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harit kranti kise kahate hain . हरित क्रांति किसे कहते हैं?

नमस्कार दोस्तों हमारे वेबसाइट पर आप लोगों का बहुत-बहुत स्वागत है आज हम आप लोगों के लिए एक ऐसा आर्टिकल लेकर आए हैं जो स्टूडेंट student के काफी ज्यादा काम आने वाली है तथा साथ ही साथ किसान भाइयों के लिए भी काफी ज्यादा महत्वपूर्ण साबित होने वाली है क्योंकि हरित क्रांति का तात्पर्य फसलों के उत्पादन में एक क्रांति लाने से है। क्योंकि हरित क्रांति का संचालन फसलों के पैदावार में आशातीत वृद्धि के लिए हरित क्रांति सन 1967 में भारत में चलाया गया जिसमें अनेक प्रकार के  नई तकनीक के हाइब्रिड बीजों तथा अनेक प्रकार की रासायनिक खादों और तकनीक के माध्यम से खेती करने को प्रेरित किया गया जिसके कारण फसलों में आशातीत वृद्धि हुई। आज हम उसी हरित क्रांति के बारे में पूरी जानकारी देने वाले हैं अतः हरित क्रांति के बारे में अनेक जानकारियां जैसे हरित क्रांति किसे कहते हैं? हरित क्रांति की क्या-क्या विशेषताएं हैं? हरित क्रांति के क्या-क्या लाभ हैं? हरित क्रांति के क्या क्या नुकसान है? इत्यादि तमाम प्रश्नों के उत्तर जाने के लिए हमारे पोस्ट को ध्यान से पढ़ें।

harit kranti kise kahate hain . हरित क्रांति किसे कहते हैं?

प्रत्येक मानव जाति को भोजन की आवश्यकता अवश्य होती है और वह भोजन फसलों के माध्यम से उत्पन्न होता है। अतः हरित क्रांति फसलों के पैदावार में आशातीत वृद्धि के लिए लागू किया गया। हमारा देश सन 1947 में आजाद हुआ तो अंग्रेज हमारे देश का सारा खजाना इंग्लैंड भेज चुके थे हमारा भारत एकदम खोखला बन कर रह गया था उसके बाद जो बचा वह भारत और पाकिस्तान का बंटवारा होने के बाद सब कुछ समाप्त हो गया था। भारत में खाने के लिए काफी ज्यादा समस्या आने लग गई थी भारत सरकार के पास अनाज बिल्कुल भी नहीं था जिससे यदि कोई अकाल पड़ जाए तो वह अपने देशवासियों का पेट भरने में सक्षम हो सके। सन 1960 में अमेरिका में हरित क्रांति की खोज सर विलियम गाउट ने किया। हरित क्रांति का मुख्य उद्देश्य कम जमीन पर अच्छी किस्म के बीजों कोबो कर उच्च तकनीकी के माध्यम से कृषि करके पैदावार में अच्छी वृद्धि करना है। अतः अधिक पैदावार करने की उद्देश्य से भारत में हरित क्रांति का पहला चरण 1967 से 1980 तक संचालित किया गया जिसमें हाइब्रिड बीजों जिसे संकर बीज के नाम से भी जाना जाता है तथा रासायनिक खादों मिट्टी की जांच इत्यादि पर काफी ज्यादा जोर दिया गया जिससे पैदावार में लगभग दोगुना वृद्धि हुई।
भारत में हरित क्रांति का दूसरा चरण सन 1980 से 1997 तक चलाया गया जिसमें कृषि यंत्रों तथा बड़े-बड़े किसानों के लिए अनेक प्रकार के कृषि यंत्र जिनके मदद से प्रत्येक कार्य बड़ी ही आसानी से हो सके इन पर जोर दिया गया जिसके कारण कृषि में और भी वृद्धि हुई अतः हरित क्रांति का ही देन है जिसके कारण भारत आज फसलों के उत्पादन में अग्रणी देश माना जाता है।

हरित क्रांति का मुख्य उद्देश्य क्या what is the main objective of green revolution

हरित क्रांति का मुख्य उद्देश्य कम जमीन पर फसलों की अधिक पैदावार लेने से है ताकि भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश का पेट भरना आसान हो जाए अतः हरित क्रांति को भारत में सन 1967 जिसके फलस्वरूप नई किस्म के बीजों के इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया तथा रासायनिक खादों के इस्तेमाल के द्वारा पैदावार में दोगुनी वृद्धि हुई। हरित क्रांति का मुख्य उद्देश्य भारत में बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए भोजन की व्यवस्था करना है अतः हरित क्रांति के द्वारा यह उद्देश्य बहुत जल्द पूरा होता दिखाई दिया आज के वर्तमान समय में यह हरित क्रांति का ही देन है की प्रत्येक व्यक्ति के घर में भोजन की कोई कमी नहीं है।

हरित क्रांति की विशेषताएं Features of Green Revolution

हरित क्रांति की कुछ प्रमुख विशेषताएं हैं जो निम्नलिखित है।
  • हरित क्रांति के द्वारा संशोधित किए गए बीजों की बुवाई पर जोर दिया गया।
  • हरित क्रांति के द्वारा रासायनिक उर्वरक तथा रासायनिक खादों के द्वारा उत्पादन में वृद्धि के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
  • हरित क्रांति के अंतर्गत अनेक प्रकार के कृषि यंत्रों का निर्माण हुआ जैसे बुवाई के लिए मशीन जिताई के लिए रोटावेटर मशीन इस प्रकार से अनेक प्रकार के मशीनों का निर्माण हुआ जिसके फलस्वरूप कृषि कम से कम मेहनत में तथा कम लागत में अच्छी से अच्छी पैदावार प्राप्त हो सके।
  • हरित क्रांति के अंतर्गत अनेक प्रकार की कीटनाशक दवाइयों का उपयोग करना बताया गया ताकि फसलों की सुरक्षा हो सके।
  • हरित क्रांति के द्वारा फसलों में उगने वाले अनेक प्रकार के घास को नष्ट करने के लिए दवाइयों का इस्तेमाल किया गया जिसके तहत फसलों को नुकसान ना हो और पैदावार प्रभावित ना हो।
  • हरित क्रांति के द्वारा सिंचाई के अनेक साधन जैसे नहर ट्यूबेल प्रत्येक गांव में एक तालाब तथा सोलर पंप के इस्तेमाल पर जोर दिया गया ताकि फसलों को पानी पर्याप्त मात्रा में प्राप्त हो सके।
  • हरित क्रांति के द्वारा जमीन का जांच कराने पर जिसे मृदा परीक्षण भी कहा जाता है अतः मृदा परीक्षण पर भी अत्यधिक जोर दिया गया।
  • हरित क्रांति के द्वारा सरकार ने कृषि पर किसानों को ऋण देने का फैसला लिया ताकि छोटे से बड़े किसान कर्ज लेकर अपना खेती कर सकें और अपना भोजन प्राप्त कर सकें। जिससे खेत का प्रमाण जिसे किसान बही देकर प्राप्त किया जाता है।

हरित क्रांति के लाभ benefits of green revolution

हरित क्रांति के द्वारा भारत एक आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने में सक्षम हुआ क्योंकि जब हमारा भारत सन 1947 में आजाद हुआ उसके पश्चात हमारे देश में अनेक प्रकार की समस्याएं जन्म लेने लग गई जिसमें सबसे बड़ी समस्या भोजन की समस्या थी अतः भोजन की समस्या से छुटकारा पाने के लिए सन 1967 में हरित क्रांति को बढ़ावा दिया गया जिसके फलस्वरूप उत्पादन में आशातीत वृद्धि हुई और इसका जीता जागता उदाहरण आप स्वयं देख सकते हैं। हरित क्रांति के द्वारा अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त हुए जो निम्नलिखित है।

1-उत्पादन में आशातीत वृद्धि

हरित क्रांति के द्वारा नए तकनीक के संशोधित बीजों की बुवाई के द्वारा उत्पादन में काफी ज्यादा बढ़ोतरी हुई जिससे प्रत्येक किसान मन लगाकर अपने खेतों में मेहनत करने लग गया और अपने घर और परिवार के लिए प्रत्येक साधन जुटाने के लिए सक्षम होने लग गया। क्योंकि जब उत्पादन में अत्यधिक वृद्धि होने लग गई तो वहां किसान अपने खाने भर का अनाज अपने पास रख कर बाकी अनाज को निर्यात कर देते हैं जिसके कारण उनके आर्थिक स्थिति में भी काफी ज्यादा सुधार देखने को मिल रहा है।

2-खाने वाली अनाज के आयात में कमी

आजादी के पश्चात जब भारत पाकिस्तान का बंटवारा हुआ तो भारत में अनाज की बहुत ज्यादा कमी महसूस होने लग गई खाने के लिए अनाज विदेशों से मंगाना पड़ता था जिसकी भारी-भरकम कीमत सरकार को चुकानी पड़ती थी। परंतु हरित क्रांति के द्वारा पैदावार में लगभग दोगुनी वृद्धि हुई जिसके कारण सरकार को विदेशों से अनाज आयात नहीं करना पड़ता है।

3-आत्मनिर्भर भारत बनने में सहायक

उत्पाद में वृद्धि होना आत्मनिर्भर भारत बनने के लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण था क्योंकि जब किसी देश में खाने के लिए अनाज भी नहीं होगा तो वह किस के बलबूते पर आत्मनिर्भर बन पाएगा आता हरित क्रांति के द्वारा पैदावार में काफी ज्यादा बढ़ोतरी हुई जिसके कारण भारत आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर होने लग गया है।

4-रोजगार के नए अवसर

आजादी के बाद लोग जब अपनी पुरानी तकनीक के द्वारा कृषि करते थे तो उसमें उत्पादन की मात्रा बहुत कम होती थी जिसके कारण किसानों का दिल टूट जाता था और वह चुपचाप घर में बैठ जाते थे और वह दिन रात ही सोचते थे कि ईश्वर उन्हें भोजन की व्यवस्था अवश्य करेगा। और इसी आशा में वह बेरोजगार बैठे रहते थे परंतु हरित क्रांति ने प्रत्येक किसानों के रोम रोम में एक नई क्रांति पैदा करती जिससे रोजगार की अनेक अवसरों ने जन्म लिया जैसे पैदावार में वृद्धि होने पर बाजार या मंडी के लिए गाड़ियों की व्यवस्था करना तथा मंडी में एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए अनेक मजदूर और गाड़ियों के ड्राइवर को तमाम रोजगार के अवसर प्राप्त हुए।

5-कृषि क्षेत्र और औद्योगिक क्षेत्रों में गहरा संबंध

हरित क्रांति के द्वारा कृषि में इस्तेमाल की जाने वाली अनेक प्रकार के यंत्र जैसे ट्रैक्टर ट्रॉली कल्टीवेटर हैरो रोटावेटर थ्रेसर इत्यादि तमाम मशीनों का निर्माण करने के लिए औद्योगिक इकाइयों का भी विकास होने लग गया जिन का सीधा संबंध कृषि से होता है और वह एक दूसरे का दर्द समझने में सक्षम हो पाते हैं इस प्रकार से अनेक प्रकार के रासायनिक खादों और संशोधित बीजों का निर्माण फैक्ट्रियों के माध्यम से हो पाता है जिससे कृषि का औद्योगिक क्षेत्रों से सीधा संबंध हो जाता है।

6-गांव का विकास

हरित क्रांति के द्वारा गांव का विकास संभव हो पाया है क्योंकि पुरानी विधि खेती के माध्यम से सिर्फ पेट भरने भर का ही अनाज प्राप्त हो पाता था जिससे ग्रामीण किसानों का जीवन अंधेरे में ही गुजरता था परंतु हरित क्रांति के द्वारा पैदावार में काफी ज्यादा वृद्धि होने के कारण अपने खाने भर का अनाज रखकर ग्रामीण किसान बाकी का अनाज बेच देते हैं जिससे प्राप्त किए गए पैसे से उनके अनेक प्रकार की आवश्यकताओं की पूर्ति होती है जिनके द्वारा गांव का विकास संभव हो पाया है।

हरित क्रांति के नुकसान effects of green revolution

हरित क्रांति के द्वारा भारत में अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त हुए हैं जिनको आपने हमारे पोस्ट में विधिवत पड़ा है अतः हरित क्रांति के तमाम ऐसे नुकसान भी हैं जिनके बारे में आपको जरूर जानना चाहिए।

1-लागत में वृद्धि

हरित क्रांति में अनेक प्रकार के रासायनिक खादों तथा संशोधित बीजों के उपयोग पर जोड़ दिया गया है परंतु इनकी कीमत बहुत ज्यादा होती है क्योंकि पहले के किसान अपनी फसल से उत्पन्न किए हुए बीजों का ही इस्तेमाल करते थे जिसमें लागत की कोई आवश्यकता नहीं होती थी परंतु हरित क्रांति के द्वारा रासायनिक खादों संशोधित पीछे था आधुनिक कृषि यंत्रों के इस्तेमाल और जोर देने के कारण लागत में काफी ज्यादा बढ़ है जिससे प्रत्येक किसानों के मन में एक डर बना हुआ रहता है कि कहीं उत्पादन कम हुई तो यह पैसे कहां से आएंगे।

2-लघु किसानों के लिए समस्या

हरित क्रांति छोटे किसानों के लिए एक समस्या का ही विषय रहा है क्योंकि छोटे किसानों के खेत भी छोटे-छोटे टुकड़ों में ही होते हैं जिनमें कृषि यंत्रों और संचालित कर पाना संभव नहीं होता है जिसके कारण उन्हें जुदाई अपने बालों से ही करना होता है तथा फसलों की कटाई हाथ से करनी पड़ती है जो एक समस्या का विषय बना हुआ है।

3-रोजगार में कमी

बृहद किसान को जब अपने खेतों में काम कराना होता था तो उन्हें अन्य मजदूरों की आवश्यकता होती थी जिनसे रोजगार के अवसर काफी ज्यादा होते थे परंतु हरित क्रांति के द्वारा नई तकनीकों के कृषि यंत्र का निर्माण हुआ जिनके द्वारा यंत्र लगभग 10 मजदूर के बराबर कार्य करता है जिससे रोजगार में काफी ज्यादा कमी दिखाई देने को मिलती।

4-बीमारियों में वृद्धि

हरित क्रांति के द्वारा अनेक प्रकार के रासायनिक खादों का इस्तेमाल करने को बढ़ावा दिया गया तथा कीटनाशक दवाओं का इस्तेमाल भी किया जाता है जिसके फलस्वरूप उन धमाकों का और रासायनिक खादों का असर फसलों में भी चला जाता है और उन फसलों के अनाज को खाने से अनेक प्रकार की बीमारियां व्याप्त होने लग जाती है जिसे आप आधुनिक युग में बड़ी ही आसानी से अनुमान लगा सकते हो की पूर्व काल में ना ही इतने अस्पताल होते थे और ना इतने डॉक्टर क्योंकि पहले बीमारी ही बहुत कम होती थी परंतु हरित क्रांति के द्वारा भोजन अत्यधिक विषैला हो गया है जिससे बीमारियां काफी ज्यादा फैल रही है।

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