकार का होता है जो निम्नलिखित है
1- आत्म संस्मरण
2- अनुभव द्वारा लिखा गया संस्मरण

1-आत्म संस्मरण

आत्म संस्मरण बैठक का मुख्य भूमिका में होता है वह अपने जीवन में बीते हुए समय के वह सुख-दुख के पल एवं कुछ रोचक प्रश्न को लिखता है वह आत्म संस्मरण कहलाता है आत्म संस्मरण लिखने की प्रक्रिया बहुत पुरानी है पहले राजा महाराजा अपनी जीवनी या अपने संस्मरण लिखा करते थे जो कि उनका स्थान आज बहुत ऊपर है लेकिन आज भी उसके प्रथा खत्म नहीं हुई आत्म संस्मरण व्यक्ति के अनुभव एवं विषम परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिखता है और बहुत ही रोचक ढंग से दूसरों के सामने प्रस्तुत करता है वह आत्मसंस्मरण कहलाता है

2-अनुभव द्वारा लिखा गया संस्मरण

ऐसा संस्मरण लेखक अपने अनुभव एवं दूसरों के सुने हुए बातों को ध्यान में रखकर संस्मरण लिखता है उसमें दूसरों के जीवन में बीते हुए बात को लिखता है अनुभव द्वारा लिखा गया संस्मरण ज्यादातर उन महान पुरुषों के बारे में लिखा जाता है जो इतिहास में बहुत महान थे।

संस्मरण और जीवनी में अन्तर sansmaran aur jivani mein antar

जब लेखक संस्मरण लिखता है तब लेखक किसी व्यक्ति विशेष के जीवन में घटित उन रोचक घटनाओं पर प्रकाश डालता है कुछ प्रसंग को लेखक आपने अनुभव एवम आपने विचार एवम विवेक के द्वारा लिखता है लेकिन जब लेखक किसी व्यक्ति के जीवनी के बारे में लिखता है तब लेखक उसके  बाल्यावस्था से लेकर जीवन के सभी घटनाओं पर प्रकाश डालता है।
संस्मरण लिखते समय कल्पनात्मक विचार को भी उस व्यक्ति विशेश के जीवनी में प्रस्तुत करता है किसी व्यक्ति की जीवनी लिखने से पहले लेखक बहुत उस व्यक्ति विशेष के बारे में जानकारी रहना बहुत आवश्यक हैं।
संस्मरण में किसी एक घटना का वर्णन किया जाता है जबकि जीवनी में उस व्यक्ति विशेष के जीवन की प्रत्येक घटनाओं का विधिवत वर्णन किया जाता है।

संस्मरण की विशेषताएं sansmaran ki visheshtaen

हमने ऊपर में संस्मरण के बारे में अनेक बातों की जानकारी प्राप्त की जिसके फलस्वरूप संस्मरण की कुछ प्रमुख विशेषताएं दिखाई देती हैं जो निम्नलिखित हैं।
संस्मरण मैं लेखक किसी विशेष घटना का वर्णन करता है जो कभी भुलाई ना जा पाती हो।
संस्मरण लिखते समय लेखक उस घटना का इस प्रकार वर्णन करता है की पढ़ने वाले को विधिवत समझ में आ सके।
संस्मरण में लेखक अपनी फीलिंग को भी उनमें समाहित करता है

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