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सामाजिक परिवर्तन किसे कहते हैं (what is the social changing in Hindi)

 सामाजिक परिवर्तन किसे कहते हैं (what is the social changing)

नमस्कार दोस्तों हमारे साइट पर आप लोग का बहुत-बहुत स्वागत है। आप लोग कैसे हैं दोस्तों, आप लोग हमें कमेंट करके जरूर बताना, आशा करता हूं आप लोग अच्छे होंगे स्वस्थ होंगे क्योंकि दोस्तों, स्वस्थ रहना एक बहुत बड़ी बात होता है। क्योंकि, पहला सुख जब निर्मल काया, दूसर सुख जब घर में माया।
तो चलिए दोस्तों हम अपने टॉपिक पर आते हैं, आज का हमारा टॉपिक है सामाजिक परिवर्तन, तो आप लोग सोच रहे होंगे कि सामाजिक परिवर्तन क्या होता है, तो चलिए इसको जान लेते हैं कि सामाजिक परिवर्तन क्या है अतः आप लोग हमारा पोस्ट लास्ट तक पढ़ें, तभी आप लोगों को अच्छे से समझ में आएगा। तो दोस्तों सामाजिक परिवर्तन जाने से पहले हम यह जानते हैं की परिवर्तन क्या है क्योंकि इसमें दो शब्द है एक सामाजिक दूसरा परिवर्तन, तो चलिए परिवर्तन को पहले समझ लेते हैं।

परिवर्तन क्या है (what is the changing)

 मैं आप लोगों को परिवर्तन के बारे में सिर्फ एक बात कहना चाहता हूं ,की परिवर्तन के बिना यह संसार नहीं चल सकता। परिवर्तन शब्द का अर्थ बदलाव होता है। अर्थात जब कोई सिस्टम में या कानून में या डेकोरेशन संस्कृति सभ्यता में या अपनी आदत में बदलाव लाता है ,तो उसे हम परिवर्तन कहते हैं। दोस्तों परिवर्तन एक ऐसा शब्द है जो प्रकृति से लेकर जीव जंतु धरती पहाड़ सब में होता है, क्योंकि परिवर्तन के बिना जीवन असंभव है। दोस्तों सुबह आपने देखा होगा सूर्य निकलता है और वह भी शाम होने पर छिप जाता है। ऐसे ही हर कार्य में अथवा हर सिस्टम में हर मनुष्य में बदलाव होते रहता है। दोस्तों अंग्रेजी में एक कहावत है
Changing is the rule of God
अर्थात बदलाव प्रकृति का नियम है, दोस्तों यह प्रकृति के द्वारा ही बनाया गया नियम है की बदलाव होते ही रहेगा कोई भी चीज स्थिर नहीं रह सकता। दोस्तों बसंत ऋतु में जो पेड़ पौधे हरे भरे रहते हैं वह भी दिसंबर में पत्ते झड़ जाते हैं। जब एक इंसान का जन्म होता है ,तो वह एक अबोध प्राणी होता है ,उसके बाद वह हंसता बोलता है, पढ़ता लिखता है, विवाह करता है, पैसो के पीछे भागता है, बच्चों को प्यार करता है, और अंत में बुढ़ापा को प्राप्त होता है, और एक दिन उसका निधन हो जाता है। इसे ही परिवर्तन कहते हैं परंतु दोस्तों हमारा आशय इस परिवर्तन से नहीं है, हमारा आशय है सामाजिक परिवर्तन से तो चलिए समझते हैं कि सामाजिक परिवर्तन कैसे होता है।

सामाजिक परिवर्तन (social changing)

मैकाइवर एवं पेज(R.M.maikaiverC.H.page) ने अपनी किताब (socity) मैं लिखा है कि समाजशास्त्री होने केे कारण समाज से हमारा सीधा संबंध है अतः समाज में होने वाले परिवर्तन को ही सामाजिक परिवर्तन कहते हैं।
H.M. jonsun के अनुसार समाज में होने वाले संरचनात्मक परिवर्तन को ही सामाजिक परिवर्तन कहा जाता है।
Kingsley devish के अनुसार सामाजिक संगठनों में होने वाले परिवर्तन को ही सामाजिक परिवर्तन कहा जाता है।
अतः स्पष्ट शब्दों में यह कहा जा सकता है कि समाज में धार्मिक, सांस्कृतिक ,आर्थिक और राजनैतिक ,भौतिक तथा भौतिक सभी प्रकार के परिवर्तन को हम सामाजिक परिवर्तन कहते हैं।

सामाजिक परिवर्तन की विशेषताएं(features of social change)

 सामाजिक परिवर्तन में कुछ विशेषताएं पाई जाते हैं जो नीचे आप हमारे पोस्ट में जानेंगे।

1-परिवर्तन अनिश्चित होता है(uncertain change)

 सामाजिक परिवर्तन की सबसे बड़ी विशेषता यह है की इसका कोई निश्चित समय नहीं होता है कि 1 साल में होगा या 4 साल में होगा या 8 साल में होगा। परंतु परिवर्तन होता है, धीरे धीरे समय बदलने पर समाज में भी परिवर्तन हो जाता है इसका कोई भी विशेषज्ञ अथवा ज्ञानी इसका समय निश्चित नहीं कर सकता है। कभी-कभी समाज में कुछ प्राकृतिक आपदाओं के आने पर बहुत ही जल्द परिवर्तनशील हो जाता है और कभी कभी समय के अनुसार अपने आप ही संस्कृति सभ्यता एवं धार्मिक कार्यों में परिवर्तन हो जाता है। 

2-परिवर्तन भौतिक अथवा अभौतिक भी होता है(physical and non material science)

 परिवर्तन कोई जरूरी नहीं की सिर्फ भौतिक चीजों में जैसे पहनावा, घर मकान का डिजाइन, गाड़ियों का डिजाइन अथवा मॉडल, इन्हीं में ही होता है। बल्कि इसका एक अभौतिक पहलू भी है जैसे मनुष्य के गुणों में बदलाव, बोलने बात करने का तरीका में बदलाव, सामाजिक संबंधों में भी बदलाव होता है।रीत रिवाज अथवा धार्मिक गतिविधियों में बदलाव लोगों के आचरण और व्यवहार में बदलाव। यह बदलाव अभौतिक होता है।

3-परिवर्तन समाज का मूल आधार(change is the basis of society)

 परिवर्तन ही समाज का मूल आधार माना जाता है क्योंकि जब समाज में कोई रीत रिवाज अथवा गुण में बदलाव हो जाता है और सभी लोग वैसा ही आचरण करने लग जाते हैं अथवा रीत रिवाज अपनाने लग जाते हैं तो कुछ व्यक्ति जो नहीं अपनाना चाहते उन्हें मजबूर होकर अपने रीति रिवाज अथवा गुणों में बदलाव लाना पड़ता है । क्योंकि समाज में अगर रहना है तो जिस तरह से सभी लोग तौर तरीके मानेंगे उसी को हमें भी मानना पड़ेगा तभी हम समाज में रह सकते हैं अन्यथा हमें समाज में बेइज्जत का सामना करना पड़ता है।अतःपरिवर्तन समाज का मूल आधार होता है।

4-सामाजिक परिवर्तन की रफ्तार निश्चित नहीं होता (no fix speed)

 आपने देखा होगा की इसकी कोई स्पीड निश्चित नहीं होती की बदलाव कितने तेजी से होगा या कितने धीरे-धीरे होगा। दोस्तों कभी कभी ऐसा होता है कि समाज में कुछ गुण अथवा कुछ आचरण बहुत कम ही दिनों में परिवर्तित हो जाते हैं। जैसे आजकल के युग में बच्चों में तेजी से बदलाव हो रहे हैं उनके खाने पीने का ढंग व माता-पिता के साथ आचरण अथवा बातचीत करने का तरीका एकदम बदलता जा रहा है। तो दोस्तों इस की कोई निश्चित स्पीड नहीं होती है। कुछ लोग तो एक दूसरे का देखकर अपने आप में बदलाव लाना शुरू कर देते हैं। क्योंकि उन्हें पता है की हम इस परिवर्तनशील जमाने के साथ नहीं चलेंगे तो हम बहुत पीछे रह जाएंगे।

5-विश्व व्यापी (worldwide)

 यह कदापि नहीं कहा जा सकता कि सामाजिक परिवर्तन सिर्फ एक ही क्षेत्र में होता है या एक ही देश में होता है अपितु सामाजिक परिवर्तन संपूर्ण विश्व में होता है क्योंकि आपने देखा होगा कि प्रत्येक पहलू में परिवर्तन अवश्य होता है। प्रकृति के नियमों में भी परिवर्तन होता है। 4 महीने गर्मी के तो 4 महीने बरसात के और 4 महीने ठंड के होते हैं इसलिए भौगोलिक दृष्टि से देखा जाए तो इनमें भी बदलाव होते रहते हैं। कभी-कभी ऐसा भौगोलिक परिवर्तन होता है कि जहां पर सिर्फ रेत ही रेत दिखाई देती है पानी का नामोनिशान नहीं होता वहां पर परमात्मा की ऐसी चमत्कार होती है कि वहां सिर्फ पानी ही पानी दिखाई देता है। अतः यह कहना उचित है कि सामाजिक परिवर्तन का कोई निश्चित क्षेत्र अथवा स्थान नहीं होता जिसके दायरे में ही परिवर्तन होता है अपितु यह विश्वव्यापी होता है।

6-अलग अलग स्वरूप(different formats)

 सामाजिक परिवर्तन का हमें समाज में अलग-अलग रूप दिखाई देने को मिलता है। कहीं पर आपने देखा होगा की लोगों के रहन-सहन में लगातार परिवर्तन होता है। और कहीं पर आपने देखा होगा लोगों के बोलचाल और भाषाओं में परिवर्तन हो जाता है। कभी-कभी परिवर्तन चक्रीय भी होता है । जैसे पहले लोग शादियों में दूल्हे को घोड़े पर लेकर जाते थे और उसके बाद में पालकी पर फिर कार मेंऔर फिर से अब घोड़े पर लेकर जाने लग गए। इसे भी चक्रीय परिवर्तन कहा जाता है।

7-अनेक कारण (difrents reason)

सामाजिक परिवर्तन का कोई एक मुख्य कारण नहीं होता है अपितु इसके अनेक कारण हो सकते हैं। कभी-कभी प्राकृतिक आपदाओं के कारण समाज में काफी परिवर्तन हो जाता है कभी-कभी मनुष्य के स्थानांतरण public transport होने से भी परिवर्तन होने लग जाते हैं। कभी-कभी समाज मेंं जब कोई बुराई व्याप्त हो जाती है तो उसमें सुधार लाने के लिए सामाजिक नियमों में परिवर्तन लाना पड़ता है।

सामाजिक परिवर्तन के कारण (reason of social changing)

सामाजिक परिवर्तन के कुछ कारण होते हैं जो निम्नलिखित हैं।

1-धार्मिक कारण (religious reasons)

सामाजिक परिवर्तन का एक मुख्य कारण धार्मिक कारण ही है क्योंकि कभी-कभी लोग धर्म के अनुसार अपने कार्य और व्यवहार को अच्छा बनाने का प्रयत्न करते हैं जिसके फलस्वरूप उन्हें अपने सभ्यता और संस्कृति में परिवर्तन लाना पड़ जाता है। क्योंकि जो समाज के लिए घातक सिद्ध होता है ऐसे व्यवहार और संस्कृति को धर्म स्वीकार नहीं करता है अतः धर्म के द्वारा उस संस्कार और संस्कृति में परिवर्तन आ जाता है।

2-आर्थिक कारण (commercial purpose)

सामाजिक परिवर्तन का एक कारण आर्थिक कारण भी है क्योंकि जब मनुष्य के पास धन संपत्ति इत्यादि अधिक हो जाते हैं तो वह अपने आप रहने सहने का तरीका भाषा और खानपान में बदलाव लाना शुरू कर देता है। आधुनिक युग में पैसों को बहुत ज्यादा महत्व है जिसके कारण सामाजिक परिवर्तन बहुत ही तेजी से होने लग जाता है।

3-मनुष्यों का स्थानांतरण (public transport)

मनुष्य के एक जगह से दूसरे जगह के आवागमन से सामाजिक परिवर्तन बहुत तेजी से होने लग जाता है। क्योंकि मनुष्य जब एक जगह से दूसरी जगह जाता है तो वह अपनी संस्कृति सभ्यता दूसरों को देता है और उस जगह की संस्कृति सभ्यता को अपनाना शुरू कर देता है जिसके कारण बहुत जल्द ही उसके व्यवहार बातचीत करने के तरीके खानपान पहनावा इत्यादि बदल जाते हैं।

4-प्राकृतिक आपदा (natural calamity)

प्राकृतिक आपदा सामाजिक परिवर्तन का बहुत बड़ा कारण है क्योंकि प्रकृति जब अपना खेल खेलती है तो वह सारा कुछ पलट के रख देती है फिर वहां इतना तेजी से बदलाव शुरू हो जाता है जिसकी कल्पना करना नामुमकिन है। प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़ ,भूकंप ,सुनामी ,आंधी ,तूफान इत्यादि होते हैं। जब प्राकृतिक आपदा मनुष्य पर हावी हो जाती है तो मजबूर होकर मनुष्य को उसके अनुरूप ढलना पड़ जाता है। जब ठंड की शुरुआत होती है तो अपने आप मजबूर होकर इंसान हो गर्म कपड़े और गर्म भोजन खाना पड़ता है। ऐसे ही प्राकृतिक आपदा जब अपना कहर ढा ती है तो इंसान मजबूर होकर उसके अनुकूल कार्य करने लग जाता है। अभी के टाइम में आप लोगों ने देखा की कोविड-19 वायरस ने कितना तेजी से सभी लोगों के जीवन में बदलाव लाया है। जिसने कभी भी मास्क देखा भी नहीं था सिर्फ फिल्मों और टीवी में डॉक्टर को लगाए हुए देखा था वह भी रोड पर मास्क पहन कर घूम रहे हैं। पता है यह प्राकृतिक आपदा की वजह से ही परिवर्तन हुआ है।

5-औद्योगिकीकरण (industrialization)

समाज में उद्योग धंधों में काफी बदलाव लाने में सक्षम रहा है क्योंकि उद्योग धंधों में सिर्फ पैसों को बल दिया गया है समाज का अस्तित्व और जो इसके मुख्य अंग है उनको बहुत ही कम महत्व दिया गया है। हम यह नहीं कह रहे कि औद्योगिकी के द्वारा समाज बिगड़ रहा है बल्कि यह भी एक समाज ही है जो एक परिवार की तरह फैक्ट्रियों में काम करता है और अपने जीवन यापन के लिए पैसे लेता है। परंतु इन जगहों पर धार्मिक कार्य बहुत ही कम होते हैं ज्यादातर आर्थिक कार्य ही पाए जाते हैं।

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