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सामाजिक प्रतिबंध किसे कहते हैं (what is the social restriction)

 सामाजिक प्रतिबंध किसे कहते हैं (what is the social restriction)

नमस्कार दोस्तों आप सभी का हमारे साइट पर बहुत-बहुत स्वागत है ,आप लोग दोस्तों हमारे साइड पर हिंदी में समाज के बारे में जानेंगे तो दोस्तों समाज में रहने के बाद हमारे मन में यह प्रश्न उठता है की सामाजिक प्रतिबंध क्या होता है इसका क्या अर्थ होता है ,और यह समाज में किस तरह से लागू होता है ,और लोग इसकी किस तरह पालन करते हैं, और किस तरह उल्लंघन करते हैं तो आइए दोस्तों नीचे हमारे लेख में हम सबसे पहले यह जानेंगे कि आखिर प्रतिबंध शब्द क्या होता है ,उसके बाद ही हम सामाजिक प्रतिबंध को समझ सकते हैं तो दोस्तों अपने मन के सभी सवालों का जवाब जानने के लिए हमारे पोस्ट को पूरा पढ़ें ।

प्रतिबंध किसे कहते हैं (what is the restriction)

 सामाजिक प्रतिबंध जानने से पहले दोस्तों हमें यह जानना जरूरी है कि प्रतिबंध का क्या तात्पर्य होता है इसका क्या अर्थ होता है। तो दोस्तों प्रतिबंध एक ऐसा शब्द है जो किसी भी कार्य को रोकने या मना करने का संकेत देता है। अर्थात प्रतिबंध शब्द के द्वारा किसी कार्य पर या सिस्टम पर लगाम लगाया जाता है,

सामाजिक प्रतिबंध की परिभाषा(difnation of social ristruction)

 सामाजिक प्रतिबंध की परिभाषा मैं आपको सरल शब्दों में बताना चाहता हूं, दोस्तों हमारे समाज में जिस कार्य को करने की इजाजत नहीं दी जाती है, या जिस कार्य को करने के लिए समाज अथवा समाज के लोग मान्यता नहीं देते उसे सामाजिक प्रतिबंध कहते हैं। दोस्तों सामाजिक प्रतिबंध समाज को अच्छी तरह सही सिस्टम में चलाने के लिए लागू किया जाता है।
सामाजिक प्रतिबंध के द्वारा समाज में रहने वाले लोगों को एक सुखमय जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है।

कुछ सामाजिक प्रतिबंधों के नाम(some neme of social ristruction)

 हम आपको बताएंगे की सामाजिक प्रतिबंध कौन कौन होते हैं। दोस्तों हर तरह का अपना अपना समाज होता है जिनकी अपनी अपनी मान्यताएं व प्रतिबंध होते हैं।
दोस्तों आप लोगों ने आज के जमाने में देखा होगा की लड़के  लड़कियां एक दूसरे से बिना मां बाप से इजाजत के बगैर प्रेम करने लगते हैं तथा शादी भी कर लेते हैं। तो दोस्तों मैं आपको बता दूं इस तरह की विवाह को समाज मान्य नहीं करता अर्थात यह विवाह समाज में प्रतिबंधित है फिर भी कानून ने इसे इजाजत दे दी है।
दोस्तों हिंदू धर्म में एक से अधिक शादियां प्रतिबंधित है। परंतु फिर भी लोग कर लेते हैं।
भाइयों आपने गांव में देखा होगा की औरतें मुंह पर पर्दा रखती हैं, और अगर वहां पर कोई लड़की जींस टॉप पहनकर घूमती है तो उस पर प्रतिबंध लगाया जाता है क्योंकि वहां का समाज इस तरह का पहनावा मान्य नहीं करता। तो दोस्तों मैं आशा करता हूं कि आप लोगों को यह समझ में आ गया होगा की सामाजिक प्रतिबंध क्या होता है।

सामाजिक प्रतिबंधों के उद्देश्य(purpose of social restrictions)

 समाज में अगर कोई सिस्टम पर रोक लगाया जाता है तो उसका कुछ ना कुछ उद्देश्य होता है, उसके कुछ ना कुछ फायदे होते हैं जिसे जानने के लिए आप लोग हमारे साइट पर बने रहे और पोस्ट को पूरा पढ़ें।

1-सामाजिक कुरीतियों का अंत(Indo of social evils)

भाइयों हमारे समाज में कुछ ऐसी कुरीतियां व्याप्त होती हैं जो मानव जाति के लिए कष्ट दाई होती है। जैसे बाल विवाह में बच्चे का विवाह 7 या 8 साल की उम्र में कर दिया जाता था, 7 और 8 वर्ष का बालक एक अबोध बालक होता है जिसे सही गलत का कोई भी ज्ञान नहीं होता है यहां तक की उससे विवाह का मतलब भी समझ में नहीं आता फिर भी इन कुरीतियों में जकड़े हुए इंसान उनकी शादियां कर देते हैं। और अंत में जब वह बालक बड़ा होता है तो उसे बताया जाता है की तुम्हारी शादी हो गई है और इस स्त्री के साथ तुम्हें अपना जीवन व्यतीत करना है। अतः वह लड़की अथवा लड़का एक दूसरे को नापसंद करते हुए भी एक दूसरे के साथ पति पत्नी बन कर रहने के लिए मजबूर हो जाता है। ऐसी ही तमाम कुरीतियां समाज में व्याप्त होती हैं जिनका वर्णन इस पोस्ट में हम ज्यादा नहीं कर सकते अतः आप को संक्षेप में बता देते हैं जैसे विधवा विवाह निषेध, सती प्रथा ,दहेज प्रथा इत्यादि कुरीतियां हमारे समाज में होती है। पता कुछ समाज सुधारकों के द्वारा यह बताया गया कि यह गलत है और इस पर प्रतिबंध लगाया गया जिसके कारण आज बाल विवाह लगभग समाप्त हो चुका है

2-एक अच्छा इंसान बनाता है(a good personality man)

 सामाजिक प्रतिबंध का सबसे बड़ा उद्देश्य यह होता है कि हम गलत रास्ते पर ना चले अतः गलत रास्ते पर चलने के लिए ही सामाजिक प्रतिबंध लगाया जाता है। दोस्तों सामाजिक प्रतिबंध एक इंसान को अच्छा कार्य करने की प्रेरणा देता है। समाज में होने वाले बुरे कर्मों पर प्रतिबंध लगाकर समाज में एक अच्छा रिवाज अपनाने के लिए प्रेरित करता है। और यह रिवाज एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में हस्तांतरित की जाती है जिससे कि हमारी आने वाली पीढ़ी भी हमारी तरह एक अच्छे रास्ते पर जाने के लिए तत्पर रहें। समाज में जिन विचारों या सिस्टम पर प्रतिबंध लगाया जाता है वह गलत अथवा बुरे कर्म होते हैं

3-समाज में एक अच्छी व्यवस्था कायम करना (To maintenan a Good order in socity)

सामाजिक प्रतिबंध का मुख्य उद्देश्य समाज की बुराइयों को समाप्त करके एक अच्छी व्यवस्था कायम करना होता है जिस व्यवस्था के द्वारा समाज को कोई आघात न पहुंचे। अतः पुराने नियम और कानून को सामाजिक दृष्टि से देखते हुए उन्हें प्रतिबंधित कर दिया जाता है और समाज में एक नया नियम व कानून लागू किया जाता है जो समाज के लिए अनुकूल होता है।

4-सामाजिक विघटन पर रोक  (stop social disintgration)

जब समाज में सामाजिक विघटन की परिस्थिति उत्पन्न होने लग जाती है तो उसको रोकने के लिए कुछ संस्थाओं और रीति-रिवाजों को प्रतिबंधित कर दिया जाता है जिसके कारण समाज विघटित ना हो सामाजिक संबंध बरकरार बनी रहे। जैसे बाल विवाह से हमारे समाज में अनेक बुराइयां व्याप्त होती थी तो उसे हमारे समाज के अनेक विद्वानों और समाज सुधारको के द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया। ऐसे ही समाज में जब समाज का कोई अंग समाज के लिए ही खतरा बन जाता है तो उस अंग को समाप्त कर देना ही अच्छा होता है जैसे यदि किसी पैर में सड़न पैदा हो जाए तो उस पैर को काटना ही उचित होता है।

सामाजिक प्रतिबंधों का पालन लोग करते हैं या नहीं

 मैं आप लोगों को पहले ही बता चुका हूं कि समाज में कोई ऐसा कानून व्यवस्था नहीं है जिसे दंडित करके लागू किया जा सके। परंतु समाज में जो सिस्टम या कानून लागू किया जाता है उसे कुछ लोग तो एक अच्छा सिस्टम समझ कर अपना लेते हैं। परंतु आपने देखा होगा कि समाज में कुछ ऐसे व्यक्ति भी होते हैं जो जिद्दी स्वभाव के होते हैं वह अपने मन का ही कार्य करेंगे अतः सामाजिक प्रतिबंधों का उल्लंघन करने पर उनका दंड यह होता है कि उन्हें समाज से निष्कासित कर दिया जाता है।
जैसे कि हमारे भारत में यह विधान है की कोई भी जाति की लड़की या लड़का हो सिर्फ अपने ही जाति में विवाह कर सकता है, परंतु कुछ लोग ऐसे होते हैं जो इन प्रतिबंधों के फल स्वरूप भी वह अलग जातियों में विवाह कर लेते हैं, और इसका खामियाजा उन्हें ही भुगतना पड़ता है, उन्हें समाज से निष्कासित कर दिया जाता है,  निष्कासित का मतलब किसी को भगाना या निकाल देना नहीं होता, दोस्तों गांव में उसके जाति के अथवा उसके घर परिवार के लोग उससे दूर रहने लग जाते हैं, उसके ना तो पानी पीते हैं और ना ही खाना खाते हैं, जिसके कारण उसे अपने आप में शर्मिंदगी महसूस होती है। यह है समाज के नियमों का उल्लंघन करने का दंड।

सामाजिक प्रतिबंधों का उल्लंघन करने पर लोगों को दंडित कैसे किया जाता है

 आप लोगों ने देखा होगा की संविधान एक कानून है जिसमें भारत में रहने वाले प्रत्येक आदमी वा उनके क्रियाकलापों का एक कानून व्यवस्था है। संविधान में मनुष्य के सभी क्रियाकलापों का सविस्तार वर्णन है की किस तरह कौन सा काम हमें करना है। परंतु फिर भी कुछ लोग जाने अनजाने में या पैसों की लालच में आकर या किसी कारणवश इन कानून के विरुद्ध कुछ कार्य कर देते हैं। जिसके कारण इन्हें दंडित किया जाता है उसके लिए दंड व्यवस्था बनाई गई है। जेल ,जुर्माना, प्रताड़ना इत्यादि दंड व्यवस्थाएं होती हैं।
परंतु दोस्तों समाज में ऐसी कोई दंड व्यवस्था नहीं है। दोस्तों मैं आपको बताना चाहूंगा की समाज में सामाजिक नियमों का उल्लंघन करने पर उन्हें भी दंडित किया जाता है परंतु समाज का दंड विधान कुछ अलग है, समाज में अगर कोई व्यक्ति सामाजिक नियमों का उल्लंघन करता है अथवा सामाजिक प्रतिबंधों को तोड़ता है, तो उसे समाज में बेजती सहनी पड़ती है। लोग उसका मजाक उड़ाने लग जाते हैं, तथा उसे किसी भी समाज में बुलाया नहीं जाता है, उसकी कोई भी जरूरत नहीं समाज का कोई भी व्यक्ति उसकी मदद नहीं करता है। इस तरह से समाज में दंड व्यवस्था बनाई गई है, जिसके डर के कारण लोग समाज के नियमों का पालन करते हैं, उन्हें डर रहता है कि अगर हम यह कार्य समाज के विरुद्ध करेंगे तो हमें समाज से अलग कर दिया जाएगा।
दोस्तों हमारी पोस्ट कैसी लगी आप लोग कमेंट करके जरूर बताना, आगे फिर मिलेंगे एक नई पोस्ट के साथ।

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