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5 best heart touching love story in hindi | 5 बेस्ट हार्ट टचिंग लव स्टोरी हिंदी में

5 best heart touching love story in hindi 5 बेस्ट हार्ट टचिंग लव स्टोरी हिंदी में 

आज के लेख में हम ऐसे heart touching love story के बारे में पढ़ेंगे , जिसको पढ़ने के बाद आपके आंखों में भी आंसू आ जाएंगे। दोस्तों कभी कभी अपने जीवन में भी यह टाइम आता है कि हमें किसी अनजान लड़की या लड़के से अचानक दिल आकर्षित हो जाता है। दोस्तों अगर आपको लव स्टोरीज पढ़ना अच्छा लगता है या आपने कभी अपने जीवन में किसी लड़की से प्यार किया है तो अवश्य ही हमारी कहानियां पढ़कर आपकी आंखों में आंसू आ जाएंगे। हमारे वेबसाइट पर आपको अनेक तरह की प्रेम कहानियां पढ़ने को मिलेंगी। दोस्तों यह कहानियां हमें पुराने मित्र और दोस्तों की याद दिलाती है, इन कहानियों को पढ़कर आपके भी दिल में एक मीठी सी मुस्कान आ जाएगी। दोस्तों इस मुस्कान को खोने मत दे क्योंकि हम विवाह के साथ अपने पर्सनल लाइफ में व्यस्त हो जाते हैं हम अपने पुराने मित्रों और प्यार को भूल जाते है।जिनके साथ हम पढ़ते थे ,खेलते थे ,और प्यारी प्यारी बातें करते थे।
  • मेरी पहली मोहब्बत real life true love story in hindi
  • स्कूल की प्रेम कहानी School love story in Hindi
  • मेरी अधूरी प्रेम कहानी my uncomplete love story in Hindi
  • गांव की पहली अधूरी प्रेम कहानी uncomplete love story in vilege Hindi
  • मेरी और मेरे बॉयफ्रेंड की प्रेम कहानी boyfriend love story in my school hindi

1-मेरी पहली मोहब्बत (real life true love story in Hindi)

नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम वैभव है, मेरी उमर बीस साल की है,आज मैं आप लोगों के साथ अपना पर्सनल लव की स्टोरी आप लोगों के साथ शेयर करने जा रहा हूं, दोस्तों मैं राजस्थान के एक छोटे से गांव में रहता हूं, हमारे साथ हमारे मम्मी पापा, दादा दादी और छोटे भाई और एक बहन रहती है। भाइयों और बहनों में मैं सबसे बड़ा हूं।
मैं अपने घर से लगभग 5 किलोमीटर दूर एक स्कूल में पढ़ता था, इसलिए हमें स्कूल एक साइकिल से जाना पड़ता था, हमारे साथ हमारे और भी दोस्त जाते थे, स्कूल जाते समय हमें एक गांव के बीच में से होकर जाना पड़ता है।एक दिन मैं स्कूल से पढ़कर अपने घर लौट रहा था।

जब उस गांव में पहुंचा तो अचानक कुछ बच्चे तेजी से शोर मचाते हुए मेरी साइकिल के आगे आ गए, मेरी साइकिल अनियंत्रित हो गई और मैं सड़क पर गिर गया, मेरी सारी किताबें बिखर गई, वहां पर सड़क के किनारे एक लड़की खड़ी थी ,जो मुझे देख कर जोर जोर से हंसने लगी, जब मैंने अपनी नजर उसकी तरफ घुमाई तो देखा एक लड़की जिसकी उम्र लगभग17 साल की थी। उसका चेहरे का रंग गोरा था और गोल होने के कारण चांद के जैसा प्रतीत हो रहा था, उसके ब्राउन कलर के बाल कमर तक लटक रहे थे, उसकी काली आंखें मेरी नजरों से मिली तो ऐसा लगा जैसे मेरे दिल पे तीर चला रही हो, यह हमारा पहला अवसर था जो मैंने किसी एक अनजान लड़की से अपनी नजरे मिलाई थी,
 उसे देख कर हमारे दिल में एक अजीब सी धड़कन होने लग गई, वह धड़कन ना खुशी की थी और ना ही किसी दुख की, हमारे जीवन मैं इस तरह से पहली बार हुआ था। मैं चुपचाप उठा और अपने किताबे उठाई, और मिट्टी को झाड़ते हुए अपने साइकिल को उठाया और चल दिया, जब मैं घर पहुंचा तो हाथ में मुंह धोकर खाना खाया, फिर दोस्तों के साथ घूमने निकल गया, रात में जब मैं सोने के लिए अपने बिस्तर पर गया तो बहुत रात तक नींद नहीं आ रही थी ,और बार-बार उस लड़की का चेहरा मेरी आंखों के सामने आ जाता था, मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मुझे क्या करना चाहिए ,क्या नहीं करना चाहिए ,मुझे बहुत देर रात को नींद आया और सुबह नींद खुलते ही उसी का चेहरा आंखों के सामने छाने लगा। दूसरे दिन जब मैं स्कूल से पुनः वापस आ रहा था तो उसी जगह उस लड़की को खड़े हुए देखा, उसे देखते ही मेरी आंखें उसके चेहरे के ऊपर आकर रुक गई जैसे कोई प्यासा व्यक्ति पानी को पीकर अपनी प्यास बुझा रहा हो। देखते ही देखते मैं कुछ दूर आगे निकल गया, और वह लड़की मुझे दूर तक जाते हुए देखती रही, धीरे-धीरे हम दोनों का प्रतिदिन का यही कार्य होने के कारण जैसे एक पहचान सी बन गई थी बन गई थी, परंतु उससे कुछ कहने का अवसर नहीं मिल पा रहा था क्योंकि वह गांव में अपने घर के पास खड़ी रहती थी और वहां पर खड़े होकर उससे बात करना मैंने उचित नहीं समझा, किसी दिन स्कूल की छुट्टी हो जाती है तो उस दिन पूरा दिन मेरा दिल नहीं लगता था और एक बेचैनी सी मन में बनी रहती थी।
दोस्तों सच्चा प्यार एक ऐसा प्यार होता है जो मुंह से कुछ ना कहते हुए भी आंखें और होंठ सब कुछ कह देते हैं उसी तरह हमारे साथ भी हुआ, एक दिन जब मैं स्कूल जा रहा था तो वह अपने घर के पास खड़ी थी और मुझे देख कर उसके होठों पर हल्की सी मुस्कान आ गई, उससे मुस्कुराते देख मेरे भी होठों पर थोड़ी सी मुस्कान सी आई और मेरा दिल और जोरो से धड़कने लग गया, स्कूल जाकर मेरा पढ़ाई में बिल्कुल भी जी नहीं लग रहा था, स्कूल की छुट्टी हुई तो मैं जल्दी से अपनी साइकिल निकाल कर चल दिया, इस प्यार के बारे में हमारे साथ पढ़ने वाले दोस्तों को भी पता चल चुका था, मेरा जी कर रहा था कि मैं उस लड़की से कुछ बातें करूं परंतु मुझे यह असंभव दिखाई दे रहा था क्योंकि मैंने अपने जीवन में कभी भी कोई अनजान लड़की से बात नहीं की थी, मेरे मन में एक विचार आया क्यों ना उसे एक लव लेटर दे दूं जिससे मैं अपने दिल की बात उससे कह सकूं। इस कार्य में हमारे दोस्त भी हमारी मदद करने के लिए तैयार हो गए, दूसरे दिन में स्कूल से छुट्टी होने पर बाजार गया और एक अच्छा पेन खरीदा, जिसे केवल लव लेटर लिखने के लिए ही खरीदा था। शाम को घर आकर मैंने रात में पढ़ने के बहाने छत पर लैंप जला कर बैठ गया, और हमारे दिल में जो भी बातें उमड़ रहे थे। मैंने पत्र में लिख दिया, और अच्छी तरह से फोल्ड करके अपने एक घनिष्ठ मित्र को दे दिया, वह उस ले जाकर उस लड़की के हाथ में चुप चाप पकड़ा दिया। कई दिन बीत गए पर उस पत्र के जवाब में कोई पत्र उसने नहीं भेजें, मुझे ऐसा लगा जैसे सिर्फ मैं ही उसको पसंद करता हूं, परंतु फिर भी दिल यह मानने को तैयार नहीं होता था, कि वह मुझसे प्यार नहीं करती। कुछ दिन ऐसे ही बीत गया, एक दिन हमारे गांव के एक दोस्त की शादी थी, मैं भी बरात जाने के लिए नए नए कपड़े पहना और तैयार होकर गाड़ी में बैठ गया, वहां पहुंचा तो पानी पीकर थोड़ा बैठ गया। मैंने देखा कि एक लड़की गुलाबी रंग का ड्रेस पहन कर जा रही थी।, मैंने ध्यान से देखा तो” यह क्या !यह तो वही लड़की है जिसे मैं अपनी गर्लफ्रेंड मान चुका था। परंतु मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि यह लड़की यहां आ सकती है, क्योंकि उसका गांव तो काफी दूर है। उसे देख कर मेरे मन में खुशी का ठिकाना ना रहा मैंने सोच लिया आज कुछ भी हो इससे बात करके ही रहूंगा, मैं देख ही रहा था उसको, तभी वह पीछे की तरफ मुड़ी और उसकी नजर मेरे ऊपर पड़ गई, जब हम दोनों की नजरें मिली तो वह थोड़ी सी मुस्काई और मैं भी थोड़ा सा मुस्कुराया।
 इस समय हमारे सभी दोस्त खाने पीने में व्यस्त थे, क्योंकि उन्हें और इस से मतलब नहीं है सिर्फ अच्छा अच्छा खाने को मिल गया वही वह पहुंच जाते थे, मुझे भी अवसर बढ़िया मिल गया ,मैंने उस से नजरें मिलाते हुए पंडाल के बाहर की तरफ इशारा किया, उसके बाद में मैं पंडाल के बाहर जाकर उसका इंतजार करने लग गया, कुछ देर बीत गया तो मुझे शायद मिलने की बहुत जल्दी थी, इसलिए लग रहा था कि वह बहुत देर कर रही है, लगता है वह नहीं आएगी, परंतु कुछ ही देर बाद वहां पर मेरे सामने आकर खड़ी हो गई मेरी धड़कन और तेज तेज धड़कने लगी, मेरी खुशी का ठिकाना ना रहा यह मेरा पहला अवसर था ,जो अपनी जिंदगी में एक लड़की से प्यार की बातें करने जा रहा था ,वह चुपचाप मेरे सामने खड़ी थी, हम दोनों के मुंह से कुछ आवाज नहीं निकल पा रहा था, बहुत हिम्मत करने के बाद में मैं बोला क्या नाम है आपका, वह लड़की अपना नाम “निशा” बताई, यह सुनकर मैं बोला बहुत अच्छा नाम है मैं वैभव “हाय! बोलते हुए मैंने अपना हाथ आगे बढ़या तो उसने भी अपना हाथ मेरे हाथों में पकड़ा दिया मैंने उसके हाथ पर किस कर लिया वाह धीरे से मुस्कुराई उसके बाद हम दोनों करीब 2 घंटे तक बातें करते रहे। मैंने उससे पूछा कि वह यहां कैसे आई ,तुम उसने जवाब दिया कि वह शादी उसकी सहेली का हो रहा है, उसके पास मोबाइल फोन नहीं था ,इस कारण मैं उसका नंबर नहीं ले सका परंतु अपना नंबर से दे दिया था। कुछ देर बाद वह जाने के लिए उत्सुक हो गई वह बोली उसकी मम्मी भी यहां आई हुई है जो उसे देख लेगी तो ठीक नहीं होगा, और हम दोनों एक दूसरे के गले से लिपट गए और उसके माथे पर मैंने एक प्यारी सी किस किया , उसे छोड़ने का मेरा दिल नहीं कर रहा था ,पर परिस्थित ठीक ना होने के कारण छोड़ना पड़ा,वह समय-समय पर वह किसी के मोबाइल से कॉल करती थी, और हम दोनों प्यार भरी बातें किया करते। 
लगभग 2 साल तक ऐसे ही चलता रहा फिर घर वालों ने मेरी शादी करने का प्लान बनाया, वह लड़की जिसे मैं प्यार करता था वह अलग कास्ट की थी जिसके कारण मैं अपने दिल की बात अपने माता-पिता को नहीं बता सका क्योंकि मुझे पता था कि माता-पिता हमारे प्यार को स्वीकार नहीं करेंगे। और यदि हम दोनों भाग कर शादी कर लेते हैं ,तो इससे समाज में हमारा और हमारे माता-पिता का सिर झुक जाएगा। यह सोच कर मैंने और “निशा “ने अपने माता-पिता के इज्ज़त और सम्मान के लिए अपने प्यार का बलिदान दे दिया। हम दोनों ने माता-पिता के द्वारा पसंद किए हुए विवाह को स्वीकार कर लिया । परंतु वह मीठी याद आज भी हमारे दिल में चिराग की तरह जल रही है, आज भी जब कभी कभी हम दोनों मिलते हैं तो बहुत ही अच्छा लगता है और बहुत सारी बातें भी करते है।
दोस्तों यह थी हमारी प्रेम कहानी , जो मैंने आप लोगों के साथ शेयर किया।आप लोगों को कैसा लगा हमें कमेंट करके जरूर बताएं।

2-स्कूल की प्रेम कहानी हिंदी में (school love story in Hindi)

गुड इवनिंग फ्रेंड्स, इस कहानी में मैं अपनी एक बीती प्रेम कहानी सुनाने जा रहा हूं, मेरा नाम चिराग है ,उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूं, मेरा घर एक छोटे से गांव में है , परंतु मैं पढ़ने के लिए लखनऊ में रहता हूं, मैं हॉस्टल में रहना पसंद नहीं करता था इसलिए मैं एक रूम लेकर अपने दोस्तों के साथ रह रहा था, मेरे पिताजी एक सरकारी टीचर है,मेरे पिताजी कहीं ना कहीं से पैसे इकट्ठा करके मेरी जरूरतों को पूरा करते थे।तो चलिए देर ना करते हुए सीधे प्वाइंट पर आता हूं। दोस्तों जिस समय किए कहानी आप लोगों को सुनाने जा रहा हूं उस समय हमारी उम्र मात्र 16 साल की थी मैं नवी क्लास में पढ़ रहा था। मैं पढ़ने लिखने में पहुंच ज्यादा तेज नहीं था।


इसलिए मैं क्लास में सबसे पीछे बैठता था, हमारे साथ के जो दोस्त हैं पढ़ने में बहुत ही तेज है जिसके कारण वह सबसे आगे बैठते थे और सब से बोलना चालना का लगा रहता था, परंतु मैं क्लास में सबसे बाद में आता था और सबसे पीछे जाकर बैठ जाता था जिसके कारण कोई मुझसे जल्दी बात भी नहीं करता था, हमारे साथ के जो दोस्त थे उनके दो दो तीन तीन गर्लफ्रेंड थी परंतु हमारे पास एक भी गर्लफ्रेंड नहीं थी इसी बात का मजाक उड़ा कर मेरे सभी दोस्त मुझे चिढ़ाते रहते थे पर मैं उन सब की बातों को बुरा नहीं मानता था मुझे इसे लड़की के पीछे भागना उसके आगे पीछे लगे रहना अच्छा नहीं लगता था, इस कारण से सभी बच्चे मेरा मजाक उड़ाते रहते थे। कुछ दिनों बाद मेरी क्लास में एक नई लड़की का एडमिशन हुआ, उसका नाम पूजा था वह लड़की गोल मुंह की और गोरे रंग की थी, देखने में वह मेरे लिए परी से कम नहीं थी, लड़कियां तो उसकी तरह बहुत थी परंतु उसका हर एक अंदाज अलग तरह का था। मेरे क्लास में जो और लड़कियां थी वह घमंडी स्वभाव की थी वह सिर्फ उन्हीं लड़कों से बात करती थी जो उनमें रुचि रखते थे उनके आगे पीछे रहते थे, परंतु वह लड़की बहुत सुंदर स्वभाव की थी, जिस तरह से वह चेहरे से खूबसूरत थी उसी तरह अपने स्वभाव और आदत से भी। 

सीधे स्वभाव होने के कारण कुछ लड़के उसे परेशान भी करते थे। परंतु वह चुपचाप रह जाती थी। वह लड़की पढ़ने में बहुत तेज थी जिसके कारण बस 15 दिन में क्लास टीचर ने उसे क्लास मॉनिटर बना दिया। मॉनिटर बनते ही क्लास में जितने शरारती बच्चे थे उनकी सब की अकल ठिकाने आ गई। उस लड़की की आदत और व्यवहार हमारे दिल को छू गई, कभी-कभी मेरा भी मन करता था, कि हमारी एक गर्लफ्रेंड हो हम भी उससे प्यार भरी बातें करें परंतु मुझे किसी लड़की के आगे पीछे घूमना और उनके पीछे पैसा बर्बाद करना अच्छा नहीं समझता था,

 एक दिन टीचर ने कुछ सवाल हल करने के लिए दिए, सभी बच्चों का सवाल हल हो गया परंतु मैं गणित में कमजोर था इसलिए हमारा सवाल हल नहीं हो पाया, जब कॉपी जमा करने के लिए वह लड़की मेरे पास आई, और खाली पेज देखकर बोली, अब तक तुम्हारा काम पूरा नहीं हुआ? मैंने इशारे में नहीं बोल दिया, वह लड़की वहीं पर मेरे बगल में बैठ गई और मेरा कॉपी लेकर जल्दी-जल्दी सारे सवाल हल कर दिया और लेकर चली गई। उसके बाद जब लंच हुआ तो रोटी खाने के बाद बाहर पार्क में मेरे पास आई, और बोली तुम पढ़ाई पर ध्यान क्यों नहीं देते?क्लास में सबसे पीछे क्यों बैठते हो?मेरे पास इन सब सवालों का कोई जवाब नहीं था, वह बोली, कल से तुम मेरे पीछे वाली सीट पर बैठोगे। मॉनिटर होने के नाते मैं इनकार भी नहीं कर सकता था। दूसरे दिन में डरते डरते उसके पीछे वाली सीट पर बैठ गया।
आज तो मेरे दोस्त मेरा और भी मजाक बनाने वाले थे, जब भी खाली टाइम मिलता वह गणित के बारे में समझाती थी, इस वजह से हमारे सारे दोस्त मुझसे और भी चिढ़ने लग गए, धीरे-धीरे हम लोग एक दूसरे के साथ बातें करते थे और एक दूसरे के करीब आते गए, स्कूल छुट्टी होने के बाद में हम दोनों एक साथ निकलते थे और बाजार जा कर आइसक्रीम और पिज्जा खाकर फिर अपने घर जाते थे। धीरे धीरे हम दोनों गहरे दोस्त बन गए, और यह दोस्ती का प्यार में बदल गई हमें पता भी ना चला, हम दोनों अब पूरी तरह से प्यार की बातें करने लगे थे, एक दिन जब मैं अपने घर आ रहा था तो वह बोली की मुझे भी अपने घर घुमाने ले चलो गांव के लोग मुझे बहुत अच्छे लगते हैं ,उनका सीधा स्वभाव सादा विचार और सरल जीवन बहुत ही अच्छा लगता है। मैं उसके मन की बात समझ चुका था कि वह क्या कहना चाहती है, अतः मैं भी चलने के लिए तैयार हो गया जब हम दोनों घर पहुंचे तो उसने एक बहू की तरह मम्मी पापा का पैर छुआ ,जिससे वह लोग बहुत दिन हुए उसके आदत और व्यवहार बातचीत करने के ढंग से हमारे घर वाले बहुत प्रभावित हुए और उसे अपनी बहू मान चुके मैंने भी पूजा से कह कर उसके मम्मी पापा को शादी के लिए मना लिया था ,और हम दोनों की शादी हो गई हम दोनों विवाह के पवित्र बंधन में बंध गए और हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत खुशी से हैं इस समय हमारे एक बच्चा भी है जो 1 साल का हो चुका है उसका नाम” देव “है।
दोस्तों कैसी लगी हम दोनों की लव स्टोरी आशा करता हूं ,अच्छी लगी होगी और भगवान से प्रार्थना करूंगा कि आप लोगों को भी ऐसा ही प्यार मिले तो संपूर्ण जिंदगी खुशी पूर्वक बीते।

3-मेरी अधूरी प्रेम कहानी (my uncomplete love story in Hindi)

नमस्कार दोस्तों, आप लोगों को आज मैं अपने लव स्टोरी बनाने जा रहा हूं ,जो हमारे दिल में अभी भी एक मीठी सी याद बनकर प्रकाशमान  है, दोस्तों प्यार करना कोई गुनाह नहीं है, परंतु प्यार करके दुनिया के और समाज के डर के कारण पीछे हटना सबसे बड़ा गुनाह है क्योंकि
मोहब्बत नाम है गम का शुरू आंखों से होती है। किया पैदा इसे दिल ने खत्म सांसो पर होती है।
मोहब्बत एक ऐसा चिराग है जो दिल में एक बार चल जाए तो दुनिया की कोई ताकत उसे बुझा नहीं सकती दुनिया भले ही हमें चहरदीवारों में जकड़ दे परंतु सच्ची मोहब्बत कभी खत्म नहीं होती है, कुछ इसी तरह मेरी भी कहानी है जो मैं आप लोगों के साथ शेयर करने जा रहा हूं।
मैं उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूं ,परंतु मैं और मेरे पापा और मेरी मम्मी मुंबई में रहते हैं, मुंबई में मेरे पापा की अपनी फ्लैट है ,उनका वहां पर काम चलता है, मैं भी मुंबई में ही एक कॉलेज में पढ़ता था मेरा नाम “संदीप “है ,और मेरी उम्र 22 साल की है। मैं अपने मम्मी पापा का अकेला बेटा हूं। स्कूल से जब मैं पढ़ कर घर आता था, तो अपने छत के बालकनी पर खड़े होकर शाम की ठंडी हवा लेने में मुझे बहुत मजा आता था। अभी तक हमारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं थी, क्योंकि ऐसी कोई लड़की मिली ही नहीं जिसकी तरफ हमारा दिल आकर्षित हो। अचानक एक दिन जब मैं बालकनी में बैठा हुआ था, तो मुझे सामने के फ्लैट में बालकनी में एक लड़की दिखाई थी। उसका कद लगभग 5 फुट का था, ना बहुत ज्यादा मोटी थी, ना बहुत ज्यादा पतली थी, गोरे रंग  गोल मुंह की, ब्लैक सूट में वह एकदम परी सी प्रतीत हो रही। वह लड़की और उसके माता पिता उस फ्लैट में किराए पर अभी जल्दी ही आए थे, मम्मी पापा पापा को बात करते सुना तो पता लगा कि उस लड़की के पापा का हॉस्पिटल में कोई सरकारी नौकरी है, जिससे उनका तबादला यहां पर हुआ था, उस लड़की को देखकर मेरा दिल उसकी तरफ खींचा चला जा रहा था, मैं प्रतिदिन अपनी बालकनी पर खड़ा होकर एकटक उसे लड़की को देखता रहता था। वह लड़की मेरे लिए बहुत खास बन चुकी थी, उसे देख कर मेरा जी नहीं भरता था। मेरा दिल उससे कुछ बात करने को करता था। एक दिन वह अवसर आ ही गया,
 उसके मम्मी पापा का मैरिज एनिवर्सरी था इसलिए वह हमारे घर भी बुलाने आई थी उसने गेट पर बेल बजाया तो गेट खोलने के लिए मैं गया जब मैंने गेट खोला तो देखा वह लड़की मेरे सामने खड़ी थी ,मेरी आंखें चमचमा उठी आज मैंने उसे इतनी नजदीक से देखा था, वह बहुत ही खूबसूरत लग रही थी, और मेरा दिल उसकी खूबसूरती का गुलाम हो गया, उसने मुझे “हाय” किया और बोली अंकल आंटी को भेज दो, आज मेरी मम्मी पापा का मैरिज एनिवर्सरी है मैंने मजाक में कह दिया मैं नहीं आ सकता क्या वह हंसने लग गई ,और बोली क्यों नहीं उसके बाद वह अपने घर चली गई, धीरे-धीरे बालकनी से भी हमारी थोड़ी मजाक भरी बातें शुरू हो गई एक दिन उसने अपने बालकनी से मुझे अपने घर आने का इशारा किया, मैं भी समझ गया था की उससे भी मुझसे प्यार हो गया है ,मैं समझ नहीं पा रहा था कि वह आखिर उसे अपने घर क्यों बुलाई है ,उसके मम्मी पापा घर पर ही होंगे फिर भी मैंने हिम्मत बांध कर उसके घर चल दिया, जब उसके घर गया तो डोर बेल बजाने से पहले ही वह दरवाजे पर खड़ी थी ,और मुझे आने का इशारा किया जब मैं अंदर गया तो उसके घर में कोई नहीं था ।
मैंने पूछा अंकल आंटी कहां है, वह बोली वह किसी रिश्तेदार की शादी में बाहर गए हुए है उसने मुझे बैठने को कहा, और खुद किचन में चली गई चाय बनाने मुझे चाय से ज्यादा उससे बात करने में रुचि थी, चाय बनाकर वह जल्दी ही कप लेकर मेरे पास आई मेरी नजर उसके चेहरे पर थी ,मैं चाय उठाने लगा परंतु ध्यान कहीं और होने के कारण कप मेरे हाथ से छूट गया, और चाय मेरे पैर पर गिर गया, उसने जल्दी-जल्दी अपने दुपट्टे से चाय को पोछते हुए बोली, I am sorry आप जले तो नहीं, उसके बाद दूसरा कप चाय लेकर आई और हम दोनों बैठ कर एक साथ चाय पीते हुए उसका नाम पूछा ,उसने अपना नाम कीर्तिका बताया, वह बोली कि मेरे मम्मी पापा यहां कुछ ही दिनों के लिए आए हैं, परंतु “Sandeep”मैं तुमसे दूर नहीं जाना चाहती, यह कहते हुए उसने मेरा हाथ पकड़ लिया ,मैंने उसके हाथों को चूमकर उसे गले से लगा लिया, उसे छोड़ने का दिल नहीं कर रहा था परंतु अभी वह सिर्फ मेरी एक दोस्त थी, हम दोनों एक दूसरे से इतना प्रेम करने लगे थे ,की अगर एक दूसरे से एक दिन बात ना हो तो नींद नहीं आती थी। मेरा मन करता था कि हमेशा उसके जुल्फों के नीचे सोता रहूं। परंतु अफसोस 6 महीने बाद ही उसके पापा का ट्रांसफर किसी और शहर में हो गया, जिसके कारण वह फ्लैट खाली करके चले गए ,जिस दिन वह जाने लगे “कृतिका “मेरे पास फोन की और बहुत रो रही थी ,परंतु वह भी मजबूर थी अतः वह मुंबई छोड़कर जाने के लिए विवश हो गई।
 हम दोनों कुछ दिन तक फोन से बातें करते रहे, 1 दिन कीर्तिका ने बताया की उसके पिता उसकी शादी करने जा रहे हैं। और वह अपने पिता की आज्ञा का उल्लंघन नहीं कर सकती ,अतः वह बोली की हम दोनों एक दूसरे को भूल जाएं यही उचित होगा, परंतु सच्चे प्यार को भूल जाना इतना आसान नहीं था, हम दोनों कई दिनों तक बहुत रोए परंतु अपने माता पिता को इसकी भनक तक नहीं लगने दिया, क्योंकि यह हमारी और हमारे माता-पिता की सम्मान की बात थी। उसकी शादी हो गई उसके बाद उसका नंबर भी बंद आने लग गया ,और मेरी भी शादी हो जाने के कारण मैं भी अपने पत्नी के साथ जीवन व्यतीत करने लग गया ,परंतु वह मीठी याद और पहली मोहब्बत की एहसास हमारे दिल में अभी भी है। जब कृतिका को याद करता हूं ,तो हमारा दिल रो पड़ता है ,उसके बाद हमारी और कृतिका का कभी भी मुलाकात नहीं हुई, परंतु उसकी याद हमेशा हमारे दिल को एक मीठा एहसास देता रहता है। 
अगर ईश्वर चाहेगा तो हमें विश्वास है वह हमारी जिंदगी में कभी ना कभी दोबारा जरूर मिलेगी और मुझसे फिर से वही प्यार भरी बातें करेगी

4-गांव की पहली अधूरी प्रेम कहानी(uncomplete love story in villege Hindi)

नमस्कार दोस्तों ,मैं मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव में रहता हूं ,आज मैं अपने गांव की एक ऐसी लव स्टोरी सुनाने जा रहा हूं ,जिसको सुनने के बाद आपकी आंखों में आंसू आ जाएगा, यह कहानी मेरे गांव की है जिससे मैं अच्छी तरह जानता हूं। सच्चा प्यार भगवान का दिया हुआ एक ऐसा वरदान है जिससे दुनिया की पूरी ताकत भी दो प्रेमियों को अलग नहीं कर सकती, परंतु इस संसार में कुछ लोग प्यार के ऐसे दुश्मन बन जाते हैं जिन्हें भगवान के कहर का भी भय नहीं रहता है ,यह कहानी भी कुछ इसी तरह है तो चलिए आगे देखते हैं।
हमारे पड़ोस में एक लड़का था ,जिसका नाम “श्याम “था ।श्याम बहुत ही सीधा-साधा और अच्छे स्वभाव का लड़का था। उसके इसी अच्छे स्वभाव के कारण पूरे गांव के लोग से बहुत प्यार करते थे, शाम एक गरीब परिवार का था परंतु उसके पिता मजदूरी करके घर का पालन पोषण करते थे। श्याम दसवीं क्लास में पढ़ रहा था, उसे दूसरों का मदद करना बहुत अच्छा लगता था। इसलिए वह किसी की भी मदद करने के लिए तुरंत तैयार हो जाता था, उसके घर के बगल में ही एक लड़की थी ,जिसका नाम “श्वेता “था ।
श्वेता अपने नाम की तरह ही गोरे रंग की थी उसकी सूरत की बनावट चांद की तरह थी जिसके कारण वह बहुत खूबसूरत लग रही थी उसका भी स्वभाव श्याम की तरह ही था पड़ोस में एक दूसरे के यहां आने जाने के कारण श्वेता और श्याम दोनों में दोस्ती हो गई ,और यह दोस्ती धीरे धीरे गहरे प्यार में बदल गई, वह दोनों एक दूसरे को बहुत ज्यादा प्यार करते थे इस बात का उनके घर वालों को खबर नहीं थी कुछ समय बीतता गया, श्याम ने 1 दिन श्वेता से कहा कि वह शादी के लिए अपने मम्मी पापा को मना ले, क्योंकि हम दोनों एक दूसरे से अलग नहीं रह सकते ,परंतु श्वेता ऊंचे खानदान की थी, और श्वेता के पिता श्वेता की शादी एक अमीर परिवार में करने के लिए सोच रहे थे।
जब श्वेता की यह बात उसके पापा ने सुनी तो वह बहुत नाराज हो गए ,और मारने मरने पर उतारू हो गए ,परंतु श्वेता ने अपने पिता से साफ इनकार कर दिया था कि अगर वह विवाह करेगी तो सिर्फ श्याम के साथ अन्यथा वह अपनी जान दे देगी, यह सुनकर उसके पिता भी जिद पर अड़ गए, और बोले कि उस दरिद्र घर में मैं शादी कभी भी नहीं करूंगा उस लड़की ने अपने पापा को बहुत मनाने की कोशिश की परंतु वह नहीं माने, फिर उसने श्याम को अपने साथ लेकर कहीं दूर जाने के लिए कहा श्याम तैयार हो गया दोनों ने घर से कुछ कपड़े पैक किए और किराए के लिए पैसे अपने दोस्त से उधार लेकर  घर से कहीं बहुत दूर भाग गए।
 श्वेता और श्याम एक शहर में जाकर रहने लग गए श्याम एक फैक्ट्री में काम करने लग गया। जिसके कारण उसकी रोजी-रोटी और पारिवारिक खर्च चलने लग गया वह दोनों आपस में बेपनाह मोहब्बत करते थे, 1 साल बाद उनकी मोहब्बत की एक निशानी हुई जिसका नाम उसने रोहित रखा, रोहित गोरा रंग और गोल चेहरे का था ,उसकी चेहरे की बनावट एकदम मां के जैसी और उसकी शरारते पिता के जैसी थी, श्याम और श्वेता भाग कर शादी करने के कारण बहुत दुखी थे ,क्योंकि उन्हें अपने माता पिता के आशीर्वाद के बिना अच्छा नहीं लग रहा था ,अतः उन दोनों ने सोचा की अब तो लगभग 1 साल बीत गया है सभी लोगों का गुस्सा शांत हो गया होगा, और वैसे भी नाती को देखकर उसके नाना अत्यंत प्रसन्न होंगे परंतु उनके जिंदगी में कैसा मोड़ आने वाला था वह उनको जरा सा भी अंदाजा नहीं था, वह दोनों अपने घर आए तो श्वेता ने अपने सास और ससुर का पैर छुआ और वह लोग बहुत प्रसन्न हुए, उसके बाद श्वेता अपने माता-पिता से मिलने गई, तो वह लोग भी खुशी से झूम उठे परंतु उनके जीवन में एक शख्स ऐसा था, जो उन्हें खुश देख कर बहुत दुखी था ,वह था श्याम का गहरा दोस्त जिसका नाम समीर था, दरअसल समीर श्वेता से एकतरफा प्यार करता था ,इस बात का श्वेता को पता नहीं था, जब श्वेता और श्याम ने चुप कर शादी कर ली तो उसका क्रोध और भी भड़क गया, और उसने मन ही मन बदला लेने की सोच ली अगर श्वेता मेरी नहीं है, तो वह किसी की नहीं हो सकती।
 रात को समीर श्वेता के घर में घुसा तो देखा श्वेता अपने मम्मी के कमरे में अकेली सो रही थी, उसकी मम्मी बाहर बरामदे में सोई हुई थी, वह चुपके से घर में घुसा और सोते समय ही श्वेता का गला दबाकर उसे मार डाला। सुबह जब इस बात का पता चला तो श्याम दौड़ कर स्वेता के पास आया ,और उसको गले से लगा लिया और जोर जोर से चिल्लाने लगा। परंतु जो चला गया वह वापस आने वाला नहीं था। उसके बाद श्याम के चेहरे की हंसी गायब हो गई वह बहुत गुमसुम सा रहने लग गया, परंतु उसके जीने की एक उम्मीद रोहित ही था अतः वह रोहित के साथ खेलता था ,उससे वह अपने दिल की बातें करता रहता था”तुम्हारी मम्मी ऐसी थी तुम्हारी मम्मी वैसी थी” यही बातें करके रोने लग जाता था। उसके माता-पिता उसे बहुत समझाते थे परंतु वह एक जिंदा लाश बन गया था।
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5-मेरी और मेरे बॉयफ्रेंड की प्रेम कहानी boyfriend love story in Hindi

Hello friends मेरा नाम “अंजली “है ,मैं उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में रहती हूं, मैं आप लोगों के साथ अपनी प्रेम कहानी शेयर करने जा रही हूं ,जो मुझे पहली बार 17 वर्ष की उम्र में हुआ था,। उस समय मैं आठवीं क्लास में पढ़ रही थी मेरी क्लास में एक लड़का था जो गोरे रंग का लंबे हाथ का और उसकी कद लगभग 6 फुट की थी ,बहुत ज्यादा मोटा भी नहीं था ,परंतु उसकी health और fitness काफी अच्छी थी, क्लास की सारी लड़कियां उसकी दीवानी थी परंतु वह इन सब बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं देता था वह सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान देता था ,उसकी नशीली आंखों का तो कोई जवाब नहीं था। कोई भी लड़की 1 मिनट में पट सकती थी।
 उसका नाम “चंदन” था। पढ़ने में चंदन बहुत ही तेज था ,सभी लड़कियां उससे बातें करने का बहाना ढूंढती थी, परंतु वह इतना अकडू स्वभाव का था की वह किसी लड़की की तरफ देखता भी नहीं था, मेरा भी मन कर रहा था बहुत सारी बातें करने को परंतु कभी भी अवसर नहीं मिलता था कि उससे कुछ बातें हो सके। मैं छुप छुप के उसको देखती रहती थी, परंतु उससे कुछ बोल नहीं पाती थी, दिन रात में उसी के बारे में सोचती रहती थी, शायद मुझे उससे प्यार हो गया था, 1 दिन मैं एक प्रश्न पूछने के बहाने उसके पास गई तो उसने जल्दी जल्दी बता कर और वहां से जाने के लिए कहा, हमारे तो कुछ भी समझ में नहीं आया ,क्योंकि मेरा ध्यान सिर्फ उसके चेहरे पर था उसके बोलने का स्टाइल उसके देखने का अंदाज ने मेरा दिल जीत लिया था। 
एक दिन स्कूल से छुट्टी होने के बाद हम दोनों साइकिल से जा रहे थे तभी अचानक मेरा एक मोटरसाइकिल से एक्सीडेंट हो गया वह देखने में तो घमंडी और अकडू था, परंतु उसका दिल बहुत ही कोमल और पवित्र था। वह तुरंत जाकर मुझे उठाया और हॉस्पिटल पहुंचाया। उसने मेरी मम्मी पापा को फोन करके हॉस्पिटल में बुलाया। मेरा ब्लड काफी लॉस हो चुका था जिसके कारण ब्लड की जरूरत पड़ी परंतु मेरे घर और रिश्तेदार में किसी का भी ब्लड ग्रुप मैच नहीं हो रहा था, घर वाले बहुत परेशान थे और घबरा रहे थे, फिर चंदन ने अपना ब्लड ग्रुप मैच करने को कहा तो उसका ब्लड ग्रुप मैच हो गया ,और वह अपना ब्लड देने के लिए तैयार हो गया, जब मैं ठीक हो कर घर आई तो मेरे मम्मी पापा बोले अगर वह लड़का ना होता तो आज मेरी बेटी मेरे साथ नहीं होती। उसका मैं किस तरह से धन्यवाद करू
 मम्मी पापा की यह बातें सुनकर मैं समझ गई थी कि यह चंदन की ही बातें कर रहे हैं यह सुनकर मेरी आंखें नम हो गई। जब मैं पूरी तरह ठीक हो गई तो मैं स्कूल गई। जब मैं स्कूल पहुंची और चंदन को देखा तो मेरी आंखें भर आईं ,मेरी वजह से उसे इतनी मुसीबत उठानी पड़ी। मैंने हाथ जोड़कर उसका धन्यवाद किया, चंदन बोला देखो “अंजलि !इसकी कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि जिसका कोई नहीं होता है उसका ईश्वर होता है,
उसकी एक-एक बातें मेरे दिल में समा रही थी। मैंने निश्चय कर लिया था ,की जिसने मेरी जान बचाई है मेरी जिंदगी सिर्फ उसी के नाम है। मैं सात जन्मों के लिए उसे अपना दिल दे चुकी थी। एक दिन अचानक उसके दोस्तों ने मुझे एक कागज का टुकड़ा दिया ।
उसको खोल कर देखा तो वह चंदन का दिया दिया हुआ अंजलि नाम से लव लेटर था, मुझे तो यकीन नहीं हो रहा था कि वह भी मुझे प्यार करता है ,उसके लव लेटर से मुझे यह पता लगा कि जिस तरह उसके बारे में मैं सोचती थी, उसी तरह मेरे बारे में वह भी सोच रहा था ,अतः हम दोनों का भ्रम खत्म हो गया था हम दोनों एक दूसरे से बहुत गहरा प्रेम करने लगे थे। एक दिन हम दोनों स्कूल से छुट्टी होने के बाद बाहर अकेले में मिले। हम दोनों प्यार भरी बातें करने लग गए चंदन बोला तुम कितनी खूबसूरत लग रही हो मैं बोली चंदन यह खूबसूरती मेरी नहीं है ,बल्कि तुम्हारी है क्योंकि मेरे शरीर के नसों में सिर्फ तुम्हारा खून दौड़ रहा है। मेरे मम्मी पापा चंदन को मन ही मन अपना जमाई मान चुके थे क्योंकि उन्हें बहुत ढूंढने के बाद भी ऐसा लड़का नहीं मिलने वाला था। और हम दोनों की शादी हो गई हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत खुशी से अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इस समय हमारे दो बच्चे हैं जो चंदन की तरह ही शरारती स्वभाव के हैं।
दोस्तों मेरे स्कूल की मेरी प्रेम कहानी आप लोगों कैसी लगी आप कमेंट करके हमें जरूर बताना।

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