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12 बेस्ट आरती संग्रह इन हिंदी 12 best aarti sangrah in Hindi

 12 बेस्ट आरती संग्रह इन हिंदी 12 best aarti sangrah in Hindi

नमस्कार मेरे प्रिय पाठको आज मैं इस आर्टिकल में आरती एवं आरती की विषयों में बहुत सारी बातें करने वाले हैं जो कि आपके बहुत कम आने वाली है तो आप इस आर्टिकल को पूरा जरूर पढ़ें।आरती को आरारती और निराजन भी कहते हैं आरती को पूजन के अंत में की जाती है आरती का उद्देश्य पूजन में  रह  गई त्रुटियों के पूर्ति के लिए की जाती है यदि आपने भगवान की पूजा की है उसमें कोई गलती हो गई है कोई कमी रह गई है ,तो उसी कमी को पूर्ण करने के लिए आरती की जाती है जो व्यक्ति भाव सहित आरती को देखता है सुनता है वह भगवान के परम पद को प्राप्त होता है ।और अपने पूर्वजों का भी उद्धार करता है आरती अपने इष्ट देव को मनाने के लिए भी किया जाता है आरती को आप भाव के सहित और आनंद विभोर होकर  करें अपने इष्ट देव के गुणों एवं साहस का व्याख्या गान के रूप में किया गया है , आरती का गायन करके भक्त आनंदित होते हैं और भगवान के प्रति उनके भक्ति में वृद्धि होती है

आरती करने का विधान ritual to perform aarti

आरती करने से पहले आरती करने का विधान जानना बहुत जरूरी है क्योंकि आप बिना आरती के विधान की जानकारी के बिना करोगे तो वह आरती संपन्न नहीं होगी।आरती को हमेशा खड़े होकर करना चाहिए आप जब भी आरती करें तो आरती में उपयोग होने वाले दीपक के बत्तियों की संख्या विषम होना चाहिए जैसे कि 1, 3,5,7 इस प्रकार के विषम संख्या के बत्तियों से आरती करें पांच बत्तियों से करने वाली आरती को पंच प्रदीप कहते हैं और इसका ही विधान ज्यादा है कपूर से भी आरती की जाती है आरती के समय शंख घंटा आदि बजाते हुए आरती करनी चाहिए आरती करते समय सर्वप्रथम भगवान की जो प्रतिमा है उनके चरणों में चार बार आरती घुमानी चाहिए उसके बाद दो बार भगवान के नाभि प्रदेश में आरती घूमनी चाहिए और एक बार भगवान के मुख मंडल पर आरती घूमनी चाहिए। उसके बाद सात बार पूरे शरीर पर आरती घूमनी चाहिए और अंत में अपने दाहिने तरफ से भूमि की परिक्रमा करके और भगवान को प्रणाम करके आरती को संपन्न किया जाता है 

1-गणेश जी की आरती Ganesh ji ki aarti

जय गणेश देवा।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।।
एक दंत दयावंत चार भुजा धारी।
मस्तक सिंदूर सोहे मूसे की सवारी।।
अंधन को आंख देत कोढिन को काया।
भजन को पुत्र देत निर्धन को माया।।
हार चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डू का भोग लगे संत करें सेवा।।
दीनन की लाज रखो संभू सुतवारी।
कामना को पूर्ण करो जग बलिहारी।।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।।

2-गणेश जी की नई आरती new aarti of Ganesh ji

पार्वती के पुत्र कहावत शंकर सूत स्वामी।
गजानंद गणनायक भक्तन के स्वामी।।
रिद्धि सिद्धि के मालिक मूषक असवारी
कर जोड़ विनती करते आनंद और भारी।।
प्रथम आपको पूजत शुभ मंगल दाता।
सिद्धि हुए सब कारज दरिद्र हट जाता।।
सूंडसुंडला इंद्र इंद्रला मस्तक पर चंदा।
कार्य सिद्ध कराओ काटो सब फंदा।।
श्री गणपति जी की आरती जो कोई नर गावे।
तब बैकुंठ परम पद निश्चित ही पावे।।
श्री गणेश जी को सभी देवताओं में श्रेष्ठ कहा गया है श्री गणेश जी की पूजा सबसे पहले की जाती है श्री गणेश जी सभी दुखों का हरण कर लेते है कोई भी शुभ काम करने से पहले श्री गणेश जी का पूजन और वंदन अवश्य करना चाहिए गणेश जी कार्य में आने वाली समस्त बाधा को दूर करते हैं इसलिए श्री गणेश जी को विघ्नेश्वर भी कहा जाता है गणेश जी रिद्धि और सिद्धि प्रदान करते हैं और अपने भक्तों के मार्ग में आने वाली सभी समस्याओं का तुरंत उपचार करते हैं श्री गणेश जी परम दयालु एवं शरणागत वत्सल है शरण में आए सभी जिओ का कल्याण करते हैं इसलिए इसलिए श्री गणेश जी की आरती बड़े प्रेम के साथ करना चाहिए।

3-हनुमान जी की आरती(hanuman ji ke aarti )

आरती हनुमान लला की

आरती की जय हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
जाके बल से गिरवर कापे।
रोग दोष जाके निकट न झाँपे।।
अंजनी पुत्र महा बलदई।
संतन के प्रभु सदा सहाई।।
दे बीरा रघुनाथ पठाये।
लंका जारी सिया सुधि लाए।।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई।
जात पवनसुत बार न लाई।।
लंका जारी असुर संघरे।
सियाराम जी के काज सवारे।।
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।
लाए संजीवन प्राण उभारे।।
पैठी पताल तोरि जम कारे।
अहिरावण की भुजा उखारे।।
बाएं भुजा असुर दल मारे।
दाहिने भुजा संत जन तारे।।
सुर नर मुनि आरती उतारे।
जय जय जय हनुमान उचारे।।
कंचन थार कपूर लौ छाई।
आरती करत अंजना माई।।
जो हनुमान जी की आरती गावे।
बसी बैकुंठ परम पद पावे।।
लंका विध्वंस कियो रघुराई।
तुलसीदास स्वामी आरती गई ।।
ज्ञान ध्यान रघुनाथ कला की।
आरती कीजे हनुमान जी लाला की।।
आरती की जय हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
हनुमान जी ज्ञानियों में सबसे आगे हैं और बुद्धिमानो में सबसे श्रेष्ठ है  और बल में परम बलशाली है हनुमान जी की कृपा जिस पर हो जाए वही धन्य हो जाता है हनुमान जी वानर के रूप में है लेकिन बानर नहीं हनुमान जी परम दयालु और निर्बल लोगो के सहायक है हनुमान जी का स्मरण करते हुए ही समस्त भय बाधा का  तत्क्षण निवारण होता है हनुमान जी का आरती जो व्यक्ति गाता है एवं प्रेम से सुनता है उससे रोग भय बाधा भूत प्रेत अज्ञानता  जैसे विकार कोशो दूर रहते है हनुमान जी की पूजा करने से बल, बुद्धि ,विद्या जैसे गुण सहज ही प्राप्त हो जाते है।

4-हनुमान जी के आरती का वीडियो Hanuman Ji ki Aarti ka video

आज मैं आप लोगों के सामने हनुमान जी की आरती का वीडियोलेकर आया हूं जिसे देखकर बहुत ही आनंद प्राप्त होता है। अतः आप लोग यह वीडियो जरूर देखें ताकि आपका भी मन श्री रामचंद्र और हनुमान जी के चरणों में लगे रज को प्राप्त करके अपना जीवन धन्य बनाए।

5-आरती श्री विष्णु जी की Aarti Shri Vishnu ji ki

ओम जय जगदीश हरे
ओम जय जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट क्षण में दूर करे।।
जो धावे फल पावे दुख बिनसे मन का।
सुख संपति घर आवे कष्ट मिटे तन का।।
मात पिता तुम मेरे शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा आस करूं किसकी।।
तुम पूरण परमात्मा तुम अंतर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर तुम सबके स्वामी।।
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी कृपा करो भरता।।
तुम हो एक अगोचर सबके प्राण पति।
किस विधि मिलूं दयामय तुमको मैं कुमति।।
दीनबंधु दुखहर्ता तुम रक्षक मेरे।
अपने हाथ उठाओ द्वार पड़ा तेरे।।
विषय विकार मिटाओ पाप हरो देवा।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ संतन की सेवा।।
तन मन धन सब है तेरा स्वामी सबकुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा।।
श्री जगदीश जी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी सुख संपति पावे।।
भगवान विष्णु परम दयालु और उदार स्वभाव के व्यक्तित्व है भगवान विष्णु अपने भक्तों का उद्धार करने के लिए बार-बार इस पृथ्वी पर अवतरित होते हैं भगवान विष्णु ही मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम है भगवान विष्णु श्री कृष्ण है और भगवान विष्णु अपने भक्त भक्त प्रहलाद को दर्शन देने के लिए खंभे से नरसिंह के रूप में प्रकट हुए भगवान विष्णु पूरे जगत के ईश्वर है इसलिए भगवान विष्णु का जगदीश कहते हैं भगवान विष्णु की पूजा करने से धर्म अर्थ काम मोक्ष सब सुकृत सहज ही प्राप्त हो जाते हैं भगवान विष्णु ही संसार के पालनकर्ता है अतः पूजा में भगवान जगदीश की आरती जरूर करनी चाहिए

6-आरती श्री रामचंद्र की Aarti Shri Ramchandra ji ki

आरती कीजे श्री रघुवर जी की।
सत चित आनंद शिवसुंदर की।।
दशरथ तनय कौशल्या नंदन।
सूर्य मुनि रक्षक दैत्य निकंदन।।
अनु गत भक्त भक्त उर चंदन।
मर्यादा पुरुषोत्तम वर की।।
निर्गुण सगुण अरूप रुपनिधि।
सकल लोक वन्दित विभिन्न विधि।।
हरण शोक भय दायक सब सिधि।
मायारहित दिव्य नर बरकी।।
जानकी पति सुराधीपति जगपति।
आखिल लोक पाताल त्रिलोक गति।।
विस्ववंद्य अनवंद अमित मति।
एक मात्र गति सचराचर की।।
शरणागत वत्सल व्रतधारी।
भक्त कल्पतरु वर अशुरारी।।
नाम तेल जग पावनकारी।
बानर सखा दीन दुख हर की।।
आरती कीजै श्री रघुवर जी की।
सत चित आनंद शिव सुंदर की।।

7-आरती श्री शिवजी की Aarti Shri shiv ji ki

जय शिव ओंकारा, प्रभु जय शिव ओंकारा।
ब्रम्हा विष्णु सदाशिव अर्धांगिनी धारा।।
एकनन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसासन गरुणासन वृषवाहन साजै।।
दो भुज चारु चतुर्भुज दस भुज अति सोहै।
तीनों रूप निरखते त्रिभुवन जग मोहै।।
अक्षमाला वनमाला मुंडमाला धारी।
चंदन मृग मद सोहे भाले शुभकारी।।
श्वेतांबर पीतांबर बाघाम्बर अंगे।।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ।।
करके मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धारी।
सुखकारी दुखहारी जग पालनहारी।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत आविवेका।
प्रणवाक्षर में सोभित ये तीनों एका।।
त्रगुण स्वामी जी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन स्वामी सुख संपति पावे।।
त्रिमूर्तियों में भगवान शिव को एक स्तंभ माना गया है
भगवान शिव के बिना कोई भी पूजा यज्ञादिक शुभ कर्म संपन्न नहीं होते ऐसा पुराणों में उल्लेख है भगवान शिव परम दयालु और करुणा के अवतार हैं इसलिए भगवान शिव को भोलेनाथ भी कहते हैं भगवान शिव ने सृष्टि के प्रारम्भ में जीवन का प्रचार प्रसार कराया इस लिए उन्हें आदिदेव भी कहते है आदि का अर्थ है प्रारम्भ जिसके उपरांत इनका एक नाम आदिश भी पड़ा भगवान शिव का पूजा करने के लिए सोमवार का दिन अच्छा माना जाता है सोमवार के दिन कन्याएं अच्छा वर पाने के लिए भगवान शिव का पूजन करती है और उन्हें मनोवांछित वर की प्राप्ति होती है

8-आरती श्री दुर्गा जी की( Aarti Shri Durga ji ki)

जय अम्बे गौरी
जय अंबे गौरी मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी।।
मांग सिंदूर विराजत टीको मृग मद को।
उज्जवल से दो नयना चंद्र बदन निको।।
कनक समान कलेवर रक्तांबर राजै।
रक्त पुष्प की माला कंठन पर साजे।।
केहरि वाहन राजत खड्ग खप्पर धारी।
सुर नर मुनि जन सेवत तिनके दुख हारी।।
कानन कुंडल शोभित नशाग्रे मोती।
कोटिक चंद्र दिवाकर राजद सम ज्योति।।
शुंभ निशुंभ बिदारे महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती।।
चंड मुंड संहारे शोणित बीज हरे।
मधु कैटभ दोउ मारे सुर भयहीन करें।।
ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी तुम शिव पटरानी।।
चौसठ योगिनी गावत नृत्य करत भयरू।
बाजत ताल मृदंगा अरु बाजत डमरू।।
तुम ही जग की माता तुम ही हो भरता।
 भक्तन की दुख हर्ता सुख संपति कर्ता।।
भुजा चारि अति शोभित वरमुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत सेवत नर नारी।।
कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती।
मलकेतु में राजत कोटि रतन ज्योति।।
Ma अंबे की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी सुख संपति पावे।।

9-आरती श्री लक्ष्मी जी की (aarti sri Lakshmi Ji ki)

तुमको निशदिन सेवत हर विष्णु विधाता।।
उमा रमा ब्रह्माणी तुम ही जग माता।
 सूर्य चंद्रमा ध्यावत नारद ऋषि गाता।।
दुर्गा रूप निरंजनी सुख संपति दाता।
 जो कोई तुमको ध्यावत रिद्धि सिद्धि पाता।।
तुम पताल निवासिनी तुम ही शुभदाता।
कर्मप्रभाव प्रकाशिनी भवनिधि की त्राता।।
जिस घर में तुम रहती सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता मन नहीं घबराता।।
तुम बिन यज्ञ न होवे वस्त्र न कोई पाता।
खान पान का वैभव सब तुमसे आता।।
शुभ गुण मंदिर सुंदर क्षीरोदधि जाता।
रत्न चतुर्दश चतुर्दस तुम बिन कोई नहीं पाता।।
महालक्ष्मी जी की आरती जो कोई नर गाता।
उर आनंद समाता पाप उतर जाता।।
ओम जय लक्ष्मी माता मैया जय लक्ष्मी माता

10-आरती श्री सरस्वती जी की(aarti sri saraswati ji ki)

जय सरस्वती माता
जय सरस्वती माता मैया जय सरस्वती माता।
सद्गुण वैभव शालिनी त्रिभुवन विख्याता।।
चंद्रवादनि पद्मासिनी द्युति मंगलकारी ।
सोहे शुभ हंस सवारी अतुल तेज धारी।।
बाएं कर में वीणा दाएं कर माला।
शीश मुकुट मणि सोहै गल मोतियन माला।।
देवी शरण जो आए उनका उद्धार किया ।
 पाठि मंथरा दासी रावण संघार किया।।
विद्या ज्ञान प्रदायिनी ज्ञान प्रकाश भरो।
  मोह अज्ञान तिमिर का जग से नास करो।।
धूप दीप फल मेवा मां स्वीकार करो।
 ज्ञानचक्षु दे माता जग निस्तार करो।।
मां सरस्वती की आरती जो कोई जन गावे।
 हितकारी सुखकारी ज्ञान भक्ति भावे पावे पावे।।

11-आरती कुंज बिहारी जी की(aarti kunj bihari ki)

आरती कुंज बिहारी की गिरधर कृष्ण बिहारी की।
गले में वैजयंती माला बजावे मुरली मधुर बाला।।
श्रवण में कुंडल झलकाला नंद के आनंद नंदलाला।
गगन में अंग कांति काली राधिका चमक रही आली।।
लतन में ठाड़े बनवाली भ्रमर सी अलक।
चंद्र सी झलक ललित छवि श्यामा प्यारी की।।
कनकमय मोर मुकुट बिलसै देवता दर्शन को तरसे।
गगन सों सुमन बहुत बरसै बजे मुरचंग मधुर मृदंग।।
ग्वालिनी संग अतुल रति गोप कुमारी की
जहां से प्रकट भई गंगा कलुष कल हारिणी श्री गंगा।
स्मरण से होत मोह भंगा बसी शिव शीश जटा के बीच।।
हरै अध कीच चरण छवि श्री बनवारी की
चमकती उज्ज्वल तट रेनू बजा रहे वृंदावन बेणू।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू हसत मृदु मंद चांदनी चंद्र।।
कटत भव फंद टेर सुनो दिन भिखारी की।
आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।।

12-आरती श्री काली जी की (‌Aarti sri kali ji ki,)

अंबे तू है जगदंबे काली जय दुर्गे खप्पर वाली।
तेरे ही गुण गाए भारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।।
माता तेरे भक्त जनों पर भीड़ पड़ी है भारी।
दानव दल पर टूट पड़ो मां करके सिंह सवार।‌।
सौ सौ सिंघो से बलशाली अष्ट भुजाओं वाली
दुखियों के दुख को निवारती।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती।।
मां बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता ।
पूत कपूत सुने है पर ना माता सुनी कुमाता।।
सब पर करुणा दरसाने वाली अमृत बरसाने वाली।
दुखियों के दुख को निवारती
 ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती
नहीं मांगते धन और दौलत ना चांदी ना सोना
 हम तो मांगे मां तेरे मन में एक छोटा सा कोना
सबकी बिगड़ी बनाने वाली लाज बचाने वाली
साथियों के साथ को संवारती
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती

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