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रोजगार किसे कहते हैं (what is the the job in hindi)

रोजगार किसे कहते हैं तथा इनका समाज में क्या महत्व होता है (what is the the job and value in my society)

नमस्कार दोस्तों आप लोगों का हमारे साइट पर बहुत-बहुत स्वागत है दोस्तों आज हम एक ऐसे पॉइंट पर बात करेंगे जो सभी के जीवन में बहुत ही महत्व रखता है। दोस्तों रोजगार एक ऐसा साधन है जिसके द्वारा हम अपना जीवन का निर्वाह करते हैं और अपने जीवन और परिवार के हर जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हो पाते हैं। वैसे सीधे अर्थ में तो रोजगार का मतलब जो हमारी मेहनत का मूल्य मिलता है उसके द्वारा हम अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं तो उसे रोजगार कहा जाता है परंतु रोजगार सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि इसका अर्थ बहुत बड़ा होता है क्योंकि रोजगार कई तरह के होते हैं। तो दोस्तों रोजगार को समझने के लिए हमारे पोस्ट को लास्ट तक जरूर पढ़ें जिससे आपको समझ में आ जाएगा की रोजगार क्या होता है। हमारे जीवन में रोजगार बहुत ही महत्व रखता है क्योंकि बिना रोजगार के हमें धन की प्राप्ति नहीं हो पाती है और जिस मनुष्य के पास रुपए नहीं है उससे अपना जीवन यापन करने में तमाम कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

रोजगार के प्रकार (types of job)

 आपने देखा होगा कि हमारे समाज में कई तरह के रोजगार पाए जाते हैं उसमें से हम आपको step by step बताएंगे तो पहले हम रोजगार को तीन भागों में बांट देते हैं।

1-स्वरोजगार (self job)

 स्वरोजगार एक ऐसा रोजगार है जिसमें सिर्फ सारा जोखिम मालिक के ऊपर होता है क्योंकि इसमें लागत मालिक को ही लगाना पड़ता है और यदि लाभ होता है तो भी मालिक का ही होता है और यदि हानि होता है तो भी मालिक को ही सहन करना पड़ता है। अर्थात स्वरोजगार का शाब्दिक अर्थ ही अपना रोजगार है। जब आदमी अपना जीवन यापन करने के लिए कोई दुकान अथवा कोई ऐसा कार्य जिसमें सिर्फ उसी का जिम्मेदारी और जोखिम होता है उससे स्वरोजगार कहा जाता है स्वरोजगार कुछ निम्न प्रकार के होते हैं।
  1. चाट के ठेले
  2. किराना स्टोर
  3. ऑटो रिक्शा
  4.  बस सर्विस
  5. बाइक सर्विस सेंटर
  6. मैकेनिकल शॉप
  7. ढाबा
  8. सब्जी की दुकान 
  9. चाय की दुकान
  10. गुटखा तंबाकू की दुकने

2-सरकारी नौकरी (government job)

 दूसरा जो होता है वह होता है सरकारी नौकरी का रोजगार, इस रोजगार में आदमी को उसके योग्यता अनुसार सरकार उसे चुनती है तथा उससे कार्य लेती है और उसके बदले में उससे उसके कार्य के योग्यता अनुसार धन देती है और उस धन से वह अपना जीवन यापन करता है तो उससे सरकारी नौकरी कहा जाता है। सरकारी नौकरी में धन पर्याप्त मात्रा में मिल जाता है जिसके कारण सरकारी नौकरी वालों का जीवन ज्यादा ही सरल हो जाता है सरकारी नौकरी वालों की अपेक्षा स्वरोजगार वाले मनुष्य ज्यादा ही गिरी हालत में होते हैं उनके पास उतने पर्याप्त धन नहीं मिल पाता है परंतु सरकारी नौकरी में पर्याप्त धन मिल जाता है और इसमें अपना कोई जोखिम भी नहीं उठाना पड़ता है। सरकारी नौकरी में महीना में वेतन मिलता है और इस वेतन के द्वारा मनुष्य अपनी आजीविका चलाने में सक्षम होता है। सरकारी नौकरी में छुट्टी लेने पर तनख्वाह में कोई कमी नहीं होती है क्योंकि कर्मचारी कोई कारणवश अपने कार्य के लिए छुट्टी करता है और अपना कार्य करके फिर अपने ड्यूटी पर आ जाता है तो सरकार उसके तनख्वाह में कटौती नहीं करती है। इसमें जो भी लाभ अथवा नुकसान होता है वह सरकार का होता है और सारा जोखिम सरकार के ऊपर ही निर्भर होता है। कुछ सरकारी नौकरी के नाम निम्न प्रकार के होते हैं।
  1. पुलिस की नौकरी
  2. टीटी की नौकरी
  3. सरकारी डॉक्टर
  4. बिजली विभाग की नौकरी
  5. सरकारी कंपनियों के कर्मचारी
  6. सरकारी वकील
  7. बैंक कर्मचारी
  8. जज की नौकरी
  9. सरकारी टीचर की नौकरी

3-  स्ववेतन रोजगार (self salary job)

इस रोजगार में मनुष्य किसी के घर पर अथवा किसी के ऑफिस में कार्य करता है जिसके बदले में उसे तनख्वाह दी जाती है यह तनख्वाह उसे पहले ही बता दिया जाता है कि आपको इतने रुपए मिलेंगे और वह आदमी उसके पास बिना किसी डिग्री और बिना किसी योग्यता का प्रूफ दिए हुए कार्य करने लग जाता है और उसे उस कार्य के बदले में पैसे मिलने लग जाते हैं तो उसे स्वरोजगार कहा जाता है। स्ववेतन रोजगार में हम मालिक के आवश्यकता अनुसार ही कार्य कर पाते हैं और हमें उसी का पैसा मिलता है। इस रोजगार में सारा जोखिम मालिक का होता है जो हमें नियुक्त करता है। इस रोजगार में जितना भी कार्य करेंगे उसी का पैसा मिलता है इसमें अगर हम किसी कारणवश छुट्टी करते हैं तो उसका पैसा हमें नहीं मिल पाता है इसीलिए इसे स्ववेतन रोजगार कहा जाता है।
 स्ववेतन रोजगार कुछ इस प्रकार से होते हैं
  1. प्राइवेट कंपनी कर्मचारी
  2. ड्राइवर की नौकरी
  3. वॉचमैन की नौकरी
  4. सेक्रेटरी की नौकरी
  5. बैंकट मैनेजर
  6. शॉपिंग मॉल मैनेजर

हमारे समाज में रोजगार का क्या महत्व है(value of job in my society)

 हमारे समाज में रोजगार का बहुत ही महत्व होता है क्योंकि आजकल के युग में जनसंख्या वृद्धि के कारण बेरोजगारी इतनी भारी मात्रा में बढ़ती जा रही है जिसके कल्पना भी नहीं की जा सकती है। अतः मनुष्य को अपना जीवन यापन करना बहुत ही मुश्किल होता जा रहा है। इसलिए हमारे समाज में रोजगार का महत्व बहुत ही बढ़ता जा रहा है। जिस मनुष्य के पास रोजगार है वह अपनी हर जरूरतों को और अपने परिवार के जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हो सकते हो पाता है और जिसके पास कोई रोजगार नहीं है वह सिर्फ अपना टाइम पास करता है और अपनी जरूरतें पूरा करने के लिए बैंक से कर्ज लेता है और कर्ज को भी नहीं चुका पाता है और वह कर्ज के दलदल में डूबता हुआ चला जाता है और एक दिन उसे आत्महत्या करने का नौबत आ जाता है। इसलिए दोस्तों यह ध्यान रखना कि अगर आपको कोई ऐसी नौकरी अथवा ऐसा कोई रोजगार है जिसके द्वारा आप अपना परिवार और बच्चों का भरण पोषण कर सकते हैं तो आप सबसे किस्मत वाले इंसान हैं क्योंकि आधुनिक युग में बेरोजगारी बहुत बेहिसाब बढ़ती जा रही है।

बेरोजगार इंसान किसे कहते हैं(who is the jobless person)

 बेरोजगार का अर्थ सीधा-सीधा रोजगार का उल्टा का है अर्थात जिसके पास कोई पैसा कमाने का साधन अथवा कार्य नहीं है और वह खाली बैठा रहता है उसे बेरोजगार इंसान कहा जाता है। जब मनुष्य को उसके योग्यता अनुसार कार्य नहीं मिल पाता है और वह कोई भी कार्य नहीं कर पाता है तो उसे बेरोजगार कहा जाता है।

बेरोजगारी के प्रकार(types of unemployment)

 कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो कार्य करने के इच्छुक नहीं होते हैं वह खाली बैठना ही पसंद करते हैं उसे ऐच्छिक बेरोजगारी कहा जाता है। क्योंकि वह अपनी इच्छा अनुसार बेरोजगार रहना ही पसंद करते हैं इसलिए इन्हें अच्छी बेरोजगारी कहा जाता है। इसके अलावा यदि कोई व्यक्ति बाजार में चल रहे मजदूरी पर कार्य करने के लिए तैयार है फिर भी उसे कार्य नहीं मिल पा रहा है तो उससे अनैच्छिक बेरोजगारी कहते हैं।
जब बाजार में उतार चढ़ाव की स्थिति आती है अर्थात जब किसी सामान की मांग कम हो जाती है और कभी ज्यादा हो जाती है तो उससे मजदूर कभी बेरोजगार हो जाते हैं तो कभी रोजगार मिल जाता है उन्हें चक्रीय बेरोजगारी कहते हैं। जैसे कृषि कार्य। आईओ
कुछ बेरोजगारी ऐसी होती है जो मौसम के हिसाब से आती है इस बेरोजगारी में जैसे गर्मी ठंडी बरसात इसकी वजह से बेरोजगारी आ जाती है जैसे मान लीजिए जब सर्दी आती है तो जूस वाले ,आइसक्रीम वाले आदि तमाम लोग बेरोजगार हो जाते हैं तो इसे मौसमी बेरोजगारी कहते हैं।

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