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shiksha kya hai in Hindi. शिक्षा का अर्थ परिभाषा तथा विशेषताएं

 shiksha kya hai in Hindi. शिक्षा का अर्थ परिभाषा तथा विशेषताएं

नमस्कार दोस्तों हमारे वेबसाइट पर आप लोगों का बहुत-बहुत स्वागत है। आज का हमारा आर्टिकल शिक्षा पर है। आप लोगों ने समाज में एक शिक्षा education का नाम सुना होगा अतः शिक्षा क्या होता है ?तथा हमारे समाज में शिक्षा की आवश्यकता क्यों है? और शिक्षा के द्वारा कौन-कौन से कार्य संभव हो जाते हैं ?शिक्षा कितने प्रकार के होते हैं? तथा हमारे जीवन में शिक्षा का कितना महत्व है ?शिक्षा से जुड़े हुए तमाम ऐसे प्रश्नों का उत्तर जानने के लिए हमारे पोस्ट को ध्यान से पढ़ें। क्योंकि इस आर्टिकल में हमने शिक्षा के बारे में संपूर्ण जानकारी लिखा है जिसे पढ़कर आप लोग भी अपने ज्ञान को विकसित करें। शिक्षा का हमारे समाज में एक महत्वपूर्ण स्थान है जिसके बिना कोई भी मनुष्य एक जानवर के समान होता है क्योंकि आपने भी पढ़ा होगा। बिना पढे नर पशु कहावे।
जीवन का सुख कभी न पावे।
इस वाक्य से यह स्पष्ट होता है कि यदि हमारे जीवन में शिक्षा नहीं है या हम ने शिक्षा ग्रहण नहीं की है तो हमारा जीवन एक पशु की भांति हो जाती है। जिससे जीवन के कई सुख सुविधाओं से हम वंचित रह जाते हैं। इस तरह से जितनी आवश्यकता हमें भोजन की होती है इतनी आवश्यकता शिक्षा की भी होती है।

शिक्षा का अर्थ meaning of education

शिक्षा शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द से हुई है। शिक्षा संस्कृत शब्द के “शिक्ष” धातु में “आ” प्रत्यय लगाने से शिक्षा की उत्पत्ति होती है। जिसका शाब्दिक अर्थ होता है सीखना  सिखाना। शिक्षा को अंग्रेजी में education भी कहा जाता है। अतः आधुनिक युग में शिक्षा को education के नाम से अधिकतर संबोधित किया जाता है। अतः शिक्षा को कुछ सीखने या सिखाने से इसका अर्थ लगाया जाता है। तथा शिक्षा देने वालेे को शिक्षक teacher कहा जाता है। हम शिक्षा के बारे विस्तृत चर्चा करेंगे जिसका पूरा अर्थ यह है कि संपूर्ण जीवन में जब भी हम कुछ नवीनतम जानकारी हासिल करते हैं तो वह शिक्षा कहलाता है।

शिक्षा की परिभाषा definition of education

शिक्षा को अनेक प्रकार के विद्वानों ने अपने अपने मतानुसार परिभाषित किया है अतः आइए उन सभी विद्वानों के कथन को पहले स्पष्ट कर लेते हैं।
स्वामी विवेकानंद के अनुसार-“शिक्षा एक प्रकार की विकासशील प्रक्रिया है जो जीवन पर्यंत चलती रहती है शिक्षा के द्वारा हमारे सभी क्षेत्रों का विकास संभव हो पाता है “
रुसो के अनुसार-“शिक्षा एक ऐसी प्रक्रिया है जो हमें एक अंधकार से उजाले की तरफ का रास्ता दिखाती है अतः जिस प्रकार से हम शिक्षा ग्रहण करते हैं उसी प्रकार से हमारा मस्तिष्क का विकास होता रहता है”
अरस्तु के अनुसार-“शिक्षा एक ऐसी शक्तिशाली प्रक्रिया है जो हमारे आंतरिक शक्तियों का विकास करती है तथा हमें कोई भी कार्य करने की क्षमता प्रदान करती है”
अतः संपूर्ण परिभाषा ओं को पढ़ने के पश्चात साधारण अर्थों में हम यह कह सकते हैं कि शिक्षा मनुष्य में एक नवीनतम जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया को कहा जाता है जिसके द्वारा मनुष्य अपनी प्रत्येक क्षेत्र जैसे सामाजिक आर्थिक सांस्कृतिक आदि क्षेत्र में विकास करने में सक्षम हो पाता है। शिक्षा की कोई निश्चित सीमा नहीं होती है और ना ही इसलिए कोई निश्चित आयु होती है क्योंकि यदि आप कोई रास्ता भूल गए हैं और कोई सज्जन व्यक्ति आपका मार्गदर्शन करें तो वह भी शिक्षा ही कहलाता है। इस प्रकार से शिक्षा एक जीवन पर्यंत चलने वाली प्रक्रिया है जो कभी समाप्त नहीं होता है और हमें अंधेरे से उजाले की तरफ ले जाने का कार्य करता है। अर्थात हमारे ज्ञान को विकसित करता है।

शिक्षा की विशेषताएं Features of education

आधुनिक युग में शिक्षा का प्रचार प्रसार बहुत तेजी से हो रहा है क्योंकि आधुनिक युग में अनेक कार्य ऐसे हैं जो बिना शिक्षा के संभव नहीं है अतः प्रत्येक व्यक्ति का शिक्षित होना बहुत ही आवश्यक हो गया है इस प्रकार से यदि आधुनिक युग में कोई व्यक्ति अशिक्षित रहता है तो उसका जीवन जीना असंभव हो जाता है क्योंकि सामाजिक जीवन भी बिना शिक्षा के संचालित होना मुश्किल हो गया है। शिक्षा की कुछ अनेक विशेषताएं हैं जो निम्नलिखित है।
  • शिक्षा के द्वारा हम कोई नवीनतम जानकारी को हासिल कर पाते हैं।
  • शिक्षा की कोई निश्चित आयु नहीं होती है।
  • शिक्षा की कोई निश्चित सीमा नहीं होती है।
  • शिक्षा मानव जीवन में एक रोशनी का कार्य करता है जो अज्ञानता रूपी अंधकार को दूर करता है।
  • शिक्षा के द्वारा हम अपना जीवन यापन करने के लिए कोई व्यवसाय चुनने में सक्षम हो पाते हैं।
  • शिक्षा हमें सही गलत का ज्ञान कराती है।
  • शिक्षा के द्वारा हम मानव जीवन में एक उच्च स्थान प्राप्त करने में सक्षम हो पाते हैं।
  • शिक्षा हमारे समाज का एक अभिन्न अंग है जिसका समाज में एक बहुत बड़ी महत्त्व होती है।
  • सीखने की प्रक्रिया को शिक्षा कहा जाता है चाहे वह किसी स्थान या किसी भी समय मिलती हो।

शिक्षा के प्रकार types of education 

आपने देखा होगा कि समाज में हम रहते हैं तो हमें अलग-अलग प्रकार से शिक्षा प्राप्त होते हैं। अतः शिक्षा को मुख्य रूप से तीन भागों में विभक्त किया गया है जिस के अलग-अलग रूप हमारे समाज में दिखाई देने को मिलते हैं।
  • औपचारिक शिक्षा aupcharik Shiksha
  • अनौपचारिक शिक्षा anopcharik Shiksha
  • निरौपचारिक शिक्षा nirop charik Shiksha

1-औपचारिक शिक्षा aupcharik Shiksha

औपचारिक शिक्षा व शिक्षा है जिसे हम स्कूलों और कॉलेजों के माध्यम से ग्रहण करते हैं। औपचारिक शिक्षा ग्रहण करने के लिए हमें एक शिक्षक की आवश्यकता होती है जो हमें पढ़ाने का कार्य करता है। औपचारिक शिक्षा के अंतर्गत हम लिखना पढ़ना तथा किसी व्यवसाय के बारे में शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं जैसे वकील डॉक्टर बिजनेसमैन शिक्षक इत्यादि तमाम व्यवसाय है जिनका कोर्स करके हम अपना जीवन यापन के लिए व्यवसाय चुन सकते हैं। या शिक्षा हमें किताबों के अध्ययन के द्वारा ही प्राप्त हो पाता है। औपचारिक शिक्षा के तीन भेद होते हैं।

1-प्रत्यक्ष शिक्षा direct education

जब हम किसी स्कूल ,विद्यालय था कॉलेज में पढ़ने के लिए प्रतिदिन जाते हैं तथा शिक्षक हमें क्लास में बैठकर शिक्षा प्रदान करता है तो वह प्रत्यक्ष शिक्षा कहलाता है क्योंकि हम इसे एक क्रमबद्ध तरीके से पढ़ते हैं जिसमें शिक्षक की एक अहम भूमिका होती है और हम शिक्षक के आमने सामने बैठ कर पढ़ाई करते हैं इसलिए इसे प्रत्यक्ष शिक्षा कहा जाता है। प्रत्यक्ष शिक्षा सबसे अच्छी शिक्षा मानी जाती है क्योंकि इस प्रकार के शिक्षा प्रणाली में सभी प्रश्नों के उत्तर प्रत्यक्ष रूप में हमें मिल जाता है तथा एक क्रमबद्ध तरीके से संपूर्ण विषयों का अध्ययन किया जाता है।

2-अप्रत्यक्ष शिक्षा indirect education

अप्रत्यक्ष शिक्षा वह शिक्षा है जो हम अपने पाठ्यक्रम को किताबों के अनुसार ग्रहण करते है।इस शिक्षा में किसी भी शिक्षक का मदद नहीं लिया जाता है।बल्कि किताबों के माध्यम से स्वयं के अध्ययन के द्वारा सिच्छा को ग्रहण किया जाता है। इस प्रकार की शिक्षा प्रणाली को अप्रत्यक्ष शिक्षा या परोछ भी कहा जाता है।

3-ऑनलाइन शिक्षा online education

आधुनिक युग में ऑनलाइन शिक्षा का प्रचार बहुत तेजी से बढ़ रहा है यह शिक्षा इंटरनेट के जरिए स्मार्टफोन तथा लैपटॉप के माध्यम से प्राप्त किया जाता है जिसमें शिक्षक अपने लैपटॉप के माध्यम से वीडियो कॉलिंग के जरिए बच्चों को शिक्षित करते हैं यह एक औपचारिक शिक्षा का बहुत बड़ा अंग माना जाता है। ऑनलाइन शिक्षा के लिए तमाम ऐसी वेबसाइट बनाई गई है जिस पर समय अनुसार विषय तय किया जाता है जिससे प्रत्येक विद्यार्थी अपने विषय का ज्ञान अर्जित कर सके। कुरौना काल में लॉकडाउन लगने पर यह माध्यम बहुत तेजी से फैल रहा है अतः आजकल ऑनलाइन शिक्षा का प्रचार बहुत ही तेज हो  रहा है।

2-अनौपचारिक शिक्षा anopcharik sichha

अनौपचारिक शिक्षा औपचारिक शिक्षा का विलोम शब्द होता है। अतः अनौपचारिक शिक्षा में औपचारिक शिक्षा के सारे नियम उल्टे होते हैं। अनौपचारिक शिक्षा व शिक्षा होती है जिसके लिए किसी भी स्कूल कॉलेज विद्यालय व कॉपी किताबें तथा शिक्षक की आवश्यकता नहीं होती है बल्कि यह किसी भी समय किसी भी स्थान पर तथा किसी के भी द्वारा ग्रहण किया जा सकता है। अनौपचारिक शिक्षा में कोई भी विषय अथवा क्रमबद्ध तरीका नहीं होता है बल्कि यह समयानुसार अपनी जरूरत के मुताबिक किसी भी व्यक्ति के द्वारा प्राप्त हो सकता है। उदाहरण के लिए मान लीजिए आप मोबाइल में जीमेल अकाउंट नहीं बना पा रहे हैं और किसी ने आपको जीमेल अकाउंट बनाना सिखा दिया तो उसे अनौपचारिक शिक्षा कहा जाता है।

3-निरौपचारिक शिक्षा niropcharik sichha

ऐसी शिक्षा जिसमें औपचारिक तथा अनौपचारिक दोनों का समावेश होता है निरौपचारिक शिक्षा कहलाते हैं। निरौपचारिक शिक्षा में जब हमारे मन में कोई प्रश्न उठता है और उसका उत्तर किसी व्यक्ति के द्वारा मिल जाता है अथवा मोबाइल इंटरनेट पर उसकी सही जानकारी मिल जाती है तो उसे निरौपचारिक शिक्षा कहा जाता है। निरौपचारिक शिक्षा में विषय तो क्रमबद्ध होता है, परंतु उसकी शिक्षा ग्रहण करने के लिए हमें किताबों के माध्यम से तथा मोबाइल के माध्यम से अपने प्रश्नों की जानकारी को हासिल करते हैं। जैसे आजकल कोई कोर्स करने के लिए फार्म भर दिया जाता है तथा घर पर बैठ कर पढ़ाई किया जाता है इसके लिए स्कूल जाने की आवश्यकता नहीं होती है अतः हमें अपने प्रश्नों के उत्तर के लिए फोन मोबाइल इंटरनेट तथा किताबों की मदद लेनी पड़ती है। इनमें किसी भी शिक्षक की कोई भूमिका नहीं होती है। अतः इस प्रकार की शिक्षा को निरौपचारिक शिक्षा कहा जाता है।

शिक्षा का महत्व value of education

आदि काल से लेकर आज तक हमारे समाज में शिक्षा का बहुत ज्यादा महत्व रहा है। बहुत लोग यह कहते हैं कि पुराने जमाने में शिक्षा की इतनी महत्त्व नहीं थी आधुनिक युग में शिक्षा का बहुत ज्यादा महत्व हो गया परंतु ऐसा बिल्कुल भी नहीं है पुराने जमाने में भी शिक्षा की बहुत ज्यादा आवश्यकता और महत्व थी ऐसे तमाम उदाहरण है जिससे यह स्पष्ट होता है कि पहले भी शिक्षा की बहुत ज्यादा आवश्यकता और महत्व होती थी। जब महारानी लक्ष्मी बाई 18 57 की क्रांति हुई थी तो महारानी लक्ष्मी बाई को अंग्रेजी बोलना भली-भांति आता था। जिसके कारण उसने अंग्रेजों से टक्कर लिया। महात्मा गांधी इंग्लैंड जाकर पढ़ाई किया है। उधम सिंह ने इंग्लैंड और ब्रिटेन में पढ़ाई किया। परंतु उनके पढ़ाई का मुख्य लक्ष्य सिर्फ जनरल डायर को मारना था। इस प्रकार से अनेक उदाहरण हैं जो शिक्षा के बगैर संभव नहीं होते हैं क्योंकि शिक्षा का महत्व हमारे समाज में बहुत ज्यादा है बिना शिक्षा के कोई भी मनुष्य अपना विकास करने में सक्षम नहीं हो पाता है।
  • शिक्षा के द्वारा मनुष्य अपने अज्ञानता रूपी अंधकार को दूर करने में सक्षम हो पाता है।
  • शिक्षा के द्वारा मनुष्य समाज में एक अच्छा स्थान प्राप्त करता है।
  • शिक्षा प्राप्त किया हुआ व्यक्ति समाज में इज्जत और सम्मान को प्राप्त करता है।
  • शिक्षा के माध्यम से कोई भी रोजगार अथवा व्यवसाय किया जा सकता है जिससे उसका और उसके परिवार का भरण पोषण होता है।
  • शिक्षा प्राप्त किया हुआ व्यक्ति विनम्र सुशील और दयावान जैसे कुल को प्राप्त करता है।
  • आधुनिक युग में शिक्षा प्राप्त किया हुआ व्यक्ति प्रत्येक क्षेत्र में कामयाबी हासिल करता है।

शिक्षा के उद्देश्य aims of education

हमारा जीवन अनेक उद्देश्यों से भरा हुआ है जिन की पूर्ति के लिए शिक्षा की आवश्यकता होती है अतः प्रत्येक क्षेत्र में शिक्षा का एक महत्वपूर्ण योगदान है। इसलिए हमें प्रत्येक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए शिक्षा का होना अत्यंत आवश्यक हो जाता है शिक्षा के कुछ महत्वपूर्ण उद्देश्य निम्नलिखित है।
  • मनुष्य जीवन को सरल और आसान बनाने के लिए शिक्षा की आवश्यकता होती है।
  • व्यक्ति के मस्तिष्क तथा कौशल का विकास करने के लिए शिक्षा की आवश्यकता होती है।
  • मनुष्य जीवन जीने के लिए धन की आवश्यकता होती है अतः धन प्राप्ति के लिए कोई ना कोई व्यवसाय अथवा रोजगार की आवश्यकता होती है जो हमें शिक्षा के माध्यम से प्राप्त हो पाती है। जैसे डॉक्टर वकील कंप्यूटर की शिक्षा बैंकिंग बिजनेस मैन आर्मी इत्यादि तमाम नौकरियों के लिए शिक्षा की आवश्यकता होती है।
  • अपने देश व राष्ट्र के विकास के लिए शिक्षा की अत्यंत आवश्यकता होती है। क्योंकि जब देश में शिक्षित व्यक्ति होंगे तभी डॉक्टर वकील वैज्ञानिक इनके द्वारा अनेक प्रकार की दवाएं तथा अनेक आविष्कार संभव हो पाते हैं जिससे देश का निरंतर विकास होता है।

निष्कर्ष conclusion

संपूर्ण पोस्ट पढ़ने के पश्चात हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि शिक्षा के बिना मनुष्य एक जानवर की भांति होता है जिसे उचित अनुचित का बिल्कुल भी ज्ञान नहीं होता है। अतः हमें जीवन जीने के लिए जितनी आवश्यकता भोजन की होती है उतनी ही आवश्यकता शिक्षा की भी होती है। शिक्षा हमारे मस्तिष्क तथा प्रत्येक क्षेत्रों में विकास का कार्य करता है। साधारण अर्थों में यह कहा जाए कि शिक्षा के बिना जीवन संभव नहीं है। आधुनिक युग में आप देख सकते हैं कि जो व्यक्ति शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाता है उसकी समाज में कोई भी मान्यता नहीं होती है अतः आधुनिक युग में शिक्षा एक परछाई की भांति हो गया है जो प्रत्यक्षण आपके साथ होता है। और कदम कदम पर एक नया रोल आपके जीवन में निभाता रहता है।इस प्रकार से संपूर्ण अर्थों में यह कहा जाता है कि बिना शिक्षा के जीवन संभव नहीं है।

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