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समाज और समुदाय में अन्तर samaj aur samuday me anter in hindi.rstbox

 समाज और समुदाय में अन्तर samaj aur samuday me anter in hindi.rstbox

नमस्कार दोस्तों, हमारे वेबसाइट पर आप लोगों का बहुत-बहुत स्वागत है। हमारे वेबसाइट पर आप लोगों को समाजशास्त्र के बारे में अनेक जानकारियां प्राप्त होती हैं अतः समाजशास्त्र से ही जुड़ी हुई आज एक प्रश्न का उत्तर लेकर आए हैं। समाज और समुदाय में क्या अंतर है। क्योंकि बहुत लोग को ऐसा लगता है कि समाज और समुदाय एक ही है परंतु ऐसा बिल्कुल भी नहीं है समाज और समुदाय में बहुत ज्यादा अंतर होता है। अतः इसी अंतर को स्पष्ट करने के लिए सबसे पहले हमें समाज क्या है और समुदाय क्या है इसको अलग-अलग समझ लेते हैं। तत्पश्चात दोनों के बीच के अंतरों को स्पष्ट करेंगे। अतः समुदाय और समाज के अंतर को बड़ी ही बारीकी और विस्तृत ढंग से समझने के लिए हमारे पोस्ट को ध्यान से पढ़ें। क्योंकि समाज और समुदाय एक शब्द नहीं बल्कि इसका एक विस्तृत अर्थ होता है।

समाज किसे कहते हैं what is the society

कई व्यक्तियों के बीच पाए जाने वाले जरूरत और संबंधों की पूर्ति जिस व्यवस्था के द्वारा होती है जो समाज कहा जाता है। सरल शब्दों में कहा जाए कि समाज के द्वारा हमें अपने जरूरत की अनेक वस्तुओं की पूर्ति हो पाती है तथा समाज के द्वारा सभी लोगों के बीच में आपसी प्रेमभाव तथा सहयोग की भावना बनी हुई रहती है। समाज में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए एक दूसरे पर निर्भर होते हैं। क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति प्रत्येक कार्य करने में सक्षम नहीं होता है। समाज के बिना जीवन असंभव है अतः समाज सिर्फ मनुष्य का ही नहीं बल्कि संपूर्ण जीव धारियों का होता है। समाज की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि यह एक व्यवस्था है कोई वस्तु नहीं है जो इसे देखा जा सके या छुआ जा सके अतः समाज पूर्ण रूप से अमूर्त है। तमाम समाजशास्त्रियों ने लोगों के हृदय में व्याप्त प्रेम भावना और एक दूसरे से संबंध की भावना तथा व्यवहार को ही समाज का रूप दिया है यदि यह सभी विशेषताएं लोगों के हृदय में से समाप्त हो जाती हैं तो सामाजिक विघटन की प्रक्रिया शुरू होने लग जाती है।

समुदाय किसे कहते हैं what are the communities called

जब समाज में कुछ व्यक्तियों के द्वारा एक संगठन बनाया जाता है जिसका मुख्य लक्ष्य एक दूसरे का सहयोग करना होता है तो वह समुदाय कहलाता है। समुदाय व व्यवस्था है जिसमें कई व्यक्तियों के विचारों और एक दूसरे के कर्तव्य के मेल के द्वारा समुदाय बनता है। यदि समुदाय के प्रत्येक सदस्य में विचारों की समानता नहीं होती है तो उन्हें समुदाय नहीं कहा जाता है और वह समुदाय बहुत जल्द ही टूट जाते हैं। समुदाय का एक निश्चित क्षेत्र होता है। जिसमें प्रत्येक सदस्य को यह ज्ञात होता है कि कौन सा व्यक्ति इस समुदाय का होता है। अतः समुदाय के दायरे में जितने भी व्यक्ति आते हैं वह सभी एक निश्चित तथा अभीष्ट आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए एक दूसरे मदद के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। यदि समुदाय के ऊपर कोई विपत्ति या कोई दुराचारी गलत प्रभाव डालता है तो समुदाय के प्रत्येक व्यक्ति एकत्र होकर उस विपत्ति तथा उस परिस्थिति से निपटने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। समुदाय समाज का ही एक अंग है जो अलग-अलग रूपों में अपने कुछ आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए समुदाय का गठन किया जाता है। जिसका मुख्य लक्ष्य एक दूसरे की सहायता करना होता है। समुदाय में रहने वाले प्रत्येक सदस्य में स्वार्थ की भावना बहुत कम पाई जाती है। प्रत्येक समुदाय का अपना एक विशिष्ट नाम होता है जिनके द्वारा उस समुदाय को संबोधित किया जाता है।

समाज और समुदाय में अंतर difference between society and community

हमने ऊपर के पोस्ट में आप लोगों को समाज तथा समुदाय के बारे में बहुत ही सरल भाषा में बताया है जिसको पढ़ने के बाद आपके समझ में संपूर्ण ढंग से आ गया होगा कि समाज का तात्पर्य क्या है और समुदाय का तात्पर्य क्या है। आता दोनों मैं कौन-कौन से अंतर पाए जाते हैं आइए स्पष्ट रूप से जानते हैं।
  • समाज एक अमूर्त धारणा है जिसे देखा नहीं जा सकता है सिर्फ महसूस किया जा सकता है। जबकि समुदाय व्यक्तियों का एक समूह होता है जो दिखाई देता है अतः समुदाय मूर्त होता है।
  • समाज का क्षेत्र विस्तृत होता है क्योंकि जहां पर जीवन है वहां पर समाज होता है। परंतु समुदाय एक निश्चित दायरे में होता है अतः समुदाय की स्थापना के लिए आसपास के कुछ व्यक्तियों का समूह समुदाय में सम्मिलित होता है।
  • समाज सामाजिक संबंधों का जाल है अतः लोगों के बीच व्यवहार और प्रेम को समाज कहा जाता है तथा समुदाय मैं कोई भी संबंध नहीं पाए जाते हैं बल्कि एक दूसरे की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए समुदाय का निर्माण किया जाता है।
  • समाज में रहकर व्यक्ति को अनेक प्रकार के संघर्ष तथा एक दूसरे के सहयोग करने होते हैं जबकि समुदाय में सिर्फ एक दूसरे की सहायता के लिए ही समुदाय का निर्माण होता है।
  • समाज में अनेक प्रकार की संस्कृति भाषा पहनावा खानपान अनेक प्रकार की विविधता व्याप्त होती है। जबकि समुदाय मे प्रतेक में समानता पाई जाती है। समुदाय के प्रत्येक सदस्यों में सामान भाषा समान खानपान और पहनावा होती है।
  • समाज में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति का अपना एक पहचान होता है। जबकि समुदाय में रहने वाले व्यक्तियों का समुदाय ही एक पहचान होता है।
  • समाज में रहने वाले प्रत्येक व्यक्तियों में अलग-अलग प्रकार के आचार विचार तथा आदतें पाई जाती हैं जबकि समुदाय में सिर्फ सामुदायिक भावना पाई जाती है।
  • समाज का अपना कोई नाम नहीं होता है जबकि समुदाय का अपना एक नाम होता है।

निष्कर्ष conclusion

संपूर्ण पोस्ट करने के पश्चात यह निष्कर्ष निकलता है कि समाज एक अमूर्त व्यवस्था है जिस में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति के विचार और मन में एक दूसरे के प्रति व्यवहार और संबंध होते हैं जिनके द्वारा समाज का निर्माण होता है। समाज में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति एक दूसरे के प्रति सुख दुख में साथ देने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। समुदाय एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें कुछ अभीष्ट आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कुछ सीमित व्यक्ति मिलकर एक समुदाय की स्थापना करते हैं जो एक विशिष्ट नाम के द्वारा संबोधित करते हैं। समुदाय की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि इनमें अहम की भावना होती है जिसके कारण किसी अन्य समुदाय के लोगों से खतरा महसूस होने पर संपूर्ण समाज के प्रत्येक सदस्य एकजुट होकर उसका सामना करते हैं।

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